जोधपुर रेल तार चोरी: 70 कैमरों और FASTag से खुला राज, 9 गिरफ्तार

दो महीने चली एक खामोश जांच, करीब 70 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज, टोल प्लाजा के रिकॉर्ड और एक FASTag — जोधपुर रेल तार चोरी के इस मामले में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने दिखा दिया कि आज के दौर में अपराधी कितनी भी चालाकी कर ले, टेक्नोलॉजी के जाल से बच नहीं सकता। बासनी रेलवे स्टेशन यार्ड से चोरी हुआ 1,294 मीटर कैटेनरी कॉपर वायर — कीमत करीब 3.74 लाख रुपए — शत-प्रतिशत बरामद कर लिया गया है और नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त (आरपीएफ) नीतीश शर्मा ने 20 अक्टूबर को इस ऑपरेशन का खुलासा किया।

यह नई पुलिसिंग की कहानी है — जहां अपराधी की पहचान गवाहों से नहीं, डिजिटल निशानों से होती है। रेलवे सुरक्षा बल की यह कार्रवाई ऐसे गिरोहों के लिए कड़ी चेतावनी है।

कैमरों और FASTag ने कैसे खोला जोधपुर रेल तार चोरी का राज

वारदात 16-17 अगस्त 2026 की रात की है। बासनी रेलवे स्टेशन यार्ड में खड़े ओएचई टावर वैगन से 1,294 मीटर कैटेनरी कॉपर वायर गायब मिला — वही तार, जिससे ओवरहेड लाइन के जरिए ट्रेनों को बिजली मिलती है। मामला आरपीएफ पोस्ट भगत की कोठी में दर्ज हुआ और सहायक सुरक्षा आयुक्त मुकेश कुमार के पर्यवेक्षण में विशेष टीम बनी।

टीम ने घटनास्थल के आसपास लगे करीब 70 कैमरों के फुटेज खंगाले और एक संदिग्ध पिकअप की पहचान की — वही गाड़ी, जिसमें चोरी का तार ले जाया गया था। फिर टोल प्लाजा के फुटेज और FASTag रिकॉर्ड से गाड़ी की आवाजाही का रूट मैप तैयार हुआ, क्योंकि FASTag में हर टोल क्रॉसिंग का डिजिटल निशान दर्ज होता है। इन्हीं निशानों का पीछा करते-करते टीम 19 अगस्त को प्रयागराज के करछना स्थित देवरी खुर्द गांव पहुंची और यूपी 70 पीटी 6664 नंबर की पिकअप जब्त कर ली।

जोधपुर रेल तार चोरी: चोरी से बरामदगी तक की टाइमलाइन

तारीख क्या हुआ
16-17 अगस्त 2026 बासनी यार्ड से 1,294 मीटर कॉपर वायर की चोरी
19 अगस्त 2026 प्रयागराज के देवरी खुर्द से संदिग्ध पिकअप (UP 70 PT 6664) जब्त
23 अगस्त 2026 नरेंद्र पटेल उर्फ कार्तिक, मनोज, शिवम पटेल, शुभम पटेल, नीरज कुमार पटेल गिरफ्तार
28 अगस्त 2026 राजकुमार पटेल, राहुल कुमार पटेल और रवि पटेल गिरफ्तार
19 अक्टूबर 2026 प्रयागराज के कबाड़ी रामदत्त मिश्रा की गिरफ्तारी, गोदाम से पूरा 1,294 मीटर वायर बरामद
20 अक्टूबर 2026 RPF ने पूरे ऑपरेशन का आधिकारिक खुलासा किया

इस टाइमलाइन से साफ है कि जांच टीम ने जल्दबाजी नहीं की — पहले गाड़ी जब्त की, फिर कड़ियां जोड़ीं, और पूरा नेटवर्क सामने आने पर ही माल खरीदने वाले कबाड़ी तक पहुंची। नतीजा: चोरी का एक मीटर तार भी गायब नहीं हुआ।

अंदर का आदमी: यार्ड की जानकारी देने वाला रखरखाव कर्मी

जोधपुर रेल तार चोरी के मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू “अंदर के आदमी” की भूमिका है। 28 अगस्त को गिरफ्तार रवि पटेल बासनी स्टेशन पर एक निजी कंपनी के अधीन टावर वैगन के रखरखाव कार्य से जुड़ा था। आरोप है कि उसी ने यार्ड में रखे कॉपर वायर की सटीक जानकारी गिरोह तक पहुंचाई और चोरी की योजना में मदद की।

