स्मार्ट परियोजना राजस्थान: अब घर बैठे मिलेगा मूल निवास प्रमाण-पत्र, 27,000 से ज्यादा नागरिक ले चुके लाभ
राजस्थान में अब मूल निवास प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए न तो किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने पड़ेंगे और न ही ई-मित्र पर लंबी कतारों में लगना होगा। राज्य सरकार की ‘स्मार्ट परियोजना राजस्थान’ के तहत पात्रता तय होते ही सिस्टम खुद आपका मूल निवास प्रमाण-पत्र तैयार कर देगा — आपकी सहमति मिलते ही वह आपके फोन तक पहुंच जाएगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की इस पहल से सिर्फ एक हफ्ते में 27,000 से ज्यादा नागरिक लाभ ले चुके हैं, और पहले चरण में करीब 3 लाख विद्यार्थियों को चिह्नित किया गया है।
स्मार्ट परियोजना राजस्थान क्या है और यह आपके लिए क्यों जरूरी है
स्मार्ट परियोजना राजस्थान (SMART — Service Management with Artificial Intelligence and Real Time System) राज्य सरकार का वह डिजिटल मंच है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की मदद से सरकारी योजनाओं को आम नागरिक तक पहुंचाने का तरीका बदल रहा है। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य साफ है — पात्र लाभार्थी की पहचान सिस्टम खुद करे, उसे संबंधित योजना से स्वतः जोड़े, और इंसानी दखल कम से कम हो ताकि भ्रष्टाचार और देरी की गुंजाइश ही न बचे।
सरल भाषा में समझें तो पहले आप सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन करते थे, दस्तावेज जमा करते थे, फिर बाबू-वेरिफिकेशन का इंतजार करते थे। स्मार्ट परियोजना में यह प्रक्रिया उल्टी हो गई है — अब सरकार के विभिन्न डेटाबेस आपस में जुड़कर खुद तय करते हैं कि आप पात्र हैं या नहीं। पात्रता तय होते ही आपके मोबाइल पर संदेश आता है, आपकी सहमति मिलते ही प्रमाण-पत्र या सेवा स्वतः जारी हो जाती है।
मूल निवास प्रमाण-पत्र अब बिना आवेदन, बिना इंतजार
इस परियोजना की सबसे बड़ी खबर मूल निवास प्रमाण-पत्र को लेकर है। मुख्यमंत्री ने 2 अक्टूबर को राज्य स्तरीय विकसित भारत-जन सेवा अभियान के कार्यक्रम में ‘स्मार्ट’ के तहत मूल निवास प्रमाण-पत्र के स्वतः जारी होने की सेवा का शुभारंभ किया था। इसका मतलब यह है कि पात्र नागरिकों को अब मूल निवास प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
प्रथम चरण में स्कूल शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड को आधार बनाया गया है। राजस्थान में लगातार 10 वर्षों तक अध्ययन करने वाले लगभग 3 लाख विद्यार्थियों को चिह्नित किया गया है। इन विद्यार्थियों को उनकी सहमति के आधार पर मूल निवास प्रमाण-पत्र स्वतः जारी किए जा रहे हैं। 9 अक्टूबर तक की स्थिति के अनुसार 27 हजार से अधिक नागरिक इस सुविधा से लाभान्वित हो चुके हैं।
प्रमाण-पत्र जारी होने के बाद उसे एसएसओ पोर्टल, ई-मित्र केंद्र या व्हाट्सऐप के जरिए डाउनलोड किया जा सकता है। यानी पूरा काम आपके मोबाइल से ही हो जाएगा।
7 सेवाएं पहले से चालू, 3 लाख से ज्यादा लोग ले चुके फायदा
स्मार्ट परियोजना राजस्थान की शुरुआत 1 जुलाई को जयपुर में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने की थी। तब से अब तक इसके तहत 7 सेवाएं शुरू की जा चुकी हैं, जिनसे 3 लाख से अधिक नागरिक लाभान्वित हो चुके हैं। जन आधार परिवार कार्ड में नवजात सदस्य का जुड़ना और मृत्यु पर सदस्य का विलोपन, आरजीएचएस परिवार कार्ड में नवजात सदस्य का जुड़ना और मृत्यु पर विलोपन, राशन कार्ड में नवजात सदस्य का जुड़ना और मृत्यु पर विलोपन, तथा 2 अक्टूबर से मूल निवास प्रमाण-पत्र का पात्रता तय होते ही स्वतः जारी होना — ये सेवाएं अब चालू हैं। जल्द ही 10 और प्रमुख विभागीय योजनाएं इस प्लेटफॉर्म से जुड़ेंगी।
