कन्हैया लाल हत्याकांड: राजस्थान हाई कोर्ट ने 5 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की, कहा — आतंकवाद कमजोरों का हथियार

कन्हैया लाल हत्याकांड: राजस्थान हाई कोर्ट ने 5 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की, कहा — आतंकवाद कमजोरों का हथियार

उदयपुर के चर्चित कन्हैया लाल हत्याकांड में शनिवार को राजस्थान हाई कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने पांच आरोपियों — वसीम अली, मुस्लिम खान, मोहसिन खान, मोहम्मद मोहसिन और आसिफ हुसैन — की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि अपराध की गंभीरता, बड़ी आपराधिक साजिश में इनकी खास भूमिका और आतंकवादी घटना की भयानक प्रकृति को देखते हुए ये जमानत के हकदार नहीं हैं। फैसले की शुरुआत महात्मा गांधी के उसी कथन से हुई जो अब सुर्खियों में है — आतंकवाद और छल-कपट ताकतवर लोगों के नहीं, बल्कि कमजोर लोगों के हथियार हैं।

जमानत पर रोक: UAPA बना सबसे बड़ा आधार

फैसले की कानूनी बुनियाद गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA है। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि UAPA के तहत जमानत देने पर कानूनी रोक है, अगर चार्जशीट देखने के बाद अदालत को लगे कि आरोपों के पहली नजर में सच होने का उचित आधार मौजूद है।

एनआईए की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजा ठाकरे ने बताया कि एजेंसी ने विस्तृत जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल किया है और निचली अदालत आरोप तय कर चुकी है — यानी प्रथम दृष्टया आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। अदालत ने माना कि एनआईए की सामग्री पहली नजर में आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त आधार देती है। ठाकरे ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जमानत के स्तर पर अदालत को बारीक ट्रायल करने या सबूतों को बारीकी से तौलने की जरूरत नहीं होती।

गांधी के शब्दों और दिनकर की कविता से शुरू हुआ फैसला

खंडपीठ ने निर्णय की शुरुआत महात्मा गांधी के कथन से की — आतंकवाद और धोखेबाजी ताकतवर के नहीं, कमजोरों के हथियार हैं। इसके बाद राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध पंक्तियां उद्धृत की गईं — “सहनशीलता, क्षमा, दया को तभी पूजता जग है, बल का दर्प चमकता उसके पीछे जब जगमग है। क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो, उसको क्या जो दंतहीन, विषरहित, विनीत, सरल हो।”

इन पंक्तियों से अदालत ने संदेश दिया कि राष्ट्र की संप्रभुता और शांति की रक्षा के लिए कानून का सख्त होना जरूरी है — सहनशीलता कमजोरी नहीं, और क्षमा उसी को शोभा देती है जिसके पास ताकत हो। पीठ ने कहा कि न्यायाधीश का आसन एक अदृश्य, फिर भी भारी भार से घिरा होता है — यह भार नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का है।

“राष्ट्र की आत्मा पर चोट”: आतंकवाद पर सख्त टिप्पणी

आतंकवाद की प्रकृति पर अदालत ने गंभीर टिप्पणियां कीं। खंडपीठ ने कहा कि जब अपराध किसी व्यक्ति विशेष को नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को निशाना बनाता है, तो जमानत का पूरा स्वरूप ही बदल जाता है। आतंकवाद केवल शारीरिक हमला नहीं, बल्कि देश की मनोवैज्ञानिक संप्रभुता पर सोचा-समझा नाटकीय हमला है — इसका अंतिम उद्देश्य अपराध नहीं, शांति की हत्या करना और कानून के शासन को भय के शासन में बदलना है।

संविधान की प्रस्तावना का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह केवल कागज के पन्ने नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा की अमर प्रतिज्ञा है जो न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व की रक्षा का निर्देश देती है। पीठ ने कहा कि एनआईए अधिनियम 2008 और UAPA 1967 शांति के समय में नहीं, बल्कि आवश्यकता की भट्ठी में गढ़े गए कानून हैं — संविधान निर्दोषों की ढाल है, पर सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने वालों का अभयारण्य नहीं बन सकता।

