बारां जिले के नाहरगढ़ में वनकर्मियों से मारपीट के मामले में फरार चल रहे किसान नेता नरेश मीणा का वीडियो सामने आया है। नरेश मीणा वीडियो में वे साफ कहते सुनाई दे रहे हैं कि वे डरने वाले नहीं हैं, और उन्हें अपनी गिरफ्तारी के साथ-साथ एनकाउंटर की आशंका भी है। यह वीडियो 7 नवंबर की रात सोशल मीडिया पर जारी हुआ, जिसके बाद से बारां पुलिस की तलाश और तेज हो गई है। खास बात यह है कि फरार नेता पर पुलिस ने लाखों का नहीं, बल्कि महज 25 पैसे का सांकेतिक इनाम घोषित किया है।
नरेश मीणा ने पहले 6 नवंबर को शाम 5 बजे नाहरगढ़ थाने पहुंचकर खुद गिरफ्तारी देने का ऐलान किया था, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी रणनीति बदल ली। अब उन्होंने पुलिस के सामने सरेंडर करने के बजाय सीधे कोर्ट की शरण लेने का फैसला किया है। उनका कहना है कि गांव के चारों तरफ पुलिस का घेरा है।
नरेश मीणा वीडियो में क्या कहा — “डरने वाला नहीं हूं”
नरेश मीणा वीडियो में वे अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए आरोपों को सिरे से नकारते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि 1 नवंबर को नाहरगढ़ में जो कुछ हुआ, उसके लिए उन्हें गलत तरीके से फंसाया जा रहा है।
वीडियो का सबसे चर्चित हिस्सा वह है, जिसमें नरेश मीणा कहते हैं कि वे डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की है कि वे बिल्कुल भी उत्तेजित न हों और कानून को अपने हाथ में न लें। उनका कहना है कि वे अपनी जगह सुरक्षित हैं और अब पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने के बजाय न्यायालय के जरिए कानूनी राहत हासिल करेंगे।
25 पैसे का इनाम क्यों? चवन्नी के पीछे पुलिस की रणनीति
बारां पुलिस ने फरार नरेश मीणा पर 25 पैसे का सांकेतिक इनाम घोषित किया है। यह फैसला सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन पुलिस के मुताबिक इसके पीछे एक सोची-समझी मनोवैज्ञानिक वजह है — पुलिस का संदेश साफ है कि नरेश मीणा की कीमत कानून की नजर में महज चवन्नी भर है।
अटरू के पुलिस उपाधीक्षक रामानंद यादव ने लोगों से अपील की है कि वे नरेश मीणा को शरण न दें। डीएसपी ने साफ चेतावनी दी है कि कानून की नजर में वांछित व्यक्ति को शरण देने वाला भी उतना ही बड़ा अपराधी माना जाएगा।
पुलिस की तलाश कहां तक पहुंची — 5 गिरफ्तार, फार्म हाउस पर छापा
नरेश मीणा की गिरफ्तारी के लिए बारां पुलिस ने पांच थानों की टीमें लगा रखी हैं। पुलिस ने अब तक इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। शुक्रवार को अटरू डीएसपी रामानंद यादव के नेतृत्व में पुलिस टीम ने गुंदलाई गांव स्थित एक फार्म हाउस पर दबिश दी थी। छापे में नरेश मीणा नहीं मिले, लेकिन थार गाड़ी में सवार उनके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर राजस्थान और आसपास के इलाकों में संभावित शरण स्थलों पर लगातार रेड मारी जा रही है। गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती है और पुलिस का कहना है कि उनकी गिरफ्तारी अब कभी भी हो सकती है, क्योंकि घेरा लगातार कसता जा रहा है।
पूरा मामला क्या है — 1 नवंबर को नाहरगढ़ में क्या हुआ था
यह पूरा विवाद 1 नवंबर को शुरू हुआ था, जब बारां जिले के नाहरगढ़ कस्बे में एक चुनावी सभा के बाद नरेश मीणा समर्थकों की भीड़ के साथ वन विभाग के रेंज कार्यालय में घुस गए थे। आरोप है कि भीड़ ने वहां वनकर्मियों के साथ मारपीट की, वर्दी के बैज और नेम प्लेट तोड़ दिए, कार्यालय में तोड़फोड़ की और जब्त किया गया जनरेटर-इंजन छुड़ाकर ले गई।
वन विभाग की रिपोर्ट पर अटरू और नाहरगढ़ थाने में राजकार्य में बाधा, सरकारी संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस घटना के बाद से ही नरेश मीणा फरार चल रहे हैं।
