राजस्थान में गाड़ी चलाने वालों के लिए अब नियम तोड़ना पहले जितना आसान नहीं रहा — और यह बात सिर्फ चेतावनी नहीं है, आंकड़े खुद इसकी गवाही दे रहे हैं। परिवहन विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 27 सितंबर तक ₹3,594.73 करोड़ का राजस्व अर्जित किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि से ₹436.45 करोड़ ज्यादा है, यानी 13.82 प्रतिशत की बढ़ोतरी। ये आंकड़े मंगलवार को शासन सचिवालय में हुई समीक्षा बैठक में सामने आए, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने की। बैठक में परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग के साथ रोडवेज की प्रगति की भी समीक्षा हुई। इस बढ़ोतरी के पीछे सिर्फ टैक्स या फीस नहीं है, बल्कि तकनीक से हो रही सख्त निगरानी भी बड़ी वजह है — विभाग की ई-डिटेक्शन प्रणाली ने बिना वैध दस्तावेजों वाले वाहनों के करीब 18 लाख चालान काटे हैं, जिनसे ₹1,188 करोड़ की राशि जुड़ी है।
राजस्व के आंकड़े क्या कहते हैं?
आमतौर पर सरकारी विभागों की कमाई में हर साल मामूली बढ़ोतरी होती है, लेकिन 13.82 प्रतिशत की छलांग सामान्य नहीं कही जा सकती। पिछले वर्ष की समान अवधि में विभाग ने करीब ₹3,158 करोड़ जुटाए थे, जबकि इस बार आंकड़ा ₹3,594.73 करोड़ पहुंच गया। अधिकारियों का मानना है कि ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार और ई-डिटेक्शन जैसी डिजिटल निगरानी ने राजस्व लीकेज पर काफी हद तक रोक लगाई है। पहले जिन वाहनों के दस्तावेज अधूरे होते थे, वे बिना रोक-टोक दौड़ते रहते थे, लेकिन अब जांच बिंदुओं पर लगी प्रणाली खुद उनकी पहचान कर चालान जारी कर देती है। इससे सरकार की कमाई बढ़ी है और वाहन मालिकों में दस्तावेज पूरे रखने की आदत भी बढ़ रही है, जो सड़क सुरक्षा के लिहाज से सकारात्मक बदलाव है।
| प्रमुख बिंदु | ताजा आंकड़ा |
|---|---|
| परिवहन विभाग का राजस्व (27 सितंबर तक) | ₹3,594.73 करोड़ |
| पिछले वर्ष से अधिक कमाई | ₹436.45 करोड़ |
| राजस्व वृद्धि दर | 13.82 प्रतिशत |
| ई-डिटेक्शन से जारी चालान | करीब 18 लाख |
| चालानों से जुड़ी राशि | ₹1,188 करोड़ |
| पूरी तरह ऑनलाइन सेवाएं | 57 |
| संचालित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन | 55 |
| ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक | 35 (23 कार्यशील) |
| रोडवेज में जुड़ने वाली नई बसें | करीब 900 |
| सम्पर्क पोर्टल पर शिकायत निपटान समय | 23 दिन से घटकर 13 दिन |
ई-डिटेक्शन: बिना कागज वाले वाहनों पर डिजिटल नजर
इस पूरी कहानी का सबसे चर्चा वाला हिस्सा ई-डिटेक्शन प्रणाली है। यह व्यवस्था वाहन के पंजीकरण, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र और फिटनेस जैसे दस्तावेजों की जांच स्वचालित तरीके से करती है। जिस वाहन का कोई दस्तावेज वैध नहीं पाया जाता, उसका ई-चालान अपने आप बन जाता है। अब तक करीब 18 लाख चालान जारी हो चुके हैं, जो बताता है कि सड़कों पर कितनी बड़ी संख्या में वाहन अधूरे कागजों के साथ चल रहे थे। वाहन मालिकों के लिए सबक साफ है — बीमा नवीनीकरण, पीयूसी या फिटनेस में देरी की तो चालान घर बैठे आ सकता है। चालान की स्थिति वाहन पोर्टल पर ऑनलाइन देखी जा सकती है, इसलिए समय रहते जांच करना ही समझदारी है।
घर बैठे 57 सेवाएं, टेस्टिंग में भी तकनीक का बोलबाला