बचाव पक्ष की दलीलें और NIA का जवाब

आरोपियों के वकील सैयद सादात अली ने तर्क दिया कि 10 जून से 28 जून 2022 के बीच इनके मृतक की दुकान के आसपास होने का कोई ठोस सबूत रिकॉर्ड पर नहीं है, और न ही किसी व्हाट्सएप ग्रुप पर भड़काऊ संदेश भेजने का सबूत है। बचाव पक्ष ने दो अन्य सह-आरोपियों फरहाद मोहम्मद और मोहम्मद जावेद को मिली जमानत की समानता मांगी, साथ ही कहा कि आरोपी साढ़े चार साल से हिरासत में हैं और अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई उनका अधिकार है।

एनआईए ने इसका विरोध करते हुए कहा कि पांचों ने अपराध में सक्रिय, अपरिहार्य और अभिन्न भूमिका निभाई। लंबी हिरासत के तर्क पर एजेंसी ने बताया कि ट्रायल दिन-प्रतिदिन तेजी से चल रहा है और कई गवाहों से पूछताछ हो चुकी है। दोनों पक्ष सुनने के बाद अदालत ने पाया कि मुकदमा अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और गंभीरता देखते हुए जमानत नहीं बनती।

घटनाक्रम: एक नजर में

तारीख घटना
28 जून 2022 उदयपुर में मोहम्मद रियाज अटारी और गौस मोहम्मद ने ग्राहक बनकर कन्हैया लाल तेली की दुकान में हत्या की; वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ
2022 एनआईए ने विस्तृत जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया
2024 की शुरुआत स्पेशल कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए
अक्टूबर-नवंबर 2024 स्पेशल कोर्ट से पांचों की जमानत याचिकाएं खारिज
3 अक्टूबर 2026 (शनिवार) राजस्थान हाई कोर्ट ने पांचों की जमानत याचिकाएं खारिज कीं

यह हत्या कन्हैया लाल द्वारा सोशल मीडिया पर नूपुर शर्मा के समर्थन में साझा पोस्ट के बाद हुई थी। गिरफ्तारी के बाद से पांचों न्यायिक हिरासत में हैं। फैसले वाले दिन पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी बयान दिया कि चार साल बाद भी न्याय नहीं मिला — उन्होंने बीजेपी पर केस के चुनावी इस्तेमाल और धीमी ट्रायल का आरोप लगाया।

आगे क्या: ट्रायल अंतिम चरण की ओर

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियां केवल जमानत के आवेदन तक सीमित हैं — निचली अदालत इनसे अप्रभावित रहकर मुख्य मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ाएगी। एनआईए के मुताबिक ट्रायल दिन-प्रतिदिन चल रहा है और कई गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है। अब सबकी नजर स्पेशल कोर्ट पर है, जहां इस बहुचर्चित मामले का अंतिम फैसला आना बाकी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: किन पांच आरोपियों की जमानत खारिज हुई?
जवाब: वसीम अली, मुस्लिम खान, मोहसिन खान, मोहम्मद मोहसिन और आसिफ हुसैन — सभी 2022 में गिरफ्तारी के बाद से न्यायिक हिरासत में हैं।

सवाल: हाई कोर्ट ने जमानत क्यों नहीं दी?
जवाब: अपराध की गंभीरता, साजिश में खास भूमिका और आतंकी घटना की भयानक प्रकृति के आधार पर। साथ ही UAPA के तहत कानूनी रोक है जब चार्जशीट प्रथम दृष्टया आरोपों को सच मानती हो।

सवाल: क्या ये टिप्पणियां ट्रायल को प्रभावित करेंगी?
जवाब: नहीं। हाई कोर्ट ने खुद कहा है कि टिप्पणियां सिर्फ जमानत के फैसले के लिए हैं; निचली अदालत अप्रभावित ट्रायल चलाएगी।

सवाल: केस की मौजूदा स्थिति क्या है?
जवाब: स्पेशल कोर्ट में ट्रायल दिन-प्रतिदिन चल रहा है, कई गवाहों से पूछताछ हो चुकी है और मामला अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है।

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