राजस्थान पुलिस दक्षता पदक: सातों नाम एक नजर में
किसी पीड़ित परिवार के लिए जांच का मतलब सिर्फ फाइल नहीं होता, बल्कि यह भरोसा होता है कि उसका केस बीच में अटक नहीं जाएगा। राजस्थान पुलिस के सात अधिकारियों को मिला राष्ट्रीय सम्मान इसी भरोसे की कहानी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वर्ष 2026 के लिए राजस्थान पुलिस दक्षता पदक के तहत प्रदेश के छह आईपीएस और एक आरपीएस अधिकारी का चयन उत्कृष्ट अनुसंधान श्रेणी में किया है।
राजस्थान पुलिस दक्षता पदक की घोषणा हर साल 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर होती है, और इस बार की सूची 1 नवंबर 2026 की खबरों में खास चर्चा का विषय बनी। इन सातों अधिकारियों के पीछे सात अलग-अलग जांचें हैं — ड्रोन हथियार नेटवर्क, 100 करोड़ से ज्यादा की साइबर ठगी और पुराने अंधे कत्ल का वैज्ञानिक खुलासा।
| अधिकारी | जिम्मेदारी | जिस जांच के लिए चयन |
|---|---|---|
| डॉ. अजेय सिंह राठौड़ | एसपी, सिरोही | किशनगढ़ शव मामला, 24 घंटे में गिरफ्तारी |
| अनुष्ठा कालिया | डीसीपी मुख्यालय, जयपुर | खाजूवाला ड्रोन हथियार तस्करी का भंडाफोड़ |
| कांबले शरण गोपीनाथ | एसपी, डीग | 100 करोड़ से ज्यादा की साइबर ठगी |
| मनीष कुमार | आईपीएस अधिकारी | पुराना मामला, डीएनए जांच से खुलासा |
| जतिन जैन | सीओ, नागौर | गैंगरेप मामले में सात दिन में चार्जशीट |
| रोशन मीणा | एसपी, टोंक | वृद्धा हत्या का ब्लाइंड मर्डर सुलझाया |
| प्रेम कुमार | आरपीएस अधिकारी, जयपुर | ऑपरेशन शटरडाउन, साइबर फ्रॉड नेटवर्क |
सीमा से लेकर साइबर ठगी तक: वे जांचें जिन्होंने सुर्खियां बटोरीं
सबसे पहले सीमा सुरक्षा से जुड़ी जांच। जयपुर डीसीपी मुख्यालय में तैनात आईपीएस अनुष्ठा कालिया की जांच में बीकानेर के खाजूवाला में ड्रोन से गिराए गए पांच विदेशी पिस्तौल और 325 कारतूस सामने आए थे। ड्रोन से हथियार गिराना नई चुनौती है, क्योंकि न तो कोई व्यक्ति मौके पर दिखता है और न ही पारंपरिक तस्करी का रास्ता नजर आता है। टीम बरामदगी से आगे बढ़ी और पूरे नेटवर्क तक पहुंची।
दूसरी बड़ी जांच साइबर अपराध से जुड़ी है। डीग एसपी कांबले शरण गोपीनाथ की टीम ने 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी में 4,000 से अधिक शिकायतों की पड़ताल की। इसमें 17 आरोपी गिरफ्तार हुए और पांच बैंक अधिकारी भी जेल भेजे गए। हर शिकायत को एक ही जाल से जोड़ना आसान नहीं होता; बैंक खातों, लेन-देन और डिजिटल निशानों को जोड़कर पूरी श्रृंखला सामने लाना ही इस जांच की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
तीसरी अहम जांच है ऑपरेशन शटरडाउन। झालावाड़ में भवानीमंडी के वृत्ताधिकारी रहते हुए आरपीएस प्रेम कुमार ने इसका नेतृत्व किया था। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि समेत कई सरकारी योजनाओं में सेंध लगाकर करोड़ों रुपये की ठगी का इसमें पर्दाफाश हुआ। चार राज्यों में 30 से अधिक ठिकानों पर एक साथ दबिश देकर 51 आरोपी गिरफ्तार किए गए। योजनाओं के नाम पर ठगी ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि इसका सीधा नुकसान किसानों और लाभार्थियों को होता है। प्रेम कुमार अब राजस्थान पुलिस अकादमी, जयपुर में सहायक निदेशक हैं।
पुराने केस, नई तकनीक: जब विज्ञान ने खोले बंद दरवाजे
कुछ जांचें इसलिए भी खास हैं, क्योंकि उन्होंने ठंडे पड़ चुके मामलों में नई जान फूंकी। सिरोही एसपी डॉ. अजेय सिंह राठौड़ के मामले में किशनगढ़ में सात दिन पुराना शव मिला था। मोबाइल वीडियो और लेयर्ड वॉयस विश्लेषण ने दिशा बदल दी और हत्यारे दंपती 24 घंटे में गिरफ्तार हो गए। मोबाइल और आवाज का विश्लेषण भी अब अहम सबूत है।
