राजस्थान संपर्क-181 पर अब नई तकनीक की नजर: प्रमुख शासन सचिव ने खुद शिकायतकर्ताओं को फोन लगाकर सुनीं समस्याएं, दोषी कार्मिकों पर कार्रवाई के निर्देश
सरकारी शिकायत व्यवस्था को लेकर आम आदमी की सबसे बड़ी शिकायत अक्सर यही होती है कि शिकायत तो दर्ज हो जाती है, लेकिन उसका जवाब कभी नहीं मिलता। सोमवार को जयपुर में राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने इस धारणा को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन-181 के कॉल सेंटर का निरीक्षण किया और खुद ऑपरेटर की सीट पर बैठकर वीडियो और ऑडियो कॉल के जरिए शिकायतकर्ताओं से सीधे बातचीत की। अधिकारियों के सामने ही उन्होंने लंबित मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
सबसे बड़ा संदेश: शिकायतकर्ता से सीधा संवाद, बिचौलिये नहीं
इस निरीक्षण की सबसे अहम बात यह रही कि प्रमुख शासन सचिव ने केवल रिपोर्टें नहीं देखीं, बल्कि शिकायतकर्ताओं को खुद फोन लगाया। उन्होंने विभिन्न जिलों के लोगों से पूछा कि उनकी समस्या का समाधान हुआ है या नहीं, और वे विभाग की कार्रवाई से कितने संतुष्ट हैं। जिन मामलों में काम अधूरा मिला, वहां मौके पर मौजूद अधिकारियों को समयबद्ध निस्तारण के कड़े निर्देश दिए गए। संपर्क पोर्टल को आमजन और सरकार के बीच सेतु बताते हुए उन्होंने कहा कि शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे ऊपर होनी चाहिए। उनका मानना है कि परिवादी की संतुष्टि ही सेवा की असली कसौटी है, इसलिए औसत समाधान समय को और कम करने के प्रयास किए जाएं।
निरीक्षण में सामने आईं पांच अहम शिकायतें — अस्पतालों की जमीनी हकीकत
निरीक्षण के दौरान जो मामले सामने आए, वे दिखाते हैं कि आम मरीजों को आज भी किन बुनियादी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सवाई माधोपुर के नरेश ने मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में जनाधार और अन्य दस्तावेजों से जुड़ी समस्या बताई — इलाज के लिए योजना का लाभ मिलने में कागजी अड़चन आ रही थी। प्रमुख शासन सचिव ने जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को मामले का जल्द समाधान करने के निर्देश दिए। जयपुर के यश ने सांगानेरी महिला चिकित्सालय में स्टाफ के अभद्र व्यवहार की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसकी जानकारी लेने के बाद संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसी तरह धनराज और ताराचंद ने आशा सहयोगिनी से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराईं, जबकि गंगापुर सिटी के सूरज ने राजकीय अस्पताल में डॉक्टरों के समय पर उपलब्ध न होने की शिकायत की। प्रमुख शासन सचिव ने सभी मामलों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
“लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी” — दोषी कार्मिकों को स्पष्ट चेतावनी
निरीक्षण के दौरान गायत्री राठौड़ ने दो टूक शब्दों में कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिकित्सा संस्थानों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जांच में दोषी पाए जाने वाले कार्मिकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि शिकायतों के निस्तारण में गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए, न कि केवल फाइल बंद करने की औपचारिकता निभाई जाए।
संपर्क AI: अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता करेगी शिकायतों का विश्लेषण
निरीक्षण का एक और अहम पहलू राजस्थान संपर्क की “संपर्क AI” पहल रही। प्रमुख शासन सचिव ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से दर्ज जन शिकायतों का विषयवार और प्रभावी विश्लेषण किया जा सकेगा। इससे विभाग को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस तरह की शिकायतें बार-बार आ रही हैं, किस जिले या अस्पताल में समस्या ज्यादा है और समाधान में औसतन कितना समय लग रहा है। डेटा और विस्तृत रिपोर्ट मिलने से समस्याओं की जड़ तक पहुंचना और उनके लिए समयबद्ध कार्रवाई करना आसान होगा।
