Rajasthan Panchayat Chunav 2026: तारीखों का ऐलान आज भी टला, अब अक्टूबर में घोषणा — 4 चरण में होगा मतदान

राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में गांव की सरकार चुनने को लेकर बेताबी बढ़ती जा रही है, लेकिन पंचायत चुनाव की तारीखों का सस्पेंस खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। आज (30 सितंबर) को उम्मीद थी कि राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव की घोषणा कर देगा, पर ऐलान आज भी नहीं हुआ। अब साफ हो गया है कि तारीखों की घोषणा के लिए अक्टूबर महीने का इंतजार करना पड़ेगा। वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग जमीनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है और हाईकोर्ट की 15 नवंबर की डेडलाइन का दबाव भी लगातार बना हुआ है।

तारीखों का ऐलान क्यों टला — अब कब होगी घोषणा

राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों के मुताबिक वार्डों के परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया का अंतिम परीक्षण अभी चल रहा है। इसी वजह से घोषणा टल रही है। माना जा रहा है कि अक्टूबर के शुरुआती दिनों में चुनाव कार्यक्रम जारी हो सकता है। एक बार आचार संहिता लगने के बाद प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह चुनावी मोड में आ जाएगी, इसलिए आयोग किसी भी तरह की चूक नहीं चाहता।

ध्यान देने वाली बात यह है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर तक संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में आयोग के पास अब ज्यादा समय नहीं बचा है। हाईकोर्ट की समयसीमा को देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा है कि नवंबर के पहले या दूसरे सप्ताह में मतदान कराया जा सकता है। आयोग की तैयारी के अनुसार मतदान 4 चरणों में होने की संभावना है, ताकि सुरक्षा बलों और प्रशासनिक अमले का इंतजाम ठीक से हो सके।

गांव की सरकार कितनी बड़ी — पूरा गणित एक नजर में

इस बार का पंचायत चुनाव राजस्थान के ग्रामीण लोकतंत्र का सबसे बड़ा जश्न होगा। आंकड़े खुद बताते हैं कि गांव की सरकार चुनने की यह प्रक्रिया कितनी विशाल है। जिला परिषद से लेकर ग्राम पंचायत तक, हर स्तर पर लाखों मतदाता और हजारों प्रत्याशी मैदान में उतरेंगे।

पद संख्या
कुल वार्ड सदस्य (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद) 1,40,237
सरपंच पद 14,403
जिला परिषद वार्ड सदस्य 1,403
जिला प्रमुख 41
पंचायत समिति वार्ड सदस्य 8,245
प्रधान 457
मतदान के संभावित चरण 4

जिला परिषद के 1,403 वार्ड सदस्य मिलकर 41 जिला प्रमुखों का चुनाव करेंगे, जबकि पंचायत समितियों के 8,245 वार्ड सदस्य 457 प्रधानों का चुनाव करेंगे। इतने बड़े चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण कराना प्रशासन के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं।

कांग्रेस का डबल मोर्चा — चुनाव आयोग पहुंचे दिग्गज नेता

तारीखों की घोषणा का इंतजार एक तरफ, तो दूसरी तरफ जयपुर की सियासत में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा के नेतृत्व में पार्टी के वरिष्ठ नेता मंगलवार को नगरीय निकाय चुनाव की शिकायत लेकर राज्य निर्वाचन आयोग के दफ्तर पहुंचे। उनके साथ नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी मौजूद थे।

आयोग कार्यालय के बाहर मीडिया से बात करते हुए डोटासरा और जूली ने आरोप लगाया कि निकाय चुनावों में कथित धांधली और पुलिस-प्रशासन के दबाव के जरिए कांग्रेस के उम्मीदवारों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने की साजिश चल रही है। उनका दावा है कि निष्पक्ष चुनाव कराने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को डराया-धमकाया जा रहा है।

