बाड़मेर जिला परिषद चुनाव: नामांकन खारिज पर हाईकोर्ट पहुंचे कांग्रेस उम्मीदवार, याचिका खारिज

बाड़मेर जिला परिषद चुनाव को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने वह फैसला सुनाया है, जो पंचायतीराज चुनाव 2026 के हर उम्मीदवार के लिए नजीर बनेगा। अदालत ने साफ कहा — जब चुनाव प्रक्रिया पूरी रफ्तार से चल रही हो, तो न्यायपालिका ऐसा कोई आदेश नहीं देगी जिससे मतदान में रुकावट आए या देरी हो। रविवार को हुई विशेष अवकाशकालीन सुनवाई में बाड़मेर जिला परिषद के वार्ड 35 से कांग्रेस उम्मीदवार आवड़ दान की याचिका खारिज कर दी गई।

बाड़मेर जिला परिषद चुनाव: अदालत ने उम्मीदवार को कौन सा रास्ता बताया?

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए उम्मीदवार को कानूनी विकल्प भी स्पष्ट किया। राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के वकीलों ने बताया कि राजस्थान पंचायती राज (चुनाव) नियम, 1994 के नियम 80(c) में प्रावधान है — नामांकन गलत तरीके से खारिज होने पर चुनाव परिणाम के 30 दिनों के भीतर जिला न्यायाधीश के समक्ष चुनाव याचिका दायर की जा सकती है। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता के पास यह प्रभावी वैकल्पिक उपाय मौजूद है, इसलिए इस चरण में हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।

बाड़मेर जिला परिषद चुनाव: कौन हैं आवड़ दान और क्या था आरोप?

आवड़ दान ने बाड़मेर जिला परिषद के वार्ड संख्या 35 से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया था। उनका आरोप था कि रिटर्निंग अधिकारी ने पक्ष रखने का अवसर दिए बिना और कोई ठोस कारण बताए बगैर नामांकन खारिज कर दिया। उन्हें इसकी जानकारी 15 अक्टूबर को समाचार पत्र के माध्यम से मिली, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की गंभीरता देखते हुए अदालत ने रविवार को विशेष पीठ गठित कर सुनवाई की — उस दिन पीठ ने केवल इसी मामले की सुनवाई की।

जस्टिस नूपुर भाटी ने क्या सिद्धांत दिया?

सुनवाई न्यायमूर्ति डॉ. नूपुर भाटी ने की। बाड़मेर जिला परिषद चुनाव से जुड़े इस मामले में उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया जारी रहने के दौरान हाईकोर्ट को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत ऐसा आदेश देने से बचना चाहिए, जिससे चुनाव बाधित हो या देरी हो। अदालत ने दोहराया कि चुनाव संपन्न होने के बाद याचिकाकर्ता के पास चुनाव याचिका का वैधानिक विकल्प खुला है।

रविवार को खुली अदालत — एक महीने में दूसरी बार

एक महीने के भीतर यह दूसरा अवसर है जब छुट्टी के दिन हाईकोर्ट में विशेष सुनवाई हुई — इससे पहले 20 सितंबर को निकाय चुनावों से जुड़े मामले में रविवार को सुनवाई हुई थी। राजस्थान हाईकोर्ट में रात्रिकालीन विशेष सुनवाई का भी इतिहास रहा है; एक मामले में रात 10 बजे शुरू सुनवाई देर रात 2 बजे तक चली थी, जिसमें हनुमानगढ़ के नौ और बीकानेर के एक पार्षद की गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई थी। बाड़मेर जिला परिषद चुनाव के इस मामले में भी अदालत ने छुट्टी के दिन सुनवाई तो की, लेकिन राहत देने के बजाय प्रक्रिया के नियमों को सर्वोपरि रखा — यही इस फैसले की सबसे बड़ी सीख है।

