राजस्थान के एनसीआर जिलों में पुराना ट्रक या बस चलाने वाले वाहन मालिकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। परिवर्तन स्कीम राजस्थान के तहत बीएस-4 या उससे पुराना वाहन स्क्रैप कराकर नया वाहन खरीदने पर 10 साल तक मोटर वाहन कर पूरी तरह माफ रहेगा, रजिस्ट्रेशन शुल्क भी नहीं देना होगा और डीजल-सीएनजी वाहन लेने वालों को पांच साल तक हर महीने ईंधन वाउचर मिलेगा। भारी वाहन के मालिक को पांच साल में कुल 2.88 लाख रुपये तक के वाउचर मिल सकते हैं। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शुक्रवार, 6 नवंबर को जयपुर के शासन सचिवालय में इस स्कीम और एनसीआर जिलों की वायु गुणवत्ता की समीक्षा की और साफ निर्देश दिए कि स्कीम का लाभ पात्र वाहन मालिकों तक हर हाल में पहुंचना चाहिए।
इसके पीछे मकसद साफ है — एनसीआर में प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाणिज्यिक वाहनों की जगह बीएस-6, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहन लाना। बैठक में परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग समेत कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, और मुख्य सचिव ने वित्तीय संस्थानों, निर्माता कंपनियों और जिला प्रशासन के बीच तालमेल बनाने व जागरूकता मेले लगाने को कहा।
परिवर्तन स्कीम राजस्थान में नए वाहन पर क्या-क्या छूट मिलेगी
एनसीआर में पंजीकृत बीएस-4 या उससे पुराने ट्रक और बस के मालिक को पुराना वाहन अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्र पर स्क्रैप कराना होगा, या बीएस-4 वाहन को एनसीआर से बाहर बेचना होगा। इसके बाद नया वाहन खरीदने पर 10 वर्ष तक मोटर वाहन कर में शत-प्रतिशत छूट, पंजीकरण शुल्क में शत-प्रतिशत छूट और एक वर्ष से अधिक की लंबित देनदारियों की माफी मिलेगी। यानी दस साल तक टैक्स की चिंता नहीं, रजिस्ट्रेशन का खर्च नहीं और पुराना बकाया भी माफ।
योजना में शामिल वाहन निर्माता कंपनियां एक्स-शोरूम कीमत पर 8 प्रतिशत छूट दे रही हैं और वाहन ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान मिलेगा। पात्र पुराना वाहन खरीदने पर मोटर वाहन कर में 50 प्रतिशत छूट मिलेगी। मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार एनसीआर समेत पूरे राज्य में प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रतिबद्ध है।
ईंधन वाउचर या इलेक्ट्रिक मदद: कितना पैसा, किस वाहन पर
इस स्कीम की सबसे आकर्षक कड़ी है ईंधन वाउचर और इलेक्ट्रिक वाहनों पर एकमुश्त मदद। नया डीजल या सीएनजी वाहन लेने वालों को पांच साल तक हर महीने ईंधन वाउचर मिलेंगे, जबकि इलेक्ट्रिक वाहन चुनने वालों को एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाएगी। रकम वाहन के आकार के हिसाब से तय है।
| वाहन का प्रकार | डीजल-सीएनजी: ईंधन वाउचर प्रति माह | 5 साल में कुल वाउचर | इलेक्ट्रिक: एकमुश्त सहायता |
|---|---|---|---|
| हल्का वाहन | 1,200 रुपये | 72,000 रुपये | 64,000 रुपये |
| मध्यम वाहन | 2,500 रुपये | 1,50,000 रुपये | 1,28,000 रुपये |
| भारी वाहन | 4,800 रुपये | 2,88,000 रुपये | 2,56,000 रुपये |
पांच साल यानी 60 महीनों में भारी वाहन के मालिक को 2.88 लाख रुपये के ईंधन वाउचर मिलेंगे, जबकि इलेक्ट्रिक भारी वाहन पर एकमुश्त 2.56 लाख रुपये मिलेंगे। वाहन मालिक को अपने काम के हिसाब से चुनना होगा कि मासिक वाउचर बेहतर है या इलेक्ट्रिक की एकमुश्त मदद।
परिवर्तन स्कीम का लाभ लेने के लिए क्या करना होगा
लाभ लेने के दो रास्ते हैं — पुराने वाहन को अधिकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा में स्क्रैप कराना, या बीएस-4 वाहन को एनसीआर से बाहर बेच देना। दोनों ही सूरतों में उसके स्थान पर नया वाहन खरीदने पर ही स्कीम के लाभ मिलेंगे। स्क्रैपिंग सिर्फ अधिकृत केंद्र पर ही करानी है, ताकि उसका प्रमाण पत्र मिल सके।
