बीकानेर निजी अस्पताल में 5 बेटियों की मां की मौत — परिजनों का हंगामा, डॉक्टर से मारपीट, निष्पक्ष जांच की मांग

बीकानेर के एक निजी अस्पताल में बुधवार रात पांच बेटियों की मां की मौत के बाद अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हो गया। मौत से आक्रोशित करीब 100 से 150 परिजन और परिचित अस्पताल में जुट गए और ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक के साथ मारपीट कर दी। परिजनों का कहना है कि बीकानेर अस्पताल मौत का यह मामला इलाज में गंभीर लापरवाही का नतीजा है। उनकी मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो।

मौत से पहले के 48 घंटे में क्या हुआ

मृतका रुकसाना बानो, पत्नी इकबाल उस्ता, बीकानेर के हंसेरा (लूणकरणसर) क्षेत्र की निवासी थीं। उन्हें पित्त की थैली में पथरी की शिकायत थी, जिसके चलते 6 अक्टूबर को उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। मृतका के भांजे मोनू उस्ता के अनुसार, रुकसाना अपने पैरों पर चलकर अस्पताल आई थीं और चिकित्सकों ने ऑपरेशन करके पथरी निकाल दी थी। लेकिन इसके बाद हालत में सुधार के बजाय गिरावट आने लगी। परिजनों का कहना है कि मंगलवार (7 अक्टूबर) से चिकित्सक मरीज की हालत गंभीर बता रहे थे, फिर भी उसे किसी बड़े अस्पताल में रेफर नहीं किया गया — और बुधवार रात उसकी मौत हो गई। यही बीकानेर अस्पताल मौत की सबसे दुखद कड़ी है।

बीकानेर अस्पताल मौत: परिजनों के तीन बड़े आरोप

बीकानेर अस्पताल मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर तीन गंभीर आरोप लगाए हैं। पहला — मंगलवार से ही हालत गंभीर बताने के बावजूद मरीज को किसी बड़े या सरकारी अस्पताल में स्थानांतरित नहीं किया गया। दूसरा — मौत के बाद जब परिजनों ने अस्पताल (एपेक्स हॉस्पिटल) से मरीज की इलाज संबंधी फाइल मांगी, तो आरोप है कि फाइल उपलब्ध नहीं कराई गई; कभी फाइल के इधर-उधर होने की बात कही गई तो कभी कोई और कारण बताया गया। तीसरा — फाइल न मिलने से परिजनों को आशंका है कि उसमें बाद में बदलाव किया जा सकता है, ताकि लापरवाही के सबूत मिटाए जा सकें।

अस्पताल परिसर में हंगामा, डॉक्टर से मारपीट

बीकानेर अस्पताल मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में परिजन और परिचित अस्पताल पहुंच गए। देखते ही देखते परिसर में 100 से 150 लोग जुट गए। इसी दौरान गुस्साए परिजनों ने ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक डॉ. तनवीर मालावत के साथ मारपीट कर दी, जिन्हें मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव करके बचाया। इसके बाद परिजन धरने पर बैठ गए और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग करने लगे। यह कोई पहला मामला नहीं है जहां मरीज की मौत पर परिजनों का गुस्सा डॉक्टरों पर फूटा हो। चिकित्सक समुदाय लंबे समय से अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा के सख्त प्रावधानों की मांग करता आ रहा है। वहीं निजी अस्पतालों में इलाज के खर्च, पारदर्शिता की कमी और गंभीर स्थिति में रेफर न करने जैसे आरोप भी अक्सर सामने आते हैं।

मरीज के अधिकार — फाइल न मिले तो क्या करें

बीकानेर अस्पताल मौत के इस मामले में परिजनों का एक अहम आरोप मेडिकल फाइल न देना है। भारतीय चिकित्सा परिषद (NMC) के आचार संहिता नियमों के मुताबिक, मरीज या उसके अधिकृत परिजन के मांगने पर अस्पताल को 72 घंटों के भीतर इलाज संबंधी रिकॉर्ड उपलब्ध कराना होता है। इनकार की स्थिति में जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) या राजस्थान मेडिकल काउंसिल में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। बीकानेर अस्पताल मौत जैसे मामलों में चिकित्सकीय लापरवाही पर उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत मुआवजे की मांग का रास्ता भी खुला है। यह भी सच है कि कोटा के प्रसूता मौत मामले में चार जांच कमेटियों की क्लीनचिट के बाद निलंबित डॉक्टरों को बहाल कर दिया गया था — यानी हर आरोप जांच में सही साबित हो, यह जरूरी नहीं। खबर लिखे जाने तक बीकानेर मामले में जांच की प्रक्रिया चल रही थी; मौत की असली वजह और लापरवाही का सवाल जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

