अलवर-खैरथल में लंपी वायरस की दस्तक: 750 से ज्यादा गोवंश चपेट में, लेकिन इस बार मौतों का आंकड़ा शून्य

अलवर-खैरथल में लंपी वायरस की दस्तक: 750 से ज्यादा गोवंश चपेट में आए, लेकिन इस बार मौतों का आंकड़ा शून्य — कैसे टली बड़ी तबाही

अलवर के पशुपालक परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। करीब चार साल बाद लौटे लंपी स्किन डिजीज के वायरस ने जिले के दो ब्लॉकों समेत खैरथल-तिजारा के सैकड़ों पशुओं को अपनी चपेट में ले लिया, लेकिन इस बार हालात 2022 जैसे नहीं रहे। पशुपालन विभाग की फुर्ती और टीकाकरण अभियान की वजह से 750 से ज्यादा संक्रमित गोवंश खतरे से बाहर निकल आए हैं और एक भी पशु की मौत नहीं हुई।

ये खबर उन हजारों पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण है जिनकी रोजी-रोटी दूध के कारोबार पर टिकी है। अलवर और खैरथल-तिजारा दोनों ही राजस्थान के अग्रणी दुग्ध उत्पादक क्षेत्रों में हैं, इसलिए वायरस की वापसी ने शुरुआत में सबकी चिंता बढ़ा दी थी। लेकिन विभाग का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है और फील्ड में स्टाफ लगातार पशुओं की निगरानी कर रहा है।

कितने पशु चपेट में आए, कितने ठीक हुए — पूरा आंकड़ा

पशुपालन विभाग के अलवर के संयुक्त निदेशक रमेशचंद मीणा के मुताबिक, अलवर जिले के गोविंदगढ़ और कठूमर ब्लॉकों में गोवंश में लंपी वायरस का संक्रमण पाया गया। इन दोनों ब्लॉकों में 273 गोवंश में संक्रमण चिन्हित किया गया था। वैक्सीनेशन के बाद ये सभी 273 पशु अब खतरे से बाहर हैं।

खैरथल-तिजारा जिले में करीब 496 पशुओं में लंपी वायरस के लक्षण मिले थे। वहां के पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर पीसी यादव ने बताया कि वैक्सीनेशन के बाद इनमें से 487 पशु ठीक हो चुके हैं। दोनों जिलों को मिलाकर 750 से अधिक पशु इस बार संक्रमित हुए, लेकिन मौतों की संख्या शून्य रही।

जिला ब्लॉक/क्षेत्र चिन्हित संक्रमित गोवंश ठीक हुए पशु
अलवर गोविंदगढ़, कठूमर 273 273
खैरथल-तिजारा विभिन्न क्षेत्र करीब 496 487

रमेशचंद मीणा का कहना है कि फिलहाल अलवर जिले में एक भी गोवंश लंपी वायरस से संक्रमित नहीं है। विभाग का स्टाफ फील्ड में लगातार पशुओं की मॉनिटरिंग कर रहा है ताकि कोई नया मामला सामने आते ही तुरंत कार्रवाई की जा सके।

लंपी वायरस है क्या — पशु पर कैसे दिखता है असर

पशुपालकों के लिए सबसे जरूरी बात ये जानना है कि लंपी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) दरअसल गाय-भैंस में फैलने वाला एक वायरल रोग है। इसमें पशु के शरीर पर गांठें निकलने लगती हैं। ये गांठें सिर, गर्दन, पैरों और शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल जाती हैं।

संक्रमण के बाद पशु को बुखार आ जाता है, भूख कम लगने लगती है और दूध का उत्पादन घट जाता है। यानी पशुपालक की जेब पर इसका सीधा असर पड़ता है। रमेशचंद मीणा ने चेताया है कि अगर पशु में इस तरह के बदलाव नजर आएं तो इसे सामान्य त्वचा की समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि तुरंत पशु चिकित्सक से जांच करवानी चाहिए। समय पर इलाज शुरू हो जाए तो पशु के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

उत्तर प्रदेश की सीमा से कैसे पहुंचा ये वायरस

पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में गोवंश में लंपी वायरस के नए मामले सामने आए थे। चूंकि अलवर और नवगठित खैरथल-तिजारा जिला सीधे उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे हुए हैं, इसलिए सीमा पार से यह संक्रमण यहां तक पहुंच गया।

