Jaipur Moot Court 2026: 17 राज्यों के 50 लॉ कॉलेजों में कानूनी महामुकाबला, 3 दिन तक AI-प्राइवेसी पर चलेगी बहस

जयपुर: राजस्थान के लॉ स्टूडेंट्स के लिए साल का सबसे बड़ा अकादमिक मौका आज से शुरू हो गया है। राजस्थान विश्वविद्यालय के मानविकी सभागार में 14वीं UFYLC रांका राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का शनिवार को शुभारंभ हुआ। देश के 17 राज्यों के 50 से ज्यादा लॉ कॉलेजों के छात्र अगले तीन दिन (3 से 5 अक्टूबर) तक असली अदालत जैसे माहौल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्राइवेसी जैसे बेहद समसामयिक मुद्दों पर कानूनी दलीलें पेश करेंगे। उद्घाटन समारोह में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विजय बिश्नोई मुख्य अतिथि और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।

जो छात्र विधि की पढ़ाई कर रहे हैं, उनके लिए यह प्रतियोगिता भविष्य के वकीलों की असली टेस्टिंग है। विजेता टीम को 51 हजार और उपविजेता टीम को 25 हजार रुपए का नकद पुरस्कार मिलेगा। सर्वश्रेष्ठ मेमोरियल, सर्वश्रेष्ठ छात्र अधिवक्ता और सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता के लिए भी अलग नकद इनाम और प्रमाण-पत्र रखे गए हैं।

तीन दिन का कार्यक्रम: पहले राउंड से ग्रैंड फिनाले तक

प्रतियोगिता का पहला राउंड 3 अक्टूबर को खेला गया। इसमें सभी भाग लेने वाली टीमें अपने-अपने मुकदमों के दोनों पक्षों — अपीलकर्ता और प्रतिवादी — की ओर से दलीलें पेश कर रही हैं। दूसरा दौर और क्वार्टर फाइनल 4 अक्टूबर को होंगे, जबकि सेमीफाइनल और ग्रैंड फिनाले 5 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा।

छात्र मूट प्रपोजिशन में दिए गए काल्पनिक मामले पर बहस करते हैं, लेकिन फॉर्मेट बिल्कुल असली अदालत जैसा होता है। हर राउंड में कानूनी जानकारी, रिसर्च की गहराई, लिखित मेमोरियल और अपनी बात रखने के तरीके को बारीकी से परखा जाता है। यही वजह है कि मूट कोर्ट को वकील बनने की सबसे अच्छी ट्रेनिंग माना जाता है।

जीतने वालों को क्या-क्या मिलेगा: पूरी पुरस्कार सूची

पुरस्कारों की व्यवस्था इस बार काफी आकर्षक है — तालिका में समझिए:

पुरस्कारराशि
विजेता टीम₹51,000
उपविजेता टीम₹25,000
सर्वश्रेष्ठ मेमोरियल₹11,000 + प्रमाण-पत्र
सर्वश्रेष्ठ छात्र अधिवक्ता (अपीलकर्ता पक्ष)₹5,100
सर्वश्रेष्ठ छात्र अधिवक्ता (प्रतिवादी पक्ष)₹5,100
सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता₹5,100

राष्ट्रीय स्तर का प्रमाण-पत्र छात्रों के करियर के लिए बेहद कीमती है — कई लॉ फर्में मूट कोर्ट विजेताओं को इंटर्नशिप के अवसर देने में खास दिलचस्पी रखती हैं।

इस बार का विषय क्यों है खास: AI, प्राइवेसी और कानून

इस वर्ष प्रतियोगिता का विषय ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्राइवेसी और कानून’ रखा गया है। यह कोई संयोग नहीं — आज AI हर क्षेत्र में घुस चुका है और हर कदम पर निजी जानकारी की सुरक्षा का सवाल खड़ा हो रहा है। छात्रों को ऐसे काल्पनिक मामलों पर बहस करनी है जहां तकनीक और मौलिक अधिकार टकराते हैं — जैसे AI से किसी की निजी तस्वीरों का इस्तेमाल, या निगरानी के नाम पर डेटा संग्रह। ऐसी उलझी स्थितियों पर दोनों पक्षों की दलीलें ही असली वकालत की परीक्षा है।

दीया कुमारी बोलीं: संविधान सिर्फ किताबों तक सीमित न रहे

उद्घाटन समारोह में उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने छात्रों से कहा कि कानून के पेशे में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, समझ और जिम्मेदारी भी जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसके सिद्धांतों को व्यवहार में भी उतारना जरूरी है।

दीया कुमारी ने छात्रों को सलाह दी कि वे दूसरे पक्ष की राय को भी सम्मान से सुनें और मूट कोर्ट को सिर्फ जीतने की कोशिश नहीं, बल्कि सीखने और आत्मविश्वास बढ़ाने का मौका मानें। कानून से जुड़ा कोई भी फैसला आखिरकार आम लोगों की जिंदगी को प्रभावित करता है, इसलिए कानूनी पढ़ाई को अच्छे मूल्यों और लोगों की सेवा से जोड़ना जरूरी है।