सरेंडर से यू-टर्न तक — घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन
| तारीख | क्या हुआ |
| 1 नवंबर 2026 | नाहरगढ़ रेंज कार्यालय में वनकर्मियों से मारपीट, जनरेटर छुड़ाकर ले जाने का आरोप; अटरू और नाहरगढ़ थाने में मामला दर्ज |
| 5 नवंबर 2026 | नरेश मीणा ने 6 नवंबर शाम 5 बजे नाहरगढ़ थाने में गिरफ्तारी देने का ऐलान किया |
| 6 नवंबर 2026 | सरेंडर का फैसला बदला — कोर्ट की शरण लेने की घोषणा; बारां पुलिस ने 25 पैसे का सांकेतिक इनाम घोषित किया |
| 7 नवंबर 2026 | फार्म हाउस पर छापा — दो साथी गिरफ्तार, नरेश मीणा फरार; रात करीब 11 बजे “डरने वाला नहीं हूं” वाला वीडियो जारी |
| 8 नवंबर 2026 | पांच थानों की पुलिस की तलाश जारी; वीडियो पर प्रदेश भर में सियासी बहस तेज |
पंचायत चुनाव से जुड़ा सियासी एंगल — 14 नवंबर को चौथा चरण
इस मामले का सियासी एंगल भी कम अहम नहीं है। राजस्थान में पंचायती राज चुनाव के चौथे चरण का मतदान 14 नवंबर 2026 को होना है, और नरेश मीणा बारां क्षेत्र के मतदाताओं से बहुजन समाज पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी पर बटन दबाने की अपील कर रहे हैं। पिछले महीने ही उन्होंने बूंदी में बसपा के साथ मिलकर पंचायत चुनाव लड़ने का ऐलान किया था।
नरेश मीणा लंबे समय से बारां में किसानों के मुद्दों पर आंदोलन करते रहे हैं — अक्टूबर में उन्होंने खाद संकट को लेकर आमरण अनशन किया था और छबड़ा में किसानों को खाद के टोकन दिलाने की मांग पर धरना दिया था। छबड़ा धरना खत्म होने की खबर यहां पढ़ें पुलिस का कहना है कि मामला पूरी तरह कानूनी है। अनशन खत्म होने की खबर यहां पढ़ें
कानूनी धाराएं और आगे क्या होगा
नरेश मीणा के खिलाफ अटरू और नाहरगढ़ थाने में दर्ज मामलों में राजकार्य में बाधा डालने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और मारपीट की धाराएं लगाई गई हैं। अब उनकी कानूनी टीम कोर्ट के जरिए राहत पाने की तैयारी में है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि सरेंडर करने के बजाय कोर्ट की शरण लेने का फैसला नरेश मीणा के लिए एक सोची-समझी कानूनी रणनीति हो सकती है, क्योंकि इससे उन्हें गिरफ्तारी से पहले अदालत से सुरक्षा मिलने की गुंजाइश रहती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
नरेश मीणा पर 25 पैसे का इनाम क्यों लगाया गया है?
बारां पुलिस ने फरार नरेश मीणा पर 25 पैसे का सांकेतिक इनाम घोषित किया है। पुलिस के मुताबिक यह एक मनोवैज्ञानिक संदेश है कि कानून की नजर में फरार आरोपी की कीमत महज चवन्नी भर है, चाहे वह कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो।
नरेश मीणा वीडियो में क्या बोले?
वीडियो में नरेश मीणा ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि वे डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने गिरफ्तारी और एनकाउंटर की आशंका जताई और समर्थकों से शांत रहने की अपील करते हुए कोर्ट की शरण लेने की बात कही।
नाहरगढ़ मामला क्या है?
1 नवंबर 2026 को बारां के नाहरगढ़ में वन विभाग के रेंज कार्यालय में भीड़ द्वारा वनकर्मियों से मारपीट, तोड़फोड़ और जब्त जनरेटर छुड़ाकर ले जाने का आरोप है। इस मामले में अटरू और नाहरगढ़ थाने में नरेश मीणा समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज है।
नरेश मीणा ने सरेंडर क्यों नहीं किया?
नरेश मीणा ने पहले 6 नवंबर को शाम 5 बजे नाहरगढ़ थाने में गिरफ्तारी देने का ऐलान किया था, लेकिन बाद में उन्होंने फैसला बदल लिया। उनका कहना है कि गांव के चारों तरफ पुलिस का घेरा है, इसलिए वे पुलिस के सामने पेश होने के बजाय अब सीधे न्यायालय की शरण लेंगे।