विशेषज्ञों के मुताबिक ये वायरस हवा, मक्खियों और मच्छरों के जरिए फैलता है, इसलिए सीमा के पास के इलाकों में इसका खतरा सबसे ज्यादा रहता है। बरसात के मौसम में मच्छर-मक्खी बढ़ने से संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। डिप्टी डायरेक्टर पीसी यादव ने बताया कि सर्दी का मौसम शुरू होते ही यह संक्रमण अपने आप कम होने लगता है।

2022 का कहर याद है? तभी हुई थी इतनी बड़ी तैयारी

वर्ष 2022 में लंपी वायरस ने पूरे राजस्थान में भयंकर तबाही मचाई थी। उस दौरान अकेले अलवर जिले में ही 1500 से ज्यादा गोवंश की मौत हो गई थी, जबकि हजारों मवेशी लंबे समय तक बीमारी से जूझते रहे। उस खौफनाक दौर के बाद बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया गया, जिसने संक्रमण की रफ्तार को थाम लिया था।

इस बार उसी तैयारी का नतीजा दिखा है। अलवर जिले में इस साल 24 जून से ही गोवंश में लंपी वायरस से बचाव का वैक्सीनेशन शुरू कर दिया गया था, जिसमें अब तक एक लाख 69 हजार 800 गोवंश का टीकाकरण किया जा चुका है। विभाग के मुताबिक, यही वजह है कि इस बार वायरस आते ही ज्यादातर पशु पहले से सुरक्षित थे, और जो संक्रमित हुए उनका भी समय पर इलाज हो गया। खैरथल-तिजारा जिले में ड्रग डिपो नहीं होने के कारण अलवर से ही वहां दवाई भेजी जाती है, ताकि इलाज में कोई देरी न हो।

पशुपालक अब क्या करें — विभाग की सलाह

अगर आप अलवर, खैरथल-तिजारा या सीमा से सटे किसी जिले के पशुपालक हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

लक्षण पहचानें — शरीर पर गांठें, बुखार, भूख कम लगना या दूध घटना दिखे तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

टीकाकरण करवाएं — अगर आपके पशु का टीकाकरण अभी नहीं हुआ है, तो नजदीकी पशु चिकित्सालय में संपर्क करें।

नजरअंदाज न करें — इसे मामूली चर्म रोग समझकर टालना खतरनाक हो सकता है।

सफाई का ध्यान रखें — बरसात के मौसम में मच्छर-मक्खियों से बचाव के उपाय करें।

विभाग का कहना है कि सर्दी का मौसम शुरू होते ही संक्रमण का प्रकोप अपने आप कम हो जाएगा, लेकिन तब तक सतर्कता जरूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल: क्या लंपी वायरस इंसानों में भी फैलता है?

जवाब: विशेषज्ञों के अनुसार लंपी स्किन डिजीज गाय-भैंस का रोग है। पशुपालकों को सिर्फ पशुओं के इलाज और टीकाकरण पर ध्यान देना चाहिए।

सवाल: संक्रमित पशु का दूध पीना सुरक्षित है?

जवाब: संक्रमण के दौरान पशु का दूध उत्पादन घट जाता है। ऐसे पशु का दूध इस्तेमाल करने से पहले पशु चिकित्सक की सलाह जरूर लें।

सवाल: इस बार 2022 जैसा खतरा क्यों नहीं रहा?

जवाब: 24 जून से चल रहा टीकाकरण अभियान — जिसमें 1.69 लाख से ज्यादा पशुओं का टीकाकरण हो चुका है — इस बार सुरक्षा कवच बना। इसी वजह से संक्रमित पशु भी इलाज के बाद ठीक हो गए।

सवाल: मेरे इलाके में टीकाकरण कहां होगा?

जवाब: नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सा उपकेंद्र में संपर्क करें। विभाग का स्टाफ फील्ड में मॉनिटरिंग कर रहा है और जरूरत वाले क्षेत्रों में वैक्सीनेशन किया जा रहा है।

फिलहाल अलवर और खैरथल-तिजारा में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सीमा से सटे इलाकों के पशुपालकों को सतर्क रहना होगा। वायरस भले ही चार साल बाद लौटा हो, इस बार विभाग और पशुपालक दोनों तैयार दिख रहे हैं।

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