बारां। नरेश मीणा अनशन खत्म — किसानों को खाद की पर्याप्त आपूर्ति समेत कई मांगों को लेकर बीते दस दिनों से आमरण अनशन पर बैठे किसान नेता नरेश मीणा ने रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को अपना अनशन तोड़ दिया। नरेश मीणा अनशन के इस अंत की खबर ने प्रदेश भर के किसानों और युवा कार्यकर्ताओं के बीच राहत की लहर दौड़ा दी। बारां जिला अस्पताल पहुंचे बाड़मेर की शिव सीट से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने मीणा को अपने हाथ से जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। उस भावुक पल में मीणा की मां प्रेम बाई भी वहीं मौजूद थीं।
नरेश मीणा अनशन: अस्पताल के वार्ड में कैसे टूटा
रविवार की शाम बारां जिला अस्पताल का वार्ड भावुक दृश्यों का गवाह बना। नरेश मीणा अनशन के दसवें दिन जब उनके सामने जूस का गिलास आया तो उन्होंने पहले अपनी मां की ओर देखा। मां प्रेम बाई की मौजूदगी और विधायक भाटी की अपील के बाद मीणा ने जूस पिया और आमरण अनशन समाप्त करने की घोषणा की।
अनशन तोड़ने से ठीक पहले जिला प्रशासन और तीसरे मोर्चे के प्रतिनिधिमंडल के बीच मीणा की मांगों पर लंबी बातचीत हुई थी। सहमति बनने के बाद ही भाटी बारां पहुंचे और अनशन तुड़वाने की जिम्मेदारी उन्होंने खुद ली। समर्थकों का कहना है कि दस दिन तक अन्न का एक दाना मुंह में न डालने वाले अपने नेता को जूस पीते देख कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
ग्यारह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और कलेक्टर की मेज पर बनी सहमति
नरेश मीणा अनशन टूटने की असली जमीन उस बैठक में तैयार हुई, जिसमें तीसरे मोर्चे के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर बालमुकुंद से किसानों से जुड़ी मांगों पर विस्तार से चर्चा की। कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी इस बातचीत में शामिल हुए। चर्चा के बाद प्रशासन और प्रतिनिधिमंडल के बीच मांगों पर सहमति बन गई, जिसके बाद ही अनशन तोड़ने का रास्ता साफ हुआ। बैठक में जिला कलेक्टर बालमुकुंद, संयुक्त निदेशक (कृषि विस्तार) राजेश विजय, उपखंड अधिकारी रामावतार मीणा, तीसरे मोर्चे के मुखिया संदीप शर्मा, अटरू प्रधान वंदना नागर और पूर्व उपसभापति कमल राठौर समेत कई लोग मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से किसानों को खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भरोसा दिया गया है।
नरेश मीणा अनशन के दस दिन: सेहत पर क्या गुजरा
नरेश मीणा अनशन अक्टूबर के पहले सप्ताह में शुरू हुआ था और रविवार को इसने दसवां दिन पूरा किया। दस दिन तक लगातार भूखे रहने का असर उनके शरीर पर साफ दिखने लगा था। नौवें दिन हालत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें राजकीय चिकित्सालय बारां में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में भी उन्होंने अनशन जारी रखा। अस्पताल में भर्ती होने के दौरान मीणा से मिलने वालों का तांता लगा रहा। मध्य प्रदेश के विधायक बाबू जंडेल भी नौवें दिन उनसे मिलने पहुंचे थे। समर्थकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही थी, इसीलिए अनशन टूटने की खबर आते ही सबने राहत की सांस ली।
