अजमेर में 147 करोड़ के गैस आधारित 132 केवी जीएसएस की प्रक्रिया तेज, देवनानी ने किया भूमि निरीक्षण

अजमेर शहर के लोगों के लिए बिजली की दिक्कतें अब इतिहास बनने की राह पर हैं। अजमेर गैस आधारित जीएसएस परियोजना — यानी शहर के बीचों-बीच बनने वाला अत्याधुनिक 132 केवी का गैस इंसुलेटेड सब-स्टेशन — अब कागजों से निकलकर जमीन पर उतरने की तैयारी में है। करीब 147 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के लिए शनिवार को विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने खुद शहर के कई संभावित स्थलों का दौरा कर भूमि चयन की प्रक्रिया तेज कर दी। दावा है कि अजमेर गैस आधारित जीएसएस अगले 50 वर्षों की बिजली जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है, यानी आने वाले दशकों में शहरवासियों को बिजली संकट या कम वोल्टेज जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

अजमेर गैस आधारित जीएसएस: लाखों घरों और अस्पतालों को सीधा फायदा

सबसे पहले बात उस असर की, जो सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ेगा। इस अजमेर गैस आधारित जीएसएस के बन जाने के बाद शहर के लाखों घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, शैक्षणिक संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों को निर्बाध और उच्च गुणवत्ता वाली बिजली मिल सकेगी। शहर के भीतर ही एक मजबूत बिजली केंद्र स्थापित होने से नया कलेक्ट्रेट भवन, नया अस्पताल परिसर और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं केंद्र से ही सीधी आपूर्ति पा सकेंगी।

गैस इंसुलेटेड तकनीक की सबसे बड़ी खूबी है कि इसमें फॉल्ट की संभावना बेहद कम होती है। इसका मतलब है — ट्रिपिंग, वोल्टेज फ्लक्चुएशन और लंबी बिजली कटौती जैसी रोजमर्रा की परेशानियों में उल्लेखनीय कमी। अधिकारियों के मुताबिक यह प्रोजेक्ट स्थानीय व्यापार और विकास को भी गति देगा।

गैस इंसुलेटेड तकनीक: अजमेर गैस आधारित जीएसएस की खासियत

अब सवाल उठता है कि “गैस आधारित जीएसएस” का मतलब आखिर क्या है। दरअसल, जीआईएस (गैस इंसुलेटेड स्विचगियर) तकनीक में बिजली के उपकरण सल्फर हेक्साफ्लोराइड गैस से भरे सीलबंद कक्षों में रखे जाते हैं। यह गैस बेहद मजबूत इंसुलेटर का काम करती है, जिससे पूरा सब-स्टेशन परंपरागत स्टेशन की तुलना में बहुत कम जगह घेरता है।

यही वजह है कि भीड़भाड़ वाले शहरी इलाकों में यह तकनीक सबसे उपयुक्त है — 132 केवी का विशाल केंद्र छोटे से भूखंड पर भी बन सकता है। पूरा सिस्टम सीलबंद होने से धूल, आंधी या बारिश का इस पर असर नहीं पड़ता, और रखरखाव का खर्च भी घटता है। अजमेर गैस आधारित जीएसएस के लिए यही तकनीक चुनी गई है, ताकि शहर के पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिले।

हाथीभाटा, टीटी कॉलेज या जयपुर रोड: भूमि चयन की प्रक्रिया

इस प्रोजेक्ट का सबसे ताजा अपडेट भूमि चयन से जुड़ा है। राज्य सरकार के बजट में की गई घोषणा के क्रियान्वयन को लेकर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अजमेर शहर के विभिन्न संभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने हाथीभाटा पावर हाउस, टीटी कॉलेज और जयपुर रोड स्थित विभिन्न जमीनों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और मौके पर मौजूद अधिकारियों से जमीनों की तकनीकी उपयुक्तता, भौगोलिक स्थिति और ग्रिड स्थापना की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

अजमेर गैस आधारित जीएसएस के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां अंतिम चरण में हैं — भूमि चयन पूरा होते ही जमीनी स्तर पर काम शुरू हो जाएगा। निरीक्षण में राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम और अजमेर विकास प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने पारदर्शिता और समय पर क्रियान्वयन का आश्वासन दिया। देवनानी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तय समय सीमा के भीतर सभी तकनीकी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जाएं ताकि अजमेर की जनता को इस सौगात का लाभ जल्द से जल्द मिल सके।

