पिछले एक साल में देशभर में कर्तव्य पालन के दौरान 154 पुलिसकर्मियों ने अपने प्राण न्योछावर किए। बुधवार को पुलिस शहीद दिवस 2026 के अवसर पर राजस्थान पुलिस ने इन सभी वीर जवानों को नमन किया। जयपुर में राजस्थान पुलिस अकादमी (RPA) स्थित पुलिस शहीद स्मारक पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने शहीद जवानों को गार्ड ऑफ ऑनर देकर श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में शहीदों के नामों की सूची का पाठ भी किया गया।
| एक नज़र में | विवरण |
|---|---|
| आयोजन | पुलिस शहीद दिवस 2026 |
| तारीख | 21 अक्टूबर 2026, बुधवार |
| मुख्य समारोह | शहीद स्मारक, राजस्थान पुलिस अकादमी, जयपुर |
| श्रद्धांजलि | DGP राजीव कुमार शर्मा ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया |
| एक साल में शहीद | 154 पुलिसकर्मी (सितंबर 2025 – अगस्त 2026) |
| इतिहास | 1959 हॉट स्प्रिंग्स (लद्दाख) घटना की स्मृति में |
जयपुर में पुलिस शहीद दिवस 2026 का समारोह: DGP ने दी गार्ड ऑफ ऑनर से श्रद्धांजलि
जयपुर के राजस्थान पुलिस अकादमी परिसर में बुधवार सुबह पुलिस शहीद दिवस 2026 का मुख्य समारोह आयोजित हुआ। समारोह की शुरुआत रीथ लेइंग (पुष्पचक्र अर्पण) से हुई, जिसके बाद दो मिनट का मौन रखा गया और ‘लास्ट पोस्ट’ की धुन बजाई गई। तीन फायर वॉली के साथ अमर शहीदों को अंतिम सलामी दी गई।
पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के साथ डीजीपी (कानून-व्यवस्था) संजय अग्रवाल, जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल और अनेक वरिष्ठ एवं सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों ने शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित किए। समारोह में मौजूद सभी अधिकारियों और जवानों ने शहीदों के बलिदान को याद किया।
RPA परिसर के अलावा जवाहर लाल नेहरू मार्ग स्थित पुलिस स्मारक त्रिमूर्ति सर्किल पर भी अलग से श्रद्धांजलि सभा हुई, जहां वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीदों को पुष्प अर्पित कर नमन किया।
DGP राजीव कुमार शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि पुलिस शहीद दिवस 2026 वीर जवानों को याद करने और उनके जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर है। उन्होंने कहा कि शहीद पुलिसकर्मियों का बलिदान पुलिस बल की उच्चतम परंपराओं और कर्तव्य के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
154 जवानों का बलिदान: एक साल का हिसाब
समारोह में एक ऐसा आंकड़ा सामने रखा गया, जो पुलिस सेवा की कठिन सच्चाई बयां करता है। 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच देशभर में 154 पुलिसकर्मियों ने कर्तव्य पालन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया।
ये आंकड़े केवल संख्या नहीं हैं। इनके पीछे वे चेहरे हैं जो नक्सल प्रभावित इलाकों में गश्त के दौरान, बड़े अपराधियों के खिलाफ ऑपरेशन में, भीड़ नियंत्रण के दौरान, प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य करते हुए, या सड़क हादसों में ड्यूटी के वक्त अपनी जान गंवा बैठे।
कानून-व्यवस्था बनाए रखना देश का सबसे जोखिम भरा काम है। सेना के बाद अगर किसी बल पर सबसे ज्यादा खतरा होता है तो वह पुलिस है, क्योंकि पुलिसकर्मी रोज़ाना सीधे अपराधियों, भीड़ और आपदा के सामने खड़ा होता है। 154 का यह आंकड़ा उसी सच्चाई का प्रमाण है।
राजस्थान पुलिस के अधिकारी बताते हैं कि शहीदों के परिवारों की देखभाल विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति और कल्याण योजनाओं के जरिए परिवारों को सहारा दिया जाता है, ताकि जिस घर का कमाने वाला कर्तव्य पर शहीद हुआ, वह घर टूटने न पाए। हाल ही में राजस्थान पुलिस में 52 निरीक्षकों की RPS में पदोन्नति हुई थी, जिससे बल में नई ऊर्जा का संचार हुआ है।
