राजस्थान कांग्रेस की अंदरूनी कलह अब बंद कमरों से निकलकर सोशल मीडिया पर खुलेआम दिखने लगी है। नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने बुधवार को एक के बाद एक दो पोस्ट करके प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और भरतपुर-डीग के जिला संगठन पर सीधा हमला बोल दिया। पहली पोस्ट में उन्होंने दोनों जिलों में हार के लिए दोनों जिलाध्यक्षों को जिम्मेदार ठहराया, तो दूसरी पोस्ट में RAS भर्ती, OBC प्रमाण पत्र और REET तक के पुराने विवाद उठाते हुए जांच की मांग कर दी। उन्होंने डोटासरा के इस्तीफे या आलाकमान से कार्रवाई की मांग भी रख दी।
पहली पोस्ट: ‘भरतपुर-डीग कांग्रेस का बंटाधार — जिम्मेदार कौन?’
विश्वेंद्र सिंह ने सुबह ‘भरतपुर-डीग कांग्रेस का बंटाधार — जिम्मेदार कौन?’ शीर्षक से पोस्ट किया। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि भरतपुर जिलाध्यक्ष दिनेश सूपा और डीग जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी ने पार्टी के पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर अपने चहेतों को टिकट बांटे। उनके मुताबिक निकाय चुनाव में खराब प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह यही रही और जनता ने इसका जवाब दे दिया। दोनों जिलों में कांग्रेस का एक भी बोर्ड नहीं बन पाया।
उन्होंने यह भी कहा कि भरतपुर मुख्यमंत्री का गृह जिला है, ऐसे में यहां कांग्रेस को मजबूत होना चाहिए था, लेकिन संगठन की कथित गलत कार्यप्रणाली ने पार्टी को कमजोर कर दिया। डोटासरा पर निशाना साधते हुए उन्होंने लिखा कि प्रदेश अध्यक्ष इस मामले पर ‘मूक-बधिर’ बने बैठे हैं।
आंकड़े क्या कहते हैं: 415 वार्डों में कांग्रेस को सिर्फ 19
चुनाव नतीजों के आंकड़े विश्वेंद्र सिंह के गुस्से की पृष्ठभूमि साफ करते हैं। भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों में कांग्रेस को सिर्फ 7 सीटें मिलीं, जबकि निर्दलीय प्रत्याशियों ने 36 और भाजपा ने 20 वार्ड जीते। वहीं भरतपुर और डीग के कुल 415 शहरी वार्डों में कांग्रेस के हिस्से सिर्फ 19 वार्ड आए।
| क्षेत्र | कुल वार्ड | कांग्रेस | भाजपा | निर्दलीय |
|---|---|---|---|---|
| भरतपुर नगर निगम | 65 | 7 | 20 | 36 |
| भरतपुर + डीग (कुल शहरी वार्ड) | 415 | 19 | — | — |
ये आंकड़े बताते हैं कि हार किसी एक वार्ड तक सीमित नहीं रही — पूरे क्षेत्र में संगठन जमीन पर कमजोर दिखा।
दूसरी पोस्ट: RAS, OBC प्रमाण पत्र और REET पर गंभीर आरोप
दूसरी पोस्ट में विश्वेंद्र सिंह ने 2016 और 2018 की RAS भर्ती का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि डोटासरा की पुत्रवधू प्रतिभा पूनिया तथा उनके भाई-बहन गौरव पूनिया और प्रज्ञा पूनिया को संबंधित RAS इंटरव्यू में समान 80-80 अंक मिले थे। बता दें कि प्रतिभा को RAS-2016 और गौरव व प्रज्ञा को RAS-2018 के इंटरव्यू में 80 अंक मिलने पर साल 2021 में भी विवाद उठा था। उस समय डोटासरा ने किसी भी गड़बड़ी से इनकार करते हुए चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बताया था।
पूर्व मंत्री ने डोटासरा के पुत्र अविनाश सिंह के RAS-2016 चयन में OBC नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र के इस्तेमाल और डोटासरा के समधी रमेश चंद पूनिया के परिवार को OBC लाभ मिलने के मामले में भी जांच की मांग की। साथ ही उन्होंने डोटासरा के शिक्षा मंत्री रहते REET में कथित धांधली का मुद्दा उठाया और राज्य सरकार से जांच कर कार्रवाई की मांग रखी। ध्यान रहे, ये सभी आरोप विश्वेंद्र सिंह की ओर से लगाए गए हैं और इन पर डोटासरा की नई प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
‘स्वागत’ वाली चेतावनी और भरतपुर आने की चुनौती
विवाद यहीं नहीं रुका। विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा के बयाना में दिए गए एक कथित बयान — ‘भरतपुर में तो रास्ता पूछने के भी पैसे ले लेते हैं’ — पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे भरतपुर की जनता का अपमान बताया और कहा कि अगली बार डोटासरा भरतपुर आएंगे तो उन्हें रास्ता भी बताया जाएगा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. चंद्रभान से बेहतर स्वागत-सत्कार भी किया जाएगा। मीडिया से बातचीत में उन्होंने डोटासरा को भरतपुर आने की चुनौती तक दे दी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस छोड़कर कहीं नहीं जा रहे हैं — वे पार्टी में रहकर ही आवाज उठाते रहेंगे।
पार्टी की ओर से क्या जवाब आया?
