राजस्थान के बीकानेर जिले की श्रीडूंगरगढ़ मंडी में शनिवार (3 अक्टूबर) को खरीदारों और किसानों, दोनों के लिए हैरान करने वाली खबर आई। मंडी में नए मोठ के भाव एक ही दिन में एक हजार रुपये प्रति क्विंटल की तेजी के साथ ₹9000 से ₹9251 प्रति क्विंटल पर पहुंच गए। मंडी व्यापारियों के मुताबिक ये भाव पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले करीब दोगुने हैं। यानी जिस मोठ का दाम पिछले साल इसी समय आधा था, आज वही मोठ दोगुने भाव पर बिक रहा है।
सिर्फ मोठ ही नहीं, मंडी में आज ग्वार और चने के भाव में भी तेजी का रुख रहा। ग्वार ₹6450 से ₹6600 प्रति क्विंटल और चना ₹6400 से ₹6800 प्रति क्विंटल के भाव पर बिका। मंडी सूत्रों के अनुसार शनिवार को कई जिंसों में ऊपर की ओर रुख बना रहा, जो प्रदेश में कमजोर मानसून और खरीफ फसलों के नुकसान का सीधा असर माना जा रहा है।
एक दिन में ₹1000 की छलांग — क्यों है ये खबर बड़ी
मोठ राजस्थान की प्रमुख खरीफ फसलों में से एक है, खासकर पश्चिमी राजस्थान के शुष्क इलाकों में इसकी खेती बड़े पैमाने पर होती है। एक ही दिन में ₹1000 प्रति क्विंटल की तेजी असामान्य मानी जाती है और इसका सीधा मतलब है कि बाजार में मोठ की आवक बेहद कम है। व्यापारियों के मुताबिक इस बार कम बरसात से पैदावार पर बुरा असर पड़ा है — जिनके पास स्टॉक बचा है, वे ऊंचे भाव का फायदा उठा रहे हैं, लेकिन जिनकी फसल खराब हो गई, उनका माल ही मंडी तक नहीं पहुंच पा रहा।
श्रीडूंगरगढ़ मंडी: शनिवार के पूरे भाव
3 अक्टूबर 2026 को श्रीडूंगरगढ़ मंडी में प्रमुख कृषि जिंसों के भाव (प्रति क्विंटल) इस प्रकार रहे:
| जिंस | भाव (रु/क्विंटल) |
|---|---|
| मोठ नया | 9000 – 9251 |
| मोठ (पुराना) | 7800 – 8200 |
| ग्वार | 6450 – 6600 |
| ग्वार काला | 6000 – 6300 |
| चना | 6400 – 6800 |
| रूसी चना | 6000 – 6800 |
| मैथी नई | 5500 – 6400 |
| गेहूं | 2655 – 2750 |
| गेहूं 1482 | 2700 – 3000 |
| बाजरी | 2300 – 2400 |
| तारामीरा नया | 5000 – 5700 |
| सरसों नई | 6500 – 7400 |
| पीली सरसों | 6800 – 7500 |
| ईसबगोल नया | 11500 – 12700 |
| जीरा नया | 18000 – 20200 |
| मूंग नया | 8000 – 8450 |
| मूंग (पुरानी) | 6500 – 7000 |
| मूंगफली खला नया | 6800 – 7501 |
| मूंगफली चुगा नया | 5500 – 6500 |
| तिल | 9500 – 10500 |
| जौ नया | 2500 – 2650 |
| नया धाना | 12500 – 16500 |
ध्यान रहे कि नई फसल के भाव पुरानी फसल से लगातार ऊंचे चल रहे हैं। नया मोठ ₹9251 के उच्च स्तर पर पहुंचा, जबकि पुराना मोठ ₹7800–8200 पर है। इसी तरह नया मूंग ₹8450 तक बिका, जीरा ₹20200 और ईसबगोल ₹12700 प्रति क्विंटल तक पहुंचा। बाजरी देसी और खड़बा सरसों में आज आवक ही नहीं आई, जो आपूर्ति की तंगी की ओर इशारा करता है।
भाव बढ़ने की असली वजह: कमजोर मानसून और चौपट फसलें
भावों में इस उछाल की जड़ मानसून की कमजोरी में है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 26 सितंबर तक राजस्थान में सामान्य 421.89 मिमी बारिश के मुकाबले सिर्फ 346.97 मिमी बारिश दर्ज हुई — यानी सामान्य से 17.76 फीसदी कम। 17 जिलों में तो बारिश सामान्य से 20 से 50 फीसदी तक कम रही। बरसात की इस कमी ने खरीफ फसलों को सीधे नुकसान पहुंचाया है।
मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार अब दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई अंतिम चरण में है और अगले कुछ दिनों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने का अनुमान है। ऐसे में जिन इलाकों में फसलें पहले से कमजोर हैं, वहां सुधार की गुंजाइश लगभग खत्म हो चुकी है। श्रीडूंगरगढ़ मंडी की रिपोर्ट में भी साफ कहा गया है कि कम बरसात के बाद चौपट हुई फसलों से महंगाई बढ़ने की आशंकाएं मंडराने लगी हैं।
अकाल की मांग और सरकार की तैयारी
