दिल्ली के राजनीतिक माहौल में एक बार फिर तेज धारा बह रही है, और इस बार इसके केंद्र में हैं राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत। गहलोत भाजपा पलटवार के तहत उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के उन आरोपों का तीखा जवाब दिया है, जिनमें विपक्षी गठबंधन पर देश को अस्थिर करने और विदेशी ताकतों के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया गया था। गहलोत ने साफ कहा है कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और विरोध दर्ज कराना विपक्ष का अधिकार है, कोई अपराध नहीं।
गहलोत ने आरोप लगाया कि सवालों से डरी सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष को अब निर्वाचन आयोग का वकील बनना पड़ रहा है। यह बयान तब आया है, जब दिल्ली में 10 अक्टूबर को विपक्षी दलों के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए थे।
75 ट्रेनें रद्द, 57 मेट्रो गेट बंद — गहलोत ने गिनाए आंकड़े
अपने पोस्ट में गहलोत ने दिल्ली के मौजूदा हालात का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि पूरी दिल्ली को छावनी में बदल दिया गया है — 75 ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं, 57 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद किए गए हैं, नई दिल्ली के बड़े हिस्से में इंटरनेट सेवा बंद है और यहां तक कि स्कूलों की परीक्षाएं तक रद्द करनी पड़ी हैं।
इन आंकड़ों को लेकर सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन से पहले दिल्ली में 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने का आदेश दिया गया था, हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बंद रखे जाने वाले स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 किए जाने की खबर भी सामने आई। रेलवे ने भी प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली आने-जाने वाली कई ट्रेनों को रद्द किया था।
| गहलोत का दावा | सामने आई जानकारी |
|---|---|
| 75 ट्रेनें रद्द | रेलवे ने दिल्ली रूट की कई ट्रेनें रद्द कीं |
| 57 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद | शुरुआत में 57 स्टेशनों के गेट बंद करने का आदेश, बाद में SC हस्तक्षेप पर 45 |
| नई दिल्ली में इंटरनेट बंद | बड़े हिस्से में इंटरनेट सेवा प्रभावित |
| स्कूलों की परीक्षाएं रद्द | परीक्षाएं रद्द करने की खबरें |
गहलोत ने सवाल उठाया कि देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अब तक जनता के सामने आकर इन पाबंदियों का जवाब देने से बच रहे हैं।
गहलोत भाजपा पलटवार की असल जड़: नितिन नवीन का बयान
इस पूरे विवाद की शुरुआत भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन और नागरिक समूहों पर विदेशी ताकतों के इशारे पर देश को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया था। नवीन ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले विपक्षी समूहों की गतिविधियों को देश की स्थिरता के लिए गंभीर बताते हुए उन पर निशाना साधा था।
संवाददाताओं से बातचीत में गहलोत ने नवीन की “आंदोलनकारियों से सख्ती से निपटने” वाली टिप्पणी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नितिन नवीन को यह बताना चाहिए कि आंदोलनकारियों से शक्ति के इस्तेमाल के जरिए निपटने की बात का आखिर क्या अर्थ है और उन्हें ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने का अधिकार किसने दिया। गहलोत का कहना था कि भाजपा एक राजनीतिक दल है और उसे राजनीतिक मुद्दों का जवाब राजनीतिक तरीके से देना चाहिए, न कि धमकी भरी भाषा में।
सबसे तीखा सवाल गहलोत ने यह उठाया कि अगर कोई राष्ट्रीय पार्टी और सत्ताधारी दल का अध्यक्ष यह कहता है कि “हम सख्ती से निपटेंगे”, तो वह सरकार के गृह मंत्री के इशारे के बिना ऐसा नहीं बोल सकता। उन्होंने दावा किया कि भाजपा अध्यक्ष मंत्री या गृह मंत्री जैसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसका मतलब है कि उन्हें प्रेस वार्ता में इसी भाषा में बात करने का निर्देश मिला है।
