मदन राठौड़ बिजली पानी निवेश — यही तीन शब्द आज राजस्थान की राजनीति की सबसे बड़ी बहस बन गए हैं। ‘पंचायत आजतक राजस्थान’ के सत्र ‘तीन साल… बदला हाल’ में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भजनलाल शर्मा सरकार के करीब तीन साल के कार्यकाल का हिसाब-किताब रखा। उनका कहना है कि राजस्थान बिजली में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, किसानों को दिन में बिजली मिल रही है, पानी का हल ईआरसीपी से निकलेगा और ‘राइजिंग राजस्थान’ के निवेश को जमीन पर उतारा जाएगा।
मदन राठौड़ बिजली पानी निवेश: ईआरसीपी से 16 जिलों को राहत का वादा
राठौड़ के इंटरव्यू का सबसे बड़ा लोक-हित वाला हिस्सा पानी पर था। उन्होंने माना कि राजस्थान में पानी की कमी लंबे समय से बड़ी चुनौती रही है। उनका दावा है कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) लंबे समय से अटकी हुई थी, लेकिन भजनलाल शर्मा सरकार ने इस दिशा में समझौता करके आगे बढ़ने का प्रयास किया है। उनके मुताबिक, इस परियोजना से प्रदेश के 16 जिलों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा राठौड़ ने यमुना जल समझौते का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, इस समझौते से शेखावाटी क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी। पंजाब से आने वाले पानी की आपूर्ति में होने वाले नुकसान को रोकने और हरियाणा से पाइपलाइन के जरिए पानी लाने की योजनाओं पर भी उन्होंने बात की। राठौड़ ने कहा कि पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को सिंचाई में मदद मिलेगी और सूखे इलाकों में खेती को बढ़ावा मिलेगा।
कुल मिलाकर, पानी के मुद्दे पर राठौड़ के दावे पिछली सरकारों के मुकाबले तेज फैसलों पर टिके हैं।
मदन राठौड़ बिजली पानी निवेश: बिजली में आत्मनिर्भरता का दावा
राठौड़ का सबसे तीखा दावा बिजली पर था — सरकार बनने के समय प्रदेश में बिजली कटौती की समस्या थी और उत्पादन से जुड़े कुछ संयंत्रों का संचालन प्रभावित था। उनके मुताबिक, सरकार ने शुरुआत में बिजली खरीदने के साथ-साथ राज्य में उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दिया। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा — तीनों के क्षेत्र में प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान बिजली के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रहा है।
सबसे ध्यान देने वाली बात यह रही कि राठौड़ ने दावा किया कि किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराई जा रही है और कटौती की समस्या में पहले से सुधार हुआ है। राजस्थान जैसे कृषि-प्रधान राज्य में किसानों को दिन की बिजली एक पुरानी मांग रही है, क्योंकि रात की सप्लाई में खेतों में काम करना मुश्किल और जोखिमभरा होता है। अगर यह दावा जमीनी स्तर पर सच है, तो यह लाखों किसान परिवारों के लिए सीधी राहत है।
राजस्थान पहले से ही सौर ऊर्जा के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में है, और सौर बूम के साथ ग्रिड की चुनौतियों पर हमारी पिछली रिपोर्ट में हमने बताया था कि उत्पादन बढ़ने के साथ ग्रिड प्रबंधन नई परीक्षा बन गया है। ऐसे में आत्मनिर्भरता के दावे के साथ-साथ वितरण और भंडारण की व्यवस्था भी उतनी ही अहम रहेगी।
निवेश की जमीन: ‘राइजिंग राजस्थान’ से रोजगार तक
निवेश के सवाल पर मदन राठौड़ ने ‘राइजिंग राजस्थान’ पहल का उल्लेख किया। उनका कहना था कि निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए सिर्फ समझौते करना काफी नहीं है, परियोजनाओं को धरातल पर उतारना भी जरूरी है। राठौड़ के मुताबिक, सरकार निवेशकों की जरूरत के हिसाब से जमीन, बिजली, पानी और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में मदद कर रही है। इसके लिए अधिकारियों को परियोजनाओं से जोड़ा गया है और विभागों के बीच समन्वय बनाया जा रहा है।