आरोपों पर प्रदेश कांग्रेस वॉर रूम के चेयरमैन जसवंत गुर्जर ने कहा कि पूर्व मंत्री के नाम से आ रहे बयान पार्टी परंपरा के अनुरूप नहीं हैं और जो लिखा गया है वह भाजपा के फैलाए झूठ के टूलकिट का हिस्सा लगता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जिला प्रभारी से निकाय चुनाव को लेकर रिपोर्ट मांगी है। वहीं भरतपुर जिलाध्यक्ष दिनेश सूपा ने कहा कि मतभेद मिल-बैठकर सुलझाए जाने चाहिए, अपनी ही पार्टी के मुखिया के परिजनों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। सूपा के मुताबिक भरतपुर नगर निगम चुनाव उनसे सलाह-मशविरा करके ही लड़ा गया था। डीग जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी ने कहा कि पिछले महीनों में पार्टी के करीब 40 कार्यक्रम हुए, सभी की सूचना विश्वेंद्र सिंह को दी गई, लेकिन वे शामिल नहीं हुए।
आगे क्या: पंचायत चुनाव से पहले बढ़ेगी खींचतान?
यह घमासान ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश में पंचायतीराज चुनाव होने हैं। निकाय चुनाव की हार के बाद अगर खींचतान और गहरी होती है तो इसका असर पंचायत चुनाव की तैयारियों पर भी पड़ सकता है। अब सबकी नजर इस पर है कि क्या डोटासरा जवाब देते हैं और क्या आलाकमान दखल देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल 1: विश्वेंद्र सिंह ने किस-किस पर आरोप लगाए हैं?
जवाब: उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, भरतपुर जिलाध्यक्ष दिनेश सूपा और डीग जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी पर आरोप लगाए हैं — टिकट बंटवारे में चहेतों को तरजीह देने से लेकर RAS चयन, OBC प्रमाण पत्र और REET तक, जिनकी उन्होंने जांच की मांग की है।
सवाल 2: भरतपुर-डीग में कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा रहा?
जवाब: भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों में कांग्रेस को सिर्फ 7 सीटें मिलीं, जबकि निर्दलीयों ने 36 और भाजपा ने 20 वार्ड जीते। दोनों जिलों के कुल 415 शहरी वार्डों में कांग्रेस को सिर्फ 19 वार्ड मिले और एक भी बोर्ड नहीं बना।
सवाल 3: क्या विश्वेंद्र सिंह कांग्रेस छोड़ रहे हैं?
जवाब: नहीं। उन्होंने साफ किया है कि वे कांग्रेस में ही रहेंगे और भाजपा में जाने की बात सिर्फ गलतफहमी है। वे हार पर जिम्मेदारी तय करने के लिए पार्टी के भीतर ही आवाज उठाते रहेंगे।
सवाल 4: डोटासरा या पार्टी की ओर से क्या प्रतिक्रिया आई है?
जवाब: डोटासरा की ओर से ताजा आरोपों पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वॉर रूम चेयरमैन जसवंत गुर्जर ने बयानों को पार्टी परंपरा के खिलाफ बताया है, जबकि दोनों जिलाध्यक्षों ने आरोप खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा है।