कोटा। कई बार हालात तब सुधरते हैं, जब अखबारों की सुर्खियों में आते हैं। कोटा की शहरी सीमा में शामिल नगर निगम के वार्ड-1 शंभुपुरा में चर्म रोग से जूझ रहे मरीजों की पीड़ा मीडिया में उजागर हुई, तो चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में टीम गठित की गई और नांता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम ने शंभुपुरा पहुंचकर घर-घर सर्वे शुरू कर दिया। सर्वे में चर्म रोग से संक्रमित 11 मरीज सामने आए, जिनमें 4 बच्चे और 5 बुजुर्ग शामिल हैं। इनमें से 2 गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि नियमित स्वास्थ्य निगरानी की व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी है।
खबर छपते ही हरकत में आया विभाग
बुधवार को प्रकाशित खबर में शंभुपुरा की स्वास्थ्य सुविधाओं और चर्म रोग की समस्या को प्रमुखता से उठाया गया था। खबर के बाद संभागीय संयुक्त निदेशक के निर्देश पर सीएमएचओ ने तुरंत चिकित्सा टीम गठित कर शंभुपुरा में सर्वे और उपचार के आदेश दिए।
नांता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम बुधवार सुबह ही गांव पहुंची और घर-घर जाकर सर्वे किया। जिन मरीजों में चर्म रोग या अन्य बीमारियों के लक्षण मिले, उन्हें मौके पर ही दवाइयां दी गईं। वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ललित शर्मा ने सर्वे की रिपोर्ट सीएमएचओ को भेजी है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
घर-घर सर्वे में क्या-क्या मिला
चिकित्सा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, घर-घर सर्वे के दौरान चर्म रोग से संक्रमित 11 मरीज सामने आए। इनमें 4 बच्चे और 5 बुजुर्ग शामिल हैं। मरीजों की मौके पर जांच कर उन्हें दवाइयां दी गईं और आवश्यक उपचार शुरू किया गया। विभाग की कार्रवाई के बाद मरीजों और उनके परिजनों को तत्काल राहत मिली।
दो मरीजों की स्थिति सर्वे के दौरान गंभीर पाई गई। डॉ. ललित शर्मा की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों को बेहतर चिकित्सा उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया है। अब इन गंभीर मरीजों के उपचार की स्थिति पर विभाग को लगातार नजर रखनी होगी।
चर्म रोग के अलावा बुखार और जुकाम-बुखार के मरीज भी सामने आए। सर्वे में बुधवार को तेज बुखार के 14 और जुकाम-बुखार के 15 मरीज मिले। 25 और 30 सितंबर के आंकड़ों को मिलाने पर दो दिन में तेज बुखार के 22 तथा जुकाम-बुखार के 30 मरीज रिपोर्ट हुए। इन मरीजों की ब्लड स्लाइड तैयार कराकर जांच शुरू की गई है।
शंभुपुरा में दो दिनों के आंकड़ों में बुखार और जुकाम-बुखार के कुल 52 मरीज सामने आने से स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर सवाल खड़े हो गए हैं। ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि नियमित स्वास्थ्य निगरानी और मरीजों की समय पर पहचान की व्यवस्था पहले कितनी प्रभावी रही होगी।
एंटी-लार्वा सर्वे: मच्छरों के लार्वा की भी जांच
स्वास्थ्य विभाग ने केवल मरीजों की पहचान तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी। 25 और 30 सितंबर को शंभुपुरा में एंटी-लार्वा सर्वे भी कराया गया। घरों और आसपास के कंटेनरों की जांच की गई। जहां लार्वा मिला, वहां कंटेनरों को खाली कराया गया तथा टेमीफोस और एमएलओ (मोसक्विटो लार्विसाइडल ऑयल) का उपयोग किया गया। लोगों को मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए पैम्फलेट भी बांटे गए।