घटनाक्रम: एक नजर में

तारीख घटना
15 अक्टूबर 2026 समाचार पत्र से नामांकन खारिज होने की जानकारी मिली
18 अक्टूबर 2026 (रविवार) हाईकोर्ट की विशेष पीठ ने सुनवाई कर याचिका खारिज की
20 अक्टूबर 2026 पहले चरण का सार्वजनिक प्रचार शाम 6 बजे के बाद बंद
22 अक्टूबर 2026 पहले चरण में जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों हेतु मतदान
परिणाम के 30 दिन के भीतर चुनाव याचिका दायर करने की समय-सीमा (नियम 80(c))

नामांकन खारिज हो तो उम्मीदवार क्या करें?

इस फैसले से हर पंचायत चुनाव उम्मीदवार के लिए स्पष्ट सबक है, और बाड़मेर जिला परिषद चुनाव का यह मामला इसकी मिसाल बन गया है। नामांकन रद्द हो तो खारिज होने का लिखित कारण जरूर लें — यही आगे की कानूनी लड़ाई की बुनियाद है। ध्यान रहे कि चुनाव के बीच अनुच्छेद 226 के तहत तुरंत राहत की उम्मीद कम है; असली रास्ता नियम 80(c) के तहत परिणाम के 30 दिन के भीतर जिला न्यायाधीश के समक्ष चुनाव याचिका है। नामांकन पत्र, रसीदें और खारिज होने का आदेश संभालकर रखें। गौरतलब है कि ऐसे मामले सिर्फ बाड़मेर तक सीमित नहीं — सीकर में RLP के 7 प्रत्याशियों के नामांकन भी खारिज हुए थे।

पंचायत चुनाव 2026 का बड़ा संदर्भ

प्रदेश में पंचायतीराज चुनाव अब निर्णायक मोड़ पर हैं। पहले चरण में 22 अक्टूबर को जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान होगा, जबकि पंच-सरपंच के लिए 24 अक्टूबर को वोट पड़ेंगे। बाड़मेर जिला परिषद चुनाव के वार्ड 35 में अब कांग्रेस उम्मीदवार के बगैर मुकाबला होगा या चुनाव याचिका के बाद कोई नया मोड़ आएगा — यह देखना दिलचस्प होगा। सुरक्षा के भी चाक-चौबंद इंतजाम हैं — पंचायत चुनाव को लेकर पुलिस अलर्ट पहले ही जारी हो चुका है। ऐसे में हाईकोर्ट का फैसला उम्मीदवारों, अधिकारियों और मतदाताओं — तीनों के लिए स्पष्ट दिशा तय करता है: चुनाव प्रक्रिया सर्वोपरि है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: बाड़मेर जिला परिषद चुनाव में हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?
उत्तर: 18 अक्टूबर 2026 को विशेष सुनवाई में वार्ड 35 के कांग्रेस उम्मीदवार आवड़ दान की याचिका खारिज कर दी गई। अदालत ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया के बीच बाधा डालने वाला हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 2: नामांकन खारिज होने पर अब कौन सा विकल्प है?
उत्तर: पंचायती राज (चुनाव) नियम, 1994 के नियम 80(c) के तहत परिणाम के 30 दिनों के भीतर जिला न्यायाधीश के समक्ष चुनाव याचिका दायर की जा सकती है।

प्रश्न 3: क्या चुनाव के दौरान हाईकोर्ट राहत दे सकता है?
उत्तर: इस फैसले के अनुसार, चुनाव जारी रहने के दौरान अदालत अनुच्छेद 226 के तहत ऐसा आदेश देने से बचेगी जिससे चुनाव में रुकावट या देरी हो।

प्रश्न 4: पहले चरण का मतदान कब है?
उत्तर: 22 अक्टूबर 2026 को जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए, तथा 24 अक्टूबर को पंच-सरपंच पदों के लिए मतदान होगा।

स्रोत: इस खबर के तथ्य अमर उजाला और मिशन सच की रिपोर्टों पर आधारित हैं।

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