राजस्थान घूमने का शौक देश के लोगों पर कुछ इस कदर चढ़ा है कि आंकड़े अब चौंकाने लगे हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के ताजा सर्वे के मुताबिक, देश में घर से बाहर कम से कम एक रात रुकने वाली हर 100 घरेलू यात्राओं में करीब 8 यात्राओं का गंतव्य राजस्थान है। पर्यटन मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि साल 2025 में 25.25 करोड़ घरेलू पर्यटक राजस्थान पहुंचे — जो 2024 के मुकाबले 9.7 फीसदी ज्यादा है। और अगर चार साल पुराना हिसाब देखें तो तस्वीर और भी प्रभावशाली है: 2022 में जहां 10.83 करोड़ घरेलू सैलानी प्रदेश आए थे, वहां 2025 में यह संख्या बढ़कर 25.25 करोड़ हो गई। यानी महज चार साल में 133 फीसदी की बढ़ोतरी।
ये आंकड़े किसी छोटे अखबार की खबर नहीं, बल्कि जुलाई 2025 से जून 2026 के दौरान किए गए NSO के घरेलू पर्यटन खर्च सर्वे और पर्यटन मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों से लिए गए हैं। इसका मतलब यह है कि राजस्थान अब सिर्फ एक पर्यटन प्रदेश नहीं रहा — यह देश के उन तीन राज्यों में शामिल हो गया है जहां घरेलू यात्रियों का सबसे ज्यादा जमावड़ा होता है।
देश में तीसरे नंबर पर राजस्थान: UP-तमिलनाडु से आगे कौन, पीछे कौन
NSO सर्वे के मुताबिक ओवरनाइट घरेलू यात्राओं के मामले में राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर है। उत्तर प्रदेश 15.7 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले पायदान पर है, तमिलनाडु 13.4 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर, और राजस्थान 8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे नंबर पर मजबूती से खड़ा है।
गौर करने वाली बात यह है कि यूपी और तमिलनाडु की विशाल जनसंख्या और धार्मिक पर्यटन केंद्रों की मौजूदगी के बावजूद राजस्थान का आठ फीसदी हिस्सेदारी हासिल करना कम बड़ी उपलब्धि नहीं है। राजस्थान के पास वह विविधता है जो हर उम्र और हर रुचि के यात्री को आकर्षित करती है — पुष्कर और खाटूश्यामजी जैसे धार्मिक केंद्र, जयपुर-जोधपुर-उदयपुर के किले-महल, जैसलमेर का रेगिस्तान, रणथंभौर-सरिस्का के टाइगर रिजर्व और अजमेर शरीफ दरगाह जैसे आस्था के केंद्र।
धार्मिक यात्राएं सबसे आगे: हर दो में से एक यात्रा आस्था के नाम
सर्वे में सबसे दिलचस्प खुलासा यह हुआ है कि देश में होने वाली ओवरनाइट घरेलू यात्राओं में सबसे बड़ा हिस्सा धार्मिक और तीर्थ यात्राओं का है। कुल यात्राओं में 47.7 फीसदी यात्राएं धार्मिक और तीर्थस्थलों के लिए हुईं। इसके बाद 29.6 फीसदी यात्राएं इलाज और स्वास्थ्य से जुड़ी रहीं। छुट्टियां और मनोरंजन के लिए 22.1 फीसदी लोग यात्रा पर निकले, जबकि 0.6 फीसदी यात्राएं शॉपिंग के लिए हुईं।
राजस्थान के लिए यह आंकड़ा खास तौर पर महत्वपूर्ण है। यहां धार्मिक स्थलों की भरमार है — पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर, खाटूश्यामजी, सांवरियाजी, अजमेर शरीफ दरगाह, नाथद्वारा, डिग्गी कल्याणजी — और इसके साथ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और एडवेंचर टूरिज्म के भी मजबूत विकल्प मौजूद हैं। यानी आस्था के नाम पर आने वाला यात्री किले-महल भी देख जाता है, और मनोरंजन के लिए आया पर्यटक धार्मिक स्थल भी घूम आता है। एक ही यात्रा में दो-दो फायदे — यही राजस्थान की सबसे बड़ी ताकत है।
उम्र के हिसाब से देखें तो धार्मिक पर्यटन का रुझान हर आयु वर्ग में दिखता है। 15 से 24 साल के युवाओं की 45.3 फीसदी यात्राएं धार्मिक और तीर्थ स्थलों के लिए थीं। 25 से 59 साल की उम्र के लोगों में यह हिस्सेदारी 50.7 फीसदी रही। 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में धार्मिक यात्रा के साथ मेडिकल टूरिज्म का रुझान भी काफी ज्यादा दिखा — इस आयु वर्ग की 32.3 फीसदी यात्राएं इलाज और स्वास्थ्य से जुड़ी थीं। वहीं 14 साल तक के बच्चों से जुड़ी यात्राओं में धार्मिक यात्राओं की हिस्सेदारी 50.3 फीसदी रही।
कितने दिन रुकते हैं सैलानी और कितना खर्च करते हैं: पूरे आंकड़े एक नजर में
