राजस्थान के हजारों किसानों के लिए आखिरकार राहत की खबर आई है। खेत में डिग्गी बनवाकर करीब दो साल से अनुदान की बाट जोह रहे किसानों की अटकी हुई राशि का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने अटल भूजल योजना के तहत लंबित डिग्गी अनुदान के लिए 9,000 लाख रुपये यानी करीब 90 करोड़ रुपये की स्वीकृति दे दी है। इस फैसले से प्रदेश के 17 जिलों के करीब 5,000 किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। कृषि विभाग की टीमें अब लंबित फाइलों की जांच करके वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने में जुट गई हैं और अधिकारियों का कहना है कि अगले पखवाड़े तक राशि किसानों के बैंक खातों में पहुंचनी शुरू हो जाएगी।
यह मामला सिर्फ एक भुगतान का नहीं है। कई किसानों ने डिग्गी बनवाने के लिए ब्याज पर पैसे उधार लिए थे। उम्मीद थी कि अनुदान मिलेगा तो कर्ज चुक जाएगा, लेकिन योजना बंद होने से उनकी परेशानी बढ़ती गई। अब राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि से बजट स्वीकृत हुआ है, तो इन परिवारों को संकट से उबरने की उम्मीद फिर जगी है।
दो साल से क्यों अटका था डिग्गी का अनुदान?
अटल भूजल योजना के तहत किसानों को खेत में डिग्गी यानी जल संग्रहण टांका बनाने पर अनुदान दिया जाता था। एक डिग्गी बनाने पर करीब 5 लाख रुपये की लागत आती है, जिसमें से सरकार करीब 3 लाख रुपये का अनुदान देती थी। इसी भरोसे सैकड़ों किसानों ने करीब दो साल पहले अपने खेतों में डिग्गियां बनवाईं। किसी ने बचत लगाई तो किसी ने ब्याज पर रकम उठाई।
लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 की ये देनदारियां लंबित रह गईं और इस बीच योजना ही बंद हो गई। किसान करीब दो महीने से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, मगर सुनवाई नहीं हो रही थी। मामला तब गरमाया जब हाल ही में हनुमानगढ़ पहुंचे किसान आयोग के अध्यक्ष का किसानों ने घेराव कर दिया। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय बना और आखिरकार भुगतान का निर्णय लिया गया। सरकार ने सामान्य बजट का इंतजार किए बिना राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि से राशि स्वीकृत करने का फैसला किया, ताकि किसानों को और इंतजार न करना पड़े।
किस जिले को कितनी राशि मिली?
स्वीकृत 9,000 लाख रुपये में सबसे बड़ा हिस्सा हनुमानगढ़ जिले को मिला है, जहां 3,789.46 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। दूसरे नंबर पर जैसलमेर है, जिसे 3,361.70 लाख रुपये मिले हैं। राजधानी जयपुर के लिए 925.98 लाख रुपये रखे गए हैं। नीचे सभी 17 जिलों का पूरा ब्योरा दिया गया है, ताकि किसान अपने जिले की स्थिति खुद देख सकें।
| जिला | आवंटित राशि (लाख रुपये) |
|---|---|
| हनुमानगढ़ | 3,789.46 |
| जैसलमेर | 3,361.70 |
| जयपुर | 925.98 |
| दौसा | 217.52 |
| सवाई माधोपुर | 158.49 |
| अजमेर | 98.61 |
| सीकर | 82.00 |
| बारां | 79.04 |
| चित्तौड़गढ़ | 65.00 |
| कोटा | 63.61 |
| झुंझुनूं | 59.07 |
| करौली | 22.94 |
| राजसमंद | 20.72 |
| अलवर | 20.17 |
| झालावाड़ | 17.34 |
| धौलपुर | 10.08 |
| भीलवाड़ा | 8.28 |
| कुल | 9,000 लाख |
आंकड़ों से साफ है कि बकाया सबसे ज्यादा उन्हीं इलाकों में था जहां डिग्गियों का निर्माण सबसे अधिक हुआ था। हनुमानगढ़ और जैसलमेर दोनों मिलाकर कुल राशि का करीब 79 प्रतिशत हिस्सा ले रहे हैं।
किसानों के खाते में पैसा कब और कैसे आएगा?
