जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाने वाली RAS को लगातार तीन बार पास करने का कारनामा हनुमानगढ़ जिले की प्रियंका सिहाग ने कर दिखाया है। 29 सितंबर 2026 को हुए सेवा आवंटन में प्रियंका को 40वीं रैंक के साथ उपखंड अधिकारी (SDM) का पद मिला है। किसान परिवार की इस बेटी ने बिना किसी ऑफलाइन कोचिंग के, सिर्फ खुद की पढ़ाई के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।
सबसे खास बात यह है कि प्रियंका ने पहली बार RAS परीक्षा सिर्फ 21 साल की उम्र में दी थी। उस बार वह महज एक अंक से सेवा आवंटन से चूक गई थीं, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
तीनों प्रयासों का सफर — एक नज़र में
| प्रयास | परीक्षा | रैंक | नतीजा |
| पहला | RAS-2021 | 599वीं | एक अंक से सेवा आवंटन से चूकीं |
| दूसरा | RAS-2023 | 265वीं | ACTO (GST) पद पर चयन |
| तीसरा | RAS-2024 | 40वीं | SDM पद पर चयन |
सेवा आवंटन के बाद अब ओटीएस में प्रशिक्षण
RPSC की RAS परीक्षा में अंतिम चयन के बाद अभ्यर्थियों को रैंक के आधार पर सेवाओं का आवंटन होता है। 29 सितंबर 2026 को हुए सेवा आवंटन में प्रियंका सिहाग को राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) का अधिकारी बनाते हुए SDM का पद दिया गया। जल्द ही वह जयपुर के ओटीएस (O.T.S.) में प्रशिक्षण के लिए जाएंगी, जहां उन्हें प्रशासनिक कामकाज, कानून-व्यवस्था, राजस्व मामलों और जनसुनवाई जैसे विषयों का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा।
SDM का पद जिले की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। उपखंड स्तर पर कानून-व्यवस्था से लेकर राजस्व मामलों तक की जिम्मेदारी SDM की होती है।
बरमसर गांव से रावतसर तक — किसान परिवार की पृष्ठभूमि
प्रियंका मूल रूप से हनुमानगढ़ जिले की रावतसर तहसील के गांव बरमसर की रहने वाली हैं। उनके पिता पुरुषोत्तम सिहाग किसान हैं और गांव में ही खेती करते हैं, जबकि मां उर्मिला देवी गृहिणी हैं। परिवार संयुक्त है — प्रियंका के दादा धनराज सिहाग के तीन भाइयों के परिवार आज भी एक साथ रहते हैं।
माता-पिता ने बच्चों की पढ़ाई के रास्ते में कभी कोई रुकावट नहीं आने दी। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने प्रियंका को पढ़ने के लिए हर संभव सहूलियत दी। प्रियंका की स्कूली शिक्षा पड़ोसी गांव पूरबसर के सरस्वती स्कूल में हुई, और स्नातक की डिग्री उन्होंने पल्लू (हनुमानगढ़) के एमडी कॉलेज से हासिल की। कॉलेज के दूसरे साल में ही उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी।
21 साल की उम्र में पहला प्रयास — एक अंक की चूक
RAS-2021 में प्रियंका ने महज 21 साल की उम्र में पहली बार भाग लिया और पूरे प्रदेश में 599वीं रैंक हासिल की। लेकिन सेवा आवंटन में वह सिर्फ एक अंक से चूक गईं। ज्यादातर अभ्यर्थी ऐसी चूक के बाद टूट जाते हैं, पर प्रियंका ने इसे अपनी कमजोरी मानने के बजाय तैयारी का पैमाना बना लिया। उन्होंने तय किया कि अगले प्रयास में वह इतना अंतर छोड़ेंगी कि एक अंक की चूक की गुंजाइश ही न रहे।
गौर करने वाली बात यह भी है कि वर्ष 2021 में ही प्रियंका को राजस्थान उपनिरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा में भी सफलता मिली थी — यानी एक ही साल में दो बड़ी परीक्षाएं।
दूसरा प्रयास — ACTO बनीं, उसी दौरान हुई शादी
RAS-2023 में प्रियंका ने 265वीं रैंक हासिल की और ACTO (GST) पद पर चयनित हुईं। यह उनका दूसरा प्रयास था और इस बार रैंक पहले से काफी बेहतर थी। इसी दौरान उनकी शादी हो गई। उनके पति दिलीप कुमार भांभू राजस्थान तहसील सेवा के 2018 बैच के अधिकारी हैं। वह मूल रूप से बीकानेर जिले के खाजूवाला के रहने वाले हैं और वर्तमान में तहसीलदार के पद पर कार्यरत हैं।
