डूंगरपुर में NH-48 पर एसिड टैंकर पलटा: आग लगने से ड्राइवर की जिंदा जलकर मौत, भांजा बाल-बाल बचा

मामा-भांजे की जोड़ी एक साथ घर से निकली थी। दोनों का काम एक ही था — केमिकल का टैंकर चलाना और उसे मंजिल तक पहुंचाना। लेकिन डूंगरपुर के बिछीवाड़ा इलाके में नेशनल हाईवे 48 पर रविवार (4 अक्टूबर) को जो हुआ, उसने इस सफर को हमेशा के लिए बदल दिया। तेज रफ्तार टैंकर बेकाबू होकर पलट गया, उसमें आग लग गई और ड्राइवर टैंकर के अंदर ही फंस गया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और ड्राइवर की जिंदा जलने से मौके पर ही मौत हो गई। उसका भांजा, जो खलासी के तौर पर साथ था, टूटे कांच से बाहर निकलने में कामयाब रहा और उसकी जान बच गई, हालांकि वह घायल हो गया है।

ये सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं है। टैंकर में आम सामान नहीं, एसिड भरा हुआ था। पलटने के बाद एसिड सड़क पर फैल गया और जहां-जहां गिरा, वहां धुआं उठने लगा। यानी आग के साथ जहरीले केमिकल का खतरा भी एक साथ सामने आ गया — और यही वजह है कि केमिकल टैंकरों के हादसे आम ट्रकों के हादसों से कहीं ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं।

गोगा मोड़ पर क्या हुआ — हादसे की पूरी कहानी

घटना डूंगरपुर जिले के बिछीवाड़ा थाना क्षेत्र की है। नेशनल हाईवे 48 पर गोगा मोड़ के पास रविवार को एक केमिकल टैंकर तेज रफ्तार में बेकाबू होकर सड़क पर पलट गया। टैंकर बड़ौदा (वडोदरा) से उत्तर प्रदेश की ओर जा रहा था और उसमें एसिड भरा हुआ था।

बिछीवाड़ा के थानाधिकारी देवेन्द्र देवल के मुताबिक, टैंकर के पलटते ही उसमें आग लग गई और एसिड हाईवे पर फैल गया। एसिड जहां-जहां गिरा, वहां धुआं उठने लगा और देखते ही देखते आग की लपटें बढ़ने लगीं। हादसे के बाद हाईवे के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और ट्रैफिक पूरी तरह जाम हो गया।

सबसे दर्दनाक पहलू ये रहा कि हादसे के बाद ड्राइवर टैंकर के अंदर ही फंस गया था। टैंकर का आगे का कांच टूट गया था, जिससे खलासी बाहर निकलने में सफल रहा। खलासी ने ड्राइवर को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन आग इतनी तेज थी कि वह नजदीक नहीं जा सका और ड्राइवर जिंदा जल गया।

हादसे की सूचना मिलते ही डूंगरपुर से फायर ब्रिगेड को मौके पर भेजा गया। दमकलकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग बुझने के बाद पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त टैंकर को सड़क से हटवाया और ट्रैफिक को धीरे-धीरे चालू करवाया। पुलिस ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।

एसिड का टैंकर था — इसलिए हादसा दोगुना खतरनाक

आम ट्रक के पलटने और केमिकल टैंकर के पलटने में बड़ा फर्क होता है। इस टैंकर में एसिड भरा था। जब ऐसा टैंकर पलटता है तो दो खतरे एक साथ पैदा होते हैं — पहला, ईंधन और केमिकल की वजह से लगने वाली तेज आग, और दूसरा, सड़क पर फैलने वाला जहरीला केमिकल।

एसिड जहां गिरता है, वहां धुआं उठता है और आसपास की हवा में जहरीले धुएं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में मौके पर मौजूद लोगों और बचाव दल दोनों के लिए खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि केमिकल टैंकरों पर खास चेतावनी चिन्ह (हैजकेम प्लेट) लगाने का नियम है, ताकि हादसे की स्थिति में बचाव दल को तुरंत पता चल सके कि टैंकर में कौन सा खतरनाक पदार्थ है और उससे कैसे निपटा जाए।

