बीकानेर में आबकारी विभाग का बड़ा वार: 3 टैंकरों से 1.20 लाख लीटर अवैध स्प्रिट जब्त, 4 आरोपी गिरफ्तार — पंजाब से गुजरात ले जाने की थी तैयारी
रात का अंधेरा, हाईवे के किनारे खड़े तीन भारी टैंकर और उनसे ड्रमों में उतारी जा रही रहस्यमयी तरल सामग्री — बीकानेर के जैतपुर इलाके में 29 सितंबर की रात कुछ ऐसा ही नजारा था, जिसे देखकर आबकारी विभाग की टीम ने तुरंत शिकंजा कस दिया। विभाग की इस कार्रवाई में कुल 1.20 लाख लीटर अवैध स्प्रिट बरामद हुई है और मौके से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में खुलासा हुआ है कि यह स्प्रिट पंजाब से भरकर गुजरात पहुंचाने की योजना थी। आबकारी थाना लूणकरणसर में राजस्थान आबकारी अधिनियम 1950 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और अब पूरे नेटवर्क की जांच चल रही है।
यह कार्रवाई आबकारी विभाग के विशेष निरोधात्मक अभियान का हिस्सा है। विभाग प्रदेशभर में अवैध शराब और स्प्रिट के खिलाफ लगातार छापेमारी कर रहा है, और बीकानेर की यह कार्रवाई उसी कड़ी में अब तक की सबसे बड़ी बरामदगियों में से एक मानी जा रही है।
गुप्त सूचना पर पड़ा छापा: रंगे हाथ पकड़े गए आरोपी
आबकारी अधिकारियों को गुप्त सूचना मिली थी कि जैतपुर के पास अरजनसर-पल्लू मेगा हाईवे के किनारे स्प्रिट से भरे तीन टैंकर खड़े हैं और इनसे अवैध तरीके से स्प्रिट निकालकर ड्रमों में भरी जा रही है। सूचना इतनी सटीक थी कि विभाग के जाप्ते ने बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचकर छापा मार दिया।
छापेमारी के समय आरोपी टैंकरों से ड्रमों में स्प्रिट उतारते हुए रंगे हाथ पकड़े गए। इसके बाद दस्ते ने तीनों टैंकरों की गहन तलाशी ली — हर टैंकर के भीतर करीब 40-40 हजार लीटर स्प्रिट पाई गई। मौके पर रखे ड्रमों में भरी लगभग 600 लीटर स्प्रिट भी जब्त कर ली गई।
यह कार्रवाई बीकानेर-हनुमानगढ़ सीमा के पास जैतपुर में भारतमाला मार्ग से लगभग 400 से 500 मीटर पहले की गई। स्थान का चयन तस्करों की सोची-समझी रणनीति की ओर इशारा करता है — हाईवे से थोड़ा हटकर, कम आबादी वाला क्षेत्र, जहां रात में गतिविधि आसानी से छिपाई जा सके।
बरामदगी का पूरा हिसाब: एक नजर में
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| जब्त स्प्रिट की कुल मात्रा | 1,20,000 लीटर (1.20 लाख लीटर) |
| टैंकरों की संख्या | 3 (हर टैंकर में करीब 40,000 लीटर) |
| ड्रमों से बरामद स्प्रिट | लगभग 600 लीटर |
| गिरफ्तार आरोपी | 4 |
| कार्रवाई का स्थान | जैतपुर, अरजनसर-पल्लू मेगा हाईवे (भारत माला रोड के पास), बीकानेर |
| स्प्रिट का स्रोत | पंजाब राज्य |
| गंतव्य | गुजरात के सिधपुर-पाटन क्षेत्र (सुजानपुर के रास्ते) |
| दर्ज मामला | राजस्थान आबकारी अधिनियम 1950 की धारा 16/54 और 54ए |
| थाना | आबकारी थाना लूणकरणसर |
पंजाब से गुजरात: तस्करी का पूरा रूट
पकड़े गए आरोपियों से की गई शुरुआती पूछताछ में इस तस्करी के पूरे मार्ग का खुलासा हुआ है। आरोपियों ने बताया कि वे इस स्प्रिट को पंजाब राज्य से भरकर लाए थे। इसके बाद सुजानपुर के रास्ते होते हुए इसे गुजरात के सिधपुर-पाटन क्षेत्र में पहुंचाने की योजना थी।
यह रूट अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। पंजाब से स्प्रिट भरकर राजस्थान के रास्ते गुजरात ले जाना किसी छोटे गिरोह के बस की बात नहीं लगती। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क हो सकता है। अब पुलिस और आबकारी विभाग की टीम इसी दिशा में जांच आगे बढ़ा रही है — यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि स्प्रिट कहां से लाई जा रही थी, इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से होना था और इस पूरे खेल के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
