3 अक्टूबर 2026 | जयपुर: पश्चिमी राजस्थान में इस बार मानसून की बेरुखी ने ग्रामीण इलाकों की चिंता बढ़ा दी है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को सोशल मीडिया पर दावा किया कि प्रदेश के सामने बीते 10 साल का सबसे बड़ा अकाल खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि जोधपुर जिले में तकरीबन 2,000 गांवों में सूखे जैसे हालात हैं, जबकि बाड़मेर के 2,460, बालोतरा के 1,216 और जैसलमेर के 961 गांव सूखे की चपेट में हैं। गहलोत के अनुसार कमोबेश यही स्थिति पूरे मारवाड़ सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी है।
सबसे चौंकाने वाली बात चारे की कीमतों को लेकर है। गहलोत ने लिखा है कि जोधपुर, बाड़मेर और बालोतरा में चारा 1,200 रुपये प्रति मन तक पहुंच गया है — इतनी महंगी दर पर चारा खरीदना आम पशुपालक के बूते से बाहर हो रहा है। ऐसे में राज्य सरकार को तत्काल हरकत में आकर प्रदेशभर के लिए एक व्यापक आकस्मिक कार्ययोजना बनाकर स्वीकृतियां जारी करनी चाहिए।
जिलावार: कहां-कितनी गंभीर स्थिति
गहलोत ने अपने संदेश में जिलावार आंकड़े रखते हुए कहा है कि हालात पश्चिमी राजस्थान में लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। उनका दावा है: जोधपुर में तकरीबन 2,000 गांव, बाड़मेर में 2,460 गांव, बालोतरा में 1,216 गांव और जैसलमेर में 961 गांव सूखे की चपेट में हैं। गहलोत का कहना है कि मारवाड़ के बाहर भी प्रदेश के अन्य हिस्सों में कमोबेश ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार भी इस बार मानसून में कम बारिश की वजह से खेती और पशुपालन — दोनों के समक्ष संकट खड़ा हो गया है, और प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में गिरदावरी तथा राहत की व्यवस्था में जुटा हुआ है।
बाड़मेर की घोषणाओं पर उठाया सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा बाड़मेर में दो दिन पहले की गई घोषणाओं को लेकर भी सरकार से सवाल पूछे हैं। गहलोत ने कहा है कि घोषणाओं के 48 घंटे बाद भी प्रशासन को सरकार की ओर से लिखित स्वीकृति का इंतजार है। उन्होंने लिखा — “ऐसी ढिलाई से काम नहीं चलेगा, यह बहुत चुनौतीपूर्ण समय हमारे सामने आ रहा है।” गहलोत का आरोप है कि कागजों पर घोषणाएं हो जाती हैं, लेकिन जमीन पर राहत पहुंचने की गति बेहद धीमी है। उनका कहना है कि सरकार को हालात की गंभीरता को देखते हुए तुरंत हरकत में आना होगा और प्रदेशभर के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए व्यापक आकस्मिक कार्ययोजना तैयार कर प्रशासनिक स्वीकृतियां जारी करनी होंगी।
गहलोत ने सरकार से रखीं चार बड़ी मांगें
गहलोत ने अपने संदेश में राज्य सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उनकी मुख्य मांगें ये हैं: (1) चारे की कीमतों पर तुरंत रोक — बढ़ती चारा कीमतों पर तत्काल प्रभाव से नियंत्रण के उपाय किए जाएं ताकि पशुपालकों पर पड़ रहा आर्थिक बोझ कम हो सके। (2) चारे और पीने के पानी की उपलब्धता — प्रदेशभर में चारे और पीने के पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। (3) मजदूरी और रोजगार की तैयारी — सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए मजदूरी और रोजगार से जुड़े इंतजाम अभी से शुरू किए जाएं, ताकि जरूरतमंद परिवारों को समय पर राहत मिल सके। (4) व्यापक आकस्मिक कार्ययोजना — प्रदेशभर के लिए एक व्यापक आकस्मिक कार्ययोजना बनाकर तत्काल प्रशासनिक स्वीकृतियां जारी की जाएं।
सबसे ज्यादा मार मूक पशुओं पर
