राजस्थान के पुलिस मुखिया ने सोमवार को साफ शब्दों में बताया कि आज कानून-व्यवस्था की असली लड़ाई कहां लड़ी जा रही है। जयपुर स्थित राजस्थान पुलिस अकादमी में 438 नव प्रशिक्षित महिला कांस्टेबलों के दीक्षांत परेड समारोह में डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने संगठित अपराध, ड्रोन से सीमा पार तस्करी और साइबर अपराध को राज्य पुलिस की सबसे बड़ी चुनौतियां करार दिया।
यह दिन उन 438 महिला कांस्टेबलों के लिए बेहद खास था, जिनकी ट्रेनिंग पूरी होने के बाद वे विधिवत रूप से पुलिस बेड़े में शामिल हो गईं। समारोह में डीजीपी ने नई महिला पुलिसकर्मियों को सेवा और समर्पण का मंत्र दिया और आम जनता की सुरक्षा से जुड़े खतरों पर भी खुलकर बात की।
ड्रोन से तस्करी: सीमा पार का नया हथियार
डीजीपी ने कहा कि राजस्थान भौगोलिक रूप से देश का सबसे बड़ा राज्य है और इसकी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पुलिसिंग को एक अलग स्तर की चुनौती देती है। पारंपरिक तस्करी की जगह अब अपराधियों ने ड्रोन को हथियार बना लिया है — ड्रोन के जरिए सीमा पार से हथियार और मादक पदार्थों की तस्करी तेजी से हो रही है और इसका पता लगाना बेहद मुश्किल है।
मादक पदार्थों की तस्करी पहले से ही राज्य पुलिस के लिए सिरदर्द बनी हुई है। डीजीपी के अनुसार, नशे के अवैध कारोबार का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और इसे जड़ से खत्म करने के लिए लगातार कार्रवाई जरूरी है।
सोशल मीडिया की अफवाहें और डीपफेक भी बड़ी चुनौती
शारीरिक अपराधों के साथ-साथ वर्चुअल दुनिया का खतरा भी बढ़ा है। डीजीपी ने माना कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहें, फर्जी खबरें और डीपफेक वीडियो अब कानून-व्यवस्था को सीधे प्रभावित कर रहे हैं। कोई भी भड़काऊ सामग्री मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाती है, जिससे हालात बिगड़ने में देर नहीं लगती।
उनके शब्दों में, “इससे भी बड़ी चुनौती है जनता का विश्वास अर्जित करना और उसे बनाए रखना।” लोग अपने जीवन के कठिन समय में पुलिस के पास आते हैं और पुलिस का व्यवहार व त्वरित प्रतिक्रिया उनके जीवन में स्थायी बदलाव ला सकती है।
438 महिला कांस्टेबलों का दीक्षांत समारोह: परेड में दिखा जोश
समारोह का मुख्य आकर्षण नव प्रशिक्षित 438 महिला कांस्टेबलों की दीक्षांत परेड थी। डीजीपी राजीव कुमार शर्मा बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे और उन्होंने परेड की सलामी भी ली। इस मौके पर डीजी (कानून-व्यवस्था) संजय कुमार अग्रवाल, एडीजी (ट्रैनिंग) एचजीआर सुहासा, एडीजी बिपिन कुमार पांडेय और राजस्थान पुलिस अकादमी के निदेशक संजीब कुमार नार्जारी भी उपस्थित रहे।
डीजीपी ने इस बैच की एक खास बात पर रोशनी डाली — इन कांस्टेबलों की ट्रेनिंग केंद्र सरकार के मॉडल सिलेबस के अनुसार हुई है। इस सिलेबस का मकसद पुलिस को महज बल (फोर्स) के रूप में नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण की दिशा में काम करने वाली इकाई के रूप में तैयार करना है। उन्होंने कहा, “आज का दीक्षांत परेड समारोह समापन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति सेवा, समर्पण और उत्तरदायित्व की यात्रा का आगाज है।”
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली कांस्टेबलों को डीजीपी ने सम्मानित भी किया। अकादमी परिसर में उत्सव जैसा माहौल था — नई वर्दी में परेड करती इन महिला कांस्टेबलों के परिजनों की आंखों में गर्व साफ झलक रहा था।
पुलिसिंग में महिलाओं की भूमिका का लगातार विस्तार
समारोह में महिला पुलिसिंग का विषय प्रमुखता से उठा। डीजीपी ने कहा कि पुलिस में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है और पुलिसिंग के हर क्षेत्र में आज महिलाएं अहम भूमिका निभा रही हैं। महिलाओं के आने से पुलिसिंग मजबूत हुई है। प्रदेशभर में कालिका यूनिट ने अपनी अलग पहचान बनाई है — यह यूनिट महिलाओं की सुरक्षा के मामलों में काम करती है।
उन्होंने नई महिला कांस्टेबलों को यथार्थवादी सलाह भी दी — महिला पुलिसकर्मी के रूप में कई चुनौतियां आएंगी और परिवार व काम के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा, लेकिन महिलाओं के पास एक विशिष्ट शक्ति होती है, जिससे यह संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
अपराध नियंत्रण में क्या सुधार हुआ?
