रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार को जोधपुर पहुंचे और यहां चल रहे बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास तरंग शक्ति 2026 के कार्यक्रमों में शामिल हुए। जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर उन्होंने भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों का शानदार हवाई प्रदर्शन देखा और सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संकट के समय खुद के हथियार ही काम आते हैं — रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत की राष्ट्रीय नीति है। 26 सितंबर से शुरू हुआ यह अभ्यास 12 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें सात देशों की वायु सेनाएं हिस्सा ले रही हैं।
रक्षा मंत्री के साथ वायुसेना प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इस दौरे को लेकर जोधपुर में सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई थीं।
तरंग शक्ति 2026 में आत्मनिर्भरता का संदेश — ‘संकट में खुद के हथियार’
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध कला की एक कठोर सच्चाई को भारत ने समझ लिया है — संकट के समय कोई भी देश लंबे समय तक चलने वाली लड़ाई तब तक नहीं लड़ सकता, जब तक वह अपने हथियार और जरूरी तकनीकें खुद बनाने में सक्षम न हो। इसी वजह से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय नीति के तौर पर अपनाया गया है।
उन्होंने कहा कि भविष्य की सैन्य ताकत का अंदाजा प्लेटफॉर्म्स की संख्या से नहीं, बल्कि चीजों को भांपने, समझने, फैसला लेने और कार्रवाई करने की रफ्तार से लगाया जाएगा। रफ्तार, सटीकता, जानकारी और तालमेल ही अब असली पहचान हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का मतलब दुनिया से अलग-थलग पड़ना नहीं है, बल्कि रक्षा तकनीकों को डिजाइन करने, बनाने और अपग्रेड करने की घरेलू क्षमता विकसित करना है। भारत भरोसेमंद ग्लोबल डिफेंस सप्लाई चेन में भी योगदान दे रहा है।
जोधपुर दौरे का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम
रक्षा मंत्री का यह दौरा एक दिवसीय था, लेकिन कार्यक्रम पूरी तरह सुनियोजित रहा। सुबह से दोपहर तक का कार्यक्रम इस प्रकार था:
| समय | कार्यक्रम |
|---|---|
| सुबह 10:55 | जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर विशेष आगमन |
| सुबह 11:00 – दोपहर 12:30 | तरंग शक्ति 2026 के एयर शो और विशेष कार्यक्रमों में शिरकत, विदेशी दलों और वायुसेना के जवानों से संवाद |
| दोपहर 12:45 | एयरफोर्स स्टेशन से उम्मेद भवन पैलेस के लिए प्रस्थान |
| दोपहर 1:00 | उम्मेद भवन पैलेस आगमन, 1:45 तक लंच कार्यक्रम |
| दोपहर 1:50 | एयरफोर्स स्टेशन वापसी |
| दोपहर 2:10 | विशेष विमान से नई दिल्ली के लिए प्रस्थान |
दौरे के दौरान रक्षा मंत्री ने वायुसेना प्रमुख और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लड़ाकू विमानों को अलग-अलग फार्मेशन में उड़ान भरते और हवाई करतब दिखाते देखा। सुरक्षा के लिहाज से पूरे मार्ग पर कड़ी चौकसी बरती गई।
आसमान में क्या हुआ — सारंग, सूर्य किरण और फार्मेशन उड़ानें
हवाई प्रदर्शन के दौरान भारतीय वायुसेना की सारंग हेलीकॉप्टर प्रदर्शन टीम और सूर्य किरण हवाई करतब टीम ने अपने कौशल का प्रदर्शन किया। लड़ाकू विमानों ने अलग-अलग फार्मेशन में उड़ान भरी और हवाई करतब दिखाए, जिसे रक्षा मंत्री ने करीब से देखा।
गौरतलब है कि दो दिन पहले ही, 8 अक्टूबर को जोधपुर एयर शो 2026 में 94वें वायुसेना दिवस के मौके पर सूर्य किरण और सारंग टीमों ने तिरंगा फार्मेशन बनाकर आसमान में शौर्य का रंग भरा था।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज जोधपुर के आसमान में कई देशों के विमानों ने भारतीय विमानों के साथ उड़ान भरी है — अलग-अलग देश, अलग-अलग विमान, अलग-अलग अनुभव, लेकिन एक आसमान। यही तरंग शक्ति का संदेश है।
तरंग शक्ति 2026 — 7 देश, 17 दिन, एक उद्देश्य
यह बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास 26 सितंबर से शुरू हुआ था और 12 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा। इसमें सात देशों की वायु सेनाएं हिस्सा ले रही हैं:
| देश | भागीदारी |
|---|---|
| भारत | मेजबान — भारतीय वायुसेना |
