आज 20 अक्टूबर है, और राजस्थान के अलवर में दशहरे की शाम कुछ अलग होने वाली है। जेल के चौराहे पर बने दशहरा मैदान में शाम को जब रिमोट का बटन दबेगा, तो 65 फीट ऊंचा रावण एक झटके में आग की लपटों में घिर जाएगा — और उससे पहले वही रावण हंसता हुआ, हाथ हिलाता हुआ हजारों लोगों को अपनी ओर खींच चुका होगा। इस साल अलवर रावण दहन 2026 में सबसे बड़ा आकर्षण यही टेक्नोलॉजी है: परंपरा और मशीनरी का ऐसा मेल, जो 1948 से चली आ रही इस परंपरा में पहली बार इतने भव्य पैमाने पर देखा जा रहा है।
कार्यक्रम की शान में चार चांद लगाने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव खुद मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे। उनके साथ वन राज्यमंत्री संजय शर्मा, रामगढ़ विधायक सुखवंत सिंह और अलवर नगर निगम की महापौर सुमनलता अग्रवाल भी मंच पर रहेंगी। पुरुषार्थी समिति के संरक्षक राकेश अरोड़ा के मुताबिक आयोजन की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं, और मैदान के आसपास सुरक्षा व भीड़ प्रबंधन की पूरी व्यवस्था कर दी गई है।
अलवर रावण दहन 2026: रिमोट से दहन, पहले हंसेगा रावण
अलवर रावण दहन 2026 की सबसे चर्चित बात इसके पुतले की बनावट है। 65 फीट ऊंचा रावण का पुतला इस बार मैकेनिकल सिस्टम से जुड़ा है — दूर से ही चमकदार दिखाई देने के लिए इसे पहले के मुकाबले ज्यादा रोशनीदार बनाया गया है। दहन से पहले यह पुतला हंसता और हाथ हिलाता नजर आएगा, और फिर रिमोट का बटन दबाते ही पुतला आग पकड़ लेगा। रावण के साथ 60 फीट के कुंभकर्ण और 55 फीट के मेघनाद के पुतले भी जलाए जाएंगे। आकर्षण की सूची यहीं खत्म नहीं होती — रावण के 5 फीट के जूते और चमकती तलवार भी इस बार खास बनाई गई है, ताकि दूर खड़ी भीड़ को भी हर नजारा साफ दिखे।
पुतलों को तैयार करने में डीग के कारीगरों की टीम करीब 20 दिनों से जुटी है। बांस, लकड़ी और कागज से बने ये पुतले हर साल की तरह इस बार भी हाथ से तैयार किए गए हैं, लेकिन इस बार की फिनिशिंग पहले से ज्यादा चमकदार रखी गई है, ताकि दूर से देखने पर पुतले और भव्य लगें।
अलवर रावण दहन 2026 का पूरा कार्यक्रम: दोपहर से रात तक
यह सिर्फ शाम का एक कार्यक्रम नहीं है — दोपहर से शुरू होकर देर रात तक चलने वाला पूरा उत्सव है। दिन का कार्यक्रम इस तरह रहेगा:
| समय | कार्यक्रम | स्थान |
|---|---|---|
| दोपहर 12:00 | विजय यज्ञ (मधुसूदन वेद विद्यालय के विद्यार्थी) | पुरुषार्थी धर्मशाला के सामने |
| दोपहर बाद | भगवान राम की शोभायात्रा, 16 झांकियां, 2 ड्रोन | विवेकानंद चौक से दशहरा मैदान तक |
| शाम | रावण दहन (रिमोट से), लेजर शो, आतिशबाजी | जेल का चौराहा, दशहरा मैदान |
शोभायात्रा की सबसे बड़ी खासियत इस बार अशोक वाटिका की झांकी रहेगी, जिसे विशेष आकर्षण के तौर पर तैयार किया गया है। इसके अलावा 15 और झांकियां शहर के मुख्य मार्गों से गुजरती हुई दशहरा मैदान पहुंचेंगी। यात्रा के साथ दो ड्रोन भी उड़ेंगे, जो ऊपर से पूरे नजारे को कैमरे में कैद करेंगे। गाजियाबाद के कारीगर आतिशबाजी का प्रदर्शन करेंगे — अलवर में हर साल गाजियाबाद की टीम की रंगीन आतिशबाजी को देखने के लिए ही हजारों लोग मैदान में जुटते हैं।
1948 से चली आ रही परंपरा: पुरुषार्थी समाज का दशहरा
अलवर का दशहरा उत्सव कोई नया आयोजन नहीं है। पुरुषार्थी समाज यहां 1948 से — यानी आजादी के ठीक एक साल बाद से — रावण दहन का आयोजन करता आ रहा है। दशकों से यह परंपरा बिना रुके चली आ रही है, और हर साल इसमें कुछ न कुछ नया जुड़ता रहा है। कभी झांकियों की संख्या बढ़ी, कभी आतिशबाजी का पैमाना बड़ा, और इस बार टेक्नोलॉजी ने प्रवेश किया है — रिमोट दहन, हंसता हुआ रावण, लेजर शो और ड्रोन।
