मौसम बदलते ही अजमेर संभाग में मौसमी बीमारियों ने फिर सिर उठा लिया है। सबसे चिंता वाली खबर किशनगढ़ से आई है, जहां डेंगू की चपेट में आई 16 साल की एक लड़की की इलाज के दौरान मौत हो गई। लड़की किशनगढ़ के देवडूंगरी इलाके की रहने वाली थी और अजमेर के जेएलएन अस्पताल में भर्ती थी। इस एक मौत ने पूरे संभाग के स्वास्थ्य तंत्र को अलर्ट पर डाल दिया है, क्योंकि जनवरी से अब तक संभाग के छह जिलों में डेंगू के 73 मरीज सामने आ चुके हैं और मलेरिया के भी 12 मामले दर्ज हुए हैं। यानी खतरा सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे संभाग में फैला हुआ है।
आम लोगों के लिए यह खबर सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। डेंगू का मच्छर घर के आसपास जमा साफ पानी में पनपता है और दिन के समय काटता है। इसलिए लापरवाही किसी के भी घर तक पहुंच सकती है। अच्छी बात यह है कि समय पर पहचान और सही देखभाल से ज्यादातर मरीज ठीक हो जाते हैं। इसीलिए लक्षण, इलाज और बचाव की सही जानकारी इस समय सबसे जरूरी है।
क्या हुआ किशनगढ़ की लड़की के साथ?
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. संपत सिंह जोधा के अनुसार, देवडूंगरी निवासी 16 वर्षीय लड़की को डेंगू के साथ बुखार के कुछ अन्य कारण भी थे। उसे इलाज के लिए जेएलएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। विभाग इस मामले को गंभीरता से ले रहा है, क्योंकि संभाग में डेंगू के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
डॉ. जोधा ने बताया कि इस बार टोंक जिले को छोड़कर संभाग के बाकी पांच जिलों में पिछले साल के मुकाबले बारिश कम हुई है। इसी वजह से मच्छरजनित बीमारियां पिछले साल से कुछ कम हैं, फिर भी 73 का आंकड़ा छोटा नहीं है। मौसम में बदलाव के साथ सर्दी, जुकाम, बुखार और खांसी के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है, जिससे असली डेंगू मामलों को समय पर पहचानना और भी जरूरी हो गया है।
संभाग के आंकड़े क्या कहते हैं?
आंकड़े साफ बताते हैं कि डेंगू इस समय संभाग की सबसे बड़ी मौसमी चुनौती है, जबकि बाकी मच्छरजनित बीमारियां फिलहाल नियंत्रण में दिख रही हैं।
| बीमारी | इस साल अब तक | पिछले साल |
|---|---|---|
| डेंगू | 73 मरीज, 1 मौत | 109 मरीज |
| मलेरिया | 12 मरीज | 20 मरीज |
| चिकनगुनिया | 0 मरीज | 4 मरीज |
| स्क्रब टायफस | 0 मरीज | 42 मरीज |
| स्वाइन फ्लू | 2 मरीज, दोनों स्वस्थ | — |
तालिका से दो बातें निकलती हैं। पहली, डेंगू के मामले पिछले साल से कम जरूर हैं, लेकिन मौत का मामला बताता है कि खतरा खत्म नहीं हुआ है। दूसरी, चिकनगुनिया और स्क्रब टायफस का इस बार एक भी मामला न मिलना विभाग की निगरानी के लिए राहत की बात है। स्वाइन फ्लू के दोनों मरीज भी स्वस्थ हो चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग क्या कर रहा है?
