बारां मंडी लाठीचार्ज की घटना ने पूरे हाड़ौती क्षेत्र के किसानों को झकझोर कर रख दिया है। रात के अंधेरे में अपनी फसल बेचने मंडी पहुंचे किसानों पर सुरक्षा गार्डों ने बेरहमी से लाठियां बरसा दीं। इस मारपीट में करीब आधा दर्जन किसान घायल हो गए, जिनमें से दो की हालत चिंताजनक बताई जा रही है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला और गरमा गया है, और किसानों ने दोषी गार्डों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।
रात भर का बवाल: 6 किसान घायल, 2 की हालत गंभीर
मिली जानकारी के मुताबिक घटना बारां शहर स्थित कृषि उपज मंडी के पिछले गेट पर बीती रात हुई। रबी सीजन की तैयारियों के बीच बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचे थे, ताकि फसल का उचित दाम मिल सके। रात के समय मंडी में वाहनों की आवाजाही को लेकर पहले से ही अव्यवस्था का माहौल था। इसी बीच पिछले गेट से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के प्रवेश को लेकर किसानों और वहां तैनात सुरक्षा गार्डों के बीच तीखी कहासुनी हो गई।
कहासुनी देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। आरोप है कि सुरक्षा गार्डों ने अपना आपा खो दिया और निहत्थे किसानों पर डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से मंडी परिसर में अफरा-तफरी और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। किसान संभल पाते, इससे पहले ही गार्डों की लाठियां उन पर बरसने लगीं। इस हिंसक झड़प में करीब छह किसानों को चोटें आईं, जिनमें से दो किसानों को सबसे ज्यादा गंभीर चोटें लगी हैं।
बारां मंडी लाठीचार्ज का वायरल वीडियो — गार्डों की बर्बरता कैमरे में कैद
इस पूरी घटना के दौरान मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने अपने मोबाइल फोन से गार्डों की इस बर्बरता का वीडियो बना लिया। अब यही वीडियो इंटरनेट और सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे सुरक्षा गार्ड निहत्थे किसानों पर लाठियां चला रहे हैं, और किसान खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे हैं।
वायरल वीडियो ने इस मामले को सिर्फ एक स्थानीय झड़प से बढ़ाकर बड़े मुद्दे में बदल दिया है। किसान संगठनों का कहना है कि यह वीडियो इस बात का सबूत है कि मंडियों में किसानों की सुरक्षा को लेकर व्यवस्था कितनी लचर है।
ट्रैक्टर-ट्रॉली की एंट्री पर कहासुनी से लाठीचार्ज तक — पूरी कहानी
घटना की जड़ मंडी के पिछले गेट से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही को लेकर हुआ विवाद है। बड़ी संख्या में किसान रात में अपनी फसल लेकर मंडी के अंदर प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान सुरक्षा गार्डों ने कुछ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को रोकने की कोशिश की, जिस पर किसानों और सुरक्षाकर्मियों के बीच बहस छिड़ गई।
किसानों का कहना है कि वे अपनी उपज बेचने के लिए मंडी आए थे, और प्रवेश से रोकना उनके लिए असहनीय था। वहीं गार्डों का पक्ष अभी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है। मामूली सी बहस ने इतना विकराल रूप ले लिया कि सुरक्षा गार्डों ने नियंत्रण खो दिया और किसानों पर डंडों से हमला बोल दिया। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या मंडी में रात के समय वाहनों के प्रवेश को लेकर कोई स्पष्ट नियम और व्यवस्था थी, या फिर अव्यवस्था ही इस झड़प की असली वजह बनी।
बारां मंडी लाठीचार्ज पर किसानों का गुस्सा: “सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?”
