राजस्थान और पूर्वोत्तर भारत के बीच की दूरी नक्शे पर भले ही हजारों किलोमीटर की दिखती हो, लेकिन अब यह दूरी संस्कृति और सम्मान के एक नए पुल से जुड़ने जा रही है। असम के महान सेनापति वीर लाचित बरफुकन की भव्य प्रतिमा राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा में स्थापित की जाएगी। यह जानकारी राजस्थान फाउंडेशन के नॉर्थ ईस्ट चैप्टर के अध्यक्ष रतन कुमार शर्मा ने गुवाहाटी में आयोजित ‘प्रवासी राजस्थानी मीट’ के दौरान दी। इसी कार्यक्रम में यह बात भी सामने आई कि लाचित बरफुकन की शौर्यगाथा को राजस्थान के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा हो चुकी है, जिसे रतन शर्मा ने एक ऐतिहासिक कदम बताया। कोटा जैसे शहर में, जहां देशभर से लाखों विद्यार्थी पढ़ने आते हैं, सराईघाट के नायक की प्रतिमा सिर्फ एक मूर्ति नहीं होगी, बल्कि हजारों युवाओं को रोज यह याद दिलाने वाला प्रतीक होगी कि देशभक्ति किसी एक प्रदेश की जागीर नहीं होती।
गुवाहाटी की ‘प्रवासी राजस्थानी मीट’ में क्या हुआ?
यह घोषणा गुवाहाटी के होटल विवांता में आयोजित ‘प्रवासी राजस्थानी मीट’ के दौरान हुई। कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के मंत्री के.के. विश्नोई, अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल और कमिश्नर मनीषा अरोड़ा (आईएएस) मौजूद रहे। पूर्वोत्तर के आठों राज्यों से पहुंचे प्रमुख उद्यमियों के साथ राजस्थान में निवेश, व्यापारिक साझेदारी और एमएसएमई इकोसिस्टम को मजबूत करने पर सकारात्मक चर्चा हुई। शर्मा ने साफ कहा कि पूर्वोत्तर और राजस्थान के बीच संबंध केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों क्षेत्रों के बीच साझा संस्कृति, विश्वास, आत्मीयता और मातृभूमि के प्रति समर्पण की मजबूत भावना है।
कौन थे वीर लाचित बरफुकन? सराईघाट की कहानी
लाचित बरफुकन असम के अहोम साम्राज्य के सेनापति थे, जिन्हें पूर्वोत्तर में ‘शिवाजी’ के समान सम्मान दिया जाता है और वे राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक माने जाते हैं। साल 1671 में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे लड़ा गया सराईघाट का युद्ध भारतीय इतिहास के सबसे चर्चित युद्धों में गिना जाता है। उस समय मुगल सेना के सामने अहोम सेना संख्या और संसाधनों में कमजोर मानी जाती थी, लेकिन लाचित बरफुकन ने अपनी रणनीति, छापामार युद्ध कला और अदम्य साहस से गुवाहाटी की रक्षा की और मुगलों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। कहा जाता है कि युद्ध के समय वे गंभीर रूप से अस्वस्थ थे, फिर भी मैदान में डटे रहे और अपने सैनिकों का हौसला बढ़ाते रहे। सराईघाट की विजय के करीब एक साल बाद उनका निधन हो गया और जोरहाट के पास हुलुंगपारा में उनका स्मारक बना हुआ है। आज भी असम में हर साल 24 नवंबर को लाचित दिवस मनाया जाता है और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के सर्वश्रेष्ठ कैडेट को उनके नाम का स्वर्ण पदक दिया जाता है। यही वजह है कि उनकी गाथा सिर्फ असम की नहीं, पूरे देश की धरोहर मानी जाती है।
पाठ्यक्रम में शामिल होगी गाथा, छात्रों को क्या मिलेगा?