शादी के बाद तैयारी छोड़ देने का दबाव अक्सर बेटियों पर होता है, लेकिन प्रियंका के मामले में उल्टा हुआ। उनके ससुर आसाराम भांभू खुद सरकारी शिक्षक हैं, और पति पहले से प्रशासनिक सेवा में थे। RAS-2024 की तैयारी के दौरान प्रियंका को पति और ससुर दोनों का पूरा सहयोग मिला। घर का माहौल ही ऐसा था कि पढ़ाई को प्राथमिकता मिलती रही।
तीसरा प्रयास — 40वीं रैंक और SDM का पद
शादी के बाद प्रियंका ने RAS-2024 परीक्षा दी — यह उनका तीसरा प्रयास था। इस बार उन्होंने पूरे राजस्थान में 40वीं रैंक हासिल की। 599 से 265 और फिर 40 — रैंक का यह सफर बताता है कि लगातार प्रयास से कितना बड़ा बदलाव संभव है। सेवा आवंटन में उन्हें SDM पद मिला, और मायके के साथ-साथ ससुराल में भी खुशी का माहौल है।
लॉकडाउन के एक वीडियो ने बदला रास्ता
प्रियंका की तैयारी की शुरुआत भी दिलचस्प है। कोविड-19 महामारी के दौरान जब लॉकडाउन लगा, तब वह कॉलेज के दूसरे साल में थीं। उस समय मोबाइल का इस्तेमाल बढ़ गया था। इसी दौरान उन्होंने एक वीडियो देखा, जिसमें RPSC और UPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाएं पास कर अधिकारी बनने के बारे में बताया गया था। उस वीडियो ने उन्हें इतना प्रेरित किया कि उन्होंने RAS की तैयारी का फैसला कर लिया।
उनके ताऊजी श्योपत सिहाग ने तैयारी के लिए ऑनलाइन किताबें मंगवाकर दीं। प्रियंका ने किताबों के साथ-साथ यूट्यूब की मदद से पढ़ाई की और टेलीग्राम पर RAS की तैयारी कराने वाले कई समूहों से जुड़कर नियमित अध्ययन किया। उन्होंने किसी भी तरह की ऑफलाइन कोचिंग नहीं की — पूरी सफलता सेल्फ-स्टडी के दम पर हासिल की।
RAS की तैयारी करने वालों के लिए 5 काम की बातें
- रैंक हर बार बेहतर हो सकती है: 599 से 40 तक का सफर बताता है कि पहला प्रयास आखिरी नहीं होता। हर असफलता को फीडबैक की तरह लें।
- कोचिंग जरूरी नहीं, निरंतरता जरूरी है: बिना ऑफलाइन कोचिंग के भी RAS जैसी परीक्षा पास की जा सकती है, बशर्ते रोज की पढ़ाई में निरंतरता हो।
- ऑनलाइन संसाधनों का सही इस्तेमाल: यूट्यूब और टेलीग्राम जैसे मुफ्त माध्यमों से भी व्यवस्थित तैयारी संभव है।
- परिवार का साथ बड़ी ताकत है: चाहे माता-पिता हों या ससुराल — सहयोगी माहौल तैयारी को आसान बनाता है।
- एक अंक की चूक को हार न मानें: 2021 में एक अंक से चूकने वाली प्रियंका 2024 में 40वीं रैंक पर पहुंचीं। धैर्य ही सबसे बड़ा हथियार है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: प्रियंका सिहाग कौन हैं और उन्हें कौन सा पद मिला है?
जवाब: प्रियंका सिहाग हनुमानगढ़ जिले के बरमसर गांव की रहने वाली हैं। RAS-2024 में 40वीं रैंक हासिल करने के बाद 29 सितंबर 2026 के सेवा आवंटन में उन्हें SDM (उपखंड अधिकारी) का पद मिला है।
सवाल: क्या प्रियंका ने कोई कोचिंग की थी?
जवाब: नहीं। उन्होंने किसी भी तरह की ऑफलाइन कोचिंग नहीं की। किताबों के साथ यूट्यूब और टेलीग्राम समूहों की मदद से उन्होंने खुद पढ़ाई की।
सवाल: RAS परीक्षा में उनके तीनों प्रयासों की रैंक क्या रही?
जवाब: RAS-2021 में 599वीं, RAS-2023 में 265वीं (ACTO पद पर चयन) और RAS-2024 में 40वीं रैंक (SDM पद पर चयन)।
सवाल: SDM बनने के बाद अब प्रियंका का अगला कदम क्या है?
जवाब: वह जल्द ही जयपुर स्थित सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थान ओटीएस में प्रशिक्षण के लिए जाएंगी, जिसके बाद उन्हें उपखंड अधिकारी के रूप में तैनाती मिलेगी।
स्रोत: NDTV India (4 अक्टूबर 2026)।