हनुमानगढ़ कृषि विभाग कार्यालय के कृषि अधिकारी कुलवंत सिंह के अनुसार, विभाग लंबित फाइलों की वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने में जुटा है। पहले बजट की कमी के कारण भुगतान नहीं हो पा रहा था, लेकिन सरकार स्तर पर स्वीकृति मिलने के बाद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उनका कहना है कि अगले पखवाड़े तक सभी पात्र किसानों के खातों में बकाया अनुदान जमा करवा दिया जाएगा।
किसानों के लिए जरूरी बात यह है कि भुगतान उन्हीं फाइलों पर होगा जो अटल भूजल योजना में स्वीकृत डिग्गियों से जुड़ी हैं और जिनकी देनदारी 2024-25 या 2025-26 की है। अगर किसी किसान की फाइल में दस्तावेज अधूरे हैं या बैंक खाते की जानकारी पुरानी है, तो भुगतान अटक सकता है। ऐसे में बेहतर होगा कि किसान एक बार अपने नजदीकी कृषि कार्यालय या संबंधित सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) कार्यालय में जाकर अपनी फाइल की स्थिति जरूर जांच लें। बैंक खाता सक्रिय हो और आधार से जुड़ा हो, यह भी सुनिश्चित कर लें, क्योंकि राशि सीधे खाते में जमा होगी।
डिग्गी क्यों है राजस्थान के किसान के लिए अहम?
पश्चिमी और उत्तरी राजस्थान में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और बारिश अनियमित रहती है। ऐसे में खेत में बनी डिग्गी किसान के लिए किसी बीमा से कम नहीं होती। बारिश का पानी संग्रह करके किसान नाजुक समय पर फसल को जीवनदान दे सकता है। यही वजह है कि डिग्गी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए अनुदान की व्यवस्था की गई थी। एक डिग्गी की लागत करीब 5 लाख रुपये और उस पर मिलने वाला 3 लाख रुपये का अनुदान किसान की जेब पर बोझ काफी कम कर देता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अनुदान समय पर मिले तो किसान कर्ज के चक्कर में नहीं फंसता और ऐसी योजनाओं पर भरोसा भी बना रहता है। दो साल की देरी ने यही भरोसा कमजोर किया था। अब भुगतान की शुरुआत से उम्मीद है कि किसान फिर जल संग्रहण के कामों में रुचि लेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: डिग्गी अनुदान की कुल कितनी राशि स्वीकृत हुई है और कितने किसान लाभान्वित होंगे?
जवाब: राज्य सरकार ने 9,000 लाख रुपये यानी करीब 90 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इससे 17 जिलों के करीब 5,000 किसानों को बकाया अनुदान मिलेगा।
सवाल: एक डिग्गी पर किसान को कितना अनुदान मिलता है?
जवाब: एक डिग्गी बनाने की लागत करीब 5 लाख रुपये आती है, जिस पर सरकार करीब 3 लाख रुपये का अनुदान देती है।
सवाल: पैसा किसानों के खाते में कब तक आएगा?
जवाब: कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार लंबित फाइलों की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की जा रही हैं और अगले पखवाड़े तक राशि खातों में जमा होने की उम्मीद है।
सवाल: सबसे ज्यादा राशि किस जिले को मिली है?
जवाब: हनुमानगढ़ जिले को सबसे अधिक 3,789.46 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि जैसलमेर को 3,361.70 लाख रुपये मिले हैं।
सवाल: किसान अपनी फाइल की स्थिति कहां जांच सकता है?
जवाब: किसान नजदीकी कृषि कार्यालय या सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) कार्यालय में फाइल की स्थिति जांच सकते हैं।