1959 लद्दाख की वह रात: क्यों मनाया जाता है पुलिस शहीद दिवस
पुलिस शहीद दिवस हर साल 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसकी जड़ें 1959 की उस घटना से जुड़ी हैं, जिसने देश को हिला दिया था।
21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के दुर्गम हॉट स्प्रिंग्स इलाके में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान नियमित गश्त पर थे। उस दुर्गम क्षेत्र में चीनी सैनिकों ने घात लगाकर हमला कर दिया। भारतीय जवान भारी संख्या में होने के बावजूद अंतिम सांस तक लड़े। इस हमले में 10 जवान शहीद हुए और 7 को बंदी बनाया गया।
उस बलिदान की स्मृति में 1960 से हर साल 21 अक्टूबर को देशभर के पुलिस बलों में पुलिस स्मृति दिवस (Police Commemoration Day) मनाया जाता है। 2018 में दिल्ली के चाणक्यपुरी में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक (National Police Memorial) का उद्घाटन भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाने वाला कदम था। राष्ट्रीय पुलिस स्मारक की आधिकारिक वेबसाइट पर शहीदों के नामों का डिजिटल रिकॉर्ड भी उपलब्ध है।
इस दिवस का मकसद सिर्फ याद करना नहीं है। यह उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो पुलिस सेवा में आना चाहते हैं, और समाज के लिए यह संदेश है कि जिस खाकी को हम रोज़ देखते हैं, उसके पीछे कितना बड़ा बलिदान छिपा है।
पौधारोपण और रक्तदान: शहीदों की याद में सेवा का संदेश
जयपुर के समारोह में श्रद्धांजलि के साथ-साथ सेवा का संदेश भी दिया गया। राजस्थान पुलिस अकादमी परिसर में DGP और वरिष्ठ अधिकारियों ने पौधारोपण किया। इसके साथ ही रक्तदान करने वाले लोगों को प्रोत्साहित किया गया।
आयोजकों का कहना है कि शहीदों की याद में पौधा लगाना और रक्तदान करना, उनकी सेवा भावना को आगे बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है। कार्यक्रम के जरिए शहीद जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ सेवा, समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया।
ऐसे आयोजन पुलिस और समाज के बीच का रिश्ता भी मजबूत करते हैं। नागौर के बड़वासन माता मंदिर विवाद में जब पुलिस जाब्ता तैनात हुआ था, तब भी स्थानीय लोगों ने पुलिस की भूमिका को सराहा था। इसी तरह श्रीगंगानगर में ड्रोन से हो रही ₹20 करोड़ की हेरोइन तस्करी पर पुलिस के बड़े वार ने दिखाया था कि राजस्थान पुलिस चुनौतियों के सामने डटकर खड़ी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: पुलिस शहीद दिवस कब मनाया जाता है?
उत्तर: पुलिस शहीद दिवस (Police Commemoration Day) हर साल 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1960 में हुई थी, 1959 में लद्दाख में शहीद हुए CRPF जवानों की स्मृति में।
प्रश्न: राजस्थान में पुलिस शहीद दिवस 2026 का मुख्य समारोह कहां हुआ?
उत्तर: जयपुर में राजस्थान पुलिस अकादमी (RPA) स्थित पुलिस शहीद स्मारक पर मुख्य समारोह आयोजित हुआ। इसके अलावा जवाहर लाल नेहरू मार्ग स्थित पुलिस स्मारक त्रिमूर्ति सर्किल पर भी श्रद्धांजलि सभा हुई।
प्रश्न: पिछले एक साल में कितने पुलिसकर्मी शहीद हुए?
उत्तर: 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच देशभर में 154 पुलिसकर्मियों ने कर्तव्य पालन के दौरान अपने प्राण न्योछावर किए।
प्रश्न: आम नागरिक शहीदों के परिवारों की मदद कैसे कर सकता है?
उत्तर: रक्तदान शिविरों में भाग लेकर, पौधारोपण जैसे सेवा कार्यों से जुड़कर, और पुलिस के प्रति सम्मान व सहयोग का भाव रखकर। शहीदों के परिवारों की आर्थिक मदद के लिए केंद्रीय और राज्य सरकारों की कल्याण योजनाएं भी चलती हैं।