गौर करने वाली बात ये है कि ईटीवी भारत के इसी पेज पर केमिकल टैंकरों से जुड़े पुराने हादसों की खबरों के लिंक भी मौजूद हैं। यानी राजस्थान के हाइवों पर केमिकल टैंकरों के ऐसे हादसे पहले भी सामने आते रहे हैं। सवाल ये है कि खतरनाक केमिकल ढोने वाले वाहनों की रफ्तार और सुरक्षा पर कितनी सख्ती बरती जा रही है।

NH-48 पर केमिकल टैंकरों की रफ्तार — नियम क्या कहते हैं

नेशनल हाईवे 48 दिल्ली से चेन्नई तक जाने वाला देश के सबसे व्यस्त हाइवों में से एक है और राजस्थान से होकर गुजरता है। इस पर रोजाना हजारों भारी वाहन चलते हैं, जिनमें केमिकल और ईंधन के टैंकर भी शामिल हैं।

खतरनाक केमिकल ढोने वाले वाहनों के लिए खास नियम हैं। टैंकर पर हैजकेम कोड वाली प्लेट लगाना जरूरी होता है, जिससे हादसे की स्थिति में पता चल सके कि अंदर कौन सा रसायन है। ड्राइवर को खतरनाक माल के परिवहन का विशेष प्रशिक्षण लेना होता है और रफ्तार की सीमा का पालन करना होता है। लेकिन हकीकत में हाइवों पर तेज रफ्तार टैंकर आम नजारा हैं, और नतीजा ऐसे दर्दनाक हादसों के रूप में सामने आता है।

इस हादसे में भी शुरुआती जानकारी के मुताबिक टैंकर तेज रफ्तार में था और गोगा मोड़ के पास बेकाबू होकर पलट गया। पुलिस अब हादसे के सही कारणों की जांच कर रही है — रफ्तार ज्यादा थी, ड्राइवर को झपकी आई थी, या सड़क की कोई खामी थी, ये जांच के बाद ही साफ होगा।

ऐसे हादसों में आपकी सुरक्षा — जरूरी नंबर और सावधानियां

केमिकल टैंकर के हादसे की जगह पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं, ये जानना बेहद जरूरी है:

स्थिति क्या करें
केमिकल टैंकर पलटा दिखे तुरंत दूर हट जाएं, धुएं की दिशा के विपरीत जाएं
आग लगी हो पास न जाएं, फायर ब्रिगेड (101) को कॉल करें
सड़क पर केमिकल/एसिड फैला हो उसे छुएं नहीं, आंखों-त्वचा को बचाएं
हाईवे पर हादसा हो NHAI हेल्पलाइन 1033 पर सूचना दें
कोई घायल दिखे एंबुलेंस के लिए 108 डायल करें
सामान्य आपात स्थिति एकल आपात नंबर 112 पर कॉल करें

याद रखें — केमिकल के धुएं में सांस लेना खतरनाक हो सकता है। हादसे वाली जगह पर भीड़ लगाना न सिर्फ आपकी जान के लिए खतरा है, बल्कि बचाव दल के काम में भी बाधा डालता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: डूंगरपुर में टैंकर हादसा कहां और कब हुआ?

जवाब: ये हादसा रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को डूंगरपुर जिले के बिछीवाड़ा थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे 48 पर गोगा मोड़ के पास हुआ।

सवाल: टैंकर में क्या भरा हुआ था और वह कहां जा रहा था?

जवाब: टैंकर में एसिड भरा हुआ था। ये केमिकल टैंकर बड़ौदा (वडोदरा) से उत्तर प्रदेश की ओर जा रहा था।

सवाल: हादसे में ड्राइवर की मौत कैसे हुई और खलासी कैसे बच गया?

जवाब: टैंकर पलटने के बाद उसमें आग लग गई और ड्राइवर अंदर ही फंस गया, जिससे उसकी जिंदा जलने से मौत हो गई। टैंकर का आगे का कांच टूट गया था, जिससे खलासी (जो ड्राइवर का भांजा है) बाहर निकलने में सफल रहा। वह घायल हुआ है और अस्पताल में भर्ती है।

सवाल: हादसे के बाद क्या कार्रवाई हुई?

जवाब: हादसे की सूचना पर डूंगरपुर से फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। घायल को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने टैंकर को सड़क से हटवाकर ट्रैफिक बहाल किया और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। मामले की जानकारी बिछीवाड़ा थानाधिकारी देवेन्द्र देवल ने दी है।

स्रोत: ईटीवी भारत राजस्थान (प्रकाशन: 4 अक्टूबर 2026, शाम 7:54 बजे)

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