देवयानी सरोवर दीपोत्सव: सांभरलेक में 21 हजार दीपों से जगमगा उठा ऐतिहासिक सरोवर, हजारों श्रद्धालु उमड़े

21 हजार दीप, हजारों श्रद्धालु और एक जगमगाता सरोवर

देवयानी सरोवर दीपोत्सव इस बार सांभरलेक में जिस भव्यता के साथ मनाया गया, उसने राजस्थान के दीपावली उत्सवों में एक नई मिसाल कायम कर दी है। जयपुर ग्रामीण के सांभरलेक स्थित ऐतिहासिक देवयानी सरोवर पर एक साथ 21 हजार दीप प्रज्वलित किए गए और सरोवर का पूरा परिसर दीपों की अलौकिक रोशनी से जगमगा उठा। शाम ढलते ही जैसे ही हजारों दीप एक साथ जले, पानी पर तैरती रोशनी ने विहंगम दृश्य रच दिया। इस भव्य आयोजन में हजारों श्रद्धालु और पर्यटक शामिल हुए, जिनमें स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालु भी थे।

देवयानी सरोवर दीपोत्सव: 21 हजार दीपों की रोशनी में नहाया सरोवर

दीपोत्सव की सबसे बड़ी खासियत इसकी संख्या नहीं, इसका सामूहिक भाव था। सरोवर के घाटों पर एकत्र हुए हजारों श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार के बीच पवित्र देवयानी सरोवर में 21 हजार दीपकों का दान किया। दीप जलते ही सरोवर का पानी सोने की तरह चमकने लगा और चारों ओर फैली दीपों की आभा ने पूरे परिसर को एक अलग ही दुनिया में बदल दिया। मनमोहक विद्युत सजावट और आकाश में हुई भव्य आतिशबाजी ने दृश्य की भव्यता बढ़ा दी। श्रद्धालुओं ने सरोवर तट पर पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य और पूरे क्षेत्र में सुख-शांति व समृद्धि की मंगल कामना की।

जागेश्वर नाथ घाट पर महाआरती, शंखनाद से गूंजा परिसर

दीपोत्सव के दौरान सरोवर के प्रसिद्ध जागेश्वर नाथ मंदिर घाट पर आयोजित भव्य महाआरती पूरे कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही। पंडितों के वेदमंत्रोच्चार, शंखनाद और डमरू की ध्वनि के साथ जब महाआरती शुरू हुई, तो पूरा वातावरण शिव भक्ति और धार्मिक उल्लास से सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारों के साथ महाआरती में भाग लिया और मंदिर परिसर घंटों तक भक्ति के रंग में रंगा रहा।

देवयानी सरोवर दीपोत्सव क्यों है खास: पौराणिक महत्व और आस्था

देवयानी सरोवर को सांभरलेक की सबसे पवित्र और ऐतिहासिक धरोहरों में गिना जाता है। स्थानीय मान्यता है कि यह सरोवर पौराणिक काल से जुड़ा है और यहां स्नान व दीपदान करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। सरोवर के आसपास कई प्राचीन मंदिर स्थित हैं, जिनमें जागेश्वर नाथ मंदिर सबसे प्रमुख है। यही वजह है कि दीपावली पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है।

सांभरलेक खुद भी आस्था और इतिहास का अनोखा संगम है। यहां स्थित शाकंभरी माता मंदिर का संबंध सांभर झील की उत्पत्ति की कथा से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि देवी शाकंभरी के आशीर्वाद से यहां की झील का खारा पानी नमक में बदल गया था। आज भी हजारों श्रद्धालु शाकंभरी माता के दर्शन के लिए सांभरलेक आते हैं और देवयानी सरोवर में स्नान को अपनी यात्रा का अहम हिस्सा मानते हैं।

सांभर झील: नमक, फ्लेमिंगो और हजारों साल की विरासत

देवयानी सरोवर से कुछ ही दूरी पर फैली सांभर झील राजस्थान की एक और बड़ी पहचान है। यह देश की सबसे बड़ी खारे पानी की अंतर्देशीय झील मानी जाती है और इसका फैलाव करीब 230 वर्ग किलोमीटर के आसपास बताया जाता है। झील का नमक उत्पादन सदियों से इस क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ रहा है और देश के कुल नमक उत्पादन में सांभर की हिस्सेदारी अहम मानी जाती है। झील के किनारे फैले नमक के खेत और सफेद नमक की परतें पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हैं। सर्दियों में यहां हजारों फ्लेमिंगो और प्रवासी पक्षी आते हैं, जो पक्षी प्रेमियों के लिए खास आकर्षण है।

