RCA चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट की रोक: नतीजे सीलबंद लिफाफे में, वोटर लिस्ट विवाद क्या है

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने क्रिकेट प्रशासन की पूरी प्रक्रिया को कुछ दिनों के लिए ठहरा दिया है। शीर्ष अदालत ने चुनाव परिणामों की घोषणा पर अंतरिम रोक लगा दी है और कहा है कि नतीजे सीलबंद लिफाफे में रखे जाएं। यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक इस विवाद से जुड़े सभी मुद्दों का निपटारा नहीं हो जाता। करीब तीन साल के इंतजार के बाद हुए इस चुनाव में कई बड़े राजनीतिक परिवारों के चिरागों की साख दांव पर लगी थी, लेकिन अब फैसला कोर्ट के फैसले के बाद ही सामने आएगा।

क्या है पूरा मामला: तीन नए जिलों पर अटका पेच

इस पूरे विवाद की जड़ राजस्थान के तीन नवगठित जिलों से जुड़ी है — खैरथल-तिजारा, बालोतरा और डीडवाना-कुचामन। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर इन तीनों जिलों के क्रिकेट संघों को RCA की वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) में शामिल करने की कोशिश की जा रही थी। इसका लगातार विरोध हो रहा था, क्योंकि विरोधियों का कहना था कि ये संघ चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र नहीं हैं।

RCA के पूर्व कन्वीनर और सवाईमाधोपुर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष डी.डी. कुमावत ने इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनके साथ मेघा गौड़ भी याचिकाकर्ता बनीं। याचिका में वोटर लिस्ट की कथित विसंगतियों और इन तीनों जिलों को मतदाता सूची में शामिल करने के प्रयासों पर कड़ी आपत्ति जताई गई थी। यही मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और वहां से बड़ा आदेश आया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा: मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ का आदेश

डी.डी. कुमावत और मेघा गौड़ की याचिका पर सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने की। पीठ ने तीन बातों को विशेष रूप से गंभीर माना: पहला, तीन नए जिलों को वोटर लिस्ट में शामिल करने का मुद्दा — क्या ये संघ पात्रता के नियमों पर खरे उतरते हैं? दूसरा, चुनाव में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का अभाव। तीसरा, चुनाव संचालन में नियम 11 का कथित उल्लंघन।

इन तीनों बिंदुओं को महत्वपूर्ण मानते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि RCA के चुनाव परिणाम घोषित न किए जाएं। इसके बजाय परिणामों को सीलबंद लिफाफे में रखा जाए, जब तक कि उच्च न्यायालय इस मामले से जुड़े मुद्दों का निपटारा नहीं कर देता।

सबसे अहम बात यह रही कि सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने के निर्देश दिए। अदालत ने AAG को पाबंद किया कि वे इस आदेश की जानकारी फौरन RCA के प्रशासक को दें, ताकि प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी न हो।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी, अरुंधति काटजू और धनुर्धर सिंह राणा ने पक्ष रखा।

चुनाव का गणित: 6 पदों पर महामुकाबला

करीब तीन साल बाद हुए इस चुनाव को “महामुकाबला” कहा जा रहा था, क्योंकि मैदान में कई बड़े नेताओं के बेटों की साख दांव पर थी। कुल 6 पदों के लिए उम्मीदवारों की सीधी टक्कर थी:

पदमुकाबला
अध्यक्षधनंजय सिंह खींवसर बनाम बृजकिशोर उपाध्याय
उपाध्यक्षमोहित यादव बनाम रतन सिंह शेखावत
सचिवपिंकेश कुमार जैन बनाम मोहित यादव
संयुक्त सचिवविनोद सहारण बनाम राजेश सारस्वत
कोषाध्यक्षआशीष तिवाड़ी बनाम विष्णु प्रकाश अग्रवाल
कार्यकारिणी सदस्यधर्मवीर सिंह शेखावत बनाम अरिष्ट सिंघवी

अध्यक्ष पद की टक्कर सबसे ज्यादा चर्चित रही, क्योंकि धनंजय सिंह खींवसर कैबिनेट मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे हैं। इस चुनाव में तीन गुट आमने-सामने थे — धनंजय गुट, पराक्रम गुट और उपाध्याय खेमा।