बजट घोषणा से भूमि निरीक्षण तक: प्रोजेक्ट का सफर

यह प्रोजेक्ट अचानक सामने नहीं आया है — इसके पीछे लंबी प्रक्रिया रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की घोषणा के अनुरूप इस 132 केवी जीएसएस के लिए 147 करोड़ रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति पहले ही जारी की जा चुकी है। राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड ने इससे संबंधित सभी आवश्यक आदेश जारी कर दिए हैं।

समझने वाली बात यह है कि फिलहाल अजमेर की बिजली शहर के बाहरी इलाकों के जीएसएस से आती है — लंबी लाइनों के कारण फॉल्ट ठीक करने और मॉनिटरिंग में देरी होती है। शहर के मध्य में स्थित अजमेर गैस आधारित जीएसएस इसी समस्या का स्थायी समाधान है — बिजली शहर के भीतर ही वितरित होगी और उसकी निगरानी भी आसान होगी। हाथीभाटा क्षेत्र को सबसे प्रमुख विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

आगे की राह की बात करें तो भूमि चयन के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा, और लक्ष्य तय समय सीमा में काम पूरा करने का है। देवनानी खुद दूरभाष और व्यक्तिगत बैठकों के जरिए इस अजमेर गैस आधारित जीएसएस प्रोजेक्ट की समीक्षा कर रहे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि सरकार इसे प्राथमिकता वाली परियोजना मान रही है। राजस्थान में बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई परियोजनाएं एक साथ चल रही हैं — उदयपुर के देवास प्रोजेक्ट जैसे काम भी इसी विकास की कड़ी हैं। ऊर्जा विभाग की आधिकारिक जानकारी राजस्थान ऊर्जा विभाग के पोर्टल पर देखी जा सकती है। बहरहाल, धौलपुर में रबी सीजन से पहले बिजली विभाग की तैयारियों जैसी खबरों के बीच अजमेर का यह प्रोजेक्ट प्रदेश के ऊर्जा-विकास अभियान की सबसे बड़ी कड़ी है।

प्रमुख तथ्य एक नजर में

बिंदुविवरण
परियोजनागैस आधारित (जीआईएस) 132 केवी सब-स्टेशन, अजमेर
अनुमानित लागतकरीब 147 करोड़ रुपये
तकनीकगैस इंसुलेटेड स्विचगियर — कम जगह, कम फॉल्ट, मौसम-प्रतिरोधी
संभावित स्थलहाथीभाटा पावर हाउस, टीटी कॉलेज, जयपुर रोड
डिजाइन अवधिअगले 50 वर्षों की बिजली मांग के अनुरूप
लाभार्थीलाखों घर, व्यापारिक प्रतिष्ठान, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, उद्योग
क्रियान्वयन एजेंसीराजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम, अजमेर विकास प्राधिकरण
ताजा स्थितिभूमि निरीक्षण पूर्ण होने की ओर, निर्माण जल्द शुरू

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: गैस आधारित जीएसएस का मतलब क्या है?

उत्तर: यह गैस इंसुलेटेड स्विचगियर तकनीक वाला सब-स्टेशन है, जिसमें बिजली के उपकरण गैस से भरे सीलबंद कक्षों में रखे जाते हैं। इससे स्टेशन कम जगह घेरता है, फॉल्ट कम होते हैं और आपूर्ति ज्यादा स्थिर रहती है।

प्रश्न: अजमेर में यह जीएसएस कहां बनेगा?

उत्तर: अजमेर गैस आधारित जीएसएस के लिए अभी भूमि का चयन अंतिम चरण में है। हाथीभाटा पावर हाउस, टीटी कॉलेज और जयपुर रोड स्थित जमीनों का निरीक्षण किया गया है। इनमें से तकनीकी रूप से सबसे उपयुक्त स्थल चुना जाएगा।

प्रश्न: इस प्रोजेक्ट की लागत कितनी है?

उत्तर: इस अजमेर गैस आधारित जीएसएस परियोजना के लिए करीब 147 करोड़ रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है।

प्रश्न: अजमेर के लोगों को इससे क्या फायदा मिलेगा?

उत्तर: शहर के भीतर ही मजबूत बिजली केंद्र बनने से निर्बाध और उच्च गुणवत्ता वाली आपूर्ति मिलेगी, वोल्टेज की समस्या और लंबी कटौती कम होगी, और अगले 50 वर्षों की बढ़ती मांग पूरी हो सकेगी।

Leave a Comment