घटना के बाद से स्थानीय किसानों और अन्नदाताओं में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। किसानों का सीधा सवाल है कि जो लोग अपनी फसल बेचने के लिए मंडी आते हैं, उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। किसानों ने प्रशासन से तीखे सवाल पूछते हुए मांग की है कि इस अमानवीय कृत्य में शामिल दोषी गार्डों के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और किसान सुरक्षित महसूस कर सकें।
गौरतलब है कि मंडियों में फसल बेचना किसानों की आजीविका का सबसे अहम हिस्सा है। मंडी भाव को लेकर किसान पहले से ही चिंतित रहते हैं, और ऊपर से ऐसी घटनाएं उनके भरोसे को और तोड़ती हैं। किसान नेताओं का कहना है कि मंडी समितियों को सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर सिर्फ गार्ड तैनात करना काफी नहीं है — उन्हें किसानों के साथ संवेदनशील व्यवहार का प्रशिक्षण भी देना होगा। किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर सरकारें बड़े दावे करती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत ऐसी घटनाओं से उजागर होती है।
बारां मंडी लाठीचार्ज: पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई
घटना की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आई और मौके पर पहुंची। पुलिस ने बिना देर किए दोनों गंभीर रूप से घायल किसानों को बारां के जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका मेडिकल उपचार जारी है। इस मामले की पुष्टि करते हुए बारां जिला अस्पताल चौकी प्रभारी एएसआई कलूआ राम ने बताया कि रात को मंडी के भीतर ट्रैक्टर-ट्रॉली की एंट्री को लेकर किसानों के साथ मारपीट की सूचना मिली थी, जिसके बाद दो घायलों को अस्पताल लाया गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित किसानों की शिकायत दर्ज कर ली गई है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि वायरल वीडियो के आधार पर दोषी गार्डों की पहचान कर उन पर क्या कार्रवाई होती है। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे — प्रदेश में किसान आंदोलन का इतिहास रहा है, इसलिए प्रशासन के लिए यह मामला संवेदनशील बन गया है।
मंडी समिति और कृषि विपणन विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। किसानों की मांग है कि बारां मंडी लाठीचार्ज जैसी घटनाएं दोबारा न हों — इसके लिए मंडी में प्रवेश व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए, रात के समय वाहनों की आवाजाही के स्पष्ट नियम तय किए जाएं, और सुरक्षा गार्डों की जवाबदेही तय हो। अधिकृत जानकारी के लिए किसान राजस्थान कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी नजर रख सकते हैं।
बारां मंडी लाठीचार्ज: मुख्य तथ्य एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
| घटना की तारीख | 21-22 अक्टूबर 2026 की रात |
| स्थान | कृषि उपज मंडी, बारां (पिछला गेट) |
| विवाद की वजह | ट्रैक्टर-ट्रॉली की एंट्री को लेकर कहासुनी |
| घायल किसान | करीब 6 (आधा दर्जन) |
| गंभीर घायल | 2, जिला अस्पताल बारां में भर्ती |
| वीडियो | सोशल मीडिया पर वायरल |
| पुलिस कार्रवाई | शिकायत दर्ज, जांच जारी |
| पुष्टि | एएसआई कलूआ राम, जिला अस्पताल चौकी प्रभारी |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: बारां मंडी लाठीचार्ज की घटना कहां हुई?
जवाब: यह घटना राजस्थान के बारां शहर स्थित कृषि उपज मंडी के पिछले गेट पर बीती रात हुई।
सवाल: विवाद की मुख्य वजह क्या थी?
जवाब: मंडी के पिछले गेट से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की एंट्री और आवाजाही को लेकर किसानों और सुरक्षा गार्डों के बीच कहासुनी हुई थी, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गई।
सवाल: इस घटना में कितने किसान घायल हुए?
जवाब: करीब आधा दर्जन (6) किसान घायल हुए हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर है और उन्हें बारां जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सवाल: पुलिस इस मामले में क्या कर रही है?
जवाब: पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया है, पीड़ित किसानों की शिकायत दर्ज कर ली है और वायरल वीडियो के आधार पर दोषी गार्डों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।