शूटिंग का काम पूरा हो चुका था, बस जमानत राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) वापस मिलनी बाकी थी — और यही सिक्योरिटी राशि दिलाने के एवज में नाहरगढ़ अभयारण्य में तैनात दो वन अधिकारियों ने शिकायतकर्ता से पहले 15 हजार रुपये वसूल लिए और फिर भी रिश्वत की भूख शांत नहीं हुई। इसके बाद वनपाल ने 20 हजार और वनरक्षक ने 30 हजार रुपये की अलग-अलग मांग शुरू कर दी। परेशान शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से शिकायत की, और गुरुवार 8 अक्टूबर 2026 को ACB की स्पेशल यूनिट-द्वितीय ने जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को कुल 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह नाहरगढ़ ACB ट्रैप प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ ACB की तेज कार्रवाई की ताजा मिसाल है।
नाहरगढ़ ACB ट्रैप: कार्रवाई में क्या-क्या हुआ
एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर स्पेशल यूनिट-द्वितीय, जयपुर ने 8 अक्टूबर को यह ट्रैप कार्रवाई की। शिकायत के सत्यापन के बाद पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित के सुपरविजन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महावीर प्रसाद के नेतृत्व में पूरी टीम ने जाल बिछाया।
ट्रैप के दौरान आरोपी श्याम सिंह (वनपाल) को 20 हजार रुपये और आरोपी शिवकिशोर (वनरक्षक) को 30 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। दोनों चौकी काला महादेव, नाहरगढ़ अभयारण्य, जयपुर में पदस्थापित थे।
कार्रवाई की जानकारी एसीबी के महानिदेशक पुलिस गोविंद गुप्ता ने दी। वहीं अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस स्मिता श्रीवास्तव और महानिरीक्षक पुलिस एस. परिमला के सुपरविजन में आरोपियों से पूछताछ और अग्रिम कार्रवाई जारी है। एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता को कैसे परेशान किया जा रहा था
मावठा, आमेर में शिकायतकर्ता ने शूटिंग संबंधी काम किया था। इस काम के लिए जमा कराई गई सिक्योरिटी राशि वापस दिलाने के नाम पर आरोपी श्याम सिंह और शिवकिशोर रिश्वत की मांग कर रहे थे।
शिकायत के मुताबिक, श्याम सिंह पहले ही 15 हजार रुपये रिश्वत के तौर पर ले चुका था। इसके बाद भी उसने 20 हजार रुपये की अतिरिक्त मांग रखी, जबकि शिवकिशोर ने 30 हजार रुपये की मांग की। यानी कुल 50 हजार रुपये की रिश्वत दोनों आरोपियों के हिस्से में बंटी हुई थी — वनपाल के हिस्से 20 हजार, वनरक्षक के हिस्से 30 हजार।
लगातार परेशान किए जाने पर शिकायतकर्ता ने ACB स्पेशल यूनिट-द्वितीय, जयपुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई। एसीबी ने शिकायत का सत्यापन किया, जिसमें रिश्वत मांगने की बात सही पाई गई। इसके बाद ट्रैप की योजना बनी और दोनों आरोपियों को पकड़ा गया।
दोनों आरोपियों के बारे में जानें
| विवरण | आरोपी 1 | आरोपी 2 |
|---|---|---|
| नाम | श्याम सिंह | शिवकिशोर |
| पद | वनपाल (Forester) | वनरक्षक (Forest Guard) |
| तैनाती | चौकी काला महादेव, नाहरगढ़ अभयारण्य, जयपुर | चौकी काला महादेव, नाहरगढ़ अभयारण्य, जयपुर |
| बरामद रिश्वत | 20,000 रुपये | 30,000 रुपये |
| पहले ली गई रिश्वत | 15,000 रुपये (आरोप के मुताबिक) | — |
| कार्रवाई करने वाली इकाई | एसीबी स्पेशल यूनिट-द्वितीय, जयपुर | एसीबी स्पेशल यूनिट-द्वितीय, जयपुर |
ट्रैप प्रक्रिया: नाहरगढ़ ACB ट्रैप से आम नागरिक क्या सीखें
