कोटा दक्षिण कचरा विवाद: ब्लैकलिस्टेड फर्म से सांठगांठ का आरोप, पूर्व पार्षद ने मांगी निष्पक्ष जांच

कोटा दक्षिण कचरा विवाद ने शहर की सफाई व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर निगम कोटा दक्षिण में कचरा परिवहन और घर-घर सफाई व्यवस्था के कार्यादेश को लेकर गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। पूर्व पार्षद सलीना शेरी ने संवेदक फर्म पर निविदा शर्तों के घोर उल्लंघन, ब्लैकलिस्टेड फर्म से सांठगांठ और अधिकारियों द्वारा बिना पेनाल्टी काटे पूरा भुगतान करने का आरोप लगाते हुए विभागीय उच्चाधिकारियों को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा है। उन्होंने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह मामला सीधे शहर की सफाई और जनता के पैसे से जुड़ा है, इसलिए हर कोटा निवासी के लिए इसे समझना जरूरी है।

कोटा दक्षिण कचरा विवाद की जड़: कार्यादेश और आरोप

कोटा दक्षिण कचरा विवाद की पृष्ठभूमि करीब दो साल पुरानी है। शिकायत के मुताबिक, नगर निगम कोटा दक्षिण ने 13 दिसंबर 2024 को मैसर्स शर्मा एंटरप्राइजेज (लाडपुरा, कोटा) को कचरा परिवहन का कार्यादेश जारी किया था, जो 16 दिसंबर 2024 से प्रभावी हुआ। कार्यादेश की शर्तों के तहत संवेदक फर्म को प्रत्येक वार्ड में निर्धारित संख्या में टिपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली उपलब्ध कराने, पर्याप्त श्रमिक तैनात करने और वाहनों की जीपीएस निगरानी जैसे मानदंड पूरे करने थे। पूर्व पार्षद का आरोप है कि इनमें से कई शर्तों का जमीन पर पालन ही नहीं हो रहा, फिर भी निगम अधिकारियों ने संवेदक के बिलों का शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया।

शिकायत में उठाए गए 5 बड़े आरोप

शिकायत पत्र में कचरा परिवहन व्यवस्था की जमीनी खामियों को बिंदुवार रेखांकित किया गया है। मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:

क्रम आरोप टेंडर शर्त/नियम शिकायतकर्ता का दावा
1 ब्लैकलिस्टेड फर्म से सांठगांठ पारदर्शी निविदा प्रक्रिया अनिवार्य तथ्य छिपाकर नई कंपनी बनाई, जिसमें झालावाड़ में ब्लैकलिस्टेड सुखपाल कंस्ट्रक्शन शामिल
2 वाहनों की कमी और कंडम गाड़ियां प्रति वार्ड निर्धारित टिपर व ट्रैक्टर-ट्रॉली कई वाहन पुराने व कंडम, नियमित कचरा उठाव बाधित
3 पेनाल्टी में धांधली वाहन न होने पर ₹2,000/दिन, शर्त अधूरी रहने पर ₹1,000/ट्रैक्टर-ट्रॉली/दिन कोई पेनाल्टी काटे बिना पूरा भुगतान
4 श्रमिकों और रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा प्रति ट्रैक्टर-ट्रॉली 3 श्रमिक, बायोमेट्रिक उपस्थिति मौके पर कम श्रमिक, PF व ESI रिकॉर्ड में हेराफेरी की आशंका
5 कागजी निरीक्षण बीट्स का भौतिक सत्यापन अधिकारी दफ्तरों में बैठकर रिपोर्ट तैयार करते हैं

ब्लैकलिस्टेड फर्म वाला आरोप क्यों सबसे गंभीर है

कोटा दक्षिण कचरा विवाद में सबसे तीखा आरोप नई कंपनी के गठन से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, संवेदक फर्म ने आवश्यक तथ्य छिपाकर एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का गठन किया, जिसमें सुखपाल कंस्ट्रक्शन शामिल है — जो झालावाड़ नगर परिषद में पहले से ब्लैकलिस्टेड है। नियमों के मुताबिक, ब्लैकलिस्टेड फर्म किसी भी सरकारी निविदा में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं ले सकती। अगर यह आरोप जांच में सही पाया गया, तो यह न सिर्फ टेंडर शर्तों का उल्लंघन होगा, बल्कि पूरे कार्यादेश की वैधता पर ही सवाल खड़ा हो जाएगा। यही वजह है कि पूर्व पार्षद ने इस बिंदु की गहराई से जांच की मांग की है।