इससे पहले टोंक में डीएपी को लेकर कलेक्टर टीना डाबी से हुई फोन बातचीत में भी मीणा ने किसानों को तय कीमत पर खाद दिलाने की मांग उठाई थी। डीएपी खाद संकट पर विस्तृत रिपोर्ट में बताया गया था कि रबी बुवाई के अहम महीने में प्रदेश को जितना खाद मिलना चाहिए था, उसका बहुत छोटा हिस्सा ही पहुंचा था।
भाटी के तीखे बोल: नरेश मीणा अनशन के बाद की सियासत
अनशन तुड़वाने के बाद मीडिया से बातचीत में रविंद्र सिंह भाटी ने प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग गहरी नींद में सोए हुए हैं, उन्हें जगाने के लिए धमाकों की जरूरत होती है। भाटी का कहना था कि जिम्मेदार लोग ठंडे कमरों में बैठकर आमजन की मेहनत की कमाई पर ऐश कर रहे हैं, जबकि किसान और युवा पूरी तरह परेशान हैं। भाटी ने स्पष्ट किया कि वाजिब मांगों को लेकर लड़ने वाले हर नौजवान के साथ वे हमेशा खड़े रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को खाद उपलब्ध कराना, बिजली देना और सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है — इसके लिए किसी युवा को आमरण अनशन पर बैठने की नौबत ही नहीं आनी चाहिए थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम ने राजस्थान की युवा राजनीति और तीसरे मोर्चे की संभावनाओं को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। भाटी ने मीणा से अनशन के बजाय जमीन पर रहकर संघर्ष जारी रखने की अपील भी की।
दस दिन के घटनाक्रम की टाइमलाइन
- पहला दिन: खाद की मांगों को लेकर आमरण अनशन की शुरुआत।
- बीच के दिन: प्रशासन से बातचीत के कई दौर, कोई ठोस नतीजा नहीं।
- नौवां दिन: तबीयत बिगड़ने पर बारां अस्पताल में भर्ती।
- दसवां दिन (11 अक्टूबर): प्रतिनिधिमंडल-कलेक्टर सहमति; शाम को भाटी ने जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया।
आगे क्या: किसानों को क्या मिलेगा
नरेश मीणा अनशन के बाद अब सबकी नजर इस पर है कि खाद की आपूर्ति का भरोसा जमीन पर कितनी जल्दी उतरता है। नरेश मीणा की किसान यात्रा के समय भी खाद की किल्लत ही सबसे बड़ा मुद्दा था, और रबी बुवाई के बीच किसानों को डीएपी की सख्त जरूरत है। समर्थकों का कहना है कि तय समय में खाद नहीं पहुंची तो आंदोलन दोबारा तेज हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: नरेश मीणा अनशन पर क्यों बैठे थे?
जवाब: किसानों को खाद की पर्याप्त आपूर्ति समेत कई मांगों को लेकर नरेश मीणा ने अक्टूबर के पहले सप्ताह में आमरण अनशन शुरू किया था। रबी बुवाई के समय डीएपी की किल्लत सबसे बड़ा मुद्दा था।
सवाल: नरेश मीणा अनशन किसने तुड़वाया?
जवाब: बाड़मेर की शिव सीट से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने 11 अक्टूबर की शाम बारां जिला अस्पताल में नरेश मीणा को जूस पिलाकर उनका दस दिन पुराना अनशन तुड़वाया। उस समय मीणा की मां प्रेम बाई भी मौजूद थीं।
सवाल: प्रशासन और प्रतिनिधिमंडल के बीच क्या सहमति बनी?
जवाब: तीसरे मोर्चे के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर बालमुकुंद से चर्चा की, जिसमें कृषि विभाग के अधिकारी भी शामिल हुए। चर्चा के बाद मीणा की मांगों पर सहमति बनी, जिसके बाद ही अनशन तोड़ा गया।
सवाल: अनशन के दौरान नरेश मीणा की सेहत का क्या हाल था?
जवाब: दस दिन की भूख हड़ताल से उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई थी। नौवें दिन उन्हें राजकीय चिकित्सालय बारां में भर्ती कराना पड़ा था, जहां डॉक्टरों की निगरानी में भी उन्होंने अनशन जारी रखा था।