रतन कुमार शर्मा ने लाचित बरफुकन की शौर्यगाथा को राजस्थान के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा को ऐतिहासिक कदम बताते हुए इसके लिए राजस्थान सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि इससे आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा मिलेगी। सोचिए, राजस्थान का एक स्कूली बच्चा जब अपनी किताब में सराईघाट का युद्ध पढ़ेगा, तो वह सिर्फ तारीखें नहीं रटेगा, बल्कि यह भी समझेगा कि देश के दूसरे छोर पर एक सेनापति ने किस तरह असंभव लगती लड़ाई को हौसले से जीत में बदला था। इसी तरह कोटा आने वाले कोचिंग विद्यार्थियों के लिए भी यह प्रतिमा एक अलग संदेश होगी — पढ़ाई के दबाव के बीच उस योद्धा की झलक, जो बीमारी में भी कर्तव्य से पीछे नहीं हटा।
एक नजर में: घोषणा से जुड़ी मुख्य बातें
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| प्रतिमा कहां लगेगी | कोटा, राजस्थान |
| घोषणा की जानकारी किसने दी | रतन कुमार शर्मा, अध्यक्ष, राजस्थान फाउंडेशन (नॉर्थ ईस्ट चैप्टर) |
| कार्यक्रम | प्रवासी राजस्थानी मीट, होटल विवांता, गुवाहाटी |
| प्रमुख ऐतिहासिक संदर्भ | 1671 का सराईघाट युद्ध |
| पाठ्यक्रम | लाचित बरफुकन की गाथा राजस्थान के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा |
| कार्यक्रम में मौजूद रहे | मंत्री के.के. विश्नोई, एसीएस शिखर अग्रवाल, कमिश्नर मनीषा अरोड़ा |
| चर्चा के अन्य विषय | राजस्थान में निवेश, व्यापारिक साझेदारी, एमएसएमई इकोसिस्टम |
कोटा ही क्यों, और आगे क्या जानकारी बाकी है?
कोटा को चुनना अपने आप में सोचा-समझा कदम लगता है। कोटा देश की सबसे बड़ी शिक्षा नगरी है, जहां हर साल लाखों युवा डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना लेकर आते हैं। ऐसी जगह पर राष्ट्रीय नायक की प्रतिमा लगना उन युवाओं तक सीधे संदेश पहुंचाएगा, जिनके लिए इतिहास अक्सर सिर्फ परीक्षा का विषय बनकर रह जाता है। साथ ही कोटा एक औद्योगिक नगरी भी है, इसलिए पूर्वोत्तर के उद्यमियों के साथ निवेश चर्चा के लिहाज से भी यह घोषणा प्रतीकात्मक महत्व रखती है। हालांकि, पाठकों के लिए यह जानना जरूरी है कि अभी प्रतिमा का आकार, लागत, कोटा में सटीक स्थान और अनावरण की तारीख जैसी जानकारियां आधिकारिक रूप से सामने नहीं आई हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: लाचित बरफुकन की प्रतिमा राजस्थान में कहां स्थापित होगी?
जवाब: राजस्थान फाउंडेशन (नॉर्थ ईस्ट चैप्टर) के अध्यक्ष रतन कुमार शर्मा के अनुसार भव्य प्रतिमा कोटा में स्थापित की जाएगी। शहर के अंदर सटीक स्थान की आधिकारिक जानकारी अभी जारी नहीं हुई है।
सवाल: लाचित बरफुकन कौन थे और सराईघाट का युद्ध क्या है?
जवाब: लाचित बरफुकन अहोम साम्राज्य के सेनापति थे। 1671 में उन्होंने ब्रह्मपुत्र के किनारे हुए सराईघाट युद्ध में मुगल सेना के खिलाफ गुवाहाटी की सफल रक्षा का नेतृत्व किया था, इसलिए उन्हें पूर्वोत्तर का ‘शिवाजी’ और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक कहा जाता है।
सवाल: राजस्थान के पाठ्यक्रम में क्या बदलाव होने जा रहा है?
जवाब: लाचित बरफुकन की शौर्यगाथा को राजस्थान के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा हुई है। रतन शर्मा ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इससे नई पीढ़ी को देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा मिलेगी।
सवाल: ‘प्रवासी राजस्थानी मीट’ कहां हुई और इसमें कौन-कौन शामिल हुआ?
जवाब: यह कार्यक्रम गुवाहाटी के होटल विवांता में आयोजित हुआ। इसमें राजस्थान सरकार के मंत्री के.के. विश्नोई, अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल, कमिश्नर मनीषा अरोड़ा और पूर्वोत्तर के आठों राज्यों के प्रमुख उद्यमी शामिल हुए, जहां निवेश और एमएसएमई पर चर्चा हुई।