खेतड़ी में हर्निया ऑपरेशन के बाद 27 वर्षीय युवक की मौत: परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

नीमराणा-खेतड़ी क्षेत्र के सिंघाना में एक निजी अस्पताल में हर्निया के ऑपरेशन के बाद 27 वर्षीय युवक की मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल के बाहर शव रखकर करीब साढ़े तीन घंटे तक धरना दिया। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद से ही युवक की तबीयत बिगड़ने लगी थी और अस्पताल प्रबंधन ने इलाज में लापरवाही बरती, जबकि अस्पताल संचालक ने आरोपों से साफ इनकार किया है। प्रशासन के दखल के बाद वार्ता हुई और आर्थिक सहायता देने पर सहमति बनने के बाद धरना समाप्त कर दिया गया।

यह घटना निजी अस्पतालों में ऑपरेशन के बाद की देखभाल और मरीज के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इस खबर में आपके काम की पूरी जानकारी मिलेगी — हर्निया क्या है, ऑपरेशन के बाद किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, और इलाज में लापरवाही लगे तो शिकायत कहां और कैसे करें।

एक हफ्ते के इलाज के बाद लौटी अर्थी: घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन

वार्ड नंबर 30 निवासी राजेश नायक को पेट दर्द की शिकायत पर 26 सितंबर को सिंघाना के निजी राज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल संचालक डॉ. रणवीर सिंह के अनुसार जांच के बाद 27 सितंबर को उसका हर्निया ऑपरेशन किया गया और दो दिन बाद छुट्टी दे दी गई। लेकिन परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद से ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी थी।

घटनाक्रम तालिका:

तारीख घटना
26 सितंबर 2026 पेट दर्द की शिकायत पर राजेश नायक निजी अस्पताल में भर्ती
27 सितंबर 2026 जांच के बाद हर्निया का ऑपरेशन किया गया
29 सितंबर 2026 ऑपरेशन के दो दिन बाद छुट्टी दे दी गई
2-3 अक्टूबर 2026 तबीयत दोबारा बिगड़ने पर अस्पताल लाया गया, फिर जयपुर रेफर
3 अक्टूबर 2026 जयपुर में इलाज के दौरान राजेश की मौत
3 अक्टूबर 2026 शव सिंघाना लाकर निजी अस्पताल के बाहर करीब साढ़े तीन घंटे धरना
3 अक्टूबर 2026 प्रशासन-परिजन वार्ता में आर्थिक सहायता पर सहमति, धरना समाप्त

परिजनों के अनुसार तबीयत दोबारा खराब होने पर राजेश को अस्पताल लाया गया और फिर जयपुर रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शव सिंघाना लाकर परिजनों ने अस्पताल के बाहर धरना दिया और जांच एवं जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की।

परिजनों का आरोप और अस्पताल प्रबंधन का पक्ष

परिजनों का मुख्य आरोप है कि ऑपरेशन के बाद से ही राजेश की तबीयत बिगड़ने लगी थी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। उनकी मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। वहीं अस्पताल संचालक डॉ. रणवीर सिंह ने कहा कि मरीज का उपचार निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया गया था, और आरोप लगाया कि अस्पताल को बदनाम करने का प्रयास किया गया। बाद में प्रशासन एवं परिजनों के बीच वार्ता हुई — पार्षद डीपी सैनी सहित प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी में आर्थिक सहायता देने पर सहमति बनने के बाद धरना समाप्त कर दिया गया, हालांकि परिजनों ने जांच की मांग बरकरार रखी है।

हर्निया क्या है और ऑपरेशन के बाद किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

हर्निया एक आम बीमारी है जिसमें शरीर के किसी अंदरूनी अंग या ऊतक का हिस्सा मांसपेशियों की कमजोर दीवार से बाहर निकल आता है। पेट के हर्निया में आमतौर पर नाभि के पास या जांघ के ऊपरी हिस्से में सूजन या उभार दिखता है, जिसमें दर्द भी हो सकता है। हर्निया का स्थायी इलाज आमतौर पर सर्जरी ही होती है, क्योंकि दवाओं से कमजोर मांसपेशी की दीवार ठीक नहीं होती।