फसलों के नुकसान को देखते हुए प्रदेशभर में अकाल (सूखा) घोषित करने की मांग उठने लगी है। अकाल घोषित होने पर प्रभावित किसानों को राहत पैकेज, फसल बीमा के दावे, कर्ज की वसूली में छूट और रोजगार योजनाओं के तहत काम जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इसलिए किसान संगठन और जनप्रतिनिधि लगातार सरकार से इस मांग को दोहरा रहे हैं।
दूसरी ओर, राजस्व विभाग कम बारिश से प्रभावित क्षेत्रों का आकलन करने की तैयारी में है। विभाग 34 जिलों की 117 तहसीलों में गिरदावरी के जरिए सर्वे कराने की योजना बना रहा है, ताकि फसल और बारिश की स्थिति का सही-सही आकलन हो सके। ये सर्वे आगे चलकर राहत पैकेज और बीमा दावों के निपटारे की नींव बनेगा। जिन किसानों की फसल का नुकसान हुआ है, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे अपने खेत की गिरदावरी और फसल बीमा के कागजात संभालकर रखें।
किसानों और आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है
जिनके पास माल है, उनके लिए मौका: जिन किसानों के पास मोठ, ग्वार या चने का स्टॉक बचा है, वे इस समय ऊंचे भाव का फायदा उठा सकते हैं। हालांकि जल्दबाजी में पूरा माल बेचने की बजाय चरणबद्ध तरीके से बेचना समझदारी होगी, क्योंकि भावों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
रबी बुवाई पर असर: खरीफ की फसल से हुई कमाई ही अक्सर रबी की बुवाई (सरसों, गेहूं, चना) की पूंजी होती है। जिन किसानों की खरीफ फसल खराब हुई, उनके लिए रबी की तैयारी में बीज और खाद का खर्च जुटाना चुनौती होगी। ऐसे किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं और किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा का लाभ लेना चाहिए।
आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव: मंडी भाव बढ़ने का असर खुदरा बाजार में भी दिखेगा। दालों, तेलों और मसालों की कीमतों में बढ़ोतरी से घरेलू बजट पर दबाव बढ़ सकता है। सरकार की ओर से भावांतर जैसी योजनाओं और बफर स्टॉक के जरिए कीमतों को थामने के उपाय अपेक्षित हैं।
व्यापारियों के लिए सलाह: मौजूदा तेजी आपूर्ति की कमी से प्रेरित है, न कि मांग में वास्तविक उछाल से। ऐसे में ऊंचे भाव पर ज्यादा स्टॉक जमा करना जोखिम भरा हो सकता है, खासकर जब आगे रबी की आवक और सरकारी हस्तक्षेप की संभावना बनी हुई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: श्रीडूंगरगढ़ मंडी में आज (3 अक्टूबर) मोठ का भाव क्या है?
उत्तर: नया मोठ ₹9000 से ₹9251 प्रति क्विंटल और पुराना मोठ ₹7800 से ₹8200 प्रति क्विंटल के भाव पर बिका। एक ही दिन में नए मोठ में ₹1000 की तेजी दर्ज हुई।
प्रश्न 2: मोठ के भाव इतने क्यों बढ़ रहे हैं?
उत्तर: इस साल मानसून में सामान्य से करीब 18 फीसदी कम बारिश हुई है, जिससे मोठ समेत खरीफ फसलों की पैदावार घटी है। मंडियों में आवक कम होने से भाव तेजी से ऊपर जा रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले भाव करीब दोगुने हो गए हैं।
प्रश्न 3: अकाल घोषित होने से किसानों को क्या फायदा मिलेगा?
उत्तर: अकाल (सूखा) घोषित होने पर प्रभावित इलाकों के किसानों को राहत पैकेज, फसल बीमा दावों का निपटारा, कृषि कर्ज की वसूली में छूट और रोजगार गारंटी योजनाओं के तहत काम जैसी सुविधाएं मिलती हैं। फिलहाल प्रदेशभर में इसकी मांग उठ रही है।
प्रश्न 4: ग्वार और चने के भाव आज क्या रहे?
उत्तर: श्रीडूंगरगढ़ मंडी में शनिवार को ग्वार ₹6450–6600, ग्वार काला ₹6000–6300, चना ₹6400–6800 और रूसी चना ₹6000–6800 प्रति क्विंटल के भाव पर बिका। इनमें भी तेजी का रुख रहा।
निष्कर्ष
श्रीडूंगरगढ़ मंडी के आज के भाव बता रहे हैं कि कमजोर मानसून का असर मंडी और थाली, दोनों तक पहुंच चुका है। मोठ के ₹9251 के भाव एक ओर स्टॉक रखने वाले किसानों के लिए राहत हैं, तो दूसरी ओर फसल गंवाने वाले किसानों और उपभोक्ताओं के लिए चिंता। आने वाले दिनों में सबकी नजर राजस्व विभाग के सर्वे और सरकार के राहत फैसलों पर रहेगी।