नाहरगढ़ ACB ट्रैप सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई की खबर नहीं है — यह बताता है कि रिश्वत मांगने पर आम नागरिक को क्या करना चाहिए।
चरण 1 — शिकायत: नाहरगढ़ मामले में शिकायतकर्ता ने एसीबी स्पेशल यूनिट-द्वितीय, जयपुर में लिखित शिकायत दी। आप अपने नजदीकी एसीबी कार्यालय में भी शिकायत दे सकते हैं।
चरण 2 — सत्यापन: एसीबी पहले शिकायत की गुप्त जांच और सत्यापन करती है, ताकि यह पक्का हो सके कि रिश्वत की मांग वाकई हो रही है। गलत शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती।
चरण 3 — ट्रैप: सत्यापन के बाद एसीबी टीम जाल बिछाती है — जैसे इस मामले में स्पेशल यूनिट ने रिश्वत लेते ही दोनों आरोपियों को पकड़ लिया।
चरण 4 — कानूनी कार्रवाई: पकड़े जाने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज होता है, पूछताछ होती है और अग्रिम अनुसंधान चलता है।
नाहरगढ़ ACB ट्रैप से सबक: ACB से संपर्क कैसे करें
अगर आपसे भी कोई सरकारी कर्मचारी रिश्वत मांगता है, तो एसीबी से इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
टोल फ्री नंबर: 1064 (24×7)
व्हाट्सएप हेल्पलाइन: 94135-02834 (24×7)
एसीबी के मुताबिक, ACB में प्रकरण दर्ज होने पर संबंधित व्यक्ति सीधे ACB से संपर्क कर अपना पक्ष भी रख सकता है; स्पष्टीकरण के विश्लेषण के बाद ही अनुसंधान में निर्णय होता है, ताकि निर्दोष व्यक्ति न फंसे।
नाहरगढ़ अभयारण्य की तैनाती पर सवाल
इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। नाहरगढ़ अभयारण्य जयपुर का एक प्रमुख वन्यजीव क्षेत्र है, जहां वन्यजीव सप्ताह जैसे आयोजनों से लेकर पर्यटकों की सफारी तक — वन विभाग की गतिविधियां सालभर चलती हैं। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र की चौकी में तैनात अधिकारी अगर फिल्म शूटिंग जैसे वैध काम की सिक्योरिटी राशि वापस दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगें, तो यह वन विभाग की छवि के लिए बड़ा झटका है।
दो अधिकारियों का रिश्वत के आरोप में पकड़ा जाना विभाग के भीतर जवाबदेही की व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है।
राजस्थान में बढ़ती ACB सक्रियता
इसी सप्ताह भरतपुर जिले के नदबई में भी ACB ने 35 हजार रुपये की रिश्वत के आरोप में एक सीनियर मेडिकल ऑफिसर और उसके बिचौलिए को गिरफ्तार किया था। (उस पूरी खबर को यहां पढ़ें) नाहरगढ़ ACB ट्रैप बताता है कि एसीबी इस समय प्रदेशभर में सक्रिय है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: नाहरगढ़ ACB ट्रैप में कितने लोग गिरफ्तार हुए और कितनी रिश्वत बरामद हुई?
उत्तर: दो आरोपी गिरफ्तार हुए — वनपाल श्याम सिंह से 20 हजार रुपये और वनरक्षक शिवकिशोर से 30 हजार रुपये, कुल 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए।
प्रश्न 2: आरोपियों ने रिश्वत किस काम के एवज में मांगी थी?
उत्तर: मावठा, आमेर में शूटिंग के काम की सिक्योरिटी राशि (जमानत राशि) वापस दिलाने के नाम पर। आरोपी वनपाल पहले ही 15 हजार रुपये ले चुका था।
प्रश्न 3: ACB में रिश्वत की शिकायत कैसे करें?
उत्तर: नजदीकी ACB कार्यालय में लिखित शिकायत दें, या टोल फ्री नंबर 1064 / व्हाट्सएप हेल्पलाइन 94135-02834 पर 24×7 संपर्क करें। एसीबी पहले शिकायत का सत्यापन करती है, फिर ट्रैप कार्रवाई करती है।
प्रश्न 4: दोनों आरोपियों पर कौन सा कानून लगाया गया है?
उत्तर: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और आईजी एस. परिमला के सुपरविजन में पूछताछ और आगे की जांच जारी है।