आठ साल का इंतजार अब खत्म होने वाला है। जयपुर एक बार फिर देश के जूनियर स्क्वैश का केंद्र बनने जा रहा है — और इस बार पैमाना पहले से कहीं बड़ा है। 23 से 29 अक्टूबर तक सवाई मानसिंह स्टेडियम में सब जूनियर और जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जयपुर का आयोजन होगा, जिसमें 22 राज्यों के करीब 900 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। खेल एवं युवा मामलों के मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ 23 अक्टूबर को प्रतियोगिता का उद्घाटन करेंगे। आखिरी बार 2018 में इस चैंपियनशिप की मेजबानी जयपुर को मिली थी।
जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप खिलाड़ियों के करियर का सबसे अहम पड़ाव है — यहीं से भविष्य के अंतरराष्ट्रीय सितारे निकलते हैं।
क्यों खास है स्क्वैश चैंपियनशिप जयपुर: 900 खिलाड़ी, 5 आयु वर्ग
प्रतियोगिता अंडर-11, अंडर-13, अंडर-15, अंडर-17 और अंडर-19 — कुल पांच आयु वर्गों में खेली जाएगी, और हर वर्ग में बालक और बालिका दोनों के मुकाबले होंगे। यानी दस श्रेणियों में देश के सर्वश्रेष्ठ जूनियर खिलाड़ी आमने-सामने होंगे।
राष्ट्रीय चैंपियनशिप में 900 के करीब खिलाड़ियों का जुटना बताता है कि स्कूलों और अकादमियों के स्तर पर स्क्वैश को लेकर दिलचस्पी कितनी बढ़ी है, खासकर छोटे शहरों से आने वाले खिलाड़ियों की तादाद में इजाफा हुआ है।
जूनियर चैंपियनशिप में प्रदर्शन ही खिलाड़ियों की राष्ट्रीय रैंकिंग तय करता है, और इसी रैंकिंग के आधार पर एशियन जूनियर चैंपियनशिप और वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप जैसी प्रतियोगिताओं के लिए भारतीय टीम का चयन होता है। इसलिए 23 से 29 अक्टूबर के बीच जयपुर के कोर्ट्स पर जो होगा, उसका असर अगले एक-दो साल के भारतीय स्क्वैश पर सीधा पड़ेगा।
कौन-कौन से सितारे उतरेंगे कोर्ट पर
चैंपियनशिप में कई ऐसे नाम हिस्सा ले रहे हैं जो पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का झंडा गाड़ चुके हैं। सबसे चर्चित हैं वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता यूशा नफीस और पूरव रांबिया — इन दोनों के मैचों पर दर्शकों और चयनकर्ताओं, दोनों की नजर रहेगी।
इनके अलावा अनिका दुबे, शिवेन अग्रवाल, लोकेश सुब्रमणि, दिव्यांशी जैन, शनाया परसरामपुरिया, अभ्युदय अरोड़ा और अमार्य बजाज भी मैदान में उतरेंगे। ये सभी अपने-अपने आयु वर्ग में एशियन चैंपियनशिप में पदक जीत चुके हैं। इतने अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं का एक ही जूनियर चैंपियनशिप में उतरना संकेत है कि इस बार मुकाबलों का स्तर असाधारण रूप से ऊंचा रहने वाला है।
स्क्वैश चैंपियनशिप जयपुर का पूरा शेड्यूल: क्वालीफाइंग से मुख्य ड्रॉ तक
सात दिन की चैंपियनशिप दो चरणों में बंटी है — पहले तीन दिन क्वालीफाइंग राउंड, फिर मुख्य ड्रॉ के निर्णायक मुकाबले।
| तारीख | चरण | ब्योरा |
|---|---|---|
| 23 अक्टूबर 2026 | उद्घाटन + क्वालीफाइंग शुरू | खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ एसएमएस स्टेडियम में करेंगे उद्घाटन |
| 23–25 अक्टूबर | क्वालीफाइंग राउंड | मुख्य ड्रॉ में जगह के लिए प्रारंभिक मुकाबले, तीनों वेन्यू पर |
| 26 अक्टूबर से | मुख्य ड्रॉ | 16 खिलाड़ियों का ड्रॉ — 8 सीधे प्रवेश, 8 क्वालीफाइंग राउंड से |
| 27–29 अक्टूबर | नॉकआउट और फाइनल | सभी दस श्रेणियों के निर्णायक मुकाबले |
मुख्य ड्रॉ 16 खिलाड़ियों का होगा, जिसमें आठ खिलाड़ी क्वालीफाइंग राउंड से चुनकर आएंगे। यह फॉर्मेट रैंकिंग से बाहर के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी बड़े मंच पर खुद को साबित करने का मौका देता है — और जूनियर खेलों में क्वालीफायर से आकर चैंपियन बनने की कहानियां अक्सर लिखी जाती हैं।