यही वजह है कि अलवर का दशहरा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। दशहरे के दिन शहर के अलग-अलग हिस्सों से लोग परिवारों के साथ दशहरा मैदान पहुंचते हैं। बाजारों में भी रावण के छोटे पुतले खूब बिकते हैं — बच्चे अपने घरों के लिए छोटे रावण खरीदते हैं, और मोहल्लों में अपने स्तर पर छोटे दहन भी होते हैं।
सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन: प्रशासन की क्या तैयारी है
इतने बड़े आयोजन में भीड़ प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती होती है। अलवर रावण दहन 2026 को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। पुलिस की व्यवस्था पूरी रहेगी और नगर निगम की टीमें भी मैदान में मुस्तैद रहेंगी। शोभायात्रा के मार्ग पर यातायात को नियंत्रित किया जाएगा, ताकि झांकियों के साथ चलने वाली भीड़ को कोई परेशानी न हो।
आयोजन स्थल पर आतिशबाजी और दहन के दौरान सुरक्षा घेरा बनाया जाएगा, ताकि भीड़ पुतलों के ज्यादा करीब न पहुंच सके। रावण दहन के समय आग की लपटें और धुआं दूर तक फैलता है, इसलिए मैदान में सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी है। परिवारों के साथ आने वालों को सलाह दी जाती है कि वे समय से पहले पहुंचें और बच्चों को अपने साथ रखें।
राजस्थान में दशहरे के बड़े आयोजनों की बात करें तो कोटा का 133वां राष्ट्रीय दशहरा मेला भी आज ही, 20 अक्टूबर को रावण दहन के साथ अपने औपचारिक चरण में प्रवेश कर रहा है। त्योहारी सीजन में शहरों की रौनक का एक और नजारा जयपुर की दीपावली लाइटिंग में दिखेगा, जहां परकोटा रात 12 बजे तक जगमगाएगा।
अलवर रावण दहन देखने जाने वालों के लिए जरूरी जानकारी
- तारीख: 20 अक्टूबर 2026 (विजयादशमी)
- स्थान: दशहरा मैदान, जेल का चौराहा, अलवर
- मुख्य आकर्षण: 65 फीट रावण (रिमोट दहन), 60 फीट कुंभकर्ण, 55 फीट मेघनाद, लेजर शो, आतिशबाजी
- शोभायात्रा: दोपहर बाद, पुरुषार्थी धर्मशाला (विवेकानंद चौक) से दशहरा मैदान तक — 16 झांकियां, 2 ड्रोन
- मुख्य अतिथि: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव; विशिष्ट अतिथि: संजय शर्मा, सुखवंत सिंह, सुमनलता अग्रवाल
- पहुंच: शहर के मुख्य मार्गों से दशहरा मैदान आसानी से पहुंचा जा सकता है; भीड़ को देखते हुए वाहन थोड़ी दूर पार्क करना बेहतर रहेगा
अधिकृत जानकारी के लिए राजस्थान पत्रिका की मूल रिपोर्ट भी देखी जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: अलवर रावण दहन 2026 कब और कहां होगा?
उत्तर: 20 अक्टूबर 2026 (विजयादशमी) को अलवर के जेल के चौराहे स्थित दशहरा मैदान में। दोपहर 12 बजे विजय यज्ञ के बाद शोभायात्रा निकलेगी और शाम को रावण दहन होगा।
प्रश्न 2: इस बार अलवर के रावण दहन में क्या खास है?
उत्तर: 65 फीट का रावण रिमोट से जलाया जाएगा — दहन से पहले पुतला हंसता और हाथ हिलाता नजर आएगा। इसके अलावा लेजर शो, गाजियाबाद के कारीगरों की आतिशबाजी, 16 झांकियां और 2 ड्रोन भी आकर्षण होंगे।
प्रश्न 3: अलवर दशहरा उत्सव में मुख्य अतिथि कौन होंगे?
उत्तर: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव मुख्य अतिथि होंगे। वन राज्यमंत्री संजय शर्मा, रामगढ़ विधायक सुखवंत सिंह और अलवर की महापौर सुमनलता अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगी।
प्रश्न 4: अलवर में रावण दहन की परंपरा कितनी पुरानी है?
उत्तर: पुरुषार्थी समाज अलवर में 1948 से लगातार रावण दहन का आयोजन करता आ रहा है — यह परंपरा अब 78 साल पुरानी हो चुकी है।