बूंदी जिला अस्पताल में नहीं है दिल का डॉक्टर: 28 दिन में 83 मरीज कोटा रेफर, 7 की मौत — विश्व हृदय दिवस पर खुली कड़वी हकीकत
विश्व हृदय दिवस (29 सितंबर) पर पूरे देश में दिल की सेहत को लेकर जागरूकता की बातें हो रही हैं। लेकिन राजस्थान के बूंदी जिले में इसी दिन एक कड़वी हकीकत फिर से सामने आई है — जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में आज भी दिल का कोई डॉक्टर नहीं है। सीने में दर्द लेकर आने वाले गंभीर मरीज को प्राथमिक उपचार देकर 35 किलोमीटर दूर कोटा भेजना पड़ता है। हार्ट अटैक में जहां हर मिनट कीमती होता है, वहां यह दूरी किसी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
जिला अस्पताल के 9 बेड वाले आईसीयू के सितंबर माह के आंकड़े इस चिंता को और बढ़ा देते हैं। महज 28 दिनों में 149 गंभीर मरीज भर्ती हुए, जिनमें से 83 को विशेषज्ञ इलाज के लिए कोटा रेफर करना पड़ा और 7 मरीजों की मौत हो गई। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल जांगिड़ खुद मानते हैं कि बूंदी जैसे बड़े चिकित्सा केंद्र में हृदय रोग विशेषज्ञ (कार्डियोलॉजिस्ट) का होना बेहद जरूरी है।
बूंदी जिला अस्पताल की हकीकत: नंबर जो चिंता बढ़ाते हैं
बूंदी जिला अस्पताल जिले की सबसे बड़ी सरकारी चिकित्सा संस्था है। रोजाना सैकड़ों मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं, लेकिन अस्पताल में हृदय रोग विभाग की बुनियादी सुविधा ही नहीं है। कार्डियोलॉजिस्ट का एक भी स्थायी पद यहां भरा नहीं गया है। इसका मतलब यह है कि दिल से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति में मरीज को पहले सामान्य चिकित्सक की देखरेख में प्राथमिक उपचार मिलता है और फिर एंबुलेंस से कोटा भेजा जाता है।
जानकारों के मुताबिक, हार्ट अटैक के बाद पहला एक घंटा सबसे अहम होता है — इसी दौरान ब्लॉकेज खोलने वाली दवा या एंजियोप्लास्टी से जान बचाई जा सकती है। लेकिन बूंदी से कोटा तक का 35 किलोमीटर का सफर अक्सर एक घंटे से ज्यादा समय ले लेता है। सितंबर में अस्पताल में हुई 7 मौतों के पीछे यही व्यवस्था सबसे बड़ा सवाल बनी हुई है।
9 बेड का आईसीयू, पर दिल का कोई डॉक्टर नहीं
जिला अस्पताल में 9 बेड का इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) जरूर है, लेकिन उसमें गंभीर हृदय मरीजों का इलाज करने वाला विशेषज्ञ नहीं है। वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल जांगिड़ के अनुसार, जहां कार्डियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है, वहां गंभीर मरीज को तत्काल सामान्य चिकित्सक से दिखाकर प्राथमिक उपचार और आवश्यक परामर्श दिलाना चाहिए। समय पर प्राथमिक उपचार मिलने से गंभीर मरीज की स्थिति को संभालने में मदद मिलती है।
यह स्थिति सिर्फ बूंदी की नहीं है। राजस्थान के कई जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। लेकिन बूंदी का मामला इसलिए खास हो जाता है क्योंकि यहां व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (जो बूंदी-कोटा संसदीय क्षेत्र से आते हैं) से भी जिला अस्पताल में वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की मांग कर रखी है।
व्यापारी की मौत के बाद उठा था मुद्दा, अब फिर गुस्सा
पिछले दिनों सर्राफा व्यापारी अशोक गुप्ता की मौत के बाद जिला अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था को लेकर व्यापारियों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला था। व्यापारियों ने चिकित्सा प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए और मामले की जांच की मांग की। संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष प्रेम प्रकाश एवरग्रीन ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी इस मामले को लेकर शिकायत की और बूंदी अस्पताल में वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की मांग रखी।
