18 साल से फरार 35 हजार का इनामी ठग गिरफ्तार: वाई-फाई तकनीशियन बनकर देहरादून से दबोचा

कल्पना कीजिए: 18 साल से पुलिस को चकमा दे रहा एक ठग, 23 धोखाधड़ी के मामले, 17 राज्यों में बदले ठिकाने — और उसे पकड़ने के लिए पुलिस को वाई-फाई तकनीशियन का वेश धरना पड़ता है। ये किसी फिल्म की कहानी नहीं, राजस्थान की सीकर पुलिस की असली कार्रवाई है। जयपुर रेंज साइबर सेल और सीकर कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने सीकर इनामी ठग कल्याण सिंह (56) को उत्तराखंड के देहरादून से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर 35 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वो छात्रों को बीएड समेत शैक्षणिक डिग्रियों के नाम पर ठगता था।

वेश बदलकर प्रेमनगर में दबिश: 10 अक्टूबर का वो दिन

गिरफ्तारी की कहानी किसी थ्रिलर से कम नहीं। पुलिस महानिरीक्षक राहुल प्रकाश के मुताबिक, आरोपी की तलाश दिल्ली, रुड़की और देहरादून समेत कई जगहों पर लगातार चल रही थी। मुखबिर से मिली सूचना के विश्लेषण के बाद टीम को पता चला कि आरोपी देहरादून के प्रेमनगर स्थित राघव विहार में रह रहा है।

लेकिन दिक्कत ये थी कि 18 साल से फरार कोई अपराधी इतनी आसानी से हाथ नहीं आता। इसीलिए टीम ने चतुराई से काम लिया — आरोपी के मकान के पास एयरटेल का फाइबर कनेक्शन उपलब्ध होने की जानकारी का फायदा उठाया गया। पुलिसकर्मी 10 अक्टूबर को वाई-फाई तकनीशियन बनकर उसके घर पहुंचे। जैसे ही आरोपी के घर के भीतर मौजूद होने की पुष्टि हुई, टीम ने दबिश दे दी और उसे मौके पर ही दबोच लिया। इसके बाद आरोपी को सीकर लाकर कोतवाली पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया, जहां अब आगे की जांच और कार्रवाई चल रही है।

बीएड डिग्री के नाम पर जाल: 23 मामलों की जड़

पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी बीएड और अन्य शैक्षणिक डिग्रियों के नाम पर विद्यार्थियों से भारी रकम हड़पता था। नौकरी की तलाश में भटकते युवाओं को डिग्री दिलाने का लालच देकर वो उनसे पैसे ऐंठता था। इसी तरीके से सीकर कोतवाली क्षेत्र में उसके खिलाफ धोखाधड़ी के 23 मामले दर्ज हैं। आपराधिक मामले दर्ज होने के बाद वो फरार हो गया था और उसके बाद से ही पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी।

ये मामला उन हजारों अभिभावकों के लिए चेतावनी है जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए डिग्री और नौकरी के शॉर्टकट ढूंढते हैं।

2008 से 2026 तक: 18 साल, 17 राज्य और एक नया चेहरा

आरोपी की फरारी की कहानी अपने आप में हैरान करने वाली है। पुलिस के मुताबिक, फरारी के दौरान उसने देश के 17 राज्यों में लगातार अपने ठिकाने बदले। अलीगढ़, आंध्र प्रदेश, हैदराबाद, दिल्ली और दक्षिण भारत के विभिन्न कॉरपोरेट कोचिंग संस्थानों में वो विद्यार्थियों को पढ़ाकर अपना गुजारा करता रहा।

सबसे दिलचस्प बात ये है कि ठगी से कमाए पैसों और कोचिंग में पढ़ाकर उसने 2016 में देहरादून के राघव नगर में एक मकान भी खरीद लिया था और वहीं रहने लगा था। यानी आरोपी ने फरारी के दौरान ही एक सामान्य नागरिक जैसा जीवन बिता लिया था — घर, रोजगार और नई पहचान। जालोर के भीनमाल स्थित बोरट का मूल निवासी ये आरोपी पुलिस के लिए एक ऐसा मोहरा था जो बार-बार हाथ से फिसल जाता था।