कोटा दक्षिण कचरा विवाद: जीपीएस, लॉगबुक और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की मांग

सलीना शेरी ने प्रशासन से स्पष्ट मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि कचरा परिवहन में लगे सभी वाहनों के जीपीएस डेटा, लॉगबुक रिकॉर्ड, संवेदक के डिजिटल दस्तावेजों और श्रमिकों के वास्तविक वेतन भुगतान की निष्पक्ष भौतिक जांच कराई जाए। शिकायत में कहा गया है कि फर्जीवाड़े से नगर निगम को हुए वित्तीय नुकसान का सटीक आकलन कर संबंधित संवेदक और लापरवाह अधिकारियों से वसूली की जाए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

शहर की सफाई व्यवस्था और आम नागरिक के अधिकार

कोटा दक्षिण कचरा विवाद सिर्फ एक ठेके का मामला नहीं है — इसका सीधा असर शहरवासियों के रोजमर्रा के जीवन पर पड़ता है। जब कचरा उठाव के वाहन समय पर नहीं आते या श्रमिक कम होते हैं, तो वार्डों में कूड़े के ढेर लगने लगते हैं, जिससे बीमारियों और बदबू की समस्या बढ़ती है। नागरिकों को यह जानना जरूरी है कि नगर निगम से घर-घर कचरा संग्रहण की नियमित सेवा पाना उनका अधिकार है। अगर आपके वार्ड में टिपर नहीं आ रहा या सफाई नहीं हो रही, तो आप निगम के शिकायत पोर्टल या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। नियमित शिकायतें ही ऐसी अनियमितताओं को उजागर करने का सबसे बड़ा जरिया हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: कोटा दक्षिण कचरा विवाद क्या है?
उत्तर: नगर निगम कोटा दक्षिण के कचरा परिवहन ठेके में वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। पूर्व पार्षद सलीना शेरी ने ब्लैकलिस्टेड फर्म से सांठगांठ, बिना पेनाल्टी पूरा भुगतान और रिकॉर्ड में फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

प्रश्न 2: शिकायत में ब्लैकलिस्टेड फर्म का क्या मामला है?
उत्तर: आरोप है कि संवेदक फर्म ने तथ्य छिपाकर बनाई गई नई कंपनी में सुखपाल कंस्ट्रक्शन को शामिल किया, जो झालावाड़ नगर परिषद में ब्लैकलिस्टेड है। ब्लैकलिस्टेड फर्म का सरकारी टेंडर में भाग लेना नियमों के खिलाफ है।

प्रश्न 3: कचरा परिवहन के कार्यादेश में पेनाल्टी के क्या प्रावधान हैं?
उत्तर: शिकायत के अनुसार, वाहन उपलब्ध न कराने पर ₹2,000 प्रतिदिन और अन्य शर्तें पूरी न होने पर ₹1,000 प्रति ट्रैक्टर-ट्रॉली प्रतिदिन की पेनाल्टी का प्रावधान है। आरोप है कि निगम अधिकारियों ने कोई पेनाल्टी काटे बिना बिलों का पूरा भुगतान कर दिया।

प्रश्न 4: इस मामले में आगे क्या होगा?
उत्तर: पूर्व पार्षद ने विभागीय उच्चाधिकारियों को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा है और GPS डेटा, लॉगबुक, डिजिटल दस्तावेजों तथा श्रमिकों के वेतन भुगतान की भौतिक जांच की मांग की है। अब प्रशासन के अगले कदम पर सबकी नजर रहेगी।


स्रोत: ख़ासख़बर, कोटा (प्रकाशित: 21 अक्टूबर 2026)। कोटा की अन्य खबरों के लिए देखें: कोटा समाचार, नगर निगम, स्वच्छता अभियान।

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