एशियन पैरा गेम्स 2026: सीकर की मोना अग्रवाल ने जीता स्वर्ण, 10 मीटर एयर राइफल में अवनी लेखरा को हराया

जापान के नागोया में शुरू हुए एशियन पैरा गेम्स 2026 के पहले ही दिन भारत का खाता सोने और चांदी — दोनों पदकों से खुल गया। मोना अग्रवाल गोल्ड मेडल की खबर पूरे देश के लिए गर्व का पल है: महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 स्पर्धा में राजस्थान के सीकर की इस बेटी ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि भारत की स्टार निशानेबाज अवनी लेखरा ने रजत पदक अपने नाम किया। 9 महीने की उम्र में पोलियो से जूझने वाली मोना ने पहले सिटिंग वॉलीबॉल में राजस्थान को चैंपियन बनाया और फिर राइफल उठाकर एशिया की सर्वश्रेष्ठ पैरा शूटर बनने का सफर तय किया।

0.4 अंक का फैसला: आखिरी शॉट तक चला रोमांचक फाइनल

फाइनल इतना करीबी था कि आखिरी गोली चलने तक किसी को नहीं पता था कि सोना किसके गले में जाएगा। मोना अग्रवाल ने 250.0 अंकों के साथ फिनिश किया, जबकि अवनी लेखरा 249.6 अंक लेकर सिर्फ 0.4 अंक पीछे रह गईं। दक्षिण कोरिया की ली युनरी 227.9 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं और उन्हें कांस्य मिला।

आखिरी शॉट से ठीक पहले मोना ने 239.2 अंकों के साथ अवनी पर महज 0.1 अंक की बढ़त बनाई हुई थी — यानी फैसला पूरी तरह अंतिम गोली पर टिका था, और दबाव के उन लम्हों में सीकर की इस बेटी का हाथ नहीं कांपा। SH1 श्रेणी में निचले अंगों में विकलांगता वाले निशानेबाज हिस्सा लेते हैं।

स्थान खिलाड़ी देश स्कोर
स्वर्ण मोना अग्रवाल भारत 250.0
रजत अवनी लेखरा भारत 249.6
कांस्य ली युनरी दक्षिण कोरिया 227.9

शूटिंग के अलावा पहले दिन जूडो में भी अच्छी खबर आई — कोकिला ने फाइनल में जगह बनाकर अपना पदक पक्का कर लिया है।

कौन हैं मोना अग्रवाल: सीकर से नागोया तक

मोना अग्रवाल का जन्म 8 नवंबर 1987 को सीकर में हुआ था। 9 महीने की उम्र में पोलियो ने उनके दोनों पैरों को प्रभावित कर दिया, लेकिन शारीरिक चुनौती उनकी राह नहीं रोक सकी। उन्होंने आर्ट्स में स्नातक की डिग्री हासिल की और मानव संसाधन व मार्केटिंग के क्षेत्र में नौकरी भी की।

खेलों में उनकी शुरुआत शूटिंग से नहीं हुई थी। मोना ने पैरा एथलेटिक्स में डिस्कस थ्रो, शॉट पुट और जैवलिन थ्रो में हिस्सा लिया और पैरा पावरलिफ्टिंग में भी दम दिखाया। लेकिन उनका सबसे पसंदीदा खेल सिटिंग वॉलीबॉल रहा — वह राजस्थान महिला टीम की कप्तानी कर चुकी हैं और 2019 में पहली नेशनल सिटिंग वॉलीबॉल चैंपियनशिप में उन्होंने अपनी टीम को स्वर्ण दिलाया था।

दिसंबर 2021 में राइफल उठाई, पांच साल में एशिया की चोटी पर

दिसंबर 2021 में मोना अग्रवाल ने प्रतिस्पर्धी निशानेबाजी शुरू की — और महज पांच साल में वह एशिया की चोटी पर पहुंच गईं। 2022 में नेशनल चैंपियनशिप में रजत के बाद उन्होंने क्रोएशिया के ओसिजेक में 2023 वर्ल्ड कप के मिक्स्ड टीम इवेंट में कांस्य जीता। उसी साल दक्षिण कोरिया के चांगवोन में हुए वर्ल्ड कप में उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 में स्वर्ण जीता — यानी एशियाई धरती पर वह पहले ही चैंपियन बन चुकी थीं। 2024 के पेरिस पैरालंपिक में उन्होंने इसी स्पर्धा में कांस्य जीता था, और अब नागोया में स्वर्ण — यह उनके करियर का सबसे बड़ा मुकाम है।