सर्वे में यह भी सामने आया कि घरेलू पर्यटक कितने दिन की यात्रा करते हैं और किस काम के लिए कितना पैसा खर्च करते हैं। सबसे ज्यादा 40.6 फीसदी यात्राएं 2 से 3 रात की होती हैं — यानी बड़ी संख्या में घरेलू पर्यटक छोटी अवधि की यात्राएं करना पसंद कर रहे हैं। 23.6 फीसदी यात्राएं सिर्फ एक रात की थीं, 16.9 फीसदी यात्राएं 4 से 5 रात की रहीं। 6 से 7 रात की यात्राओं की हिस्सेदारी 7.3 फीसदी और 8 से 9 रात की 2.8 फीसदी रही। वहीं 10 रात या उससे ज्यादा रुकने वाली यात्राएं 8.8 फीसदी रहीं।
खर्च के मामले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला आंकड़ा मेडिकल टूरिज्म का है। इलाज के लिए निकलने वाले पर्यटक एक यात्रा पर औसतन 32,167 रुपए खर्च करते हैं। इसके मुकाबले शॉपिंग के लिए यात्रा करने वालों का औसत खर्च 18,981 रुपए, मनोरंजन और छुट्टियों में 11,723 रुपए और धार्मिक-तीर्थ यात्रा में 7,694 रुपए रहा।
| यात्रा का उद्देश्य | औसत खर्च (प्रति यात्रा) | ठहरने पर औसत खर्च |
|---|---|---|
| इलाज / स्वास्थ्य (मेडिकल टूरिज्म) | 32,167 रुपए | 3,471 रुपए |
| शॉपिंग | 18,981 रुपए | 1,162 रुपए |
| धार्मिक / तीर्थ यात्रा | 7,694 रुपए | 1,020 रुपए |
चार साल के घरेलू पर्यटकों की संख्या पर एक नजर डालें तो बढ़ोतरी की रफ्तार साफ दिखती है:
| साल | घरेलू पर्यटक (करोड़ में) |
|---|---|
| 2022 | 10.83 |
| 2023 | 17.91 |
| 2024 | 23.01 |
| 2025 | 25.25 |
1 अक्टूबर से नया पर्यटन सीजन: कारोबारियों की उम्मीदें आसमान पर
पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि ये आंकड़े राजस्थान के लिए उत्साह बढ़ाने वाले हैं। 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले पर्यटन सीजन को लेकर पर्यटन कारोबारियों को काफी उम्मीदें हैं। मौसम के ठंडा होने के साथ त्योहारी सीजन और छुट्टियां भी शुरू होंगी, ऐसे में लोगों के घूमने के लिए निकलने की संभावना और बढ़ेगी। मानसून ब्रेक के बाद 1 अक्टूबर से सरिस्का, रणथंभौर, मुकुंदरा हिल्स और विषधारी जैसे टाइगर रिजर्वों में जंगल सफारी का नया सीजन भी शुरू हो रहा है, जिससे टाइगर साइटिंग के शौकीन पर्यटकों का अतिरिक्त प्रवाह होगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक धार्मिक पर्यटन में बढ़ता रुझान राजस्थान के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या का सीधा असर पर्यटन कारोबार के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी पड़ेगा। होटल, ट्रांसपोर्ट, गाइड, हस्तशिल्प और रेस्तरां — हर क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर बनेंगे। पर्यटन कारोबारियों को उम्मीद है कि सरकार इस क्षेत्र में सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को और मजबूत करेगी, ताकि बढ़ती भीड़ को बेहतर अनुभव मिल सके और राजस्थान का पर्यटन ब्रांड और ऊंचा उठ सके।
FAQ: राजस्थान पर्यटन के ताजा आंकड़ों पर आपके सवाल
प्रश्न 1: NSO सर्वे में राजस्थान का घरेलू पर्यटन में कौन-सा स्थान है?
उत्तर: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के घरेलू पर्यटन खर्च सर्वे (जुलाई 2025–जून 2026) के मुताबिक ओवरनाइट घरेलू यात्राओं के मामले में राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर है, जिसकी हिस्सेदारी 8 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश (15.7%) पहले और तमिलनाडु (13.4%) दूसरे स्थान पर है।
प्रश्न 2: 2025 में कितने घरेलू पर्यटक राजस्थान आए?
उत्तर: पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में 25.25 करोड़ घरेलू पर्यटक राजस्थान पहुंचे, जो 2024 के मुकाबले 9.7 फीसदी ज्यादा है। 2022 में यह संख्या 10.83 करोड़ थी — यानी चार साल में करीब 133 फीसदी की बढ़ोतरी।
प्रश्न 3: घरेलू यात्राओं का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है?
उत्तर: धार्मिक और तीर्थ यात्राएं सबसे बड़ा हिस्सा रखती हैं — कुल ओवरनाइट यात्राओं में 47.7 फीसदी। इसके बाद इलाज-स्वास्थ्य (29.6%), छुट्टियां-मनोरंजन (22.1%) और शॉपिंग (0.6%) का नंबर आता है।
प्रश्न 4: कौन-सी यात्रा पर सबसे ज्यादा खर्च होता है?
उत्तर: मेडिकल टूरिज्म में एक यात्रा पर औसत खर्च 32,167 रुपए रहा — सभी श्रेणियों में सबसे ज्यादा। धार्मिक-तीर्थ यात्रा में औसत खर्च 7,694 रुपए रहा, जो सबसे कम है।