जस्टिस विजय बिश्नोई की सलाह: घबराहट छोड़ो, तैयारी पर भरोसा रखो

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विजय बिश्नोई ने युवा अधिवक्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि उनमें थोड़ी घबराहट के साथ सीखने की इच्छा और साहस भी नजर आता है। उन्होंने छात्रों से कहा कि अदालत में अपनी बात रखने के लिए अच्छी तैयारी और बात को सही तरीके से रखना बहुत जरूरी है। घबराहट को पीछे छोड़कर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और संवैधानिक मूल्यों को ध्यान में रखें।

जस्टिस बिश्नोई ने कहा कि असल जिंदगी में कानूनी मामले हमेशा सही-गलत के सीधे जवाब वाले नहीं होते — उलझे हालात में कानून को समझकर नए तरीके से समाधान तलाशना पड़ता है। AI और नई तकनीक से कानून के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं, इसलिए छात्रों को खुद को लगातार अपडेट रखना होगा।

मूट कोर्ट आखिर होता क्या है? जानिए पूरा फॉर्मेट

मूट कोर्ट एक काल्पनिक अदालत की कार्यवाही होती है, जहां लॉ स्टूडेंट्स वकील की भूमिका निभाते हैं। हर टीम में आमतौर पर दो वक्ता और एक शोधकर्ता होते हैं। टीमों को पहले से एक ‘मूट प्रपोजिशन’ (मामले के तथ्य) दी जाती है, जिस पर वे लिखित में ‘मेमोरियल’ तैयार करते हैं — यानी अपने पक्ष की पूरी कानूनी दलील दस्तावेज के रूप में।

फिर मौखिक राउंड में दोनों टीमें जजों के सामने बहस करती हैं, और जज सवाल पूछकर दलील की धार परखते हैं। अंक तथ्यों की समझ, कानूनी शोध, तर्कशक्ति और अदालत की शिष्टता पर मिलते हैं।

14वां संस्करण: एक दशक से ज्यादा पुरानी परंपरा

यह प्रतियोगिता यूनिवर्सिटी फाइव ईयर लॉ कॉलेज की परंपरागत आयोजन है — रिकॉर्ड बताते हैं कि 2014 में ही इसका चौथा संस्करण हो चुका था, यानी यह सिलसिला एक दशक से भी पुराना है। अब यह राष्ट्रीय स्तर की पहचान बना चुकी है, जहां देशभर के नामी लॉ कॉलेजों की टीमें हिस्सा लेने आती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: रांका राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता कब और कहां हो रही है?

उत्तर: 3 से 5 अक्टूबर 2026 तक राजस्थान विश्वविद्यालय के मानविकी सभागार, जयपुर में 14वीं UFYLC रांका राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता चल रही है। पहला राउंड 3 अक्टूबर को हुआ, दूसरा दौर और क्वार्टर फाइनल 4 अक्टूबर को, तथा सेमीफाइनल और ग्रैंड फिनाले 5 अक्टूबर को होंगे।

प्रश्न 2: इस बार प्रतियोगिता का विषय क्या है?

उत्तर: इस बार का विषय ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्राइवेसी और कानून’ है। छात्र AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच निजी जानकारी की सुरक्षा और नागरिक अधिकारों से जुड़े कानूनी सवालों पर दोनों पक्षों से दलीलें पेश कर रहे हैं।

प्रश्न 3: विजेता टीम को कितना पुरस्कार मिलेगा?

उत्तर: विजेता टीम को ₹51,000 और उपविजेता टीम को ₹25,000 मिलेंगे। इसके अलावा सर्वश्रेष्ठ मेमोरियल के लिए ₹11,000 और प्रमाण-पत्र, दोनों पक्षों के सर्वश्रेष्ठ छात्र अधिवक्ताओं और सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता के लिए ₹5,100-₹5,100 का पुरस्कार रखा गया है।

प्रश्न 4: उद्घाटन समारोह में कौन-कौन मौजूद रहा?

उत्तर: समारोह में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विजय बिश्नोई मुख्य अतिथि और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। दोनों ने छात्रों को कानूनी पेशे में नैतिकता, तैयारी और संवैधानिक मूल्यों की अहमियत समझाई।

निष्कर्ष: 17 राज्यों के भविष्य के वकील जयपुर में जुटे हैं — AI और प्राइवेसी पर हो रही यह बहस दिखाती है कि भारत का कानूनी जगत तकनीकी बदलावों से कदम मिलाकर चलने को तैयार है। 5 अक्टूबर को ग्रैंड फिनाले के बाद खिताब का फैसला होगा।

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