सीकर के बेरी पशु मेले में ऊंट ‘बादल’ और घोड़ी ‘सोनूड़ी’ का कमाल, पंजाब-हरियाणा से आए पशुपालक — 5 अक्टूबर तक चलेगा मेला

शेखावाटी की धरती पर इन दिनों एक ऐसा नजारा है, जिसे देखकर आप दांतों तले उंगली दबा लेंगे। सीकर जिले के बेरी पशु मेले में एक ऊंट और एक घोड़ी, दोनों अपने-अपने मालिकों के इशारों पर ऐसा लयबद्ध नृत्य पेश कर रहे हैं कि हजारों की भीड़ तालियां बजाने पर मजबूर हो गई है। ऊंट का नाम है ‘बादल’ और घोड़ी का ‘सोनूड़ी’ — और इस वक्त ये दोनों नाम बेरी मेले की सबसे बड़ी चर्चा का विषय बने हुए हैं।

दरअसल, सीकर जिले में हर साल लगने वाला प्रसिद्ध बेरी पशु मेला इस बार फिर अपनी पूरी रौनक के साथ जारी है। मेला 5 अक्टूबर तक चलेगा। यहां केवल राजस्थान के ही नहीं, बल्कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में पशुपालक अपने बेहतरीन पशुओं के साथ पहुंचे हैं। स्थानीय प्रतिनिधि मनोज गुर्जर के अनुसार बेरी पशु मेला शेखावाटी अंचल के सबसे प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मेलों में गिना जाता है, जहां पशुओं के व्यापार के साथ-साथ पारंपरिक दुकानों, खान-पान के स्टॉल और मनोरंजन के साधनों से मेला परिसर पूरी तरह गुलजार नजर आ रहा है।

बादल और सोनूड़ी: करतब जो हैरत में डाल रहे हैं

इस बार मेले की सबसे बड़ी खूबसूरती नेकीराम छावसरी और मांगीलाल पचार के प्रशिक्षित पशुओं की प्रस्तुति है। नेकीराम छावसरी के ऊंट और घोड़ी ने ऐसे अद्भुत करतब दिखाए कि पूरा मेला परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहीं मांगीलाल पचार के ऊंट और घोड़ी ने भी अपनी विशेष प्रस्तुतियों से जमकर वाहवाही लूटी।

पशुपालकों ने बताया कि इन पशुओं को कई महीनों तक कठिन अभ्यास कराया जाता है, तब जाकर ये इतने कुशल बनते हैं। खास बात ये है कि ये करतब केवल मनोरंजन नहीं हैं — पशुओं की चपलता, आज्ञाकारिता और स्वास्थ्य का प्रदर्शन खरीद-फरोख्त में उनकी कीमत भी तय करता है। यानी बादल और सोनूड़ी की हर एक झलक उनके मालिकों के लिए कदर और कीमत दोनों बढ़ा रही है।

तीन राज्यों के पशुपालक, एक ही परिसर में खरीद-फरोख्त

बेरी पशु मेले की साख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें भाग लेने के लिए केवल सीकर या राजस्थान के अन्य जिलों से ही लोग नहीं आए हैं। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में पशुपालक अपने बेहतरीन पशुओं के साथ पहुंचे हैं। मेले में विभिन्न उन्नत नस्लों के ऊंट, घोड़े, घोड़ियां और अन्य मवेशी देखने को मिल रहे हैं।

मेले में आया एक विशालकाय भैंसा भी दर्शकों के बीच विशेष कौतूहल का विषय बना हुआ है। बाहरी राज्यों से आए पशुपालक अपने पशुओं के लालन-पालन और प्रशिक्षण के अनुभवों को स्थानीय लोगों के साथ साझा कर रहे हैं, जिससे मेले का माहौल बेहद जीवंत हो गया है। हर दिन आसपास के गांवों सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों लोग यहां पहुंच रहे हैं — कोई पशु खरीदने, कोई देखने और कोई बस इस ग्रामीण उत्सव का आनंद लेने।

