2 अक्टूबर 2026 | जयपुर: पंचायतीराज चुनावों की तारीखों का ऐलान भले ही अभी बाकी है, लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ग्रामीण राजनीति के मोर्चे पर अपना सबसे बड़ा दांव चल दिया है। शुक्रवार, गांधी जयंती के दिन जयपुर में उन्होंने प्रदेशभर के पंचायतीराज जनप्रतिनिधियों के साथ राज्य स्तरीय संवाद किया। इस मंच से उन्होंने दो काम एक साथ किए — पहला, खुद को “मुख्यमंत्री नहीं, सरपंच साहब” कहकर सरपंचों के दिल में जगह बनाई; और दूसरा, 1 लाख 94 हजार युवाओं की नियुक्ति का दावा करते हुए कांग्रेस पर तीखा निशाना साधा। चुनावी दृष्टि से देखें तो यह कार्यक्रम पंचायतीराज चुनाव से पहले की सबसे अहम सियासी गतिविधि माना जा रहा है।
कार्यक्रम की एक झलक: 51 किलो की माला, धोती पहने सीएम
संवाद कार्यक्रम जयपुर के जवाहर नगर स्थित माहेश्वरी पब्लिक स्कूल के तक्षशिला ऑडिटोरियम में शुक्रवार सुबह 11:30 बजे शुरू हुआ। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा धोती पहनकर देसी अंदाज में पहुंचे। सरपंच संघ ने उनका स्वागत 51 किलो फूलों की माला पहनाकर किया।
मंच पर पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर, राज्य मंत्री ओटाराम देवासी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, सांसद मंजू शर्मा सहित कई विधायक मौजूद रहे। प्रदेशभर के निवर्तमान सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य भी कार्यक्रम में जुटे। कई जिलों में जिला स्तरीय कार्यक्रम अलग से आयोजित किए गए, जहां मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
यह आयोजन राज्य सरकार के ‘सेवा संकल्प अभियान–जन सेवा ही प्रभु सेवा’ के तहत हुआ, जो 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चल रहा है। अभियान का मकसद सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, और पंचायतीराज जनप्रतिनिधि इस कड़ी की सबसे महत्वपूर्ण जोड़ हैं।
‘मुख्यमंत्री नहीं, सरपंच साहब कहते हैं गांव वाले’
कार्यक्रम का सबसे यादगार पल तब आया जब मुख्यमंत्री ने अपनी सरपंच वाली पुरानी पहचान याद की। उन्होंने कहा कि एक बार सरपंच बनने के बाद यह पहचान जीवनभर साथ रहती है। आज भी जब वे अपने गांव जाते हैं, तो लोग उन्हें मुख्यमंत्री नहीं, ‘सरपंच साहब’ कहकर बुलाते हैं।
उन्होंने सरपंच के पद की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि गांव में गरीब, मजदूर, किसान और दिव्यांग की उम्मीद का पहला केंद्र सरपंच होता है। सरपंच सबसे बड़ा जनप्रतिनिधि होता है — गांव की जनता आज भी उन्हें इसी नाम से पुकारती है। इसलिए विकास की डोर सरपंचों के हाथ में है, और प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के बेहतर समन्वय से ग्रामीण समस्याओं का समाधान तेजी से होगा।
मुख्यमंत्री ने पहले धोबलाई के सरपंच से सीधा संवाद किया और पंचायत में किए गए कार्यों की जानकारी ली। इसके बाद पंचायत समिति सेवर की ग्राम पंचायत लुधावई के सरपंच गौरव सिंह सहित कई अन्य सरपंचों से बातचीत हुई। जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीण विकास, योजनाओं के क्रियान्वयन, स्थानीय समस्याओं और जरूरतों से जुड़ी बातें खुलकर साझा कीं।
नवाचार करने वाले सरपंचों का सम्मान: बर्तन बैंक से लेकर बालिका हॉस्टल तक
कार्यक्रम में उन सरपंचों का विशेष सम्मान भी किया गया जिन्होंने अपने गांवों में अलग-अलग तरह के नवाचार किए। सरपंचों ने खुद अपने अनुभव मुख्यमंत्री को सुनाए — किसी ने स्वच्छता से जुड़े काम बताए, तो किसी ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल साझा की।
उनमें स्वच्छता के काम, बालिका शिक्षा की पहल, त्योहारों के सामूहिक आयोजन, हॉस्टल निर्माण और बर्तन बैंक जैसी अनोखी पहलें शामिल थीं।