हर्निया ऑपरेशन आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन किसी भी सर्जरी की तरह इसमें भी कुछ जोखिम होते हैं। ऑपरेशन के बाद निम्न लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • दो-तीन दिन से ज्यादा बना रहने वाला या तेज बुखार
  • ऑपरेशन वाली जगह पर तेज दर्द, सूजन, लालिमा या मवाद
  • उल्टी, लगातार मतली या पेट फूलना
  • पेशाब या मल त्याग में दिक्कत, सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द
  • घाव से खून या असामान्य स्राव

डॉक्टर छुट्टी के समय फॉलो-अप की तारीख देते हैं — उस पर जांच जरूर करवाएं, भले ही तबीयत ठीक लग रही हो। बीच में कोई असामान्य लक्षण दिखे तो फॉलो-अप का इंतजार किए बिना अस्पताल जाएं।

अस्पताल के इलाज से असंतुष्ट हैं तो कहां शिकायत करें: मरीज के अधिकार

राजेश के परिजनों ने धरना देकर अपनी बात रखी, लेकिन हर मामले में यही एकमात्र रास्ता नहीं है। राजस्थान में इलाज में लापरवाही की शिकायत के कई औपचारिक माध्यम हैं — जिले के CMHO कार्यालय में लिखित शिकायत, गंभीर मामलों में जिला कलेक्टर को ज्ञापन, डॉक्टर की पेशेवर लापरवाही पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में शिकायत, उपभोक्ता आयोग में मुआवजे का दावा, और मौत के आरोप में पुलिस में FIR। शिकायत करते समय अस्पताल की पर्चियां, जांच रिपोर्ट, बिल और डिस्चार्ज समरी संभालकर रखें — यही दस्तावेज जांच में सबसे अहम सबूत होते हैं।

निजी अस्पताल चुनते समय इन बातों का ध्यान रखें

विशेषज्ञों के अनुसार छोटे शहरों और कस्बों में निजी अस्पताल चुनते समय कुछ बुनियादी जांच जरूर करें — अस्पताल का पंजीकरण और लाइसेंस वैध है या नहीं, ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर की योग्यता और अनुभव क्या है, ऑपरेशन से पहले लिखित में अनुमानित खर्च और संभावित जोखिमों की जानकारी लें, और यह भी पूछें कि आपात स्थिति में मरीज को कहां रेफर किया जाएगा। सिंघाना की इस घटना में भी सवाल यही उठ रहा है कि छुट्टी के बाद बिगड़ती तबीयत को समय रहते कितनी गंभीरता से लिया गया — जांच में इन्हीं बिंदुओं की पड़ताल होनी चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न: हर्निया का ऑपरेशन कितना सुरक्षित होता है?
उत्तर: हर्निया की सर्जरी आमतौर पर सुरक्षित और आम प्रक्रिया मानी जाती है। लेकिन किसी भी सर्जरी में संक्रमण या एनेस्थीसिया से जुड़े जोखिम हो सकते हैं, इसलिए ऑपरेशन के बाद की देखभाल और फॉलो-अप बेहद जरूरी है।

प्रश्न: ऑपरेशन के बाद छुट्टी मिलने पर क्या सावधानियां बरतें?
उत्तर: दवाएं समय पर लें, घाव को साफ और सूखा रखें, भारी वजन न उठाएं, फॉलो-अप पर जरूर जाएं और बुखार, तेज दर्द या सूजन दिखे तो तुरंत अस्पताल जाएं।

प्रश्न: निजी अस्पताल में इलाज में लापरवाही लगे तो सबसे पहले क्या करें?
उत्तर: सबसे पहले सारे दस्तावेज (पर्ची, रिपोर्ट, बिल, डिस्चार्ज समरी) संभालकर रखें। फिर जिले के CMHO कार्यालय या जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत दें। गंभीर मामलों में पुलिस में FIR और उपभोक्ता आयोग में मुआवजे का दावा भी किया जा सकता है।

प्रश्न: सिंघाना मामले में अब आगे क्या होगा?
उत्तर: प्रशासन और परिजनों के बीच वार्ता में आर्थिक सहायता पर सहमति बन गई है और धरना समाप्त हो गया है। परिजनों ने जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है, जिस पर प्रशासनिक स्तर पर फैसला होना बाकी है।

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