रात ढलते ही शुरू होता है दूसरा मेला

दिन के समय पशुओं की गतिविधियों और व्यापार के बाद रात में भी मेले की रौनक कम नहीं होती। शाम ढलते ही मेला परिसर में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत होती है। स्थानीय और प्रांतीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत लोक नृत्य और संगीत दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर रहे हैं। ये रात के कार्यक्रम बेरी मेले को केवल पशु व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि शेखावाटी की संस्कृति का जश्न बना देते हैं।

मेले के अंतिम दिन, यानी 5 अक्टूबर को भव्य समापन समारोह आयोजित होगा। इसमें शानदार प्रदर्शन करने वाले ऊंटों और घोड़ियों के साथ-साथ उनके पशुपालकों को प्रशासन और मेला समिति की ओर से विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। यानी बादल और सोनूड़ी जैसे स्टार पशुओं को ट्रॉफी और सम्मान का तोहफा भी मिलेगा।

मेले की मुख्य जानकारी एक नजर में

विवरण जानकारी
मेले का नाम बेरी पशु मेला
स्थान बेरी, जिला सीकर (शेखावाटी अंचल), राजस्थान
आयोजन की अवधि 5 अक्टूबर 2026 तक
मुख्य आकर्षण ऊंट ‘बादल’ और घोड़ी ‘सोनूड़ी’ के नृत्य व करतब
प्रमुख प्रशिक्षक नेकीराम छावसरी, मांगीलाल पचार
शामिल राज्य राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश
पशुओं की नस्लें उन्नत नस्लों के ऊंट, घोड़े, घोड़ियां, भैंसा व अन्य मवेशी
रात के कार्यक्रम लोक नृत्य, लोक संगीत, रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
समापन समारोह 5 अक्टूबर — सर्वश्रेष्ठ पशुओं व पशुपालकों का सम्मान

पशु खरीदने जा रहे हैं? इन बातों का रखें ध्यान

पशु मेलों में खरीद-फरोख्त एक गंभीर सौदा होता है, और बेरी जैसे मेले में अनुभवी पशुपालक भी आते हैं। अगर आप पशु खरीदने के इरादे से जा रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें।

सबसे पहले पशु का स्वास्थ्य खुद जांचें — आंखों की चमक, चाल की सहजता, दांत और खाल की स्थिति पशु की उम्र और सेहत बताती है। दूसरा, मोलभाव के दौरान जल्दबाजी न करें; एक ही नस्ल के कई पशु मेले में होते हैं, तो दो-तीन जगह भाव जरूर पूछें। तीसरा, प्रशिक्षित और करतब दिखाने वाले पशुओं की कीमत आम पशुओं से ज्यादा होती है — इसकी मानसिक तैयारी पहले से रखें। और आखिर में, भुगतान और परिवहन की व्यवस्था पहले से पक्की कर लें, क्योंकि मेले के अंतिम दिनों में ट्रक और टैम्पो मिलना मुश्किल हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल 1: बेरी पशु मेला 2026 कब तक चलेगा?

जवाब: बेरी पशु मेला 5 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। मेले के अंतिम दिन भव्य समापन समारोह होगा, जिसमें सर्वश्रेष्ठ पशुओं और पशुपालकों को सम्मानित किया जाएगा।

सवाल 2: बेरी पशु मेला कहां लगता है?

जवाब: यह मेला राजस्थान के सीकर जिले के बेरी में लगता है, जो शेखावाटी अंचल का प्रसिद्ध ऐतिहासिक पशु मेला है।

सवाल 3: इस बार मेले का मुख्य आकर्षण क्या है?

जवाब: ऊंट ‘बादल’ और घोड़ी ‘सोनूड़ी’ के लयबद्ध नृत्य और करतब इस बार मेले के सबसे बड़े आकर्षण बने हुए हैं। नेकीराम छावसरी और मांगीलाल पचार के प्रशिक्षित पशुओं ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया है।

सवाल 4: क्या मेले में केवल राजस्थान के पशुपालक आते हैं?

जवाब: नहीं, इस मेले में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में पशुपालक अपने उन्नत नस्लों के पशुओं के साथ पहुंचे हैं।

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