बीकानेर के किसानों के लिए खुशखबरी: प्लास्टिक लो-टनल लगाने पर मिलेगा लागत का 50% अनुदान, सर्दी में भी होगी अगेती सब्जी की फसल

सर्दी का मौसम आते ही बीकानेर के सब्जी किसानों की सबसे बड़ी चिंता शुरू हो जाती है — पाला और कड़ाके की ठंड से फसल कैसे बचे? कई बार पूरी मेहनत के बाद भी एक रात का पाला नाजुक पौधों को झुलसा देता है और किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन इस बार उद्यान विभाग किसानों के लिए एक ऐसा उपाय लेकर आया है, जिससे न सिर्फ फसल ठंड से बचेगी, बल्कि सब्जियां बाजार में समय से पहले पहुंचकर अच्छा दाम भी दिला सकेंगी। राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत बीकानेर जिले में प्लास्टिक लो-टनल तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है और इस पर किसानों को लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा।

क्या है प्लास्टिक लो-टनल तकनीक?

प्लास्टिक लो-टनल एक साधारण लेकिन असरदार तकनीक है। इसमें खेत में फसल की क्यारियों के ऊपर बांस या लोहे के तार से सुरंगनुमा ढांचा बनाया जाता है और उसे पारदर्शी प्लास्टिक शीट से ढक दिया जाता है। यह छोटी-सी सुरंग अंदर के तापमान और नमी को नियंत्रित रखती है, जिससे बाहर चाहे कितनी भी ठंड या पाला क्यों न पड़े, अंदर के पौधे सुरक्षित रहते हैं। यह तकनीक खासतौर पर टमाटर, मिर्च, खीरा, लौकी, तुरई और पत्तेदार सब्जियों जैसी नाजुक उद्यानिकी फसलों के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है। पौधों को शुरुआती अवस्था में सही वातावरण मिलने से उनकी बढ़वार तेज होती है और फसल मजबूत बनती है।

कितना मिलेगा अनुदान? पूरी गणित समझिए

योजना के तहत प्लास्टिक लो-टनल की अनुमानित लागत 80 रुपए प्रति वर्गमीटर मानी गई है। किसान को इसी लागत या विभाग से अनुबंधित फर्म की दर — दोनों में से जो भी कम हो — उसका 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। यानी अगर कोई किसान 1,000 वर्गमीटर में लो-टनल लगाता है तो करीब 80 हजार रुपए की लागत पर उसे लगभग 40 हजार रुपए की सहायता मिल सकती है। एक किसान अधिकतम 2,000 वर्गमीटर क्षेत्र के लिए प्रोरेटा आधार पर इस योजना का लाभ ले सकता है। खास बात यह है कि अनुसूचित (टीएसपी) क्षेत्रों के लिए लो-टनल की इकाई लागत 15 प्रतिशत अधिक निर्धारित की गई है, जिससे वहां के किसानों को अपेक्षाकृत ज्यादा सहायता का लाभ मिलेगा।

विवरण योजना के नियम
योजना का नाम राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत प्लास्टिक लो-टनल
अनुमानित लागत 80 रुपए प्रति वर्गमीटर (या अनुबंधित फर्म की दर, जो कम हो)
अनुदान लागत का 50 प्रतिशत
अधिकतम सीमा एक किसान को 2,000 वर्गमीटर तक
जिले का कुल लक्ष्य 10,000 वर्गमीटर
सामान्य श्रेणी लक्ष्य 8,000 वर्गमीटर
अनुसूचित जाति श्रेणी लक्ष्य 2,000 वर्गमीटर
टीएसपी क्षेत्र इकाई लागत 15 प्रतिशत अधिक

जिले में किसे मिलेगा कितना लक्ष्य?