यह रेलवे संपत्ति की सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौती को उजागर करता है — बाहरी चोर को कैमरे और गश्त रोक सकते हैं, लेकिन सिस्टम के अंदर मौजूद व्यक्ति को पकड़ना कहीं कठिन है। रवि पटेल की गिरफ्तारी यह संदेश देती है कि रेलवे परिसरों में काम करने वाले ठेका कर्मियों की गतिविधियों पर भी अब कड़ी नजर है।

प्रयागराज तक फैला था जाल: कबाड़ी के गोदाम से मिला पूरा माल

चोरी का तार जोधपुर से सीधे प्रयागराज पहुंचा था। जांच में पता चला कि इसे कीडगंज क्षेत्र के कबाड़ी रामदत्त मिश्रा को बेचा गया था। पूछताछ में कबाड़ी ने स्वीकार किया कि उसने 18 अगस्त को नरेंद्र पटेल उर्फ कार्तिक और राजकुमार पटेल से यह वायर खरीदा था — चोरी के महज एक-दो दिन बाद ही माल ठिकाने लगाने की कोशिश हुई थी।

लेकिन RPF ने पीछा नहीं छोड़ा। 19 अक्टूबर को रामदत्त मिश्रा को गिरफ्तार किया गया और उसके गोदाम से चोरी हुआ पूरा 1,294 मीटर कॉपर वायर बरामद कर लिया गया। कबाड़ी को न्यायालय में पेश किया जा रहा है। इस कार्रवाई में निरीक्षक मदनलाल भाटी, उपनिरीक्षक सिद्धार्थ सिंह, सहायक उपनिरीक्षक ईश्वर लाल, हेड कांस्टेबल रामकिशोर और कांस्टेबल भंवरलाल खोजा व ललित कुमार की अहम भूमिका रही। जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने RPF की कार्यकुशलता की सराहना की है।

जोधपुर रेल तार चोरी से बड़ा सबक: रेलवे संपत्ति की सुरक्षा

यह मामला एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है — रेलवे की संपत्ति पर अपराधियों की नजर क्यों टिकी है? जवाब है तांबे की कीमत। कैटेनरी वायर का कॉपर कबाड़ बाजार में महंगा बिकता है, और ओवरहेड लाइन का तार चोरी होने से ट्रेन संचालन और यात्री सुरक्षा पर भी खतरा मंडराता है।

रेलवे संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम, 1966 के तहत RPF को ऐसे मामलों में जांच और अभियोजन की शक्ति मिली है, और अब सीसीटीवी नेटवर्क व डिजिटल रिकॉर्ड उसकी रोजमर्रा की जांच का हिस्सा हैं।

गौरतलब है कि राजस्थान में रेलवे से जुड़ी घटनाओं पर लगातार नजर रही है — चाहे बूंदी में पटरी पर लकड़ी रखकर ट्रेन रोकने की कोशिश हो या डूंगरपुर में यात्रियों को लूटने वाले ईको गैंग का पर्दाफाश। जोधपुर रेल तार चोरी का यह खुलासा दिखाता है कि संगठित अपराध के खिलाफ तकनीक अब सबसे बड़ा हथियार बन रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: जोधपुर रेल तार चोरी में कितना माल चोरी हुआ था?

जवाब: जोधपुर रेल तार चोरी के इस मामले में बासनी रेलवे स्टेशन यार्ड से 1,294 मीटर कैटेनरी कॉपर वायर चोरी हुआ था, जिसकी कीमत करीब 3.74 लाख रुपए है। पूरा माल बरामद कर लिया गया है।

सवाल: अपराधियों को पकड़ने में FASTag ने क्या भूमिका निभाई?

जवाब: संदिग्ध पिकअप की पहचान के बाद RPF ने टोल प्लाजा के फुटेज और FASTag रिकॉर्ड से गाड़ी का रूट ट्रेस किया। हर टोल क्रॉसिंग के डिजिटल रिकॉर्ड से टीम प्रयागराज तक पहुंची।

सवाल: इस मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?

जवाब: जोधपुर रेल तार चोरी मामले में कुल नौ — 23 अगस्त को पांच आरोपी, 28 अगस्त को तीन आरोपी और 19 अक्टूबर को माल खरीदने वाला कबाड़ी रामदत्त मिश्रा।

सवाल: RPF क्या है?

जवाब: रेलवे सुरक्षा बल (RPF) संसद के अधिनियम के तहत गठित सशस्त्र बल है, जिसका काम रेलवे की संपत्ति, यात्री क्षेत्रों और यात्रियों की सुरक्षा करना है।

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