Congress का डबल अटैक: चुनाव आयोग को ज्ञापन, 5 जिलों में CEC के खिलाफ सड़क पर हंगामा — “वोट चोरी” के आरोप, इस्तीफे की मांग

जयपुर/बीकानेर। राजस्थान की राजनीति में मंगलवार 29 सितंबर 2026 का दिन कांग्रेस के नाम रहा। पार्टी ने एक ही दिन में दो मोर्चों पर सरकार और चुनाव आयोग को घेरा। पहले जयपुर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल राज्य निर्वाचन आयोग के दफ्तर पहुंचा और नगर निकाय चुनावों में धांधली के आरोपों का ज्ञापन सौंपा। उसके बाद बीकानेर, अलवर, डीडवाना-कुचामन, सवाई माधोपुर और भीलवाड़ा समेत पांच जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।

राज्य निर्वाचन आयोग को ज्ञापन: “गुंडागर्दी और आतंक का माहौल” का आरोप

मंगलवार दोपहर को कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल राज्य निर्वाचन आयोग पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली मौजूद थे। आयोग को सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि हाल ही में संपन्न हुए नगर निकाय चुनावों के दौरान प्रदेश भर में “गुंडागर्दी और आतंक का माहौल” पैदा किया गया।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनाव के दौरान पूरी सरकारी मशीनरी, पुलिस और प्रशासन सत्तारूढ़ दल के हित में काम करता रहा। प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि पार्षदों की खरीद-फरोख्त और सरकार के पक्ष में माहौल बनाने के लिए प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग हुआ। ज्ञापन के साथ पार्टी ने आयोग को कुछ सबूत भी सौंपे हैं और उन अधिकारियों के खिलाफ लिखित शिकायतें दी हैं, जो पार्टी के मुताबिक “सत्तारूढ़ दल के एजेंट बनकर काम कर रहे थे।”

कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि चुनाव के दौरान प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग और सत्ता पक्ष की तानाशाही की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

डोटासरा की चेतावनी: “अधिकारियों के नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होंगे”

पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने ज्ञापन के बाद मीडिया से बातचीत में बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि संविधान की शपथ लेकर जो अधिकारी भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं, उनके नाम आने वाले समय में राजस्थान विधानसभा में “स्वर्ण अक्षरों में लिखे जाएंगे।” डोटासरा के मुताबिक इसका मकसद यह है कि आने वाली पीढ़ी भी याद रख सके कि उनके पूर्वजों ने अधिकारी बनकर इतिहास के पन्नों में किस तरह अपनी भूमिका दर्ज कराई।

वहीं कांग्रेस नेताओं ने चुनाव परिणामों के आंकड़ों को लेकर भी भाजपा के दावों पर सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि भाजपा को इस बार के नगर निकाय चुनावों में पिछले नगर निकाय चुनावों, विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनावों की तुलना में कम वोट मिले हैं, जबकि कांग्रेस को लगभग भाजपा के बराबर मत प्राप्त हुए हैं। कांग्रेस का कटाक्ष था कि भाजपा जिस “प्रचंड बहुमत” का दावा करती है और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए प्रधानमंत्री और गृहमंत्री स्तर से ट्वीट करवाती है, वह सिर्फ नाकामियों को छिपाने का ढोंग है।

5 जिलों में CEC के खिलाफ प्रदर्शन: अलवर में टूटी बैरिकेडिंग, डीडवाना में फूंका पुतला

राजधानी में ज्ञापन के साथ-साथ कांग्रेस ने देशभर में चल रहे अभियान के तहत राजस्थान के पांच जिलों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि चुनाव आयोग “वोट चोरी” करा रहा है।

