फसल बीमा योजना में राजस्थान देश में चौथे स्थान पर: किसानों को मिला 35,600 करोड़ रुपये का क्लेम, प्रीमियम से साढ़े चार गुना भुगतान

जयपुर। राजस्थान के किसानों के लिए एक अच्छी और भरोसा बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन में राजस्थान ने पूरे देश में चौथा स्थान हासिल किया है। केंद्र सरकार के हालिया मूल्यांकन में राज्य को कुल 43.5 अंक मिले हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि योजना शुरू होने के बाद से अब तक प्रदेश के किसानों को 35,600 करोड़ रुपये के क्लेम का भुगतान हो चुका है, जबकि किसानों ने प्रीमियम के रूप में करीब 7,800 करोड़ रुपये ही जमा किए थे। यानी किसानों को उनके दिए गए प्रीमियम से करीब साढ़े चार गुना रकम क्लेम के रूप में वापस मिली है।

खेती हमेशा मौसम के भरोसे रहती है। कभी सूखा, कभी बेमौसम बारिश और कभी कीट-रोग पूरी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। ऐसे समय में फसल बीमा किसान के लिए दोबारा खड़ा होने का सहारा बनता है।

रैंकिंग में कौन आगे, कौन पीछे?

केंद्र सरकार हर साल राज्यों को फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन पर कई मानकों पर परखती है। इनमें फसल कटाई प्रयोगों की समयबद्धता और डिजिटल रिकॉर्डिंग, दावों के निपटारे में लगने वाला समय, किसानों की शिकायतों का समाधान और तकनीक अपनाने की दर जैसे बिंदु शामिल रहते हैं।

ताजा मूल्यांकन में असम 55.5 अंकों के साथ पहले और उत्तर प्रदेश 47.5 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। राजस्थान 43.5 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहा, उसके बाद उत्तराखंड, हरियाणा, पुद्दुचेरी और महाराष्ट्र रहे।

दस साल के आंकड़े: 25.47 करोड़ पॉलिसी, 35,600 करोड़ क्लेम

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत साल 2016 में हुई थी। इसका मकसद साफ था — प्राकृतिक आपदा, कीट-रोग या मौसम की मार से फसल खराब होने पर किसान को कम प्रीमियम पर बीमा सुरक्षा मिले, ताकि एक खराब सीजन उसे कर्ज के जाल में न धकेल दे।

राज्य कृषि विभाग के अनुसार खरीफ 2016 से खरीफ 2026 तक राजस्थान में कुल 25.47 करोड़ बीमा पॉलिसियां जारी हुई हैं। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार ने करीब 19-19 हजार करोड़ रुपये का अंशदान भी दिया है। किसान का प्रीमियम हिस्सा बहुत छोटा रहता है और बड़ा जोखिम बीमा व्यवस्था उठाती है।

विवरण आंकड़ा
देश में राजस्थान का स्थान चौथा
मूल्यांकन में प्राप्त अंक 43.5 अंक
पहले स्थान पर असम 55.5 अंक
दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश 47.5 अंक
कुल जारी बीमा पॉलिसियां (2016-2026) 25.47 करोड़
किसानों द्वारा जमा प्रीमियम करीब 7,800 करोड़ रुपये
किसानों को मिला क्लेम भुगतान 35,600 करोड़ रुपये
केंद्र व राज्य सरकार का अंशदान करीब 19-19 हजार करोड़ रुपये
डिजिटल भूमि अभिलेख से जुड़े गांव 47,028 गांव (करीब 89 प्रतिशत)

साधारण भाषा में किसान ने एक रुपया प्रीमियम दिया और मुश्किल समय में उसे औसतन साढ़े चार रुपये से ज्यादा वापस मिले।

तकनीक ने बदली तस्वीर: CCE और Yestech पर पूरे अंक

इस रैंकिंग में राजस्थान को तकनीकी मोर्चे पर खास मजबूती मिली है। राज्य में फसल कटाई प्रयोग यानी CCE के 90 प्रतिशत से अधिक रिकॉर्ड अब ऑनलाइन दर्ज किए जा रहे हैं। साथ ही 90 प्रतिशत से ज्यादा जिलों में Yestech तकनीक अपनाई जा चुकी है। इन दोनों मानकों पर राज्य को पूरे 10-10 अंक मिले हैं।