गहलोत ने अपने संदेश में एक मार्मिक बात कही है — अकाल और सूखे की सबसे अधिक मार मूक पशुओं पर पड़ती है। जब चारे की कीमतें बढ़ती जाती हैं तो पशुपालकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और कई बार वे मजबूरी में अपने पशुओं को खुले में छोड़ने के लिए विवश हो जाते हैं। ऐसे हालातों में भूख और प्यास से तड़पते पशुओं की कई बार जान तक चली जाती है। इसीलिए गहलोत का कहना है कि सरकार को सिर्फ पशुओं के लिए ही नहीं, बल्कि सूखे से प्रभावित श्रमिक और ग्रामीण परिवारों के लिए भी अभी से तैयारी शुरू करनी चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार और मजदूरी से संबंधित राहत कार्यों की योजना समय रहते तैयार की जानी चाहिए।
क्यों खड़ा हुआ यह संकट: मानसून की बेरुखी
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मानसून के दौरान कम बारिश और मानसून की विदाई के बाद का सूखा मौसम — दोनों ने मिलकर स्थिति को गंभीर किया है। मानसून के मौसम में कम बारिश की वजह से खरीफ की फसलों और चारे की उपलब्धता दोनों पर असर पड़ा है। पत्रिका के अनुसार प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में गिरदावरी और राहत की व्यवस्था में जुटा है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान में सूखा कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन गहलोत का दावा है कि इस बार स्थिति बीते 10 साल में सबसे गंभीर है। पश्चिमी राजस्थान के रेतीले इलाकों में पशुपालन ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है — चारा महंगा होने से छोटे पशुपालकों के लिए गुजारा मुश्किल हो रहा है।
आगे क्या: नजर रहेगी सरकार के कदमों पर
अब सवाल यह है कि राज्य सरकार गहलोत के दावों और मांगों पर कितनी जल्दी प्रतिक्रिया देती है। चारे की कीमतों पर नियंत्रण, पेयजल की आपूर्ति और रोजगार की तैयारियां — ये तीनों मोर्चों पर ठोस कार्रवाई ही असली परीक्षा होगी। आने वाले हफ्तों में यह भी साफ होगा कि गिरदावरी के आंकड़ों के आधार पर सरकार किन इलाकों को सूखा प्रभावित घोषित करती है और क्या राहत पैकेज की घोषणा होती है। राज न्यूज़ की इस खबर पर नजर बनी रहेगी।
FAQ: राजस्थान सूखा 2026
प्रश्न: अशोक गहलोत ने अकाल को लेकर क्या दावा किया है?
उत्तर: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 3 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर दावा किया कि राजस्थान के सामने बीते 10 साल का सबसे बड़ा अकाल खड़ा है। उन्होंने जोधपुर में तकरीबन 2,000, बाड़मेर में 2,460, बालोतरा में 1,216 और जैसलमेर में 961 गांवों के सूखे की चपेट में होने की बात कही है।
प्रश्न: चारा कितना महंगा हो गया है?
उत्तर: गहलोत के अनुसार जोधपुर, बाड़मेर और बालोतरा में चारा 1,200 रुपये प्रति मन तक पहुंच गया है, जो आम पशुपालकों के बूते से बाहर हो रहा है।
प्रश्न: गहलोत ने सरकार से क्या मांगें रखी हैं?
उत्तर: चारे की कीमतों पर तुरंत रोक, प्रदेशभर में चारे व पीने के पानी की उपलब्धता, प्रभावित क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए मजदूरी-रोजगार की तैयारी और प्रदेशभर के लिए व्यापक आकस्मिक कार्ययोजना — ये चार मुख्य मांगें हैं।
प्रश्न: बाड़मेर की घोषणाओं पर गहलोत ने क्या कहा?
उत्तर: गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा बाड़मेर में दो दिन पहले की गई घोषणाओं के 48 घंटे बाद भी प्रशासन को सरकार की ओर से लिखित स्वीकृति का इंतजार है, जो गंभीर ढिलाई है।
स्रोत: ईटीवी भारत राजस्थान (3 अक्टूबर 2026), आईबीसी24/भाषा (3 अक्टूबर 2026), राजस्थान पत्रिका। आंकड़े पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के दावे पर आधारित हैं।