सांभरलेक का इतिहास भी उतना ही समृद्ध है। यह कस्बा कभी चौहान वंश की राजधानी हुआ करता था और यहां के किले व हवेलियां उस दौर की गवाही देती हैं। झील के किनारे स्थित देवयानी सरोवर, शाकंभरी मंदिर और पुराने घाट इस विरासत की जीवंत कड़ियां हैं।

सांभरलेक कैसे पहुंचें: जयपुर से यात्रा गाइड

सांभरलेक जयपुर से करीब 80 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है और यहां पहुंचना आसान है। सड़क मार्ग से जयपुर से अजमेर रोड होते हुए करीब दो घंटे में सांभरलेक पहुंचा जा सकता है। रेल मार्ग से भी यहां आना सुविधाजनक है — सांभरलेक रेलवे स्टेशन जयपुर-अहमदाबाद रेल लाइन पर स्थित है और जयपुर से कई ट्रेनें यहां रुकती हैं। त्योहारी मौसम में यहां भीड़ बढ़ जाती है, इसलिए यात्रा से पहले ट्रेन और ठहरने की जानकारी ले लें।

सांभरलेक पहुंचने पर देवयानी सरोवर, जागेश्वर नाथ मंदिर, शाकंभरी माता मंदिर और सांभर झील का किनारा एक ही यात्रा में देखे जा सकते हैं। स्थानीय बाजार में सांभर का नमक और हस्तशिल्प भी खरीदा जा सकता है। राजस्थान में दीपावली के दौरान जयपुर की रोशनी और मेट्रो की विशेष व्यवस्था भी पर्यटकों के लिए आकर्षण रहती है — जयपुर में दीपावली पर मेट्रो की आखिरी ट्रेन रात 12:30 बजे तक चल रही है, जिससे राजधानी में घूमना आसान हो गया है। वहीं धनतेरस पर प्रदेश में हुए करीब 20,000 करोड़ रुपये के कारोबार ने इस बार के त्योहारी मौसम की रौनक को दिखा दिया है।

सुरक्षा और व्यवस्था: प्रशासन के पुख्ता इंतजाम

हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सरोवर परिसर में भीड़ प्रबंधन, रोशनी और घाटों पर सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए थे, ताकि दीपदान के दौरान कोई अव्यवस्था न हो। आतिशबाजी के दौरान भी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया और प्रशासन की टीम पूरे कार्यक्रम के दौरान मौके पर मौजूद रही। राजस्थान में मंदिरों में दर्शन की व्यवस्था को लेकर मंदिर लाइव दर्शन और वर्चुअल यात्रा की सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे दूर रहने वाले श्रद्धालु भी आरती और दर्शन से जुड़ सकते हैं।

बिंदु विवरण
आयोजन देवयानी सरोवर दीपोत्सव 2026
स्थान देवयानी सरोवर, सांभरलेक, जयपुर ग्रामीण
तारीख 8 नवंबर 2026 (दीपावली अवसर)
दीपों की संख्या 21,000 दीप
मुख्य आकर्षण जागेश्वर नाथ मंदिर घाट पर भव्य महाआरती
जयपुर से दूरी करीब 80 किलोमीटर
स्रोत News18 Rajasthan

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

देवयानी सरोवर दीपोत्सव में कितने दीप जलाए गए?
इस बार के दीपोत्सव में देवयानी सरोवर पर एक साथ 21 हजार दीप प्रज्वलित किए गए। हजारों श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार के बीच सरोवर में दीपदान किया।

देवयानी सरोवर कहां स्थित है?
देवयानी सरोवर राजस्थान के जयपुर ग्रामीण जिले के सांभरलेक कस्बे में स्थित है। यह सांभर झील के पास है और जयपुर से करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर है।

दीपोत्सव के दौरान महाआरती कहां हुई?
भव्य महाआरती सरोवर के प्रसिद्ध जागेश्वर नाथ मंदिर घाट पर आयोजित हुई। पंडितों के वेदमंत्रोच्चार, शंखनाद और डमरू की ध्वनि के साथ हुई इस आरती में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

सांभरलेक घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
दीपावली के आसपास का समय देवयानी सरोवर के दीपोत्सव के लिए सबसे अच्छा है, जबकि सर्दियों का मौसम सांभर झील पर फ्लेमिंगो और प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए आदर्श माना जाता है।

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