SMS अस्पताल आग: 8 मौतों पर डोटासरा ने मांगा स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा, सरकार घेरे में

जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल की आग में 8 मरीजों की मौत ने राजस्थान की सियासत में तूफान खड़ा कर दिया है। बुधवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर से इस्तीफा मांगा और सरकार को घटनाएं रोकने में विफल बताया। SMS अस्पताल आग अब सरकार की जवाबदेही पर सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है।

रविवार रात को क्या हुआ: 8 मौतों का सिलसिला

SMS अस्पताल आग रविवार देर रात ट्रॉमा सेंटर की दूसरी मंजिल पर स्थित न्यूरो आईसीयू में भड़की। उस समय आईसीयू में 11 मरीज भर्ती थे, जिनमें से 6 की मौके पर ही मौत हो गई। उसी मंजिल के दूसरे आईसीयू से 14 मरीज बाहर निकाले गए, लेकिन उनमें से भी 2 ने बाद में दम तोड़ दिया — कुल मौतें 8 हो गईं।

आग लगते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। धुआं फैलने से वार्डों में दहशत फैल गई और मरीजों को निकालने के प्रयास हुए, लेकिन कई जानें जा चुकी थीं।

डोटासरा के 5 बड़े आरोप: इस्तीफे की मांग क्यों?

बूंदी में मीडियाकर्मियों से बातचीत में गोविंद सिंह डोटासरा ने SMS अस्पताल आग पर इस्तीफे की मांग के पीछे 5 गंभीर आरोप रखे:

1. चिंगारी की चेतावनी नजरअंदाज: डोटासरा का आरोप — हादसे से कुछ दिन पहले तारों में चिंगारी की चेतावनी मिली थी, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया।

2. अधीक्षक का विवादित बयान: अधीक्षक ने आग से मौत की बात से इनकार किया और दावा किया कि मौतें धुएं से दम घुटने से हुईं — जबकि धुआं भी तो आग की वजह से फैला था।

3. मुख्यमंत्री पर सबूत मिटाने का आरोप: डोटासरा का दावा है कि त्रासदी के बाद मुख्यमंत्री ने अस्पताल का दौरा कर सबूत मिटाने के निर्देश दिए।

4. मंत्री के पास कोई जवाब नहीं: स्वास्थ्य मंत्री अभी तक आग के कारणों की व्याख्या नहीं कर पाए हैं; न मंत्री ने, न मुख्यमंत्री ने बयान जारी किया है।

5. ‘पर्ची वाली सरकार’ का तंज: डोटासरा बोले — सरकार घटनाएं रोकने में विफल रही है, ‘पर्ची’ व्यवस्था बदलनी चाहिए।

डोटासरा ने पूछा — “लोग खुद को बचाने के लिए अस्पताल पहुंचे, लेकिन उनकी जान चली गई। इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है?”

जूली का हमला: ‘ये हादसा नहीं, हत्या है’

सोमवार सुबह नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली SMS अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिजनों से मिले। उन्होंने SMS अस्पताल आग को ‘हादसा नहीं, हत्या’ बताते हुए सरकार पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया।

जूली ने बताया कि परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग के दौरान स्टाफ मरीजों को छोड़कर भाग गया। “स्टाफ को आग पर काबू पाना चाहिए था, लेकिन वे अपनी जान बचाने में व्यस्त थे। मरीजों को उनके परिजनों ने ही बचाया,” जूली ने कहा।

जूली ने स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा और पीड़ित परिवारों को मुआवजा मांगा। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी अस्पताल पहुंचे और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। जूली ने जांच समिति पर भी सवाल उठाए — कहा कि पूर्व अनुभवों से जांच धीमी होगी और लोग इस त्रासदी को भूल जाएंगे।