डीजीपी ने पिछले वर्ष के कामकाज का लेखा-जोखा भी रखा। उनके अनुसार, राजस्थान पुलिस का फोकस अपराध नियंत्रण, साइबर सुरक्षा, संगठित अपराध पर कार्रवाई और तकनीकी पुलिसिंग पर रहा है।
| मोर्चा | कार्रवाई करने वाली इकाई | प्रमुख बिंदु |
|---|---|---|
| संगठित अपराध | एजीटीएफ (एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स) | गिरोहों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई |
| नशा तस्करी | एएनटीएफ (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) | मादक पदार्थ नेटवर्क पर प्रहार |
| साइबर अपराध | साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (R4C) | जल्द पूरी तरह कार्यात्मक होगा |
| साइबर हेल्पलाइन | 1930 | हेल्पलाइन को और मजबूत किया जा रहा |
| पेपर लीक व परीक्षा धांधली | एसओजी | धांधली के मामलों में प्रभावी काम |
उन्होंने कहा, हत्या और लूट जैसी संगीन घटनाओं में कमी आई है, और साइबर हेल्पलाइन 1930 को और मजबूत किया जा रहा है। राजस्थान साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (R4C) जल्द पूरी तरह कार्य करने लगेगा।
नए कानून, AI और सॉफ्ट स्किल पर जोर
अपने संबोधन के आखिरी हिस्से में डीजीपी ने नई कांस्टेबलों को तकनीक और व्यक्तिगत विकास — दोनों का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है और इसके लिए निरंतर सीखते रहना होगा। तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल और तनाव प्रबंधन पर भी फोकस रखना होगा, और योग, खेल व पीटी को दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।
नए कानूनों के बारे में उन्होंने कहा कि इन्हें दैनिक कामकाज में अपनाएं — वर्दी पहनते ही व्यक्ति कानून का प्रतिनिधि बन जाता है, और उसके हर कदम पर जनता की नजर रहती है।
FAQ
प्रश्न: राजस्थान पुलिस अकादमी के इस दीक्षांत समारोह में कितनी महिला कांस्टेबल शामिल हुईं?
उत्तर: कुल 438 नव प्रशिक्षित महिला कांस्टेबल इस बैच की थीं, जिनकी ट्रेनिंग पूरी होने पर 5 अक्टूबर 2026 को दीक्षांत परेड समारोह आयोजित हुआ।
प्रश्न: डीजीपी ने पुलिस की सबसे बड़ी चुनौतियां कौन-सी बताईं?
उत्तर: संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, ड्रोन की मदद से सीमा पार हो रही हथियार व नशे की तस्करी, साइबर अपराध, सोशल मीडिया की अफवाहें-फर्जी खबरें-डीपफेक और जनता का विश्वास बनाए रखना।
प्रश्न: साइबर ठगी का शिकार होने पर किस नंबर पर शिकायत करें?
उत्तर: साइबर अपराध की राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत करें। डीजीपी ने कहा है कि इस हेल्पलाइन को राजस्थान में और मजबूत किया जा रहा है।
प्रश्न: कालिका यूनिट क्या है?
उत्तर: कालिका यूनिट राजस्थान पुलिस की वह इकाई है जो महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में काम करती है। डीजीपी ने कहा कि प्रदेशभर में इस यूनिट ने अपनी अलग पहचान बनाई है।