सरकार का संदेश: ‘दिया तले अंधेरा नहीं होना चाहिए’
मुख्यमंत्री ने सरपंचों से कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचना चाहिए। उनके आसपास रहने वाला कोई भी व्यक्ति योजनाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए — “दिया तले अंधेरा नहीं होना चाहिए”। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से लोगों की समस्याएं सुनने और उनके समाधान की दिशा में काम करने की अपील की।
सीएम ने यह भी कहा कि यदि किसी समस्या के समाधान में सरकार के स्तर पर कोई परेशानी आ रही है, तो उसकी जानकारी सरकार तक पहुंचाई जाए। सरकार की हेल्पलाइन के जरिए गांव का कोई भी मुद्दा लटकना नहीं चाहिए।
कांग्रेस पर सीधा निशाना: बार-बार चुनाव, वन स्टेट वन इलेक्शन और रोजगार
मंच से मुख्यमंत्री ने विरोधियों को भी नहीं बख्शा। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं और सरकारी संसाधनों पर खर्च बढ़ता है। ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ पर उन्होंने कहा कि जो लोग कभी इस पर सवाल उठाते थे, वह भी हो रहा है। कोरोना काल का जिक्र करते हुए उन्होंने तंज कसा कि “होटल में बंद रहकर सरकार चलाने वाले लोग आमजन की तकलीफ कैसे समझेंगे।”
रोजगार के मोर्चे पर उन्होंने दावा किया कि सरकार की ओर से अब तक 1 लाख 94 हजार युवाओं को नियुक्तियां दी जा चुकी हैं, जबकि 1 लाख 22 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर रोजगार के आंकड़ों को लेकर भी कटाक्ष किया।
एक नजर में: कार्यक्रम के अहम तथ्य
- तारीख और समय: 2 अक्टूबर 2026 (गांधी जयंती), सुबह 11:30 बजे
- स्थान: तक्षशिला ऑडिटोरियम, माहेश्वरी पब्लिक स्कूल, जवाहर नगर, जयपुर
- स्वागत: सरपंच संघ ने 51 किलो फूलों की माला पहनाई
- प्रमुख उपस्थिति: पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर, राज्य मंत्री ओटाराम देवासी, मंत्री अविनाश गहलोत, सांसद मंजू शर्मा, विधायक, निवर्तमान सरपंच व अन्य जनप्रतिनिधि
- रोजगार का दावा: 1,94,000 नियुक्तियां हो चुकीं; 1,22,000 पदों पर प्रक्रिया जारी
- अभियान: ‘सेवा संकल्प अभियान–जन सेवा ही प्रभु सेवा’ (17 सितंबर – 17 अक्टूबर 2026)
- चुनावी संदर्भ: पंचायतीराज चुनाव की तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है
सवाल-जवाब (FAQ)
प्रश्न: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का पंचायतीराज जनप्रतिनिधियों से संवाद कब और कहां हुआ?
उत्तर: 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के दिन जयपुर के जवाहर नगर स्थित माहेश्वरी पब्लिक स्कूल के तक्षशिला ऑडिटोरियम में सुबह 11:30 बजे यह राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हुआ।
प्रश्न: कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सरपंचों से क्या मुख्य बातें कहीं?
उत्तर: उन्होंने कहा कि सरपंच गांव का सबसे बड़ा जनप्रतिनिधि है और गरीब, मजदूर, किसान व दिव्यांग की उम्मीद का पहला केंद्र है। सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए — “दिया तले अंधेरा नहीं होना चाहिए”।
प्रश्न: क्या कार्यक्रम में सरपंचों का सम्मान भी किया गया?
उत्तर: हां। अलग-अलग क्षेत्रों में नवाचार करने वाले सरपंचों का सम्मान किया गया। इनमें झुंझुनूं की ‘बर्तन बैंक’ पहल, आदिवासी क्षेत्र में बालिका हॉस्टल निर्माण, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रयास शामिल थे।
प्रश्न: पंचायतीराज चुनाव की तारीखें कब घोषित होंगी?
उत्तर: अभी आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन मुख्यमंत्री लगातार जिलों में कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों से संवाद कर रहे हैं, जिससे माना जा रहा है कि चुनावी तैयारियां अंतिम चरण में हैं।