परिवहन विभाग की 57 सेवाएं अब वाहन और सारथी पोर्टल के जरिए पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध हैं। लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, परमिट और दस्तावेज संशोधन जैसी प्रक्रियाओं के लिए अब बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। फिटनेस जांच में भी प्रदेश तेजी से आगे बढ़ा है — राज्य में 55 ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन संचालित हैं और इस मामले में राजस्थान गुजरात के बाद देश में दूसरे स्थान पर है। प्रदेश के सभी 35 ड्राइविंग टेस्ट ट्रैकों को स्वचालित किया जा रहा है, जिनमें 23 कार्यशील हो चुके हैं। ऑटोमेटेड ट्रैक पर टेस्ट सेंसर और कैमरों की निगरानी में होता है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश घटती है। यानी अब लाइसेंस योग्यता पर मिलेगा, पहचान पर नहीं — यह बदलाव सड़क हादसे घटाने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
रोडवेज यात्रियों के लिए खुशखबरी: 900 नई बसें
समीक्षा बैठक में आम यात्रियों से जुड़ी सबसे बड़ी घोषणा रोडवेज बेड़े को लेकर हुई। बेड़े में करीब 900 नई बसें शामिल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जिनमें एसी, ब्लू लाइन और इलेक्ट्रिक बसें भी होंगी। लंबे समय से यात्री पुरानी, खस्ताहाल बसों की शिकायत करते आए हैं, खासकर लंबी दूरी के रूटों पर। नई बसों से सफर आरामदायक होगा और रूटों पर फेरे भी बढ़ सकेंगे, जबकि इलेक्ट्रिक बसें शहरों में प्रदूषण घटाने में मदद करेंगी। मुख्य सचिव ने लंबित परियोजनाओं को समयबद्ध पूरा करने और बजट घोषणाओं की शत-प्रतिशत पालना के निर्देश भी दिए, ताकि घोषणाएं कागजों तक सीमित न रहें।
स्क्रैपिंग पर टैक्स छूट और शिकायतों का तेज निपटारा
बैठक में राजस्थान व्हीकल स्क्रैपिंग नीति का भी जिक्र हुआ। इसके तहत पुराना वाहन स्क्रैप कराने वालों को नए वाहन की खरीद पर 16 से 26 प्रतिशत तक टैक्स छूट मिलेगी। यह नीति पुराने, ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए प्रोत्साहन का काम करेगी। इसके अलावा सम्पर्क पोर्टल पर परिवहन से जुड़ी शिकायतों के निपटान का औसत समय 23 दिन से घटकर 13 दिन रह गया है, जो प्रशासनिक सुधार का संकेत है। कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि परिवहन विभाग तकनीक के सहारे एक साथ तीन मोर्चों पर काम कर रहा है — राजस्व बढ़ाना, नियमों की पालना कराना और आम आदमी के काम आसान करना। आने वाले महीनों में नई बसों का सड़कों पर उतरना इस बदलाव की असली कसौटी होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: ई-डिटेक्शन चालान क्या होता है और यह कैसे कटता है?
जवाब: ई-डिटेक्शन प्रणाली पंजीकरण नंबर के आधार पर बीमा, फिटनेस, पीयूसी जैसे दस्तावेजों की वैधता अपने आप जांचती है। कोई दस्तावेज समाप्त पाया जाने पर चालान स्वतः जारी हो जाता है — मौके पर रोका जाना जरूरी नहीं है।
सवाल: परिवहन विभाग की कौन सी सेवाएं ऑनलाइन मिलती हैं?
जवाब: विभाग की कुल 57 सेवाएं वाहन और सारथी पोर्टल पर पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध हैं। इनमें लाइसेंस, पंजीकरण और परमिट से जुड़ी प्रमुख सेवाएं शामिल हैं, जिनके लिए अब कार्यालय जाना जरूरी नहीं है।
सवाल: रोडवेज की 900 नई बसें कब तक सड़कों पर आएंगी?
जवाब: समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि करीब 900 नई बसें बेड़े में शामिल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इनमें एसी, ब्लू लाइन और इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी, हालांकि चरणवार शामिल होने की विस्तृत समय-सारणी अलग से जारी होगी।
सवाल: पुराना वाहन स्क्रैप कराने पर क्या फायदा मिलेगा?
जवाब: राजस्थान व्हीकल स्क्रैपिंग नीति के तहत पुराना वाहन स्क्रैप कराने पर नए वाहन की खरीद में 16 से 26 प्रतिशत तक टैक्स छूट का प्रावधान है। छूट की सटीक दर वाहन की श्रेणी के अनुसार तय होगी।