‘विदेशी ताकतों के सामने सरेंडर खुद केंद्र कर चुका है’
गहलोत भाजपा पलटवार का सबसे तेज धार वाला हिस्सा था — विदेशी ताकतों वाले आरोप को ही पलट देना। गहलोत ने कहा कि जब भी विपक्ष सवाल पूछता है, तो उस पर अर्बन नक्सल और विदेशी ताकतों का ठप्पा लगा दिया जाता है। उनके मुताबिक, इससे साबित होता है कि जनता के सवालों का जवाब देने के लिए सरकार के पास कुछ नहीं बचा है।
इसके बाद गहलोत ने पलटवार किया — “सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार और भाजपा खुद विदेशी ताकतों के सामने पूरी तरह सरेंडर हैं।” उन्होंने इसके उदाहरण के तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के बयानों, भारत पर लगाए जा रहे टैरिफ और वीजा नीतियों का उल्लेख किया और कहा कि इन मुद्दों पर भी सवाल उठाए जाने चाहिए। उनका तर्क था कि जब विपक्ष के हर सवाल को विदेशी ताकतों से जोड़ दिया जाता है, तो इससे जनता के सवालों का जवाब देने से बचने की कोशिश दिखाई देती है।
संसद से सड़क तक: गहलोत भाजपा पलटवार का तीसरा मोर्चा
गहलोत ने अपने पोस्ट में संसद में आवाज दबाए जाने का भी आरोप लगाया। उनके मुताबिक लोकसभा में राहुल गांधी और राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे को बोलने का अवसर नहीं दिया गया, और जब विपक्षी सांसदों ने निर्वाचन आयोग और जंतर-मंतर जाने का प्रयास किया तो उन्हें रोका गया।
राहुल गांधी के समर्थन में उन्होंने लिखा कि उन्होंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत जोड़ो यात्रा निकाली — जो व्यक्ति देश को जोड़ने का काम कर रहा है, उसी पर उंगली उठाना शर्मनाक है।
सत्ता में रहते हुए भाजपा खुद करती थी विरोध — गहलोत का तर्क
गहलोत भाजपा पलटवार में एक पुराना तर्क भी सामने आया। उन्होंने याद दिलाया कि जब भाजपा विपक्ष में थी, तब उसने भी सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किए थे, लेकिन कांग्रेस ने कभी उस पर विदेशी ताकतों के इशारे पर काम करने का आरोप नहीं लगाया। उनका सवाल था — विपक्ष में रहते हुए भाजपा खुद सड़कों पर उतरती थी, उस समय कौन सी विदेशी ताकत थी? सत्ताधारी दल खुद ही लोकतांत्रिक विरोध को बदनाम करके देश में तनाव बढ़ा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: अशोक गहलोत ने भाजपा पर पलटवार क्यों किया?
उत्तर: भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के विदेशी ताकतों वाले आरोप के जवाब में गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है, अपराध नहीं। यही वह गहलोत भाजपा पलटवार है जो अब राष्ट्रीय सुर्खियों में है।
प्रश्न 2: गहलोत ने दिल्ली को लेकर क्या दावे किए?
उत्तर: 75 ट्रेनें रद्द, 57 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद, नई दिल्ली में इंटरनेट बंद और स्कूल परीक्षाएं रद्द — हालांकि रिपोर्टों के मुताबिक मेट्रो गेट बाद में 45 रह गए।
प्रश्न 3: नितिन नवीन कौन हैं और उन्होंने क्या कहा था?
उत्तर: नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने विपक्षी गठबंधन पर विदेशी ताकतों के इशारे पर देश को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया था।
प्रश्न 4: गहलोत ने ‘विदेशी ताकतों के सामने सरेंडर’ का क्या मतलब बताया?
उत्तर: गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार और भाजपा खुद विदेशी ताकतों के सामने सरेंडर हैं, जिसके उदाहरण ट्रंप के बयान, भारत पर टैरिफ और वीजा नीतियां हैं।
स्रोत: इस खबर के तथ्यों की पुष्टि Amar Ujala समेत कई राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों से की गई है।
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