बीकानेर अस्पताल मौत: अब आगे क्या होगा

बीकानेर अस्पताल मौत के बाद परिजन फिलहाल निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हैं। जांच में यह साफ होना है — ऑपरेशन में कोई चिकित्सकीय चूक हुई या नहीं, गंभीर हालत में रेफर न करने का फैसला सही था या गलत, और मौत के बाद मेडिकल फाइल क्यों नहीं दी गई। निजी अस्पतालों को लेकर आम लोगों का भरोसा पहले से डगमगा रहा है — RGHS के तहत निजी अस्पतालों के कैशलेस इलाज पर आए संकट ने इसे और कमजोर किया है। पत्रिका की मूल रिपोर्ट के मुताबिक, मौत की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

घटनाक्रम एक नज़र में

बिंदु विवरण
घटना की तारीख 7 अक्टूबर 2026 (बुधवार) रात
स्थान बीकानेर का निजी अस्पताल (एपेक्स हॉस्पिटल)
मृतका रुकसाना बानो, पत्नी इकबाल उस्ता, निवासी हंसेरा (लूणकरणसर), 5 छोटी बच्चियों की मां
बीमारी व इलाज पित्त की थैली में पथरी; 6 अक्टूबर को भर्ती, ऑपरेशन में पथरी निकाली गई
परिजनों के आरोप गंभीर हालत में रेफर नहीं किया; मेडिकल फाइल नहीं दी; फाइल में बदलाव की आशंका
हंगामा 100-150 लोग जुटे; डॉ. तनवीर मालावत से मारपीट; परिजन धरने पर
मांग इलाज में लापरवाही की निष्पक्ष जांच

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: बीकानेर अस्पताल में महिला की मौत कैसे हुई? जवाब: परिजनों के मुताबिक, रुकसाना बानो 6 अक्टूबर को पित्त की थैली में पथरी की शिकायत पर बीकानेर के एक निजी अस्पताल में भर्ती हुई थीं — वे खुद चलकर आई थीं। ऑपरेशन के बाद हालत बिगड़ती गई और 7 अक्टूबर की रात उनकी मौत हो गई। बीकानेर अस्पताल मौत की असली वजह जांच के बाद ही पता चलेगी।

सवाल: परिजनों ने अस्पताल पर क्या आरोप लगाए हैं? जवाब: तीन मुख्य आरोप — गंभीर हालत बताने के बावजूद बड़े अस्पताल में रेफर नहीं किया गया; मौत के बाद मेडिकल फाइल देने से इनकार; और फाइल में बाद में बदलाव की आशंका।

सवाल: डॉक्टर के साथ मारपीट क्यों हुई? जवाब: मौत के बाद करीब 100-150 आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया। इसी दौरान ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक डॉ. तनवीर मालावत से मारपीट कर दी गई, जिन्हें मौके पर मौजूद लोगों ने बचाया।

सवाल: मेडिकल फाइल न मिलने पर परिजन क्या कर सकते हैं? जवाब: NMC के नियमों के मुताबिक अस्पताल को मांगने पर 72 घंटों में इलाज का रिकॉर्ड देना होता है। इनकार पर CMHO या राजस्थान मेडिकल काउंसिल में शिकायत, और लापरवाही के मामले में उपभोक्ता फोरम का रास्ता खुला है।

रुकसाना बानो अपने पीछे पांच छोटी बच्चियां छोड़ गई हैं। उनका परिवार एक ही सवाल का जवाब चाहता है — जो महिला अपने पैरों पर चलकर अस्पताल आई थी, वह वापस क्यों नहीं लौटी? बीकानेर अस्पताल मौत के इस मामले में जवाब निष्पक्ष जांच में ही मिलेगा, और यही सबसे बड़ी जरूरत है।

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