आमतौर पर इतनी बड़ी मात्रा में स्प्रिट अवैध शराब बनाने के काम में ली जाती है। स्प्रिट से नकली ब्रांडेड शराब तैयार करके उसे असली बताकर बेचा जाता है, जो न सिर्फ सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि पीने वालों की सेहत के लिए भी बेहद खतरनाक हो सकता है।
कानूनी शिकंजा: कौन सी धाराएं लगीं, आगे क्या होगा
इस पूरे मामले में आबकारी थाना लूणकरणसर में राजस्थान आबकारी अधिनियम 1950 की धारा 16/54 और 54ए के तहत अभियोग दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत अवैध स्प्रिट के परिवहन, भंडारण और व्यापार जैसे अपराधों पर सख्त सजा का प्रावधान है। बरामद स्प्रिट और तीनों टैंकरों को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
विभाग के मुताबिक मामले में अग्रिम अनुसंधान जारी है। गिरफ्तार चारों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि इस खेप को भेजने और मंगाने वाले कौन हैं, और क्या इससे पहले भी इसी रूट से ऐसी खेपें गुजरी हैं।
कार्रवाई में शामिल रही टीम
इस कार्रवाई को आबकारी विभाग के अधिकारियों और जाप्ते की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया — डीसी आबकारी पेमाराम, डीईओ संजीव पटवारी और एईओ प्रताप सिंह डूडी के साथ पीओ भागाराम, मनोहर सिंह, प्रेम सिंह, दयाराम और शिवचंद डूडी मौके पर मौजूद रहे। आबकारी थाना खाजूवाला के प्रहराधिकारी जयदयाल का भी विशेष योगदान रहा।
क्यों खास है यह कार्रवाई
दरअसल, आबकारी विभाग इन दिनों प्रदेशभर में विशेष निरोधात्मक अभियान चला रहा है। त्योहारी सीजन और पंचायत चुनावों के मद्देनजर अवैध शराब की तस्करी और बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए विभाग ने सक्रियता बढ़ा दी है। ऐसे में बीकानेर में 1.20 लाख लीटर स्प्रिट की बरामदगी यह संदेश देती है कि तस्करों के नेटवर्क पर विभाग की पैनी नजर है।
इतनी बड़ी खेप का पकड़ा जाना तस्करों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इसमें उनका भारी निवेश फंसा हुआ था। साथ ही, यह भी स्पष्ट होता है कि गुप्त सूचना तंत्र को मजबूत करना कितना कारगर है — सही समय पर मिली एक सूचना ने लाखों लीटर अवैध स्प्रिट को बाजार तक पहुंचने से रोक दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. स्प्रिट क्या होती है और इसका अवैध इस्तेमाल क्यों होता है?
स्प्रिट एक तरह की तेज अल्कोहल युक्त तरल सामग्री होती है, जिसका इस्तेमाल अवैध रूप से नकली शराब बनाने में किया जाता है। तस्कर इससे सस्ती और खतरनाक शराब तैयार करके उसे ब्रांडेड बताकर बेचते हैं, जो सेहत के लिए घातक हो सकती है।
2. बीकानेर मामले में आरोपियों पर कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?
आरोपियों के खिलाफ आबकारी थाना लूणकरणसर में राजस्थान आबकारी अधिनियम 1950 की धारा 16/54 और 54ए के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये धाराएं अवैध स्प्रिट के परिवहन और व्यापार से जुड़े अपराधों पर लागू होती हैं।
3. जब्त स्प्रिट कहां से लाई जा रही थी और कहां ले जाने की योजना थी?
पूछताछ में सामने आया है कि स्प्रिट पंजाब राज्य से भरकर लाई गई थी और सुजानपुर के रास्ते होते हुए गुजरात के सिधपुर-पाटन क्षेत्र में पहुंचाने की योजना थी।
4. इस मामले की जांच अब किस दिशा में बढ़ रही है?
आबकारी विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि स्प्रिट की इस खेप को भेजने और मंगाने वाले कौन हैं, इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से होना था और क्या इसी रूट से पहले भी ऐसी खेपें गुजरी हैं। मामले में अग्रिम अनुसंधान जारी है।