181 हेल्पलाइन का रिपोर्ट कार्ड: तिरानवे प्रतिशत शिकायतें निपटीं
गायत्री राठौड़ के इस निरीक्षण से पहले ही राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन-181 की एक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसके अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने दर्ज शिकायतों में से 93 प्रतिशत का निस्तारण कर दिया है। मेडिकल हेल्थ से जुड़े मामलों में 66 प्रतिशत और स्वास्थ्य बीमा से जुड़े मामलों में 72 प्रतिशत परिवादियों ने समाधान पर पूर्ण संतुष्टि जताई है। ये आंकड़े बताते हैं कि व्यवस्था काम तो कर रही है, लेकिन संतुष्टि के स्तर में अभी सुधार की गुंजाइश है। यही वजह है कि प्रमुख शासन सचिव ने औसत समाधान समय घटाने और गुणवत्तापूर्ण समाधान पर जोर देने के निर्देश दिए हैं।
आप भी दर्ज करा सकते हैं शिकायत — जानिए पूरा तरीका
अगर आपको भी सरकारी अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र या किसी चिकित्सा योजना से जुड़ी कोई परेशानी है, तो राजस्थान संपर्क के जरिए शिकायत दर्ज कराना बेहद आसान है। आप हेल्पलाइन नंबर 181 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा sampark.rajasthan.gov.in पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज की जा सकती है। शिकायत दर्ज करते समय अपना नाम, जिला, मोबाइल नंबर और समस्या का स्पष्ट विवरण जरूर दें — इससे निस्तारण में तेजी आती है। शिकायत दर्ज होने के बाद आपको एक पंजीकरण संख्या मिलती है, जिससे आप अपनी शिकायत की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं। तय समय में समाधान न होने पर शिकायत उच्च स्तर पर स्वतः पहुंच जाती है।
निरीक्षण के दौरान सामने आए प्रमुख मामले एक नजर में
| शिकायतकर्ता | जिला/शहर | शिकायत का विषय | दी गई कार्रवाई |
| नरेश | सवाई माधोपुर | आयुष्मान आरोग्य योजना में जनाधार व दस्तावेज संबंधी अड़चन | जिला सीएमएचओ को जल्द समाधान के निर्देश |
| यश | जयपुर | सांगानेरी महिला चिकित्सालय में स्टाफ का अभद्र व्यवहार | संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश |
| धनराज और ताराचंद | — | आशा सहयोगिनी से जुड़ी शिकायतें | जांच कर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश |
| सूरज | गंगापुर सिटी | राजकीय अस्पताल में डॉक्टरों का समय पर उपलब्ध न होना | जांच व नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन-181 क्या है?
उत्तर: यह राज्य सरकार की जन शिकायत निवारण हेल्पलाइन है, जहां आप सरकारी विभागों और सेवाओं से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सहित सभी विभागों की शिकायतें इस पर ली जाती हैं।
प्रश्न: शिकायत दर्ज करने के क्या-क्या तरीके हैं?
उत्तर: आप 181 पर कॉल करके या sampark.rajasthan.gov.in पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। शिकायत दर्ज होने पर पंजीकरण संख्या मिलती है, जिससे स्थिति ट्रैक की जा सकती है।
प्रश्न: संपर्क AI पहल क्या है और इससे क्या फायदा होगा?
उत्तर: संपर्क AI कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण प्रणाली है, जो दर्ज शिकायतों का विषयवार विश्लेषण करेगी। इससे बार-बार आने वाली समस्याओं की पहचान होगी और विभाग समयबद्ध व लक्षित कार्रवाई कर सकेगा।
प्रश्न: शिकायत का समाधान न होने पर क्या करें?
उत्तर: तय समय सीमा में समाधान न होने पर शिकायत स्वतः उच्च स्तर के अधिकारियों के पास पहुंच जाती है। पंजीकरण संख्या से स्थिति ट्रैक करें और 181 पर फॉलो-अप लें।