आईसीयू में आग क्यों होती है इतनी जानलेवा

SMS अस्पताल आग ने दिखाया कि आईसीयू में आग सामान्य आग से कहीं ज्यादा खतरनाक होती है। पहला कारण — मरीज वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट से जुड़े होते हैं, ऐसे में उन्हें तुरंत बाहर निकालना लगभग असंभव हो जाता है। दूसरा — ऑक्सीजन की मौजूदगी आग को तेजी से फैलाती है और धुआं मिनटों में वार्ड में भर जाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक हर बड़े अस्पताल में साल में दो बार फायर ऑडिट, पुरानी वायरिंग की जांच और स्टाफ का आपातकालीन प्रशिक्षण जरूरी है। डोटासरा का सबसे गंभीर आरोप यही है — चिंगारी की चेतावनी पहले से मिली थी, फिर भी कोई कदम नहीं उठाया गया।

अभी अनुत्तरित 4 सवाल

SMS अस्पताल आग पर 4 सवाल अनुत्तरित हैं: आग का असली कारण — शॉर्ट सर्किट या पुरानी वायरिंग, जांच रिपोर्ट बताएगी; चिंगारी की चेतावनी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई — डोटासरा के आरोप की पुष्टि होगी या नहीं; स्टाफ ने मरीजों को छोड़ा या बचाया — प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अहम होंगे; मुआवजा कब और कितना — सहायता की घोषणा अभी बाकी है।

घटना के तथ्य एक नजर में

बिंदु विवरण
घटना स्थल SMS अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर, दूसरी मंजिल, न्यूरो आईसीयू
घटना का समय रविवार देर रात
न्यूरो आईसीयू में भर्ती मरीज 11 (6 की मौत)
दूसरे आईसीयू से निकाले गए 14 (2 की बाद में मौत)
कुल मौतें 8
मुख्य मांग स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा + पीड़ितों को मुआवजा
जांच की स्थिति मुख्यमंत्री ने जांच समिति गठित की

राजस्थान में अस्पताल सुरक्षा की चुनौती

हाल ही में जोधपुर केमिकल फैक्ट्री अग्निकांड में दमकलकर्मियों की मौत ने भी फायर सेफ्टी की पोल खोल दी थी। अस्पतालों में खतरा दोगुना होता है, क्योंकि मरीज खुद चलकर बाहर नहीं निकल सकते।

राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पहले से दबाव है — निजी अस्पतालों के RGHS योजना से दूरी बनाने के संकट के बीच सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का भार बढ़ रहा है। SMS अस्पताल प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां रोजाना हजारों मरीज आते हैं — यहां सुरक्षा में चूक का मतलब हजारों जिंदगियों को खतरे में डालना है।

आगे क्या होगा?

मुख्यमंत्री ने जांच समिति गठित कर दी है, लेकिन विपक्ष का दबाव बढ़ रहा है — इस्तीफे की मांग सड़कों और विधानसभा दोनों जगह उठ रही है। विपक्ष 8 पीड़ित परिवारों के लिए उचित मुआवजे की भी मांग कर रहा है, जिसे डोटासरा ने “बिल्कुल भी राजनीति नहीं” बताया है। सवाल अब सिर्फ इतना है — क्या जांच दोषियों तक पहुंचेगी और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलेगा, या समय के साथ यह SMS अस्पताल आग की त्रासदी भी फाइलों में दबकर रह जाएगी?

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: SMS अस्पताल आग कब और कहां लगी?
उत्तर: रविवार देर रात SMS अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर की दूसरी मंजिल के न्यूरो आईसीयू में आग लगी थी।

प्रश्न 2: इस हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
उत्तर: कुल 8 मौतें — न्यूरो आईसीयू के 11 में से 6 की मौके पर और दूसरे आईसीयू के 14 में से 2 की बाद में मौत हुई।

प्रश्न 3: SMS अस्पताल आग पर डोटासरा ने इस्तीफा क्यों मांगा?
उत्तर: डोटासरा का आरोप है कि चिंगारी की चेतावनी नजरअंदाज हुई, प्रशासन ने मौतों का कारण छिपाने की कोशिश की और स्वास्थ्य मंत्री कारणों की व्याख्या नहीं कर पाए।

प्रश्न 4: सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर: मुख्यमंत्री ने जांच समिति गठित की है। विपक्ष मुआवजे और दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहा है।

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