जिलावार प्रदर्शन का ब्योरा: बीकानेर में कोटगेट से जिला कलेक्टर कार्यालय तक पैदल मार्च, ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ की तख्तियां; नेतृत्व में चिरंजीव राव (AICC सचिव व सह प्रभारी), भंवर सिंह भाटी, अनिल कल्ला, मदनगोपाल मेघवाल, बिशनाराम सियाग। अलवर में मालवीय नगर चौराहे से मिनी सचिवालय तक जुलूस, बैरिकेडिंग तोड़ने का प्रयास, धक्का-मुक्की, कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी; नेतृत्व प्रकाश गंगावत (जिलाध्यक्ष) के साथ योगेश मिश्रा, अजीत यादव, नरेंद्र मीणा, रमन सैनी, अंकित गोयल। डीडवाना-कुचामन में जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन; नेतृत्व जाकिर हुसैन गेसावत (मकराना विधायक व जिलाध्यक्ष)। सवाई माधोपुर में अंबेडकर सर्किल से कलेक्ट्रेट तक जुलूस और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन; नेतृत्व इंदिरा मीणा (बामनवास विधायक व जिलाध्यक्ष)। भीलवाड़ा में जिला कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन, कार्यकर्ताओं के हाथों में काले बैलून; नेतृत्व रामलाल जाट (पूर्व राजस्व मंत्री व देहात जिलाध्यक्ष)।

अलवर में सबसे ज्यादा तनावपूर्ण स्थिति बनी। कार्यकर्ता मालवीय नगर चौराहे पर एकत्र हुए और जुलूस के रूप में मिनी सचिवालय की ओर बढ़े। पुलिस ने सचिवालय से कुछ दूरी पर बैरिकेडिंग कर रखी थी। कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग पर चढ़ने और तोड़ने का प्रयास किया, तो पुलिस से धक्का-मुक्की हो गई। बाद में पुलिस ने कार्यकर्ताओं को पीछे खदेड़ दिया और प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तारी दी। पुलिस तीन बसों में भरकर उन्हें दूर ले गई। इस दौरान कार्यकर्ता चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। अलवर के जिलाध्यक्ष प्रकाश गंगावत ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग एसआईआर (SIR) के नाम पर वोट चोरी करा रहा है और ज्ञानेश कुमार “भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि इस्तीफा नहीं दिया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

डीडवाना-कुचामन में मकराना विधायक जाकिर हुसैन गेसावत के नेतृत्व में कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध जताया गया और “ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो” व “वोट चोरी नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाए गए।

सवाई माधोपुर में विधायक इंदिरा मीणा के नेतृत्व में जिला कांग्रेस कमेटी ने कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता अंबेडकर सर्किल पर एकत्र हुए और जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे। ज्ञापन में कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि SIR, मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा कर लोकतंत्र की हत्या की गई है। मांग की गई कि अनुच्छेद 324(5) के तहत ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए, स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी हो। इंदिरा मीणा ने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से नहीं हटाया जाता, कांग्रेस का धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।

भीलवाड़ा में पूर्व राजस्व मंत्री एवं देहात कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामलाल जाट के नेतृत्व में जिला कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन हुआ। कार्यकर्ता हाथों में काले बैलून लेकर पहुंचे। जाट ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने फॉर्म नंबर-6 में गलत तरीके से काम किया है और “ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी के माध्यम से सरकारें बनवाई हैं।” जाट ने कार्यकर्ताओं से वोटर लिस्ट में अपना नाम जांचने की अपील भी की।

बीकानेर में शहर और देहात कांग्रेस कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में कोटगेट से जिला कलेक्टर कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला गया। प्रदर्शन में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं राजस्थान के सह प्रभारी चिरंजीव राव भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए। चिरंजीव राव ने कहा कि राहुल गांधी की ओर से लगातार उठाए जा रहे कथित वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस लंबे समय से सवाल उठा रही है और अब चुनाव आयोग के भीतर भी फैसलों को लेकर सवाल सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वोट प्रतिशत के लिहाज से कांग्रेस का निकाय चुनावों में प्रदर्शन शानदार रहा है और आगामी पंचायतीराज चुनाव में पार्टी इससे बेहतर प्रदर्शन की तैयारी कर रही है।

