लुधियाना रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर जब पुलिस ने घेराबंदी की, तो प्रयागराज भागने की फिराक में खड़ा 25 साल का युवक समझ गया कि खेल खत्म हो चुका है। करीब 1300 किलोमीटर — डूंगरपुर से लुधियाना तक — पुलिस उसका पीछा करती आई थी। यह युवक डूंगरपुर नकली नोट रैकेट का मास्टरमाइंड रवि कुमार मिश्रा है, जिसने एक लोकप्रिय क्राइम वेब सीरीज देखकर जाली नोट छापने का धंधा सीखा था। शुक्रवार को पुलिस ने इस अंतरराज्यीय नेटवर्क के 4 और सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया — अब कुल 6 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
डूंगरपुर में हाल ही में ईको गैंग का भी पर्दाफाश हुआ था, लेकिन नकली नोट का यह नेटवर्क कहीं ज्यादा बड़ा है — इसके तार चार राज्यों में फैले हैं।
लुधियाना स्टेशन पर खत्म हुआ 1300 किलोमीटर का पीछा
डूंगरपुर के पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के मुताबिक, 29 सितंबर को रामसागड़ा थाना क्षेत्र के माड़ा स्कूल के मैदान से भावेश खटीक (23) और नयन जोशी (19) को गिरफ्तार किया गया था। उनके कब्जे से 4 लाख 95 हजार 500 रुपये की जाली भारतीय मुद्रा बरामद हुई थी। पूछताछ में नयन ने जिस शख्स का नाम लिया, वही इस रैकेट की सबसे अहम कड़ी था — उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ का रहने वाला रवि कुमार मिश्रा।
साथियों की गिरफ्तारी की भनक लगते ही रवि डूंगरपुर से फरार हो गया और उसने मोबाइल बंद कर लिया। लेकिन साइबर सेल और विशेष टीम ने तकनीकी अनुसंधान से उसका पीछा जारी रखा। लोकेशन लुधियाना में मिलते ही पुलिस टीम करीब 1300 किलोमीटर का सफर तय करके वहां पहुंची और उसे स्टेशन से उस वक्त दबोच लिया, जब वह प्रयागराज भागने की तैयारी में था।
पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार द्वारा शुरू ‘ऑपरेशन नोटफ्लिक्स’ के तहत विभिन्न राज्यों में छापेमारी कर बाकी तीन आरोपियों को भी पकड़ा गया।
डूंगरपुर नकली नोट नेटवर्क: इंस्टाग्राम से किराए के मकान तक
पुलिस जांच के मुताबिक, नयन जोशी का संपर्क इंस्टाग्राम के जरिए रवि से हुआ था। रवि ने पहले कूरियर से नकली नोट डूंगरपुर भेजे। भरोसा जमने पर नयन और भावेश ने रवि को डूंगरपुर बुलाकर वसुंधरा विहार कॉलोनी में किराए का मकान दिलवा दिया।
इसी मकान में बैठकर तीनों ने करीब पांच लाख रुपये की जाली मुद्रा तैयार की। लेकिन पहली ही बड़ी खेप के साथ भावेश और नयन पुलिस के हत्थे चढ़ गए, और रवि फरार हो गया।
‘फर्जी’ देखकर सीखा नोट छापना: दिल्ली के कागज से टेलीग्राम चैनल तक
पूछताछ में रवि ने कबूल किया कि उसने क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज ‘फर्जी’ देखकर दो साल से जाली नोट बनाने का तरीका सीखा था।
जाली नोटों के लिए उसने दिल्ली के पेपर मार्केट से विशेष कागज खरीदा और PSD फाइल, प्रिंटर, विशेष स्याही व वाटरमार्क की मदद से नोट तैयार किए। इंस्टाग्राम-टेलीग्राम के चैनलों से उसने खामियां दूर करने की जानकारी भी जुटाई।
रवि के मोबाइल की जांच में टेलीग्राम पर ‘अंकित पेपर सेलर’ नाम का चैनल मिला, जिससे कानपुर के आरिफ मोहम्मद की भूमिका सामने आई। पुलिस ने आरिफ को कानपुर से गिरफ्तार कर लिया — उसने कागज सप्लाई करने वाला समूह तैयार करने की बात स्वीकार की है। एक अन्य टेलीग्राम आईडी ‘यूनीक बॉय’ छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी तरुण मालेकर चला रहा था, जिसने रवि को 500 रुपये के नोटों की PSD फाइलें भेजी थीं।
अपने ही गुरु को दिया धोखा: गत्तों से भरा पार्सल