विभाग ने संभाग के सभी जिलों में शहरी और ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। टीमों के काम का तरीका कुछ इस तरह है:
- घरों की छतों पर रखी पानी की टंकियों को खाली करवाकर साफ पानी भरवाने के लिए ‘जीरो डे’ मनाया जा रहा है।
- घरों में पड़े पुराने टायर, कूलर, बर्तन और गड्ढों में भरा पानी खाली करवाया जा रहा है, ताकि मच्छरों के लार्वा पनप ही न सकें।
- लार्वा खत्म करने के लिए टेमिफोस का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- जहां डेंगू का मरीज मिलता है, उसके घर के आसपास के 50 घरों में पायरेथ्रम का स्प्रे किया जाता है।
विभाग का कहना है कि दवा और स्प्रे से ज्यादा असर लोगों की अपनी सावधानी का होगा, क्योंकि मच्छर घर के अंदर और आसपास ही पनपता है।
प्लेटलेट्स गिरने पर घबराएं नहीं: डॉक्टर की सलाह
डेंगू का नाम सुनते ही सबसे ज्यादा घबराहट प्लेटलेट्स को लेकर होती है। डॉ. जोधा ने इस पर साफ कहा है कि डेंगू में प्लेटलेट्स घटना आम बात है और प्लेटलेट्स 10 हजार तक आ जाने पर भी घबराने की जरूरत नहीं है। असली खतरा तब होता है जब डेंगू हेमरेजिक बुखार का रूप ले ले। इसके संकेत हैं — नाक या मुंह से खून आना, चोट लगने पर जरूरत से ज्यादा खून बहना और महिलाओं में माहवारी के दौरान असामान्य रूप से ज्यादा रक्तस्राव होना। ऐसे लक्षण दिखें तो मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।
आम डेंगू में तेज बुखार और प्लेटलेट्स में कमी देखी जाती है। इलाज में बुखार के लिए पेरासिटामोल दी जाती है, सिर पर गीले कपड़े की पट्टी रखी जाती है और मरीज को पर्याप्त तरल भोजन और पानी देना जरूरी होता है। बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाएं खुद से लेना खतरनाक हो सकता है, इसलिए बुखार दो दिन से ज्यादा रहे तो जांच जरूर करवाएं।
एक और जरूरी फर्क समझ लीजिए — मलेरिया का मच्छर रात में काटता है, जबकि डेंगू का मच्छर दिन में काटता है। इसलिए सिर्फ रात को मच्छरदानी लगा लेना डेंगू से बचाव के लिए काफी नहीं है।
आप अपने घर को कैसे सुरक्षित रखें?
- दिन में बाहर निकलते समय पूरी बांह के कपड़े पहनें, शॉर्ट्स पहनकर बाहर जाने से बचें।
- कूलर, गमले, टायर और छत पर रखे बर्तनों में पानी जमा न होने दें, हफ्ते में एक दिन इन्हें खाली करके सुखाएं।
- पानी की टंकी को ढककर रखें और नियमित सफाई करें।
- घर के आसपास गड्ढों में भरा पानी निकलवाएं।
- तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द या शरीर पर लाल चकत्ते दिखें तो तुरंत सरकारी अस्पताल में जांच करवाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: अजमेर संभाग में डेंगू के कुल कितने मामले सामने आए हैं?
जवाब: जनवरी से अब तक संभाग के छह जिलों में डेंगू के 73 मरीज सामने आए हैं। इसके अलावा मलेरिया के 12 मामले भी दर्ज हुए हैं।
सवाल: किशनगढ़ में जिस लड़की की मौत हुई, वह कहां भर्ती थी?
जवाब: 16 वर्षीय लड़की किशनगढ़ के देवडूंगरी की रहने वाली थी और अजमेर के जेएलएन अस्पताल में भर्ती थी। विभाग के अनुसार उसे डेंगू के साथ बुखार के अन्य कारण भी थे।
सवाल: डेंगू में प्लेटलेट्स कितनी गिर जाएं तो अस्पताल जाना चाहिए?
जवाब: डॉक्टरों के अनुसार प्लेटलेट्स 10 हजार तक आने पर भी घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन नाक-मुंह से खून आने या ज्यादा रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
सवाल: डेंगू से बचाव का सबसे आसान तरीका क्या है?
जवाब: घर और आसपास साफ पानी जमा न होने देना, दिन में पूरी बांह के कपड़े पहनना और बुखार आने पर समय पर जांच करवाना सबसे असरदार बचाव है।