तीन वेन्यू पर होंगे मुकाबले — इतनी एंट्री पहली बार
चैंपियनशिप का मुख्य केंद्र सवाई मानसिंह स्टेडियम के स्क्वैश कोर्ट्स रहेंगे, लेकिन करीब 900 खिलाड़ियों की एंट्री को देखते हुए मैच जयपुर क्लब और मानसरोवर स्थित मॉडर्न स्कूल में भी खेले जाएंगे। सुरभि मिश्रा ने बताया कि अधिक एंट्री की वजह से यह व्यवस्था करनी पड़ी है — और यह अपने आप में खेल की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है।
तीन वेन्यू पर एक साथ मुकाबले कराना आयोजन के लिहाज से चुनौतीपूर्ण है, लेकिन राजस्थान का हालिया ट्रैक रिकॉर्ड भरोसा देता है। सवाई मानसिंह स्टेडियम में हाल ही में अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप का सफल आयोजन इसका ताजा उदाहरण है, जहां तीन दिन में छह मीट रिकॉर्ड टूटे थे।
आठ साल बाद मेजबानी: जयपुर के लिए इसका क्या मतलब है
राष्ट्रीय खेल कैलेंडर में मेजबानी उन्हीं शहरों को मिलती है जहां बुनियादी ढांचा, आयोजन अनुभव और प्रशासनिक तैयारी — तीनों पुख्ता हों। जयपुर ने पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय स्तर के कई आयोजन सफलतापूर्वक कराए हैं, जिससे खेल संघों का भरोसा बढ़ा है।
मेजबानी का सीधा फायदा स्थानीय खिलाड़ियों को मिलता है — यात्रा की थकान नहीं, familiar माहौल और घरेलू दर्शकों का समर्थन। जयपुर के स्कूली खिलाड़ियों का हाल में राष्ट्रीय स्तर पर हुआ चयन बताता है कि शहर में जूनियर खेलों की जड़ें गहरी हो रही हैं — ऐसे में घरेलू धरती पर राष्ट्रीय चैंपियनशिप युवा खिलाड़ियों के लिए दोहरी प्रेरणा बनेगी।
बड़े आयोजनों से शहर के खेल बुनियादी ढांचे को भी गति मिलती है — स्टेडियमों का रखरखाव सुधरता है, नई सुविधाएं जुड़ती हैं और भविष्य में और बड़ी मेजबानियों के दरवाजे खुलते हैं।
जूनियर चैंपियनशिप भारतीय स्क्वैश के लिए क्यों अहम है
स्क्वैश में भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत हो रही है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती रही है निरंतरता — सीनियर स्तर पर टिके रहने वाले खिलाड़ियों की कतार। जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप इसी कतार को तैयार करने का कारखाना है। यहां जो खिलाड़ी दबाव में मैच निकालना सीखते हैं, वही आगे चलकर बड़े मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्क्वैश से जुड़ी आधिकारिक जानकारियां, राष्ट्रीय रैंकिंग और आगामी टूर्नामेंटों का कैलेंडर स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। राष्ट्रीय चैंपियनशिप में प्रदर्शन के आधार पर ही चयन ट्रायल्स के लिए बुलावा आता है — इसलिए अभिभावकों और कोचों के लिए यह कैलेंडर खास अहमियत रखता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: सब जूनियर और जूनियर नेशनल स्क्वैश चैंपियनशिप कब और कहां हो रही है?
उत्तर: 23 से 29 अक्टूबर 2026 तक जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में। अधिक एंट्री की वजह से कुछ मुकाबले जयपुर क्लब और मानसरोवर के मॉडर्न स्कूल में भी खेले जाएंगे।
प्रश्न: कितने खिलाड़ी और कितने आयु वर्गों में मुकाबले होंगे?
उत्तर: 22 राज्यों के करीब 900 खिलाड़ी। अंडर-11, अंडर-13, अंडर-15, अंडर-17 और अंडर-19 — पांच आयु वर्गों में बालक और बालिका दोनों श्रेणियों में मुकाबले होंगे।
प्रश्न: चैंपियनशिप का उद्घाटन कौन करेगा?
उत्तर: 23 अक्टूबर को खेल एवं युवा मामलों के मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ एसएमएस स्टेडियम में प्रतियोगिता का उद्घाटन करेंगे।
प्रश्न: मुख्य ड्रॉ के मुकाबले कब से शुरू होंगे?
उत्तर: 23 से 25 अक्टूबर तक क्वालीफाइंग राउंड के बाद 26 अक्टूबर से 16 खिलाड़ियों का मुख्य ड्रॉ शुरू होगा, जिसमें 8 खिलाड़ी क्वालीफाइंग राउंड से आएंगे।