इस केस का सबसे चौंकाने वाला पहलू रवि और उसके “गुरु” आनंद उर्फ पुष्कर कोली (20, अंबाला कैंट) का रिश्ता है। दोनों की मुलाकात इंस्टाग्राम पर हुई थी। आनंद भी 2023-24 से ‘फर्जी’ देखकर जाली नोट बनाने की कोशिश कर रहा था, पर सफल नहीं हुआ।
दोनों ने मिलकर कागज की जानकारी जुटाई और चीनी कंपनी अलीबाबा से भी सामग्री मंगवाई। आनंद के असफल रहने पर उसने मंगवाया कागज रवि को दे दिया। रवि ने उसी कागज से जाली नोट बनाकर आनंद को भेजे — ये नोट बाजार में चल भी गए। बाद में आनंद ने और नोट मांगे, तो रवि ने पार्सल तो भेजा, लेकिन उसमें नोटों के बजाय केवल गत्ते भरे थे। साथी को धोखा देने वाला मास्टरमाइंड आखिरकार पुलिस के जाल में फंस गया।
डूंगरपुर नकली नोट केस: 6 आरोपियों की कुंडली
| आरोपी | उम्र | निवासी | भूमिका |
|---|---|---|---|
| रवि कुमार मिश्रा (मास्टरमाइंड) | 25 | प्रतापगढ़, UP | नेटवर्क संचालन, नोट छापना |
| भावेश खटीक | 23 | डूंगरपुर | 4.95 लाख जाली नोटों सहित गिरफ्तार |
| नयन जोशी | 19 | डूंगरपुर | इंस्टाग्राम संपर्क, किराए का मकान |
| आनंद उर्फ पुष्कर कोली | 20 | अंबाला कैंट, हरियाणा | कागज उपलब्ध कराया |
| आरिफ मोहम्मद | — | कानपुर, UP | कागज सप्लाई समूह |
| तरुण मालेकर | 27 | दुर्ग, छत्तीसगढ़ | 500 के नोटों की PSD फाइलें भेजीं |
आरोपियों से कागज, प्रिंटर, जाली नोट, लेमिनेशन मशीन, लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन और रद्दी बरामद हुई है। नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
संगठित अपराध पर पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है — हाल ही में अलवर में बांग्लादेशी नागरिकों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भी भंडाफोड़ हुआ था।
जाली नोट पहचानें: RBI के सुरक्षा फीचर्स
इस घटना का सबसे बड़ा सबक आम नागरिकों के लिए है — जाली नोट पहचानना सीखें:
- वाटरमार्क: रोशनी में गांधीजी की तस्वीर और मूल्यवर्ग दिखता है।
- सुरक्षा धागा: ‘भारत’ लिखा धागा; झुकाने पर रंग बदलता है।
- लेटेंट इमेज: आंख के स्तर पर झुकाकर देखने पर मूल्यवर्ग दिखता है।
- उभरी छपाई: गांधीजी की तस्वीर पर इंटैग्लियो प्रिंटिंग, छूकर महसूस होती है।
- सीरियल नंबर: जाली नोटों में नंबर अक्सर दोहराए जाते हैं।
संदिग्ध नोट को चलाने की कोशिश न करें — बैंक शाखा या पुलिस को सूचित करें। अधिक जानकारी RBI की आधिकारिक वेबसाइट पर देखें।
जाली नोट छापना कितना बड़ा अपराध
जाली मुद्रा का निर्माण और प्रसार अर्थव्यवस्था के खिलाफ गंभीर अपराध है। BNS के तहत जाली नोट छापने, बेचने या इस्तेमाल करने पर 7 साल से आजीवन कारावास तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है (पहले IPC की धारा 489A-489E)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: डूंगरपुर नकली नोट रैकेट का मास्टरमाइंड कौन है? उत्तर: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ का 25 वर्षीय रवि कुमार मिश्रा। डूंगरपुर पुलिस ने 1300 किलोमीटर पीछा कर उसे लुधियाना रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया, जहां से वह प्रयागराज भागने की फिराक में था।
प्रश्न 2: आरोपियों ने जाली नोट बनाने का तरीका कहां से सीखा? उत्तर: रवि ने क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज ‘फर्जी’ देखकर तरीका सीखा। उसने दिल्ली के पेपर मार्केट से कागज खरीदा और टेलीग्राम-इंस्टाग्राम चैनलों से तकनीकी जानकारी जुटाई।
प्रश्न 3: अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं? उत्तर: कुल 6 — 29 सितंबर को भावेश खटीक और नयन जोशी, अब रवि मिश्रा, आनंद उर्फ पुष्कर, आरिफ मोहम्मद और तरुण मालेकर। ‘ऑपरेशन नोटफ्लिक्स’ के तहत अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।