जन आधार, आरजीएचएस और राशन कार्ड जैसी सेवाओं में जन्म और मृत्यु से जुड़े बदलाव पहले महीनों तक अटके रहते थे। अब ये बदलाव डेटाबेस के आधार पर अपने आप हो जाते हैं — न आवेदन, न प्रमाण-पत्रों की फोटोकॉपी, न दफ्तरों के चक्कर।
आगे क्या: 10 और बड़ी योजनाएं जुड़ेंगी स्मार्ट प्लेटफॉर्म से
मुख्यमंत्री ने राज उन्नति की 9वीं बैठक में स्मार्ट परियोजना के तहत विभिन्न विभागों की 10 प्रमुख योजनाओं को भी स्मार्ट प्लेटफॉर्म पर लाने के निर्देश दिए हैं। ये सेवाएं भी आमजन को जल्द सुलभ होंगी। सरकार की योजना है कि सूचना प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्थाओं को निरंतर मजबूत किया जाए, ताकि सरकारी योजनाएं और सेवाएं सुगम, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से हर नागरिक तक पहुंचें।
यह उसी दिशा का अगला कदम है जिसमें सरकार पहले से डिजिटल सेवाओं का दायरा बढ़ा रही है — जैसे हाल ही में मुख्यमंत्री ने राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन 181 का औचक निरीक्षण करके शिकायत निस्तारण व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे।
विद्यार्थियों के लिए दोहरी राहत: छात्रवृत्ति के साथ अब मूल निवास भी
जिन 3 लाख विद्यार्थियों को पहले चरण में चिह्नित किया गया है, उनके लिए यह सुविधा दोहरी राहत लेकर आई है। मूल निवास प्रमाण-पत्र छात्रवृत्ति, स्कूटी योजना और प्रवेश प्रक्रियाओं में सबसे जरूरी दस्तावेज होता है। अब जब छात्रवृत्ति और स्कूटी योजनाओं के आवेदन 1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक खुले हैं, तो विद्यार्थियों को दस्तावेज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा — प्रमाण-पत्र पहले से तैयार मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: क्या मुझे मूल निवास प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन करना होगा? उत्तर: नहीं। स्मार्ट परियोजना के तहत पात्रता सरकारी रिकॉर्ड से तय होगी और आपकी सहमति मिलते ही प्रमाण-पत्र स्वतः जारी हो जाएगा।
प्रश्न: मैं पात्र हूं या नहीं, यह कैसे पता चलेगा? उत्तर: सिस्टम जैसे ही आपकी पात्रता तय करेगा, आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर संदेश भेजा जाएगा। सहमति देने पर प्रमाण-पत्र तैयार हो जाएगा।
प्रश्न: प्रमाण-पत्र कहां से डाउनलोड करूंगा? उत्तर: राजस्थान सरकार के एसएसओ पोर्टल, नजदीकी ई-मित्र केंद्र या व्हाट्सऐप के माध्यम से इसे डाउनलोड किया जा सकेगा।
प्रश्न: क्या मेरी जानकारी सुरक्षित रहेगी? उत्तर: परियोजना का पूरा ढांचा सरकारी डेटाबेस के आपसी जुड़ाव पर आधारित है और प्रमाण-पत्र आपकी सहमति के बिना जारी नहीं होगा। मानवीय हस्तक्षेप कम होने से पारदर्शिता बढ़ती है।
क्यों है यह बदलाव बड़ा
राजस्थान में अब तक मूल निवास प्रमाण-पत्र बनवाना हफ्तों का काम था — आवेदन, दस्तावेजों का पुलिंदा, तहसील-कलेक्ट्रेट के चक्कर, और फिर इंतजार। स्मार्ट परियोजना राजस्थान इस पूरी प्रक्रिया को ही खत्म कर रही है। 27 हजार लाभार्थियों का आंकड़ा सिर्फ एक सप्ताह का है, और जब 10 और विभागीय योजनाएं इस प्लेटफॉर्म से जुड़ेंगी, तो लाखों नागरिकों को इसी तरह बिना मांगे, बिना भटके सरकारी सेवाएं मिलने लगेंगी। यही असली ई-गवर्नेंस है — सरकार नागरिक के द्वार, न कि नागरिक सरकार के द्वार।