आईपीएस मनीष कुमार का मामला भी इसी श्रेणी में आता है। बताया गया है कि वृद्धा की हत्या का एक मामला फिल्मी अंदाज में छिपाया गया था, जिसे दोबारा खोलकर खोपड़ी की डीएनए जांच से सुलझाया गया। पुराने मामलों में गवाहों की याददाश्त धुंधली पड़ जाती है, लेकिन डीएनए जैसे सबूत अपनी बात खुद कहते हैं। टोंक एसपी रोशन मीणा की जांच में 70 वर्षीय वृद्धा की हत्या का ब्लाइंड मर्डर सुलझा — कमर पर बंधी चाबियों से पहचान हुई और दस टीमों ने कड़ियां जोड़ीं। रोशन मीणा 2021 बैच के आईपीएस हैं और जमवारामगढ़ के नाटाटा गांव के रहने वाले हैं।
तेजी का एक और उदाहरण नागौर से है। वहां के सीओ आईपीएस जतिन जैन ने गैंगरेप के एक मामले में सिर्फ सात दिन में चार्जशीट दाखिल की। ऐसे मामलों में तेज चार्जशीट पीड़िता को जल्द न्याय की प्रक्रिया से जोड़ती है — मामला जितनी जल्दी अदालत पहुंचता है, सबूतों के कमजोर पड़ने का खतरा उतना ही कम होता है।
राजस्थान पुलिस दक्षता पदक क्यों खास है?
केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक की शुरुआत 1 फरवरी 2024 को हुई थी। इसके तहत विशेष अभियान, अनुसंधान, आसूचना और फॉरेंसिक विज्ञान में उत्कृष्ट काम करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया जाता है, ताकि पेशेवर दक्षता बढ़े और बेहतर काम करने वालों का मनोबल बढ़े।
वर्ष 2026 में देश के 26 राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय पुलिस संगठनों के कुल 490 अधिकारियों और कर्मचारियों को इस पदक के लिए चुना गया है — 358 विशेष अभियान, 123 अनुसंधान और नौ फॉरेंसिक विज्ञान श्रेणी से। राजस्थान के सातों अधिकारी अनुसंधान श्रेणी में हैं, जो दिखाता है कि प्रदेश में जांच की गुणवत्ता पर खास ध्यान है। साइबर ठगी से जुड़ी राजस्थान की खबरों और राजस्थान पुलिस से जुड़ी अन्य खबरों पर इसी तरह की जांचों की जानकारी मिलती रहती है।
आगे क्या होगा और नागरिकों के लिए क्या मायने रखता है
पदक की घोषणा के बाद अब इन अधिकारियों के नाम राष्ट्रीय सूची में दर्ज हो गए हैं। सम्मान प्रदान करने की औपचारिक प्रक्रिया गृह मंत्रालय के कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेगी। प्रदेश के लिए असली परीक्षा यह होगी कि इन जांचों के तरीके — तकनीकी विश्लेषण, अंतरराज्यीय समन्वय और तेज चार्जशीट — रोजमर्रा की जांचों का हिस्सा कितनी तेजी से बनते हैं। नागरिकों के लिए तीन सीधी सीख हैं: शिकायत में हर छोटा विवरण संभालकर रखें; पुराने मामलों में भी विज्ञान से न्याय की उम्मीद खत्म नहीं होती; और सीमा व साइबर जैसे नए अपराधों से निपटने के लिए पुलिस के पास अब तकनीक भी है और अनुभव भी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राजस्थान पुलिस दक्षता पदक 2026 में कितने अधिकारियों का चयन हुआ है?
राजस्थान से कुल सात अधिकारी चुने गए हैं — छह आईपीएस और एक आरपीएस, सभी उत्कृष्ट अनुसंधान श्रेणी में।
इस सूची में कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं?
अनुष्ठा कालिया, कांबले शरण गोपीनाथ, अजेय सिंह राठौड़, मनीष कुमार, जतिन जैन, रोशन मीणा और प्रेम कुमार।
राजस्थान पुलिस दक्षता पदक की घोषणा कब होती है?
हर साल 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर। पदक की शुरुआत 1 फरवरी 2024 को हुई थी।
देशभर में इस साल कितने अधिकारियों को यह पदक मिलेगा?
कुल 490 अधिकारी और कर्मचारी — 358 विशेष अभियान, 123 अनुसंधान और नौ फॉरेंसिक विज्ञान श्रेणी से।
स्रोत: जागो इंडिया जागो, 1 नवंबर 2026।
1 thought on “राजस्थान पुलिस दक्षता पदक 2026: 7 अधिकारियों को राष्ट्रीय सम्मान, जानिए किस जांच ने दिलाई पहचान”