| ऑस्ट्रेलिया | वायु सेना दल |
| अमेरिका | वायु सेना दल |
| संयुक्त अरब अमीरात | वायु सेना दल |
| फ्रांस | वायु सेना दल |
| जर्मनी | वायु सेना दल |
| श्रीलंका | वायु सेना दल |
| बांग्लादेश | वायु सेना दल |
कई अन्य देशों ने इस अभ्यास में पर्यवेक्षक के रूप में भी भाग लिया है। अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त प्रशिक्षण, अभियानगत अनुभवों के आदान-प्रदान और एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझने के माध्यम से भाग लेने वाली वायु सेनाओं के बीच तालमेल को बेहतर बनाना है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से विकसित हो रही है कि कोई भी एक वायु सेना सिर्फ अपने अनुभव से सीखकर काम नहीं चला सकती। बहुराष्ट्रीय अभ्यासों का गहरा महत्व सक्षम सेनाओं के साथ तालमेल बिठाने की क्षमता विकसित करने में है।
तेजस से AMCA तक — स्वदेशी रक्षा ताकत की पूरी सूची
अपने भाषण में राजनाथ सिंह ने उन स्वदेशी कार्यक्रमों का जिक्र किया जो भारत की बढ़ती क्षमता को दिखाते हैं:
- तेजस फाइटर एयरक्राफ्ट — स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम
- हेलीकॉप्टर — ध्रुव, रुद्र और प्रचंड से लेकर एलयूएच तक डिजाइन और निर्माण की क्षमता
- आकाश एयर डिफेंस सिस्टम — स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली
- एईएसए रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम — अत्याधुनिक सेंसर तकनीक
- अन-मैन्ड (बिना पायलट वाले) और एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी की बढ़ती रेंज
- एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) — पांचवीं पीढ़ी की स्टील्थ फाइटर तकनीक का प्रमुख कार्यक्रम
उन्होंने कहा कि एडवांस्ड एयरो-इंजन के विकास और को-प्रोडक्शन (साझा उत्पादन) पर जोर दिया जा रहा है, ताकि एविएशन टेक्नोलॉजी के सबसे जटिल हिस्से में महारत हासिल की जा सके। मकसद सिर्फ उपकरण बनाना नहीं, बल्कि डिजाइन करना, इनोवेशन करना, इंटीग्रेट करना और डिलीवर करना है।
रक्षा मंत्री के मुताबिक, भविष्य में रक्षा संबंध सिर्फ प्लेटफॉर्म के बारे में नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और भरोसे के बारे में होंगे। भारत उन देशों के साथ सहयोग तलाशने के लिए तैयार है जो स्थिर, सुरक्षित और शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय माहौल की प्रतिबद्धता साझा करते हैं।
12 अक्टूबर के बाद क्या — राजस्थान के लिए इसके मायने
12 अक्टूबर को तरंग शक्ति 2026 का समापन होगा। जोधपुर में इस अभ्यास का होना राजस्थान के लिए खास मायने रखता है — पश्चिमी सीमा से नजदीकी के कारण जोधपुर भारतीय वायुसेना का अहम अड्डा है, और यहां का एयरफोर्स स्टेशन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
जयपुर-जोधपुर-पचपदरा एक्सप्रेसवे जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के साथ-साथ ऐसे रक्षा आयोजनों से पश्चिमी राजस्थान की रणनीतिक और आर्थिक अहमियत लगातार बढ़ रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
तरंग शक्ति 2026 क्या है? यह भारतीय वायुसेना का बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास है, जो 26 सितंबर से 12 अक्टूबर 2026 तक जोधपुर में आयोजित हो रहा है। इसमें सात देशों की वायु सेनाएं हिस्सा ले रही हैं।
राजनाथ सिंह ने जोधपुर में क्या कहा? रक्षा मंत्री ने कहा कि संकट के समय खुद के हथियार ही काम आते हैं, इसलिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय नीति है। उन्होंने तेजस, आकाश और AMCA जैसे स्वदेशी कार्यक्रमों का जिक्र किया।
तरंग शक्ति 2026 कब तक चलेगा? यह अभ्यास 12 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। 10 अक्टूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसके कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
अभ्यास में कौन-कौन से देश भाग ले रहे हैं? भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका और बांग्लादेश की वायु सेनाएं हिस्सा ले रही हैं। कई अन्य देश पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हैं।
स्रोत: दैनिक ट्रिब्यून (पीटीआई), पंजाब केसरी (आईएएनएस) — 10 अक्टूबर 2026