समय घटनाक्रम
2008 के आसपास बीएड/शैक्षणिक डिग्रियों के नाम पर ठगी के मामले दर्ज, सीकर कोतवाली में 23 केस
2008–2016 17 राज्यों में ठिकाने बदले; कोचिंग संस्थानों में पढ़ाकर गुजारा
2016 देहरादून के राघव नगर में मकान खरीदा, वहीं बस गया
2025–2026 जयपुर रेंज साइबर सेल ने दिल्ली, रुड़की, देहरादून में तलाश तेज की; 35 हजार का इनाम
10 अक्टूबर 2026 वाई-फाई तकनीशियन का वेश धरकर प्रेमनगर के राघव विहार से गिरफ्तारी
11 अक्टूबर 2026 आरोपी सीकर लाया गया, कोतवाली पुलिस को सौंपा; आगे की जांच जारी

सीकर इनामी ठग की गिरफ्तारी के पीछे की रणनीति

इस सफलता के पीछे महीनों की तैयारी है — मुखबिर सूचना का डेटा विश्लेषण और आरोपी के पुराने ठिकानों की मैपिंग।

राजस्थान पुलिस के लिए ये गिरफ्तारी इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल के महीनों में राज्य में ठगी के कई बड़े मामले सामने आए हैं — जयपुर बैंक घोटाले में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी की पूरी कहानी यहां पढ़ें। वहीं साइबर ठगी से बचाव के लिए पुलिस ने शादी के कार्ड के नाम पर APK वाली ठगी पर एडवाइजरी भी जारी की थी। इन सबके बीच ये गिरफ्तारी पुलिस के लिए मनोबल बढ़ाने वाली खबर है।

फर्जी डिग्री के जाल से बचने के 5 काम के नियम

इस घटना से सबक लेकर हर अभिभावक और छात्र को ये बातें याद रखनी चाहिए:

1. डिग्री सिर्फ मान्यता प्राप्त संस्थान से लें — किसी भी संस्थान में दाखिले से पहले UGC या संबंधित नियामक की मान्यता जरूर जांचें।

2. “गारंटीड डिग्री” के वादों से सावधान — जो डिग्री बिना पढ़ाई के या असामान्य रूप से कम समय में दिलाने का दावा करे, वो ठगी हो सकती है।

3. पैसे हमेशा रसीद के साथ दें — नकद भुगतान से बचें; बैंक ट्रांसफर या चेक से ही फीस चुकाएं ताकि रिकॉर्ड रहे।

4. संस्थान का भौतिक पता सत्यापित करें — सिर्फ फोन या व्हाट्सऐप पर बात करने वाले “एजेंटों” पर भरोसा न करें।

5. शक हो तो पुलिस से संपर्क करें — राजस्थान पुलिस की साइबर हेल्पलाइन और नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

इस पूरी खबर का मूल स्रोत अमर उजाला की रिपोर्ट है, जिसमें गिरफ्तारी के ब्योरे दर्ज हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: सीकर का इनामी ठग कल्याण सिंह कौन है?

उत्तर: कल्याण सिंह (56) जालोर के भीनमाल स्थित बोरट का निवासी है, जिस पर बीएड समेत शैक्षणिक डिग्रियों के नाम पर विद्यार्थियों से ठगी के 23 मामले दर्ज हैं। वो 18 साल से फरार था और उस पर 35 हजार रुपये का इनाम था।

प्रश्न 2: पुलिस ने उसे कैसे पकड़ा?

उत्तर: जयपुर रेंज साइबर सेल और सीकर कोतवाली पुलिस की टीम ने मुखबिर की सूचना पर देहरादून के प्रेमनगर स्थित राघव विहार में उसका पता लगाया। 10 अक्टूबर को पुलिसकर्मी वाई-फाई तकनीशियन बनकर उसके घर पहुंचे और पहचान की पुष्टि होते ही उसे दबोच लिया।

प्रश्न 3: फरारी के दौरान आरोपी कहां-कहां रहा?

उत्तर: आरोपी ने 18 साल की फरारी में देश के 17 राज्यों में ठिकाने बदले। वो अलीगढ़, आंध्र प्रदेश, हैदराबाद, दिल्ली और दक्षिण भारत के कॉरपोरेट कोचिंग संस्थानों में पढ़ाकर गुजारा करता था। 2016 में उसने देहरादून में मकान खरीद लिया था।

प्रश्न 4: अब आगे क्या कार्रवाई होगी?

उत्तर: आरोपी को सीकर लाकर कोतवाली पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। अब 23 मामलों में उसके खिलाफ आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई चल रही है।

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