वर्ष उपलब्धि
2019 नेशनल सिटिंग वॉलीबॉल चैंपियनशिप में राजस्थान की कप्तानी, स्वर्ण
दिसंबर 2021 प्रतिस्पर्धी राइफल शूटिंग की शुरुआत
2022 नेशनल चैंपियनशिप में रजत
2023 चांगवोन वर्ल्ड कप में स्वर्ण; ओसिजेक वर्ल्ड कप मिक्स्ड टीम में कांस्य
2024 पेरिस पैरालंपिक में कांस्य
2026 एशियन पैरा गेम्स (नागोया) में स्वर्ण

अवनी लेखरा से टक्कर: राजस्थान की दो बेटियों का मुकाबला

इस फाइनल की खास बात यह थी कि शीर्ष दो स्थानों पर दोनों भारतीय थीं। अवनी लेखरा दो बार की पैरालंपिक स्वर्ण विजेता हैं और भारतीय पैरा शूटिंग का सबसे बड़ा चेहरा हैं। 0.4 अंक का अंतर बताता है कि मुकाबला कितना कड़ा था। अवनी खुद राजस्थान से हैं, इसलिए यह फाइनल एक तरह से प्रदेश की दो बेटियों के बीच का मुकाबला भी था। ऐसी प्रतिस्पर्धा भारतीय पैरा शूटिंग के लिए शुभ संकेत है — जब देश के दो सर्वश्रेष्ठ निशानेबाज एक-दूसरे को चुनौती देते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोनों का स्तर और ऊपर उठता है।

राजस्थान के लिए क्यों खास है यह स्वर्ण

मोना अग्रवाल का गोल्ड मेडल राजस्थान की पैरा खेल परंपरा की नई कड़ी है। हाल के हफ्तों में ही प्रदेश के खिलाड़ियों ने एशियाई खेलों में पदक जीते हैं — उदयपुर की माहेश्वरी चौहान ने शूटिंग में कांस्य जीता था, जिसका शहर में भव्य स्वागत हुआ, और यशवीर सिंह ने जैवलिन थ्रो में रजत अपने नाम किया था। अब मोना का स्वर्ण इस सूची का सबसे चमकदार नाम बन गया है।

यह सफलता प्रदेश के उन हजारों दिव्यांग बच्चों के लिए प्रेरणा है, जो खेलों में करियर का सपना देखते हैं। मोना की कहानी सिखाती है कि शुरुआत किसी भी खेल से हो सकती है — उन्होंने 34 साल की उम्र के बाद शूटिंग अपनाई और दुनिया की चोटी पर पहुंचीं। उम्र और शारीरिक चुनौती, दोनों को उन्होंने सिर्फ आंकड़ों में बदल दिया।

नागोया खेलों में भारत की शुरुआत शानदार रही है — शूटिंग में दो पदक पक्के हो चुके हैं और जूडो में कोकिला से एक और पदक की उम्मीद है। सीकर की इस बेटी ने साबित कर दिया कि हौसला सबसे बड़ा हथियार होता है — चाहे वह राइफल हो या जिंदगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मोना अग्रवाल ने कौन सा पदक जीता है?

एशियन पैरा गेम्स 2026 (नागोया) में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 स्पर्धा में 250.0 अंकों के साथ स्वर्ण पदक।

मोना अग्रवाल कहां की रहने वाली हैं?

उनका जन्म 8 नवंबर 1987 को राजस्थान के सीकर में हुआ था। 9 महीने की उम्र में पोलियो से उनके दोनों पैर प्रभावित हुए थे।

SH1 श्रेणी का क्या मतलब है?

पैरा शूटिंग की वह श्रेणी, जिसमें निचले अंगों में विकलांगता वाले निशानेबाज हिस्सा लेते हैं।

फाइनल में अवनी लेखरा का प्रदर्शन कैसा रहा?

दो बार की पैरालंपिक स्वर्ण विजेता अवनी लेखरा ने 249.6 अंकों के साथ रजत जीता — वह मोना से सिर्फ 0.4 अंक पीछे रहीं।

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