जयपुर। राजस्थान में आने वाले महीनों में पेयजल की किल्लत न हो, इसके लिए सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में गुरुवार को पेयजल आपूर्ति और जल उपलब्धता पर बड़ी समीक्षा बैठक हुई। निर्देश दिया गया कि अगले 10 दिनों में जल वितरण का स्टेट एक्शन प्लान तैयार हो — हर जिले के लिए पानी के बंटवारे की अलग कार्ययोजना बनेगी और उसकी नियमित निगरानी भी होगी।
इस बार मानसून में सामान्य से कम बारिश हुई है, ऐसे में यह तैयारी बेहद अहम है। बैठक में शहरों, गांवों, गौशालाओं और खेतों — सभी के लिए पानी की व्यवस्था पर चर्चा हुई।
बैठक में किन बातों की समीक्षा हुई
मुख्य सचिव ने प्रदेश की जल स्थिति का पूरा खाका खींचा। चार बिंदुओं पर फोकस रहा — इस साल की वर्षा, बांधों में उपलब्ध जल, भूजल की हालत, और शहरी व ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति की मौजूदा व्यवस्था।
अधिकारियों से कहा गया कि आने वाले दिनों में कहां दिक्कत आ सकती है, इसका अंदाजा पहले से लगाकर तैयारी करें। संदेश साफ था — संकट पर हड़बड़ी में फैसले लेने की बजाय अभी से व्यवस्थित योजना बनाई जाए।
खेतों और घरों के बीच उचित बंटवारा
कृषि और पेयजल की जरूरतों के बीच संतुलन का मुद्दा भी उठा। निर्देश दिया गया कि उपलब्ध जल का वितरण दोनों आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर उचित तरीके से हो।
पेयजल व्यवस्था मजबूत करने के लिए जल जीवन मिशन, अमृत 2.0, ट्यूबवेल और हैंडपंप के चल रहे कार्यों को गति देने की बात कही गई, ताकि ज्यादा से ज्यादा घरों तक नल से जल पहुंचे।
आपके लिए इसका क्या मतलब है
सरकार की कोशिश है कि पानी की कमी की नौबत ही न आए, और दिक्कत आए भी तो समाधान घंटों में हो। आपके जिले का अलग एक्शन प्लान बनेगा — इलाके की असली जरूरत के हिसाब से इंतजाम होगा। शिकायत पर टीमें तेजी से पहुंचेंगी और संकट गहराने पर कलेक्टर के पास 75 लाख रुपये का आपात बजट रहेगा।
| प्रावधान / निर्देश | विवरण |
|---|---|
| स्टेट एक्शन प्लान | 10 दिनों में जल वितरण की राज्य स्तरीय कार्ययोजना |
| जिला स्तरीय प्लान | हर जिले की जरूरत के हिसाब से अलग योजना, नियमित मॉनिटरिंग |
| नहर के पानी का बंटवारा | इंदिरा गांधी नहर परियोजना से जुड़े जिलों में समुचित वितरण |
| शिकायत निस्तारण | 650 वाहन और 3,200 श्रमिकों की सेवाएं स्वीकृत |
| हैंडपंप मरम्मत | रख-रखाव के लिए 150 वाहनों की व्यवस्था |
| आपात मद (अक्टूबर-दिसंबर 2026) | कलेक्टर 75 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे |
| जनता जल योजना | 25 लाख रुपये तक के कार्य कलेक्टर स्तर पर स्वीकृत |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
10 दिन का स्टेट एक्शन प्लान क्या है?
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के निर्देश पर 10 दिनों में जल वितरण का स्टेट एक्शन प्लान तैयार होगा — नहर के पानी के बंटवारे, जल स्रोतों के संतुलित उपयोग और हर जिले की अलग कार्ययोजना का खाका।
क्या हर जिले के लिए अलग योजना बनेगी?
हां। हर जिले की परिस्थितियों और जरूरतों के हिसाब से अलग जिला स्तरीय एक्शन प्लान बनेगा और उसकी मॉनिटरिंग होगी। कलेक्टर हर हफ्ते समन्वय बैठक करके समीक्षा करेंगे।
पानी की शिकायत जल्दी कैसे सुलझेगी?
शिकायतों के निस्तारण के लिए 650 वाहनों और 3,200 श्रमिकों की सेवाएं स्वीकृत हुई हैं। हैंडपंप मरम्मत के लिए 150 वाहन अलग से रहेंगे, ताकि टीमें जल्दी मौके पर पहुंच सकें।
आपात स्थिति में कलेक्टर कितना खर्च कर सकेंगे?
अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक आपात मद में कलेक्टर 75 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे। जनता जल योजनाओं के लिए 25 लाख रुपये तक के कार्य वे अपने स्तर पर स्वीकृत कर सकेंगे।
शिकायतों का तुरंत निपटारा — 650 वाहन, 3,200 श्रमिक
पानी की शिकायतें — नल नहीं आ रहा, पाइपलाइन टूटी है, हैंडपंप खराब है — इनके त्वरित निस्तारण के लिए ठोस व्यवस्था को मंजूरी दी गई। शिकायतें जल्दी सुलझाने के लिए 650 वाहनों और 3,200 श्रमिकों की सेवाएं स्वीकृत हुई हैं।
जलापूर्ति संसाधनों के रख-रखाव और हैंडपंप मरम्मत के लिए 150 वाहनों की अलग व्यवस्था को भी मंजूरी मिली। अब शिकायत पर टीमें तेजी से मौके पर पहुंच सकेंगी।
कलेक्टरों को आपात खर्च की छूट — 75 लाख तक
अक्टूबर 2026 से दिसंबर 2026 तक पेयजल कार्यों के लिए आपात मद में जिला कलेक्टर 75 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे। किसी जिले में अचानक संकट गहराने पर कलेक्टर को फाइलों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा — तुरंत 75 लाख रुपये तक का काम कराया जा सकेगा।
जनता जल योजनाओं के लिए चालू वित्तीय वर्ष में 25 लाख रुपये तक के कार्य कलेक्टर अपने स्तर पर स्वीकृत कर सकेंगे, जिससे छोटी जल योजनाओं को मंजूरी में देरी नहीं होगी।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (जल संसाधन) अभय कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) भास्कर ए. सावंत, अतिरिक्त मुख्य सचिव (नगरीय विकास एवं आवासन) आलोक गुप्ता, प्रमुख शासन सचिव (जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं भू-जल) हेमंत कुमार गेरा सहित शासन सचिव, वरिष्ठ अधिकारी और जिला कलेक्टर मौजूद रहे।
10 दिन का स्टेट एक्शन प्लान — क्या होगा इसमें
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि 10 दिनों में जल वितरण का स्टेट एक्शन प्लान तैयार किया जाए। इसका सबसे अहम हिस्सा इंदिरा गांधी नहर परियोजना से जुड़े जिलों में पानी के समुचित वितरण की कार्ययोजना होगी — नहर के पानी का बंटवारा इस तरह हो कि हर जरूरतमंद इलाके तक पहुंच बने।
यह भी तय हुआ कि उपलब्ध जल स्रोतों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित होगा और जल वितरण की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि एक क्षेत्र में बर्बादी और दूसरे में किल्लत न हो।
खास बात यह है कि हर जिले की स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के हिसाब से अलग जिला स्तरीय एक्शन प्लान बनेगा। एक ही फॉर्मूला पूरे प्रदेश पर नहीं थोपा जाएगा — रेगिस्तानी जिलों, शहरी इलाकों और नहरी क्षेत्रों की जरूरतें अलग-अलग हैं।
जिला कलेक्टरों को सीधे निर्देश — हर हफ्ते समीक्षा
कलेक्टरों को स्पष्ट जिम्मेदारी सौंपी गई — अपने जिलों में जल स्रोतों की नियमित समीक्षा करें और साप्ताहिक समन्वय बैठकें आयोजित करें। यानी पानी का मुद्दा अब हर हफ्ते कलेक्टर की टेबल पर आएगा।
कलेक्टरों को आगामी मानसून तक की जलापूर्ति को ध्यान में रखकर कार्ययोजना बनाने के निर्देश भी दिए गए — सिर्फ इस सर्दी या गर्मी की नहीं, अगले मानसून तक पानी कैसे पहुंचेगा, इसका पूरा हिसाब अभी से तैयार रहेगा।
गौशालाओं और पशुधन के लिए भी पानी
बैठक में पशुधन की प्यास का भी ख्याल रखा गया। मुख्य सचिव ने गोपालन एवं पशुपालन विभाग को निर्देश दिया कि गौशालाओं में गोवंश सहित सभी पशुधन के लिए पर्याप्त पेयजल सुनिश्चित किया जाए।
पशुधन के लिए पानी की उपलब्धता जिला स्तरीय कार्ययोजना में शामिल होगी। जहां कमी की आशंका हो, वहां समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। राजस्थान में पशुपालन लाखों परिवारों की आजीविका है — गर्मी में पशुओं के लिए पानी बड़ी चुनौती होता है।