यह स्कीम राजस्थान के एनसीआर जिलों — अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़ और भरतपुर-डीग — में पंजीकृत बीएस-4 या उससे पुराने ट्रक और बस के मालिकों के लिए है। जिला प्रशासन और परिवहन विभाग जागरूकता मेले लगाकर पात्र वाहन मालिकों को प्रक्रिया की पूरी जानकारी देंगे।
चार जिलों का AQI और मुख्य सचिव की समीक्षा में क्या निकला
मुख्य सचिव ने अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़ और भरतपुर-डीग के जिला कलेक्टरों से उनके इलाकों के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पर विस्तार से फीडबैक लिया। उन्होंने कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सभी निर्देशों की जमीनी स्तर पर पूरी पालना हो और एनसीआर जिलों में ग्रैप-2 के सभी नियम गंभीरता से लागू किए जाएं।
पहले की कोशिशों का असर दिखने लगा है — 5 अक्टूबर की समीक्षा में भरतपुर का एक्यूआई 152 से घटकर 78 पर आने की जानकारी दी गई थी। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इस रफ्तार को बनाए रखा जाए और प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को हटाने का काम तेजी से हो।
नो पीयूसी, नो फ्यूल: बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र ईंधन नहीं
मुख्य सचिव ने ‘नो पॉल्यूशन सर्टिफिकेट, नो फ्यूल’ नियम को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया — वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के बिना किसी वाहन को ईंधन नहीं मिलना चाहिए। यह नियम बिना जांच के सड़कों पर चल रहे वाहनों पर सबसे ज्यादा असर डालेगा।
वाहन मालिकों के लिए पीयूसी प्रमाणपत्र अपडेट रखना अब सिर्फ चालान से बचने का मामला नहीं रहा, ईंधन भरवाने के लिए भी यह जरूरी हो गया है। जिनका पीयूसी खत्म हो चुका है, वे जल्द से जल्द अधिकृत केंद्र से नया प्रमाणपत्र बनवाएं। जिनके पास बीएस-4 या उससे पुराना ट्रक-बस है, उनके लिए परिवर्तन स्कीम दोहरा फायदा देती है — पुराने वाहन से छुटकारा और नए वाहन पर भारी छूट।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
परिवर्तन स्कीम राजस्थान का लाभ किन जिलों के वाहन मालिकों को मिलेगा?
यह स्कीम राजस्थान के एनसीआर जिलों — अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़ और भरतपुर-डीग — में पंजीकृत बीएस-4 या उससे पुराने ट्रक और बस के मालिकों के लिए है।
परिवर्तन स्कीम में नए वाहन पर कितने साल तक टैक्स माफ रहेगा?
पुराना वाहन स्क्रैप कराकर या एनसीआर से बाहर बेचकर नया वाहन खरीदने पर 10 वर्ष तक मोटर वाहन कर और पंजीकरण शुल्क में शत-प्रतिशत छूट मिलेगी, और एक वर्ष से अधिक की लंबित देनदारियां माफ होंगी।
ईंधन वाउचर कितना मिलेगा और इलेक्ट्रिक वाहन पर क्या मदद है?
डीजल-सीएनजी वाहन पर पांच साल तक हर महीने वाउचर मिलेगा — हल्के पर 1,200 रुपये, मध्यम पर 2,500 रुपये और भारी पर 4,800 रुपये प्रति माह; पांच साल में भारी वाहन को 2.88 लाख रुपये तक के वाउचर मिलेंगे। इलेक्ट्रिक पर एकमुश्त मदद — हल्के पर 64,000 रुपये, मध्यम पर 1,28,000 रुपये और भारी पर 2,56,000 रुपये।
नो पीयूसी, नो फ्यूल नियम का क्या मतलब है?
इस नियम के तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के बिना किसी वाहन को ईंधन नहीं दिया जाएगा। मुख्य सचिव ने इसे सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं, इसलिए वाहन मालिक अपना पीयूसी प्रमाणपत्र अपडेट रखें।
स्रोत: खास खबर — मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक, 6 नवंबर 2026; राजस्थान का पंछी — परिवर्तन स्कीम समीक्षा। बीएस-6 वाहनों पर दिल्ली के प्रतिबंध से जुड़ी हमारी पहले की खबर भी पढ़ें।