“वोट चोरी” विवाद का पूरा बैकग्राउंड: यह मुद्दा कहां से शुरू हुआ

कांग्रेस की ओर से “वोट चोरी” का मुद्दा लंबे समय से उठाया जा रहा है। राहुल गांधी ने कई मौकों पर चुनाव आयोग पर आरोप लगाए हैं कि मतदाता सूची में गड़बड़ी और अन्य अनियमितताओं के जरिए भाजपा को फायदा पहुंचाया जा रहा है। इसी कड़ी में पार्टी अब मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन कर रही है।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से अपने कामकाज और मतदाता सूची से जुड़े कदमों को कानूनी प्रक्रिया के तहत उठाया गया बताया गया है। आयोग ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) जैसी प्रक्रियाओं को मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करने का नियमित अभियान बताया है, जबकि कांग्रेस इसे वोट कटने और वोट चोरी का हथियार बता रही है। राजस्थान में यह मुद्दा इसलिए भी गर्म है क्योंकि यहां हाल ही में नगर निकाय चुनाव संपन्न हुए हैं और अब पंचायतीराज चुनावों की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है — हाईकोर्ट ने 15 नवंबर 2026 तक पंचायत चुनाव पूरे कराने की डेडलाइन तय की है।

आगे क्या: पंचायत चुनावों पर कांग्रेस की निशाना साधी

कांग्रेस नेताओं के बयानों से साफ है कि पार्टी निकाय चुनावों के नतीजों और “वोट प्रतिशत” के अपने दावे को आगे पंचायत चुनावों तक ले जाना चाहती है। चिरंजीव राव ने कहा कि आगामी पंचायतीराज चुनाव में पार्टी निकाय चुनावों से बेहतर प्रदर्शन की तैयारी कर रही है। वहीं इंदिरा मीणा ने दावा किया कि कांग्रेस पंचायतीराज चुनावों के लिए पूरी तरह तैयार है और जनता इस बार भाजपा को सबक सिखाएगी।

वोटर लिस्ट में अपना नाम जांचना क्यों जरूरी है

भीलवाड़ा में कांग्रेस नेता रामलाल जाट ने कार्यकर्ताओं से वोटर लिस्ट में अपना नाम जांचने की अपील की — और यह सलाह हर मतदाता के लिए उपयोगी है। नाम कटने या गलत दर्ज होने की स्थिति में वोट का अधिकार प्रभावित हो सकता है। आप चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर अपने नाम, विधानसभा और बूथ की जानकारी आसानी से सत्यापित कर सकते हैं। अगर नाम न मिले या कोई त्रुटि दिखे, तो समय रहते फॉर्म-6 भरकर सुधार या नया नामांकन कराया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. 29 सितंबर 2026 को कांग्रेस ने राज्य निर्वाचन आयोग को ज्ञापन क्यों सौंपा?

कांग्रेस का आरोप है कि हाल के नगर निकाय चुनावों में सरकारी मशीनरी, पुलिस और प्रशासन का दुरुपयोग हुआ और पार्षदों की खरीद-फरोख्त कर चुनाव प्रभावित किया गया। पार्टी ने आयोग से निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

2. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग क्यों की जा रही है?

कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग SIR और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं के नाम पर “वोट चोरी” करा रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं। इसी के विरोध में मंगलवार को बीकानेर, अलवर, डीडवाना-कुचामन, सवाई माधोपुर और भीलवाड़ा में प्रदर्शन हुए।

3. राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपे गए ज्ञापन में डोटासरा ने अधिकारियों को लेकर क्या कहा?

गोविंद सिंह डोटासरा ने चेतावनी दी कि संविधान की शपथ लेकर जो अधिकारी भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं, उनके नाम आने वाले समय में राजस्थान विधानसभा में स्वर्ण अक्षरों में लिखे जाएंगे।

4. सवाई माधोपुर में ज्ञापन में क्या कानूनी मांगें उठाई गईं?

सवाई माधोपुर में जिला कांग्रेस कमेटी ने ज्ञापन में मांग की कि अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जाए, स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए।

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