डोटासरा और जूली के साथ सांसद मुरारीलाल मीणा, विधायक रफीक खान, पूर्व मंत्री बीडी कल्ला और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा सहित कई दिग्गज नेता मौजूद थे। कांग्रेस नेताओं ने निकाय अध्यक्ष, सभापति और महापौर चुनाव की प्रक्रिया की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि जहां पक्षपात, मत निरस्तीकरण या दबाव साबित हो, वहां परिणाम निरस्त कर पुनर्मतदान या पुनर्गणना कराई जानी चाहिए।

कांग्रेस के निशाने पर पुलिस-प्रशासन

कांग्रेस के ज्ञापन में पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। डोटासरा का दावा है कि पार्षद चुनाव के परिणाम आने के बाद कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों तथा उनके परिजनों के खिलाफ बड़ी संख्या में केस दर्ज किए गए। ज्ञापन में 152 अपहरण संबंधी केस दर्ज होने का दावा भी किया गया है।

इसके अलावा जीएसटी, आयकर, खाद्य और श्रम विभाग की कार्रवाई, पुराने मामलों में नोटिस और संपत्तियों की जांच के जरिए पार्षदों पर दबाव बनाने के आरोप भी लगाए गए हैं। कांग्रेस का कहना है कि यही हथकंडे पंचायत चुनाव में भी दोहराए जाने की आशंका है, इसलिए आयोग को पहले से सख्त निगरानी रखनी चाहिए।

भाजपा की तैयारी — अलर्ट मोड में संगठन

उधर, सत्ताधारी भाजपा ने भी पंचायत चुनाव के लिए संगठन को अलर्ट मोड पर डाल दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने तीन दिन में 25 जिलों के धुआंधार दौरे की योजना बनाई है, ताकि बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा सके। नगरीय निकाय चुनावों में मिली जीत के बाद भाजपा का मनोबल ऊंचा है और अब उसकी नजर पंचायत राज की गद्दी पर है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत चुनाव का नतीजा अगले विधानसभा चुनावों से पहले जनता के मूड का पैमाना होगा। इसलिए दोनों ही दल इसे प्रतिष्ठा का सवाल बनाकर लड़ेंगे। तारीखों की घोषणा के बाद चुनावी सरगर्मी और तेज होगी।

आम मतदाता के लिए क्या मतलब

पंचायत चुनाव में वोट डालने वाले हर मतदाता को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। आयोग की ओर से मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जा रहा है, इसलिए अपना नाम सूची में जरूर जांच लें। दो से अधिक संतान वाले भी अब चुनाव लड़ सकते हैं, क्योंकि सरकार ने चुनाव लड़ने की पात्रता से जुड़ा पुराना नियम हटा दिया है। मतदान के दिन अपना फोटोयुक्त पहचान पत्र साथ ले जाना न भूलें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न: राजस्थान में पंचायत चुनाव की तारीखों की घोषणा कब होगी?
उत्तर: 30 सितंबर को भी घोषणा नहीं हुई। अब अक्टूबर महीने के शुरुआती दिनों में चुनाव कार्यक्रम जारी होने की संभावना है।

प्रश्न: मतदान कब हो सकता है?
उत्तर: हाईकोर्ट ने 15 नवंबर तक पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में नवंबर के पहले या दूसरे सप्ताह में मतदान होने की संभावना जताई जा रही है।

प्रश्न: कुल कितने पदों पर चुनाव होगा?
उत्तर: 1,40,237 वार्ड सदस्यों और 14,403 सरपंचों का चुनाव होगा। इसके अलावा जिला परिषद के 1,403 वार्ड सदस्य 41 जिला प्रमुख और पंचायत समितियों के 8,245 वार्ड सदस्य 457 प्रधान चुनेंगे।

प्रश्न: कांग्रेस ने चुनाव आयोग में क्या शिकायत की है?
उत्तर: कांग्रेस नेताओं ने निष्पक्ष चुनाव कराने वाले अधिकारियों को डराने-धमकाने, 152 अपहरण संबंधी केस दर्ज होने और विभिन्न विभागों की कार्रवाई के जरिए पार्षदों पर दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने निकाय अध्यक्ष, सभापति और महापौर चुनाव की प्रक्रिया की जांच और जरूरत पड़ने पर पुनर्मतदान की मांग की है।

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