उद्यान उपनिदेशक (अनुसंधान ग्राह्य परीक्षण केंद्र) प्रेमाराम ने बताया कि जिले में कुल 10 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में प्लास्टिक टनल स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 8 हजार वर्गमीटर क्षेत्र सामान्य श्रेणी के किसानों के लिए और 2 हजार वर्गमीटर क्षेत्र अनुसूचित जाति के किसानों के लिए निर्धारित किया गया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि जो किसान पहले इस योजना का लाभ ले चुके हैं, उन्हें दोबारा इसका लाभ नहीं दिया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा नए किसान इससे जुड़ सकें। इसलिए इच्छुक किसानों को सलाह है कि वे जल्द से जल्द विभाग से संपर्क कर अपना नाम दर्ज कराएं, क्योंकि लक्ष्य सीमित है और आवंटन पहले आने वालों को प्राथमिकता के आधार पर हो सकता है।

अगेती फसल का मतलब — बाजार में पहले, दाम ज्यादा

उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत ने बताया कि प्लास्टिक टनल तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान सब्जियों की अगेती फसल तैयार कर सकते हैं। सामान्य तौर पर जो सब्जी खुले खेत में देर से तैयार होती है, वही टनल के अंदर अनुकूल तापमान मिलने से जल्दी तैयार हो जाती है। जब कोई सब्जी सीजन की शुरुआत में बाजार पहुंचती है तो उसकी मांग ज्यादा और आपूर्ति कम होती है, ऐसे में किसान को बेहतर भाव मिलना तय होता है। इसके अलावा टनल फसल को प्रतिकूल मौसम, ठंडी हवाओं और पाले से बचाती है, जिससे नुकसान का जोखिम घटता है। फसल की शुरुआती अवस्था में तापमान और नमी बेहतर ढंग से नियंत्रित होने से पौधे स्वस्थ रहते हैं और उत्पादन भी बढ़ता है। विभाग का कहना है कि उसका उद्देश्य आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों को किसानों तक पहुंचाकर उत्पादकता और आय — दोनों में बढ़ोतरी करना है।

लाभ लेने के लिए किसान क्या करें?

जो किसान इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, वे अपने क्षेत्र के उद्यान विभाग कार्यालय या सहायक निदेशक (उद्यान) कार्यालय, बीकानेर से संपर्क कर सकते हैं। आवेदन के समय किसान को अपनी जमीन से जुड़े दस्तावेज, आधार कार्ड और बैंक खाते की जानकारी साथ रखनी चाहिए, क्योंकि अनुदान की राशि सामान्यतः सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। टनल लगवाने का काम विभाग से अनुबंधित फर्म के माध्यम से ही कराएं और काम पूरा होने के बाद विभागीय निरीक्षण जरूर करवाएं, ताकि अनुदान मिलने में कोई अड़चन न आए। रबी का सीजन दस्तक दे चुका है, ऐसे में समय पर आवेदन करना ही समझदारी होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल 1: प्लास्टिक लो-टनल पर कितना अनुदान मिलेगा?

जवाब: अनुमानित लागत 80 रुपए प्रति वर्गमीटर या अनुबंधित फर्म की दर (जो भी कम हो) का 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। एक किसान अधिकतम 2,000 वर्गमीटर तक लाभ ले सकता है।

सवाल 2: क्या पहले लाभ ले चुके किसान दोबारा आवेदन कर सकते हैं?

जवाब: नहीं। योजना के नियमों के अनुसार पूर्व में लाभान्वित किसानों को पुनः इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा।

सवाल 3: जिले में कुल कितने क्षेत्र का लक्ष्य रखा गया है?

जवाब: बीकानेर जिले में कुल 10,000 वर्गमीटर का लक्ष्य है — 8,000 वर्गमीटर सामान्य श्रेणी और 2,000 वर्गमीटर अनुसूचित जाति श्रेणी के किसानों के लिए।

सवाल 4: लो-टनल तकनीक किन फसलों के लिए सबसे उपयोगी है?

जवाब: यह तकनीक टमाटर, मिर्च, खीरा, लौकी और पत्तेदार सब्जियों जैसी नाजुक उद्यानिकी फसलों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि यह उन्हें पाले और ठंड से बचाकर अगेती उत्पादन देती है।

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