वोटिंग का हिसाब: 38 में से 35 ने डाले वोट

RCA चुनाव में कुल 38 मतदाताओं का प्रावधान है — 36 जिला क्रिकेट संघों के प्रतिनिधि और 2 पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी। चुनाव के दिन 35 जिला क्रिकेट संघों के सचिवों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। तीन नए जिला क्रिकेट संघों — डीडवाना-कुचामन, खैरथल-तिजारा और बालोतरा — के सचिवों ने स्वेच्छा से मतदान का बहिष्कार किया।

डीडवाना-कुचामन जिला क्रिकेट संघ के सचिव ओमप्रकाश बेनीवाल ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह फैसला स्वेच्छा से लिया गया था और उनका उद्देश्य चुनाव के परिणाम को प्रभावित करना बिल्कुल नहीं था। जिला संघों के सचिवों के अलावा पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर गगन खोडा और पंकज सिंह ने भी मतदान किया।

इस तरह मतदान तो हो गया, लेकिन परिणामों की घोषणा पर अब सुप्रीम कोर्ट की रोक लग गई है। बैलेट बॉक्स खुलेंगे, लेकिन नतीजे सीलबंद लिफाफे में बंद रहेंगे।

याचिका में और क्या-क्या था: प्रशासक और लोकपाल के लंबित मामले

याचिका में सिर्फ वोटर लिस्ट का मुद्दा ही नहीं उठाया गया था। इसमें यह भी रेखांकित किया गया कि RCA में लोकपाल की नियुक्ति और प्रशासक के स्तर पर क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण मामले लंबे समय से लंबित पड़े थे। इन सभी अनसुलझे विवादों के बीच चुनाव परिणाम घोषित करना उचित नहीं था, ऐसा याचिकाकर्ताओं का तर्क था। सुप्रीम कोर्ट ने इन बातों को भी गंभीरता से लिया।

अब आगे क्या होगा: RCA चुनाव की आगे की राह

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह रोक कब हटेगी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि जब तक उच्च न्यायालय इस मामले से जुड़े मुद्दों का निपटारा नहीं कर देता, तब तक नतीजे सीलबंद लिफाफे में रहेंगे। इसका मतलब है कि अगली सुनवाई और हाई कोर्ट के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं।

राजस्थान सरकार के AAG को निर्देश मिल चुके हैं कि वे आदेश की जानकारी RCA के प्रशासक तक तुरंत पहुंचाएं। यानी अब गेंद प्रशासन और न्यायपालिका के पाले में है। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के साथ-साथ राजस्थान के क्रिकेट प्रेमियों को भी इंतजार करना होगा कि नतीजे कब सामने आते हैं।

एक बात तय है — इस फैसले ने RCA चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। तीन नए जिलों की पात्रता, महिलाओं के प्रतिनिधित्व और चुनाव नियमों का पालन — ये तीनों मुद्दे अब कोर्ट की निगरानी में सुलझेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल 1: सुप्रीम कोर्ट ने RCA चुनाव परिणाम पर रोक क्यों लगाई?

जवाब: तीन नए जिलों (खैरथल-तिजारा, बालोतरा, डीडवाना-कुचामन) को वोटर लिस्ट में शामिल करने के विवाद, चुनाव में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के अभाव और नियम 11 के कथित उल्लंघन को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर माना, इसलिए नतीजों की घोषणा पर अंतरिम रोक लगाई गई।

सवाल 2: चुनाव परिणाम अब कब घोषित होंगे?

जवाब: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक नतीजे सीलबंद लिफाफे में रहेंगे, जब तक उच्च न्यायालय इस मामले से जुड़े सभी मुद्दों का निपटारा नहीं कर देता। इसकी कोई निश्चित तारीख अभी तय नहीं है।

सवाल 3: याचिका किसने दायर की थी?

जवाब: RCA के पूर्व कन्वीनर और सवाईमाधोपुर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष डी.डी. कुमावत ने मेघा गौड़ के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी, अरुंधति काटजू और धनुर्धर सिंह राणा ने पक्ष रखा।

सवाल 4: RCA चुनाव में कुल कितने वोटर थे और कितनों ने वोट डाला?

जवाब: कुल 38 मतदाताओं का प्रावधान था — 36 जिला संघों के प्रतिनिधि और 2 पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी। इनमें से 35 जिला संघों के सचिवों ने वोट डाला, जबकि तीन नए जिला संघों ने स्वेच्छा से मतदान का बहिष्कार किया। पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर गगन खोडा और पंकज सिंह ने भी मतदान किया।

Leave a Comment