राठौड़ ने कहा कि निवेशकों को स्थिर सरकार और समय पर निर्णय लेने वाली व्यवस्था चाहिए, और औद्योगिक परियोजनाओं के आगे बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। औद्योगिक भूखण्डों के आवंटन जैसे कदम भी इसी दिशा में हैं — RIICO के 4,700 भूखण्डों के सीधे आवंटन की हमारी रिपोर्ट में इसका विस्तार से जिक्र है।
कांग्रेस पर निशाना, संगठन पर भरोसा: इंटरव्यू के राजनीतिक दावे
बिजली-पानी और निवेश के अलावा राठौड़ ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच राजनीतिक खींचतान का असर शासन पर पड़ा था।
भाजपा में गुटबाजी के सवाल पर राठौड़ ने कहा कि पार्टी में सामूहिक निर्णय लेने की परंपरा है और कोर कमेटी जैसे मंचों पर विचार-विमर्श के बाद ही फैसले लिए जाते हैं। स्थानीय निकाय चुनावों पर उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने नगर निगमों में करीब 90 प्रतिशत और नगर परिषदों में लगभग 66 प्रतिशत सफलता हासिल की — हालांकि उन्होंने यह भी माना कि टिकट देने में कहीं-कहीं गलतियां हुईं।
राठौड़ के बड़े दावे एक नज़र में
| मुद्दा | मदन राठौड़ का दावा | पृष्ठभूमि |
|---|---|---|
| बिजली | कटौती घटी, उत्पादन बढ़ा; आत्मनिर्भरता की ओर कदम | सौर/पवन/परमाणु पर जोर, किसानों को दिन में बिजली |
| पानी | ईआरसीपी से 16 जिलों को लाभ; यमुना समझौता शेखावाटी के लिए | पानी की कमी राजस्थान की पुरानी चुनौती |
| निवेश | ‘राइजिंग राजस्थान’ को जमीन पर उतारने की कोशिश | जमीन, बिजली, पानी और वित्त की मदद का वादा |
| शासन | पिछली सरकार में खींचतान, अब स्थिरता और तालमेल | गहलोत-पायलट विवाद का हवाला |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
मदन राठौड़ ने बिजली पर क्या दावा किया? राठौड़ ने कहा कि सरकार बनते समय कटौती थी, लेकिन अब सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा से उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। राजस्थान आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है और किसानों को दिन में बिजली मिल रही है।
ईआरसीपी को लेकर राठौड़ ने क्या कहा? उन्होंने कहा कि ईआरसीपी लंबे समय से अटकी थी, लेकिन मौजूदा सरकार ने समझौता करके आगे बढ़ने का प्रयास किया है। उनके मुताबिक, इससे 16 जिलों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
यमुना जल समझौते से किसे फायदा होगा? राठौड़ के अनुसार, इससे शेखावाटी में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी। पंजाब से आने वाले पानी के नुकसान को रोकने और हरियाणा से पाइपलाइन के जरिए पानी लाने की योजनाओं पर भी काम हो रहा है।
‘राइजिंग राजस्थान’ निवेश पहल की क्या स्थिति है? राठौड़ ने बताया कि सरकार निवेशकों को जमीन, बिजली, पानी और वित्तीय सहायता देने में मदद कर रही है, ताकि समझौते सिर्फ कागज पर न रहें और जमीन पर उतर सकें।
निष्कर्ष
मदन राठौड़ का यह इंटरव्यू भजनलाल शर्मा सरकार के करीब तीन साल के कार्यकाल का एक राजनीतिक लेखा-जोखा है। बिजली में आत्मनिर्भरता, ईआरसीपी से पानी का वादा और निवेश को जमीन पर उतारने के दावे — ये तीनों मुद्दे सीधे आम आदमी की जिंदगी से जुड़े हैं। अब असली परीक्षा यह है कि ये दावे जमीनी हकीकत में कितने उतरते हैं। पानी के संकट की जमीनी तस्वीर पर हमारी रिपोर्ट दिखाती है कि कनेक्शन तक पहुंचना अभी भी चुनौती है।