उनका कहना था कि बूंदी में हृदय रोग विशेषज्ञ मिलता तो गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार मिलता। विश्व हृदय दिवस के मौके पर यह मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है।
आंकड़ों में बूंदी जिला अस्पताल (सितंबर 2026)
| विवरण | आंकड़ा |
|---|---|
| ICU में कुल बेड | 9 |
| 28 दिन में भर्ती गंभीर मरीज | 149 |
| कोटा रेफर किए गए मरीज | 83 |
| मौतें | 7 |
| जिला अस्पताल में स्थायी कार्डियोलॉजिस्ट | 0 |
| बूंदी से कोटा की दूरी | 35 किलोमीटर |
सीने में दर्द हो तो इंतजार नहीं: डॉक्टर की सलाह
विश्व हृदय दिवस के अवसर पर डॉ. अनिल जांगिड़ ने लोगों को हृदय रोग से बचाव के लिए जीवनशैली में बदलाव की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हृदय को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है। भोजन में अत्यधिक चिकनाई, तले-भुने खाद्य पदार्थ, ज्यादा नमक, घी-तेल और चीनी की मात्रा सीमित रखनी चाहिए। फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालों को भोजन में शामिल करना चाहिए।
उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार नियमित पैदल चलना या हल्का से मध्यम व्यायाम किया जा सकता है। धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाना जरूरी है। तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान और पर्याप्त नींद पर भी ध्यान देना चाहिए।
जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह या कोलेस्ट्रॉल है, उन्हें नियमित जांच करानी चाहिए और डॉक्टर की दवाएं समय पर लेनी चाहिए। परिवार में हृदय रोग का इतिहास हो तो बीपी, ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल की जांच नियमित कराएं।
हार्ट अटैक के चेतावनी संकेत (तुरंत मदद लें)
- सीने में दबाव, जकड़न या दर्द जो बांह, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैले
- अचानक सांस फूलना
- ठंडा पसीना आना
- चक्कर आना या बेहोशी जैसा लगना
- मतली या उल्टी की भावना
डॉ. जांगिड़ के अनुसार इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्वयं दवा लेने या इंतजार करने के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए — क्योंकि हार्ट अटैक में हर मिनट मायने रखता है।
बूंदी के मरीजों के लिए इमरजेंसी में क्या करें
- तुरंत 108 एंबुलेंस बुलाएं — लक्षण दिखते ही देर न करें।
- मरीज को शांत लिटाएं — हिलाएं-डुलाएं नहीं, घबराहट न फैलाएं।
- पहले जिला अस्पताल जाएं — प्राथमिक उपचार वहीं से शुरू होगा, फिर कोटा रेफर की प्रक्रिया डॉक्टर खुद करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: बूंदी जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट क्यों नहीं है?
उत्तर: अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का कोई स्थायी पद भरा ही नहीं गया है। यह कमी लंबे समय से बनी है, जिस पर व्यापारी और जनप्रतिनिधि मांग उठा चुके हैं।
प्रश्न: हार्ट अटैक के मरीज को बूंदी में कहां ले जाएं?
उत्तर: सबसे पहले जिला अस्पताल बूंदी ले जाएं — प्राथमिक उपचार वहीं मिलेगा। गंभीर स्थिति में डॉक्टर मरीज को 35 किमी दूर कोटा रेफर करेंगे। तुरंत 108 एंबुलेंस बुलाएं।
प्रश्न: सीने में दर्द हमेशा हार्ट अटैक होता है क्या?
उत्तर: नहीं, लेकिन सीने में दबाव, सांस फूलना या पसीना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। असली वजह सिर्फ डॉक्टर की जांच से पता चलती है — गैस, मांसपेशियों का दर्द या हार्ट अटैक का अंतर करना डॉक्टर का काम है।
प्रश्न: दिल को स्वस्थ रखने के लिए रोज क्या करें?
उत्तर: रोज 30 मिनट पैदल चलें, तला-भुना और ज्यादा नमक-चीनी वाला खाना कम करें, फल-सब्जियां खाएं, धूम्रपान-तंबाकू से दूर रहें, बीपी-शुगर की नियमित जांच कराएं और पर्याप्त नींद लें।