बरसात के बाद ठहरे पानी में लार्वा पनपता है और डेंगू-मलेरिया का खतरा बढ़ जाता है। ठहरे पानी की सफाई और लार्विसाइड से इन बीमारियों पर अंकुश लगाया जा सकता है।
चर्म रोग: लक्षण, कारण और बचाव
चर्म रोग एक ही बीमारी नहीं, बल्कि त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं का समूह है। नमी वाले मौसम में खुजली, दाद, फोड़े-फुंसी और फफूंद संक्रमण के मामले बढ़ जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, चर्म रोग आमतौर पर फंगल, बैक्टीरियल या एलर्जिक कारणों से होते हैं और गंदगी, नमी तथा साफ-सफाई की कमी में तेजी से फैलते हैं।
आम लक्षण: त्वचा पर लाल चकत्ते, लगातार खुजली, पपड़ी जमना, फुंसियां निकलना या घाव बनना। अगर खुजली या लालिमा 7-10 दिन से ज्यादा बनी रहे तो घरेलू नुस्खों के बजाय डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
बचाव: रोजाना स्नान और साफ कपड़े पहनें, पसीने के बाद शरीर सुखाकर रखें, दूसरों के तौलिया-कंघी-कपड़े इस्तेमाल न करें, घर और आसपास पानी न ठहरने दें। बच्चों और बुजुर्गों की त्वचा विशेष संवेदनशील होती है।
उपचार: फंगल संक्रमण में एंटीफंगल, बैक्टीरियल में एंटीबायोटिक और एलर्जी में एंटीहिस्टामाइन दी जाती हैं। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें और कोर्स बीच में न छोड़ें।
अब जरूरत नियमित फॉलोअप की
खबर छपने के बाद टीम का गांव पहुंचना और मरीजों को मौके पर उपचार देना तत्काल राहत की दिशा में कदम है। लेकिन अब सबसे बड़ी जरूरत नियमित फॉलोअप और निरंतर निगरानी की है। सर्वे में मिले चर्म रोग के मरीजों की दोबारा जांच, गंभीर मरीजों के उपचार की स्थिति और नए मरीजों की पहचान पर विभाग को लगातार नजर रखनी होगी। बच्चों और बुजुर्गों के मामलों में उपचार एक दिन की कार्रवाई तक सीमित न रहकर पूरा होने तक जारी रखना होगा।
सीएमएचओ कोटा डॉ. नरेंद्र नागर ने बताया कि चिकित्सा टीम ने शंभुपुरा में घर-घर जाकर सर्वे किया है। चिन्हित मरीजों की जांच कर दवाइयां वितरित की गई हैं, वहीं दो गंभीर मरीजों को रेफर किया गया है। उन्होंने टीम को इलाके में सघन मॉनिटरिंग के लिए निर्देशित किया है।
शंभुपुरा सर्वे: आंकड़े एक नजर में
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| चर्म रोग से संक्रमित कुल मरीज | 11 |
| इनमें बच्चे | 4 |
| इनमें बुजुर्ग | 5 |
| गंभीर मरीज (मेडिकल कॉलेज रेफर) | 2 |
| तेज बुखार के मरीज (2 दिन) | 22 |
| जुकाम-बुखार के मरीज (2 दिन) | 30 |
| सर्वे करने वाली टीम | नांता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र |
| एंटी-लार्वा सर्वे की तारीखें | 25 और 30 सितंबर |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: शंभुपुरा में चर्म रोग का मामला कब सामने आया?
उत्तर: बुधवार को प्रकाशित खबर के बाद चिकित्सा विभाग ने घर-घर सर्वे कराया, जिसमें 11 चर्म रोग संक्रमित मरीज मिले।
प्रश्न: गंभीर मरीजों का इलाज कहां हो रहा है?
उत्तर: 2 गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया है।
प्रश्न: चर्म रोग से बचाव के लिए क्या करें?
उत्तर: रोजाना स्नान, साफ कपड़े, शरीर सूखा रखें, दूसरों के तौलिया-कंघी न इस्तेमाल करें और आसपास पानी न ठहरने दें। लक्षण 7-10 दिन से ज्यादा रहें तो डॉक्टर को दिखाएं।
प्रश्न: एंटी-लार्वा सर्वे में क्या किया गया?
उत्तर: कंटेनरों में लार्वा की जांच कर जहां लार्वा मिला, वहां टेमीफोस और एमएलओ का उपयोग किया गया तथा बचाव के पैम्फलेट बांटे गए।