इसके अलावा प्रदेश के 47,028 गांव, यानी करीब 89 प्रतिशत गांव, डिजिटल रूप से भूमि अभिलेखों से जुड़ चुके हैं। इससे दावों के निपटारे का समय घटा है और पारदर्शिता बढ़ी है।

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा है कि डिजिटल तकनीक के अधिकाधिक उपयोग से योजना की निगरानी अधिक प्रभावी बन रही है। वहीं कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि योजना में गड़बड़ी करने वाले तत्वों के खिलाफ अब तक 10 से अधिक प्राथमिकी यानी एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। यह संदेश साफ है — व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के साथ-साथ गड़बड़ी करने वालों पर सख्ती भी जारी रहेगी।

किसान के लिए इस खबर का असली मतलब क्या है?

रैंकिंग और अंकों से आगे बढ़कर किसान के लिए असली सवाल यह है कि जरूरत पड़ने पर उसे क्लेम मिलेगा या नहीं और कितनी आसानी से मिलेगा। ताजा आंकड़े बताते हैं कि भुगतान का ट्रैक रिकॉर्ड मजबूत है, लेकिन किसान को अपनी तरफ से कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

फसल खराब होने पर किसान को तय समय सीमा में बीमा कंपनी, कृषि विभाग या बैंक को सूचना देनी चाहिए। देरी से सूचना देने पर क्लेम अटक सकता है। पॉलिसी, खसरा विवरण और बैंक खाते की जानकारी सही रखना भी जरूरी है, क्योंकि डिजिटल रिकॉर्ड में छोटी गलती भुगतान रोक सकती है।

जिन किसानों ने अभी तक बीमा नहीं कराया है, उनके लिए यह खबर एक संकेत है। मौसम का मिजाज हर साल बिगड़ रहा है, ऐसे में मामूली प्रीमियम पर बीमा कराना समझदारी है। किसान नजदीकी बैंक, सहकारी समिति, ई-मित्र केंद्र या कृषि विभाग से जानकारी ले सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: फसल बीमा योजना में राजस्थान को देश में कौन सा स्थान मिला है?

उत्तर: केंद्र सरकार के हालिया मूल्यांकन में राजस्थान को कुल 43.5 अंकों के साथ देश में चौथा स्थान मिला है। असम पहले और उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा।

प्रश्न 2: अब तक राजस्थान के किसानों को कितने क्लेम का भुगतान हुआ है?

उत्तर: खरीफ 2016 से खरीफ 2026 तक किसानों को कुल 35,600 करोड़ रुपये के क्लेम का भुगतान हुआ है, जबकि किसानों ने करीब 7,800 करोड़ रुपये ही प्रीमियम जमा किया था।

प्रश्न 3: डिजिटल व्यवस्था से किसान को क्या फायदा हुआ है?

उत्तर: प्रदेश के 47,028 गांव डिजिटल भूमि अभिलेख से जुड़ चुके हैं और 90 प्रतिशत से अधिक फसल कटाई प्रयोग ऑनलाइन दर्ज हो रहे हैं। इससे दावों की जांच तेज और पारदर्शी हुई है।

प्रश्न 4: फसल खराब होने पर किसान को क्या करना चाहिए?

उत्तर: किसान को तय समय सीमा में बीमा कंपनी, बैंक या कृषि विभाग को नुकसान की सूचना देनी चाहिए, अपनी पॉलिसी और खसरा विवरण सही रखना चाहिए और बैंक खाते की जानकारी अद्यतन रखनी चाहिए, ताकि क्लेम बिना रुकावट मिल सके।


नोट: यह जानकारी 30 सितंबर 2026 को जयपुर से जारी फसल बीमा योजना के मूल्यांकन आंकड़ों पर आधारित है। योजना से जुड़ी अंतिम और आधिकारिक जानकारी के लिए कृषि विभाग या संबंधित बीमा कंपनी से संपर्क करें।

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